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राज्य स्तर पर सुशासन का कड़ा संदेश: कुमाऊँ मंडलायुक्त दीपक रावत ने परखीं रामनगर की व्यवस्थाएं, कचरा निस्तारण व स्टोर रूम में धांधली पर केस दर्ज करने के निर्देश

राज्य शासन में सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता कायम करने की दिशा में वरिष्ठ नेतृत्व की सक्रियता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इसी क्रम में कुमाऊँ मंडलायुक्त दीपक रावत द्वारा रामनगर नगर पालिका परिषद का सोमवार को किया गया औचक निरीक्षण स्थानीय प्रशासन की वास्तविक कार्यप्रणाली को सामने लाने वाला रहा। जांच की प्रक्रिया में निकाय की आंतरिक प्रक्रियाओं, स्वच्छता तंत्र, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, रिकॉर्ड प्रबंधन तथा पशु बाजार के संचालन से जुड़े प्रोटोकॉल में कई संरचनात्मक खामियां और भारी अव्यवस्थाएं पाई गईं। मंडलायुक्त ने प्रशासनिक शिथिलता, अभिलेखीय विसंगतियों और विधिक मानकों के उल्लंघन को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को सख्त ताकीद की। उन्होंने त्वरित दंडात्मक कार्रवाई के तहत जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन रोकने, लापरवाह ठेकेदारों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने, पशु बाजार को तत्काल प्रभाव से सील करने और संपूर्ण मामले की पारदर्शी जांच के आदेश दिए। यह कड़ा प्रशासनिक हस्तक्षेप नगरीय निकायों की कार्यसंस्कृति में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

रामनगर नगर पालिका में औचक निरीक्षण और अव्यवस्थाओं की भरमार
रामनगर नगरीय क्षेत्र में आम जनता को सुलभ नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने की जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद पर है। हालांकि, जब मंडलायुक्त ने अचानक कार्यालय, स्टोर रूम और सफाई व्यवस्था के मैदान पर कदम रखा, तो दावों के विपरीत हकीकत बेहद चिंताजनक नजर आई। निरीक्षण के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि नगर पालिका की नियमित मॉनिटरिंग लंबे समय से ठप पड़ी थी, जिससे कर्मचारियों और ठेकेदारों की मनमानी चरम पर पहुंच चुकी थी।

फुटपाथ पर अवैध अतिक्रमण: नगर पालिका भवन के ठीक सामने फुटपाथ पर बिना किसी आधिकारिक अनुमति या सत्यापन के व्यावसायिक दुकानें संचालित पाई गईं। सार्वजनिक स्थानों पर अनधिकृत कब्जे को देखकर मंडलायुक्त ने गहरा असंतोष व्यक्त किया और तत्काल प्रभाव से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए।

बंद पड़ी रोड क्लीनिंग मशीन: शहर की सफाई और धूल से मुक्ति के लिए खरीदी गई महंगी रोड क्लीनिंग मशीन मौके पर बंद और लावारिस हालत में पाई गई। जनता के पैसे से खरीदे गए संसाधनों का इस्तेमाल न होना प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा को दर्शाता है।

अभिलेखों का गायब होना: कार्यालय के भीतर जब महत्वपूर्ण पंजी और रजिस्टर मांगे गए, तो जिम्मेदार कर्मचारी संतोषजनक दस्तावेज प्रस्तुत करने में पूरी तरह नाकाम रहे।

कचरा प्रबंधन और वित्तीय पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल
नगर पालिका क्षेत्रों में कूड़ा निस्तारण केवल सफाई का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा वित्तीय लेन-देन और जनस्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। निरीक्षण के दौरान कूड़ा निस्तारण प्रक्रिया में भारी पारदर्शिता की कमी पाई गई। कचरे के वजन, उसके वर्गीकरण और निस्तारण स्थल तक पहुंचाए जाने के दावों का कोई पुख्ता रिकॉर्ड मौजूद नहीं था।

तोलमोल में पारदर्शिता के लिए तकनीक का सहारा: मंडलायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कचरे की सटीक माप-तौल सुनिश्चित करने के लिए तोल कांटा परिसर में तुरंत सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। इससे कचरे के वजन में होने वाली किसी भी संभावित धोखाधड़ी को रोका जा सकेगा।

प्लास्टिक व मूल्यवान कचरे की रसीदें गायब: माह अगस्त के दौरान एकत्र किए गए प्लास्टिक और पुनर्चक्रण योग्य कचरे की बिक्री से संबंधित रसीदें ना तो ठेकेदार दिखा पाया और ना ही पालिका के कर्मचारी। इस वित्तीय अनियमिता को बेहद गंभीरता से लेते हुए मंडलायुक्त ने पूरे लेखा-जोखा की जांच के आदेश दिए।

कचरे का अंतिम गंतव्य अनिश्चित: ठेकेदार द्वारा कचरा कहाँ भेजा जा रहा है और उसका किस तरह से ट्रीटमेंट किया जा रहा है, इसका कोई सत्यापन रिकॉर्ड नहीं था। मंडलायुक्त ने इस पूरी प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग करने और हर गाड़ी के आने-जाने का सटीक रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए।

सफाई कर्मचारियों के मानवाधिकार और बायोमेट्रिक हाजिरी का मुद्दा
किसी भी शहर को स्वच्छ रखने में सबसे बड़ी भूमिका जमीनी स्तर पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों की होती है। लेकिन रामनगर में इन कर्मचारियों के साथ हो रहे अमानवीय व्यवहार ने मंडलायुक्त को झकझोर कर रख दिया। कर्मचारियों के रहने और काम करने के लिए कोई समुचित मानवीय व्यवस्था नहीं बनाई गई थी।

ठेकेदार के खिलाफ चालान के निर्देश: सफाई कर्मियों को अनिवार्य बुनियादी सुविधाएं न देने पर मंडलायुक्त ने मौके पर ही श्रम निरीक्षक को बुलाकर संबंधित सफाई ठेकेदार के विरुद्ध नियमानुसार चालान की कार्रवाई करने के आदेश दिए।

अधिशासी अधिकारी का वेतन रोका: नगर पालिका में हाजिरी के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करना अनिवार्य था। लेकिन इसका पालन न होने पर मंडलायुक्त ने कड़ा रुख अपनाया और निर्देश दिया कि जब तक सभी सफाई कर्मियों की बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू नहीं हो जाती, तब तक अधिशासी अधिकारी का वेतन रोक दिया जाए।

उप जिलाधिकारी को जिम्मेदारी: इस प्रशासनिक आदेश को तत्काल लागू कराने की जिम्मेदारी उप जिलाधिकारी को सौंपी गई है ताकि जवाबदेही तय की जा सके।

स्टोर रूम की बदहाली: सरकारी संपत्ति का गायब होना
सरकारी कार्यालयों में स्टोर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, जहाँ जनता के करों से खरीदी गई सामग्री का रखरखाव किया जाता है। जब मंडलायुक्त ने नगर पालिका के स्टोर का रुख किया, तो वहाँ की स्थिति देखकर अधिकारी बगलें झांकने लगे।

स्टोर कीपर से जब विभिन्न प्रकार के सामानों के वितरण और वर्तमान स्टॉक से संबंधित रजिस्टर माँगे गए, तो वह कोई भी अद्यतन रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका। सरकारी सामग्री किसे बांटी गई, कहाँ इस्तेमाल हुई और कितनी बची है, इसका कोई अंदेशा नहीं था। मंडलायुक्त ने इस पर सख्त नाराजगी जताते हुए स्टॉक की गहन जांच कराने और भविष्य के लिए शत-प्रतिशत डिजिटल और कागजी रिकॉर्ड दुरुस्त रखने के कड़े निर्देश दिए।

पशु बाजार में क्रूरता, अनियमिताएं और पुलिस केस के आदेश
निरीक्षण का सबसे दुखद और गंभीर पहलू स्थानीय पशु बाजार में सामने आया, जहाँ जानवरों के साथ न केवल क्रूरता की जा रही थी, बल्कि नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही थीं।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई: निरीक्षण के दौरान एक पिकअप वाहन (UK-19-CA-1719) में क्षमता से अधिक पशुओं को भूसे की तरह लादा गया था। वाहन में नियमतः एक पशु ले जाने की अनुमति थी, जबकि उसमें तीन पशु ठूंस-ठूंस कर भरे गए थे। इसके अलावा पशुओं का कोई मेडिकल या फिटनेस जांच प्रमाणपत्र नहीं था। इस पर मंडलायुक्त ने पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत तुरंत पुलिस मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए।

ठेकेदार की संदिग्ध भूमिका: पशु बाजार के ठेकेदार गिरीश चंद्र पंत द्वारा खरीद-फरोख्त से जुड़ा कोई भी रजिस्टर या दस्तावेज पेश नहीं किया गया। यही नहीं, बाजार में तैनात अपने कर्मचारियों के नाम और फोन नंबर तक ठेकेदार उपलब्ध नहीं करा सका।

19 सितम्बर से पशु बाजार बंद: प्रथम दृष्टया बड़े पैमाने पर अवैध गतिविधियों और क्रूरता को देखते हुए मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि जब तक पशु बाजार की सभी व्यवस्थाएं मानक के अनुरूप नहीं हो जातीं, तब तक इसे पूर्ण रूप से बंद रखा जाए।

प्रशासनिक जवाबदेही और दूरगामी प्रभाव
कुमाऊँ मंडलायुक्त का यह कदम केवल एक दिन की कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह पूरे कुमाऊँ मंडल के प्रशासनिक तंत्र के लिए एक कड़ा संदेश है। जब शीर्ष अधिकारी स्वयं धरातल पर उतरकर छोटी-छोटी फाइलों, कर्मचारियों की स्थिति और आम जनता की समस्याओं को देखते हैं, तो निचले स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही पर रोक लगती है।

जिलाधिकारी को पूरे मामले की विस्तृत और निष्पक्ष जांच सौंपना यह दर्शाता है कि दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों को बख्शा नहीं जाएगा। इससे नगरीय निकायों में पारदर्शिता आएगी, वित्तीय अनियमितताओं पर अंकुश लगेगा और आम जनता को बेहतर नागरिक सुविधाएं मिल सकेंगी।

भावी सुधार और स्थायी समाधान की आवश्यकता
रामनगर नगर पालिका की इस स्थिति से सबक लेते हुए राज्य सरकार और शहरी विकास विभाग को कुछ स्थायी सुधार लागू करने होंगे। केवल निरीक्षण के समय जागना काफी नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्वतः संचालित प्रणाली बनानी होगी जहाँ लापरवाही की गुंजाइश खत्म हो जाए।

नियमित ऑडिट प्रणाली: सभी नगर पालिकाओं के स्टोर और कचरा प्रबंधन की हर तीन महीने में स्वतंत्र वित्तीय और भौतिक जांच होनी चाहिए।

डिजिटल ट्रैकिंग: कचरा उठाने वाली गाड़ियों में जीपीएस और तोल कांटों पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लगाया जाए।

कड़े दंडात्मक प्रावधान: सरकारी नियमों का उल्लंघन करने वाले ठेकेदारों को केवल चालान तक सीमित न रखकर उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए ताकि अन्य ठेकेदारों में डर कायम हो।

मंडलायुक्त दीपक रावत का यह औचक निरीक्षण यह साबित करता है कि मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति से ही व्यवस्था में सुधार संभव है। यदि रामनगर की जांच को मुकाम तक पहुंचाया जाता है, तो यह पूरे उत्तराखंड के नगरीय प्रशासन के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

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