Homeउत्तराखंडधर्मनगरी हरिद्वार: संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले राज्यपाल गुरमीत सिंह...

धर्मनगरी हरिद्वार: संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में बोले राज्यपाल गुरमीत सिंह – “भविष्य की तकनीक और नवाचार से जुड़े संस्कृत”

धर्मनगरी हरिद्वार में स्थित उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय का बारहवां दीक्षांत समारोह केवल एक शैक्षणिक औपचारिकता भर नहीं था, बल्कि यह प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक के अनूठे संगम का एक ऐतिहासिक अवसर बन गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे राज्य के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने अपने प्रखर विचारों से पूरी सभा को प्रेरित किया। इस समारोह की सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि राज्यपाल ने अपना पूरा संबोधन देववाणी संस्कृत भाषा में प्रस्तुत किया, जो विश्वविद्यालय के वातावरण में एक नई ऊर्जा और गर्व की अनुभूति भर गया। उन्होंने अपने इस भाषण के माध्यम से न केवल छात्रों को ज्ञान, संस्कार और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया, बल्कि संस्कृत को आधुनिक युग की जरूरतों, आधुनिक तकनीकों और भविष्य की संभावनाओं के साथ जोड़ने पर जोर दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को उपाधियां और मेडल प्रदान किए, साथ ही कला, साहित्य और समाज सेवा में असाधारण योगदान देने वाली विभूतियों को मानद उपाधियों से अलंकृत भी किया।

इस दीक्षांत समारोह का महत्व इसलिए भी बहुत बढ़ जाता है क्योंकि आज का समय ज्ञान-विज्ञान और डिजिटल क्रांति का समय है। राज्यपाल ने अपने वक्तव्य में साफ किया कि दीक्षांत समारोह केवल पढ़ाई पूरी होने और डिग्री हासिल करने का पड़ाव नहीं है। यह असल में जीवन की एक नई और अधिक व्यावहारिक यात्रा की शुरुआत है, जहाँ से युवाओं को अपने ज्ञान का उपयोग समाज और देश की भलाई के लिए करना होता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि युवाओं के पास ज्ञान की ताकत, उच्च संस्कारों की नींव और युवा ऊर्जा की शक्ति होती है। जब ये तीनों तत्व समाज की वास्तविक समस्याओं और जरूरतों के साथ जुड़ते हैं, तभी किसी देश का सर्वांगीण और स्थायी विकास संभव हो पाता है।

मानद उपाधियों से महान विभूतियों का सम्मान
दीक्षांत समारोह के गरिमामय मंच से समाज की विभिन्न दिशाओं में उत्कृष्ट कार्य करने वाले विद्वानों और कलाकारों को सम्मानित किया गया। राज्यपाल ने उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री माधुरी बड़थ्वाल को उनके सांस्कृतिक योगदान के लिए सम्मानित किया। माधुरी बड़थ्वाल ने उत्तराखंड के लोक संगीत और पारंपरिक कला को जीवंत रखने तथा उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए जीवन भर काम किया है।

इसके अलावा, शिक्षा और शोध के क्षेत्र में महान योगदान देने वाले डॉ. अनुसूया प्रसाद पंत, प्रो. राम कुमार शर्मा और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पाण्डेय को भी मानद उपाधियों से अलंकृत किया गया। इन विभूतियों का सम्मान असल में संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और शोध की परंपरा का सम्मान है। ऐसे आयोजनों से अध्ययनरत युवाओं को यह प्रेरणा मिलती है कि अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़कर भी वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।

संस्कृत: सिर्फ अतीत का गौरव नहीं, बल्कि भविष्य का आधार
समारोह के दौरान राज्यपाल ने एक अत्यंत विचारणीय बिंदु पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संस्कृत को केवल हमारी पुरानी धरोहर मानकर अलमारियों में सजाकर रख देना काफी नहीं है। इसे केवल प्राचीन गाथाओं तक सीमित न रखकर भविष्य की संभावनाओं से जोड़ना होगा। आज जब दुनिया आधुनिक तकनीकों के नए दौर में प्रवेश कर रही है, तब संस्कृत भाषा की उपयोगिता और अधिक बढ़ जाती है।

कंप्यूटर विज्ञान, आधुनिक भाषा-विज्ञान और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में संस्कृत की संरचना को दुनिया भर के वैज्ञानिक और भाषा विशेषज्ञ बेहद सटीक मानते हैं। संस्कृत व्याकरण की वैज्ञानिक बनावट, शब्दों का सटीक तालमेल और स्पष्ट उच्चारण इसे कंप्यूटर प्रोग्रामिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लिए एक बेहद अनुकूल भाषा बनाते हैं। राज्यपाल ने आग्रह किया कि संस्कृत को पुस्तकालयों की पुरानी पांडुलिपियों से बाहर निकालकर डिजिटल संसार, अत्याधुनिक शोध प्रयोगशालाओं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चल रहे ज्ञान-विमर्श तक ले जाना समय की सबसे बड़ी मांग है।

भारत की ज्ञान-चेतना और सांस्कृतिक धरोहर
संस्कृत भाषा की महत्ता को रेखांकित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल बातचीत या साहित्य की भाषा नहीं है, बल्कि यह भारत की हजारों साल पुरानी ज्ञान-चेतना, चिंतन शैली और सांस्कृतिक यादों की मुख्य संवाहक है। भारत का प्राचीन और समृद्ध ज्ञान-विज्ञान संस्कृत भाषा में ही सुरक्षित है। हमारे वेद, उपनिषद, दर्शन शास्त्र, व्याकरण, आयुर्वेद और योग विज्ञान जैसे अमूल्य खजाने संस्कृत में ही लिखे गए हैं।

संस्कृत भाषा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह व्यक्ति को केवल शब्द या वाक्य नहीं सिखाती, बल्कि जीवन जीने का सही नज़रिया, सही-गलत का विवेक, कर्तव्यों का ज्ञान और संपूर्ण मानव जाति के कल्याण की सोच प्रदान करती है। इसमें निहित मूल्य किसी एक जाति, धर्म या क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के शांतिपूर्ण और सुखद जीवन के लिए मार्गदर्शक का काम करते हैं।

नए जमाने में संस्कृत के माध्यम से रोजगार और अवसर
अक्सर यह गलतफहमी देखने को मिलती है कि संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों के पास आजीविका और करियर के सीमित विकल्प होते हैं। राज्यपाल ने इस सोच को पूरी तरह से खारिज करते हुए छात्रों को आश्वस्त किया कि आज के आधुनिक दौर में संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए संभावनाओं के अनेक नए द्वार खुले हैं।

अध्यापन और शिक्षण कार्य के अलावा अनुवाद, उच्च शोध, भारतीय दर्शन, संस्कृति प्रबंधन, प्रकाशन व्यवसाय, डिजिटल मीडिया, भाषा-प्रौद्योगिकी और सॉफ्टवेयर विकास जैसे क्षेत्रों में संस्कृत विशेषज्ञों की भारी माँग है। दुनिया भर में भारतीय संस्कृति, योग और आयुर्वेद के प्रति आकर्षण बढ़ रहा है, जिससे संस्कृत स्नातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काम करने के नए मौके बन रहे हैं। इसलिए, आवश्यकता इस बात की है कि संस्कृत की पारंपरिक पढ़ाई को नए जमाने की जरूरतों, बाजार की मांग और नवाचार से जोड़ा जाए।

विद्यार्थियों के लिए राज्यपाल के पांच महा-संकल्प
दीक्षांत समारोह में उपाधि प्राप्त कर नई दुनिया में कदम रख रहे युवाओं को राज्यपाल ने अपने जीवन में पांच मुख्य संकल्पों को धारण करने का आह्वान किया:
ज्ञान का निरंतर संवर्धन: पढ़ाई खत्म होने के बाद भी सीखने की प्रक्रिया को कभी रुकने न दें और हमेशा नया ज्ञान हासिल करते रहें।
संस्कारों का आचरण: अर्जित ज्ञान का सही उपयोग तभी संभव है जब जीवन में नैतिक मूल्य, विनम्रता और उच्च संस्कार हों।
समाज सेवा का भाव: अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज के कमजोर, वंचित और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए करें।
नवाचार और आधुनिक सोच: पुरानी परंपराओं का सम्मान करते हुए नई तकनीकों, नए विचारों और वैज्ञानिक सोच को अपनाएं।
राष्ट्र सर्वप्रथम की भावना: अपने हर कार्य, निर्णय और विचार में देश के हित को सर्वोपरि रखें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान दें।
ये पांच संकल्प किसी भी युवा को केवल एक सफल पेशेवर ही नहीं बनाते, बल्कि एक जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक भी बनाते हैं।

दुर्लभ ग्रंथों का दान और ‘अभिराज-पुस्तक-वीथी’ की स्थापना
इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्यपाल ने उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के विभिन्न नए प्रकाशनों और शोध-पुस्तकों का विमोचन भी किया। कार्यक्रम में राज्यपाल ने जाने-माने विद्वान पद्मश्री अभिराज राजेन्द्र मिश्र के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया, जिन्होंने विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी को लगभग दस हजार अत्यंत दुर्लभ पुस्तकें, पांडुलिपियां और पुरानी पत्र-पत्रिकाओं का विशाल संग्रह दान में दिया है।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि इन बहुमूल्य और दुर्लभ ग्रंथों को ‘अभिराज-पुस्तक-वीथी’ नाम से एक विशेष दीर्घा बनाकर सुरक्षित और व्यवस्थित रखा जाए। यह दुर्लभ ज्ञान-कोश आने वाली पीढ़ियों, शोधकर्ताओं और अध्येताओं के लिए एक अनमोल संपत्ति साबित होगा। इससे विश्वविद्यालय में शोध और अध्ययन का स्तर और अधिक उन्नत होगा।

संस्कृत विश्वविद्यालय और राज्य की प्रशासनिक व सामाजिक जिम्मेदारी
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहाँ संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्राप्त है। ऐसे में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। विश्वविद्यालय को ऐसे पाठ्यक्रम तैयार करने होंगे जो पारंपरिक शास्त्रों के पठन-पाठन के साथ-साथ छात्रों को आधुनिक कंप्यूटर विज्ञान, कोडिंग और भाषा विश्लेषण में भी दक्ष बनाएं।

उत्तराखंड सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को मिलकर संस्कृत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए जमीनी स्तर पर काम करना होगा। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा स्तर पर संस्कृत को रोचक तरीके से पढ़ाने की रणनीतियां बनानी होंगी, ताकि नई पीढ़ी इस भाषा से कटे नहीं, बल्कि इसमें रुचि ले।

उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय का १२वां दीक्षांत समारोह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर एक नए युग की शुरुआत कर रहा है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के विचार हमें यह सिखाते हैं कि हमारी भाषाएं और संस्कृति केवल इतिहास की वस्तुएं नहीं हैं, बल्कि वे भविष्य के निर्माण की ठोस नींव हैं। संस्कृत जब तकनीक, शोध और रोजगार से जुड़ेगी, तो न केवल युवाओं के लिए तरक्की के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि भारत विश्व स्तर पर एक ज्ञान-आधारित महाशक्ति के रूप में अपनी पुरानी साख को फिर से हासिल कर सकेगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments