कुमाऊँ मंडल में प्रशासनिक जवाबदेही और जनसेवा की एक अनूठी तस्वीर देखने को मिल रही है। मुख्यमंत्री के सचिव तथा कुमाऊँ मंडल आयुक्त दीपक रावत ने अपने कैंप कार्यालय में आयोजित शनिवार की जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक तत्परता और संवेदनशीलता का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया। जनसुनवाई के दौरान भूमि विवाद, पारिवारिक उत्पीड़न, विकास कार्यों में आ रही बाधाओं, यातायात व्यवस्था और बुनियादी ढांचागत समस्याओं से जुड़ी शिकायतों का न केवल गंभीरता से संज्ञान लिया गया, लेकिन अधिकतर मामलों का मौके पर ही पारदर्शी निस्तारण कर दिया गया। आम जनता की समस्याओं को बिना किसी विलंब के हल करने की यह प्रशासनिक शैली यह दर्शाती है कि यदि उच्च स्तर पर नीयत साफ हो और आमजन के दर्द को समझने की इच्छाशक्ति हो, तो वर्षों से अटकी फाइलें और जटिल कानूनी दांव-पेच भी मिनटों में सुलझ सकते हैं।
जमीन पर कब्जा और आर्थिक धोखाधड़ी: सख्त कार्रवाई के दिए निर्देश
जनसुनवाई के दौरान भूमि और संपत्ति से जुड़े गंभीर विवाद प्रमुखता से सामने आए। हल्द्वानी के रेशमबाग क्षेत्र से आई एक विधवा महिला, श्रीमती रेखा की व्यथा ने सभी को भावुक कर दिया। पति की मृत्यु के बाद उनके नाम दर्ज हुई तीन बीघा पैतृक भूमि पर उनके ही चाचा-चाची द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया था और उन्हें ज़मीन का हक नहीं दिया जा रहा था। इस पर आयुक्त दीपक रावत ने प्रशासनिक कड़ा रुख अपनाते हुए राजस्व अभिलेखों की गहन जांच कराने के आदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि महिला के दस्तावेज सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पीड़िता को उसकी ज़मीन पर तुरंत कब्जा दिलाया जाएगा। इस मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आयुक्त ने दोनों पक्षों को अगली जनसुनवाई में आमने-सामने तलब किया है।
इसके अतिरिक्त, व्यापारिक धोखाधड़ी और बकाए धन से जुड़ा एक अन्य बड़ा मामला सामने आया। हल्द्वानी निवासी कारोबारी दीपक मेहरा ने शिकायत दर्ज कराई कि एक ठेकेदार ने उनकी दुकान से लगभग २५ लाख रुपये की निर्माण सामग्री उधारी पर ली थी। हालांकि ठेकेदार ने १६ लाख १४ हजार रुपये वापस कर दिए, लेकिन लंबे समय से बकाया ८ लाख ८६ हजार रुपये की राशि बार-बार मांगने पर भी नहीं लौटाई। आयुक्त ने इस लेनदेन के सभी दस्तावेजों का सत्यापन करने के आदेश दिए और कहा कि यदि अभिलेखीय साक्ष्य सही पाए जाते हैं तो संबंधित देनदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
बुनियादी ढांचे का नया समाधान: जिला खनन न्यास निधि से बनेगी सड़क
पंचशील कॉलोनी की महिलाओं और निवासियों ने अपने क्षेत्र की जर्जर सड़क, जलभराव और गहरे गड्ढों की समस्या आयुक्त के सामने रखी। उन्होंने बताया कि बिल्डर से प्लॉट खरीदने के कई वर्षों बाद भी सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई, जिससे लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। जब प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की समीक्षा की गई तो यह तकनीकी अड़चन सामने आई कि यह मार्ग न तो नगर निगम के अंतर्गत आता है और न ही लोक निर्माण विभाग के क्षेत्राधिकार में।
सामान्यतः ऐसे मामलों में विभागीय क्षेत्राधिकार के चक्कर में फाइलें सालों तक लटकी रहती हैं, लेकिन आयुक्त दीपक रावत ने लीक से हटकर त्वरित निर्णय लिया। उन्होंने जनता की असुविधा को प्राथमिकता देते हुए जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि इस सड़क का निर्माण और मरम्मत कार्य जिला खनन न्यास निधि से तत्काल कराया जाए। इस निर्णय से प्रशासनिक लालफीताशाही पर करारा प्रहार हुआ और कॉलोनी वासियों को वर्षों पुरानी समस्या से राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ।
मुक्तेश्वर में जाम से मुक्ति और बिजली बिलों में मानवीय राहत
पर्यटन नगरी मुक्तेश्वर में लगातार बढ़ती यातायात भीड़ और जाम की समस्या को दूर करने के लिए मुक्तेश्वर टैक्सी यूनियन के प्रतिनिधियों ने एक व्यावहारिक सुझाव रखा। उन्होंने भटेलिया से मुक्तेश्वर तक शटल सेवा शुरू करने की मांग की। आयुक्त ने इस प्रस्ताव की सराहना की, लेकिन साथ ही यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं का पूरा ध्यान रखने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शटल सेवा शुरू करने से पहले भटेलिया में व्यवस्थित टैक्सी स्टैंड, यात्रियों के लिए स्वच्छ शौचालय और मूलभूत सुविधाएं विकसित की जाएं। इसके साथ ही, शटल सेवा में केवल नए और आरटीओ से तकनीकी रूप से पूरी तरह फिट घोषित वाहनों को ही चलाने की अनुमति दी जाएगी। उन्होंने परिवहन विभाग और संबंधित अधिकारियों से इस योजना की विस्तृत रिपोर्ट जल्द पेश करने को कहा।
इसके अलावा, शीशमहल निवासी सैफी पत्नी इसरार सैफी ने बिजली के पुराने भारी बकाए को एकमुश्त जमा करने में असमर्थता जताते हुए इसे किस्तों में बांटे जाने का अनुरोध किया। आयुक्त ने तत्काल बिजली विभाग को निर्देश दिए कि उपभोक्ता की आर्थिक स्थिति और सुविधा को ध्यान में रखते हुए बकाया राशि को आसान मासिक किस्तों में विभाजित किया जाए। साथ ही उन्होंने उपभोक्ता को भी नियम का पालन करते हुए हर महीने समय पर किस्त जमा करने की ताकीद की, ताकि बकाया का पारदर्शी निस्तारण हो सके।
पहचान पत्र और सामाजिक सरोकार: मौके पर सुलझे जटिल मामले
प्रशासनिक मशीनरी की सुस्ती के कारण आम लोगों को छोटी-छोटी कागजी औपचारिकताओं के लिए महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं। जनसुनवाई में ऐसे कई मामले सामने आए जिन्हें तुरंत हल किया गया:
पहचान पत्र की समस्या का समाधान: खीमा देवी नामक महिला का पहचान पत्र नहीं बन पा रहा था, जिसे संज्ञान में लेते हुए आयुक्त ने तुरंत संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया पूरी करने के आदेश दिए।
एक ही पहचान संख्या का दोहराव: चेतन जोशी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में एक ही पहचान संख्या दो अलग-अलग व्यक्तियों के पास होने का गंभीर मामला सामने आया। आयुक्त ने जांच कराकर इस तकनीकी गड़बड़ी को दूर कराया।
पारिवारिक विवाद और भरण-पोषण: किच्छा की रंजीत कौर की सहमति के बिना उनका प्लॉट बेचने, रेखा आर्या द्वारा पति पर मानसिक उत्पीड़न व मारपीट करने, और बागेश्वर की बुजुर्ग महिला शांति देवी को उनकी बहू से भरण-पोषण भत्ता दिलाने जैसे संवेदनशील मामलों में त्वरित कानूनी और प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए।
शैक्षणिक प्रबंधन: एचएन इंटर कॉलेज में प्रबंध समिति का गठन न होने की जगदीश गुप्ता की शिकायत पर भी शिक्षा विभाग को नियमानुसार समिति गठित करने के निर्देश दिए गए।
त्वरित निस्तारण से बढ़ा जनविश्वास
जनसुनवाई के अंत में जिन लोगों की समस्याओं का तात्कालिक निस्तारण हुआ, उन्होंने आयुक्त दीपक रावत और प्रशासनिक टीम का हृदय से आभार व्यक्त किया। सरकारी तंत्र में जब आम नागरिक को न्याय के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ता और उसकी फरियाद पर तुरंत अमल होता है, तो शासन और प्रशासन के प्रति जनता का भरोसा कई गुना बढ़ जाता है। कुमाऊँ मंडल आयुक्त की यह जनसुनवाई शैली केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सुशासन की वह उम्मीद है जो हर आम नागरिक को यह विश्वास दिलाती है कि उसकी बात सुनी जा रही है।


