
अजय सिंह
देहरादून। देवभूमि में आगामी विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। सत्ता पर दोबारा काबिज होने के लिए बीजेपी जहां हैट्रिक लगाने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस वनवास खत्म कर सत्ता में वापसी के लिए छटपटा रही है। दोनों ही खेमों में बैठकों, दौरों और रणनीतियों का दौर चरम पर है। चुनावी रण को जीतने के लिए दोनों पार्टियों ने सबसे पहला दांव अपने ‘बूथ मैनेजमेंट’ पर खेला है।
तीसरी बार ‘कमल’ खिलाने की तैयारी: मोर्चों पर सक्रिय हुई बीजेपी
बीजेपी का इरादा साफ है-एंटी-इंकम्बेंसी को पछाड़कर लगातार तीसरी बार सरकार बनाना। इसके लिए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने खुद मोर्चा संभालते हुए पिछले दिनों उत्तराखंड का दौरा किया। उन्होंने कोर ग्रुप से लेकर जमीनी कार्यकर्ताओं के साथ मैराथन बैठकें कर जीत का मंत्र दिया।
पार्टी की रणनीति पर प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कहना है: हमारी असली ताकत हमारे बूथ स्तर के कार्यकर्ता हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए फिलहाल बूथ कमेटियों, शक्ति केंद्रों और जिला स्तर पर संगठन को अभेद्य किला बनाया जा रहा है। आने वाले दिनों में युवाओं, महिलाओं, ओबीसी वर्ग और पूर्व सैनिकों को साधने के लिए पार्टी बड़े स्तर पर विशेष अभियान शुरू करने जा रही है।
हाथ मजबूत करने में जुटी कांग्रेस: चार जोन में बांटा राज्य
दूसरी तरफ, कांग्रेस भी इस बार कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती। पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा ने हाल ही में राज्य के सघन दौरे कर संगठन की नब्ज टटोली और नेताओं को गुटबाजी छोड़ एकजुट होने का टास्क दिया।
कांग्रेस ने इस बार चुनावी चक्रव्यूह रचने के लिए राज्य को भौगोलिक आधार पर चार विशेष जोन में विभाजित किया है, जिनकी कमान अनुभवी और वरिष्ठ चेहरों को सौंपी गई है।
संगठन का कायाकल्प: ब्लॉक और बूथ स्तर पर नई टीमों का गठन किया गया है।
ग्राउंड वर्क: प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना के मुताबिक, पिछले पांच सालों से संगठन को री-स्ट्रक्चर करने का जो काम चल रहा था, वह अब अंतिम चरण में है और पार्टी सीधे जनता के बीच जाने को तैयार है।
साफ है कि उत्तराखंड की सियासत अब ‘ड्राइंग रूम पॉलिटिक्स’ से निकलकर सीधे जनता के ‘बूथ’ तक पहुंच चुकी है। जो दल मतदाता के सबसे करीब होगा, जीत का सेहरा उसी के सिर बंधेगा। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाला होने जा रहा है।