Homeउत्तराखंडउत्तराखंड में 24 घंटे की निगरानी तंत्र सक्रिय: आपदा कंट्रोल रूम पर...

उत्तराखंड में 24 घंटे की निगरानी तंत्र सक्रिय: आपदा कंट्रोल रूम पर स्वयं नजर बनाए हुए हैं – मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, अधिकारियों को तत्काल राहत और बचाव के सख्त निर्देश

उत्तराखंड में भारी बारिश, अतिवृष्टि और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक चुनौतियों के बीच राज्य सरकार और प्रशासनिक अमला पूरी तरह से सतर्क हो गया है। मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के बाद शासन ने आपदा प्रबंधन की कमान संभाल ली है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर पूरे प्रदेश की स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर नागरिक और तीर्थयात्री की सुरक्षा राज्य सरकार की पहली प्राथमिकता है। राज्य के विषम भौगोलिक हालातों और पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ऐसे संकट के समय में प्रशासनिक मशीनरी का 24 घंटे सतर्क रहना और विभिन्न विभागों का आपसी समन्वय ही बड़ी जनहानि को रोक सकता है।

उत्तराखंड जैसे संवेदनशील पहाड़ी राज्य में मानसून और उसके बाद का मौसम हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन इस बार सरकार ने पूर्व-तैयारी, तकनीक और त्वरित राहत तंत्र के माध्यम से किसी भी आपात स्थिति से निपटने की ठोस रणनीति बनाई है।

चौबीसों घंटे निगरानी और विभागों का मजबूत समन्वय
आपदा प्रबंधन की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि सूचनाओं का आदान-प्रदान कितना सटीक और तेज है। मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट किया कि सभी संबंधित विभागों को आपस में चौबीसों घंटे तालमेल बनाकर काम करना होगा। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से जिलों के अधिकारियों को पल-पल की जानकारी साझा की जा रही है।
पहाड़ी रास्तों पर अचानक होने वाले भूस्खलन, सड़कों के बंद होने, बिजली की लाइनें टूटने और पेयजल योजनाओं के बाधित होने की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग, पेयजल निगम और आपदा प्रबंधन की टीमों को प्रभावित स्थलों पर तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी मार्ग के बाधित होते ही उसे जल्द से जल्द साफ किया जा सके।

चारधाम यात्रियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम
उत्तराखंड की चारधाम यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। भारी बारिश के समय पहाड़ी मार्गों पर सफर करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए हैं कि मौसम की स्थिति को देखते हुए ही यात्रा का संचालन किया जाए।
सुरक्षित स्थानों पर ठहराव: यदि मार्ग में कहीं लैंडस्लाइड होता है या भारी बारिश के कारण रास्ते बंद होते हैं, तो तीर्थयात्रियों को तुरंत सुरक्षित स्थानों, राहत शिविरों या पड़ावों पर रोका जाएगा।
मूलभूत सुविधाएं: रोके गए यात्रियों के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, ठहरने और चिकित्सा की पूरी व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा की जाएगी।
यात्रा पुनः शुरू करना: मौसम साफ होने और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे की यात्रा के लिए रवाना किया जाएगा।

नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर और तटीय क्षेत्रों में चेतावनी
अतिवृष्टि के कारण राज्य की प्रमुख नदियां और बरसाती नाले उफान पर हैं। गंगा, यमुना, अलकनंदा, मंदाकिनी और काली नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। मुख्य सचिव ने बांधों और बैराजों के प्रबंधकों को विशेष हिदायत दी है कि पानी छोड़े जाने से पहले निचले और तटीय इलाकों में मुनादी करवाकर लोगों को पहले से सतर्क किया जाए।
तटीय इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की योजना तैयार रखी गई है। राज्य आपदा मोचन बल और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल की टीमों को संवेदनशील नदी घाटियों में तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति में तुरंत बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत और गड्ढामुक्त अभियान
प्रदेश में भारी वर्षा से यातायात व्यवस्था काफी प्रभावित हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा राज्य की सड़कों को १५ अक्टूबर तक पूरी तरह गड्ढामुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्य सचिव ने समीक्षा बैठक में इस समय सीमा का विशेष उल्लेख करते हुए सभी जिलाधिकारियों और लोक निर्माण विभाग को तेजी से काम करने के निर्देश दिए।
पहाड़ी क्षेत्रों में मुख्य राजमार्गों के साथ-साथ ग्रामीण संपर्कों को बहाल करना बेहद आवश्यक है, क्योंकि इन्हीं रास्तों से आवश्यक वस्तुओं और दवाओं की आपूर्ति होती है। भारी मशीनों और जेसीबी को भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में तैनात रखा गया है ताकि मलबा आते ही रास्ते को तुरंत साफ किया जा सके।

उत्तरकाशी और बागेश्वर में फंसे ट्रेकर्स का हवाई रेस्क्यू अभियान
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ट्रेकिंग पर गए सैलानियों और ट्रेकर्स के भारी बारिश और बर्फबारी के कारण फंसने की खबरें सामने आई थीं। उत्तरकाशी और बागेश्वर जनपदों के उच्च पर्वतीय इलाकों में फंसे ट्रेकर्स को सुरक्षित निकालने के लिए राज्य सरकार ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू अभियान की योजना बनाई है।
सोमवार, २८ सितंबर को सुबह ६ बजे से ही नागरिक उड्डयन विकास प्राधिकरण के माध्यम से पर्याप्त संख्या में हेलीकॉप्टरों की तैनाती करके बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि यदि जरूरत पड़ी तो अतिरिक्त हेलीकॉप्टरों को भी तुरंत काम पर लगाया जाएगा।

ऊंचाई वाले और नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में संचार व्यवस्था बनाए रखने के लिए रेस्क्यू टीम के हेलीकॉप्टरों में सैटेलाइट फोन होना अनिवार्य कर दिया गया है। इससे खराब मौसम में भी बेस कैंप और कंट्रोल रूम से लगातार संपर्क बना रहेगा।

संवेदनशील वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं और वायु सेवा की तैयारी
आपदा के समय सबसे ज्यादा परेशानी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर मरीजों को होती है। शासन ने इस विषय में अत्यंत मानवीय और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया है।
समय से सुरक्षित स्थान: दुर्गम और आपदा संभावित गांवों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को प्रसव की संभावित तारीख से पहले ही नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
हवाई एम्बुलेंस व्यवस्था: अत्यधिक आपातकालीन स्थिति में दूरस्थ क्षेत्रों से मरीजों को लाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवा का उपयोग किया जाएगा।
विशेष निगरानी: गांव स्तर पर आशा कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बुजुर्गों और दिव्यांगों की सूची तैयार कर उनकी नियमित देखभाल करने की जिम्मेदारी दी गई है।

वर्षा के मौसम में डेंगू का खतरा और स्वास्थ्य तंत्र की तैयारी
बारिश के मौसम में जगह-जगह जलभराव के कारण डेंगू और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। मुख्य सचिव ने आपदा समीक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग को डेंगू की रोकथाम के लिए भी सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
राज्य के सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को अलर्ट पर रखा गया है। अस्पतालों में डेंगू जांच किट, प्लेटलेट्स, आवश्यक दवाएं, अलग वार्ड और पर्याप्त संख्या में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। शहरी और ग्रामीण इलाकों में नियमित फॉगिंग और दवा का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बीमारियों के फैलाव को समय रहते रोका जा सके।

त्वरित मुआवजा और नुकसान का पारदर्शी आकलन
अतिवृष्टि से हुई जनधन की हानि, फसलों के नुकसान और मकानों के क्षतिग्रस्त होने पर प्रभावित परिवारों को त्वरित आर्थिक सहायता देने पर जोर दिया गया है। सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में हुई क्षति का विस्तृत आकलन तैयार कर उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को तुरंत भेजें।
नियमों के तहत प्रभावित लोगों को राहत राशि और मुआवजे का वितरण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। शासन का मानना है कि आपदा के तुरंत बाद मिलने वाली आर्थिक मदद से प्रभावित परिवारों को पुनर्गठन और संभलने में बड़ी सहायता मिलती है।

प्रशासनिक तत्परता, जनसहयोग और भविष्य की राह
उत्तराखंड सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। मुख्य सचिव ने कठिन परिस्थितियों में दिन-रात काम कर रहे अधिकारियों, कर्मचारियों और राहत-बचाव टीमों की सराहना करते हुए उनका हौसला बढ़ाया। आपदा से निपटने में तकनीक, जैसे उपग्रह संचार, मौसम पूर्वानुमान और त्वरित हवाई रेस्क्यू ने पूरी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना दिया है।

प्राकृतिक आपदाओं को पूरी तरह रोकना मानवीय वश में नहीं है, लेकिन पूर्व-तैयारी, मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति और त्वरित क्रियान्वयन से नुकसान को न्यूनतम जरूर किया जा सकता है। उत्तराखंड प्रशासन की यह सतर्कता और २४ घंटे की निगरानी प्रणाली राज्य के नागरिकों और यहां आने वाले श्रद्धालुओं में सुरक्षा और विश्वास का भाव जगाती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments