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देहरादून: ‘रन फॉर यूनिटी’ के मंच से सीएम पुष्कर सिंह धामी का संदेश: पारंपरिक खेलों से लेकर रक्षा प्रशिक्षण तक मजबूत होगी देवभूमि की युवा शक्ति

देहरादून का ऐतिहासिक पवेलियन ग्राउंड आज एक ऐसी नई ऊर्जा और उत्साह का साक्षी बना, जिसने राज्य के युवाओं और खेल जगत के भविष्य को एक नया दृष्टिकोण प्रदान किया। राष्ट्रीय एकता दिवस के पावन अवसर पर आयोजित ‘रन फॉर यूनिटी’ कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न केवल हजारों युवाओं को एकता और अखंडता की दौड़ के लिए झंडी दिखाकर रवाना किया, बल्कि राज्य के सामाजिक और खेल ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से कई ऐतिहासिक घोषणाएं भी कीं। लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के विचारों और उनके सपनों के भारत को साकार करने की दिशा में यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक या खेल गतिविधि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने ग्रामीण प्रतिभाओं की खोज, युवाओं के सर्वांगीण विकास, सुरक्षा बलों के मनोबल को बढ़ाने और उत्तराखंड को नशे के जाल से पूरी तरह मुक्त कराने का एक विस्तृत खाका तैयार किया। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री की घोषणाओं ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य सरकार युवा शक्ति को उत्तराखंड के विकास की मुख्यधारा में सबसे आगे रखकर एक मजबूत नीव का निर्माण कर रही है।

सरदार वल्लभभाई पटेल का संदेश और राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता
सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने देश की आजादी के बाद विभिन्न रियासतों के एकीकरण में उनके ऐतिहासिक योगदान को बड़े ही श्रद्धाभाव से याद किया। स्वतंत्रता के समय भारत विभिन्न टुकड़ों में बंटा हुआ एक देश था, जिसे एक सूत्र में पिरोने का दुर्गम कार्य सरदार पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और प्रशासनिक निपुणता से किया। मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी सबसे पहली और सबसे बड़ी पहचान एक भारतीय की है। जब हम जाति, धर्म, क्षेत्र और भाषा से ऊपर उठकर भारतीयता की भावना को सर्वोपरि रखते हैं, तभी एक सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र का निर्माण संभव हो पाता है।

वर्ष 2014 से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरदार पटेल की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हर साल 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाने की परंपरा शुरू की गई। गुजरात में नर्मदा नदी के तट पर बनी ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ आज दुनिया के सामने भारत की अटूट एकता का सबसे बड़ा प्रतीक बनकर खड़ी है। ‘रन फॉर यूनिटी’ जैसे आयोजन केवल शारीरिक फिटनेस का जरिया नहीं हैं, बल्कि ये समाज के हर वर्ग, विशेषकर युवा पीढ़ी के दिलों में देशभक्ति, आपसी सद्भाव और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूकता जगाने का एक सशक्त माध्यम हैं।

पीआरडी के जवानों के लिए राहत और सम्मान की पहल
कार्यक्रम का एक सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू पीआरडी के जवानों के कल्याण से जुड़ा रहा। राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने, ट्रैफिक प्रबंधन, मेलों, त्योहारों और आपदा प्रबंधन के समय पीआरडी के जवान हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़े रहकर अपनी सेवाएं देते हैं। लंबे समय से इन जवानों की तरफ से मानदेय में बढ़ोतरी की मांग उठ रही थी। मुख्यमंत्री ने जनमंच से यह घोषणा की कि पीआरडी जवानों के मानदेय में जल्द ही सम्मानजनक वृद्धि की जाएगी और इसके लिए शासन स्तर पर बहुत जल्द एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाएगी।

मानदेय बढ़ाने का यह फैसला केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि यह उन हजारों जवानों के समर्पण का सम्मान है जो विपरीत से विपरीत परिस्थितियों में भी राज्य की सेवा में तैनात रहते हैं। इस घोषणा से न केवल पीआरडी जवानों के परिवारों का जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि उनके भीतर अपने दायित्वों के प्रति एक नया उत्साह और प्रतिबद्धता भी देखने को मिलेगी। प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी यह एक अत्यंत सराहनीय कदम माना जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर काम करने वाले सुरक्षा कर्मियों का मनोबल काफी ऊंचा होगा।

ग्रामीण खेल प्रतिभाओं के लिए नया मंच: ‘मुख्यमंत्री खेल क्लब’ का गठन
उत्तराखंड के पहाड़ी और दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सही मार्गदर्शन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अक्सर गांव की प्रतिभाएं राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर तक नहीं पहुंच पातीं। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री ने प्रदेश की हर एक ग्राम पंचायत में ‘मुख्यमंत्री खेल क्लब’ के गठन की एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है।

इस योजना के तहत प्रत्येक गांव में स्थानीय युवाओं को खेलकूद से जोड़ने के लिए संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे। ग्राम स्तर पर खेल क्लब बनने से स्थानीय युवाओं को अपनी पसंदीदा खेल विधाओं में नियमित अभ्यास करने का अवसर मिलेगा। यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना पर भी सकारात्मक प्रभाव डालेगा। जब गांव का युवा खेल के मैदान में पसीना बहाएगा, तो वह न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनेगा, बल्कि उसमें टीम भावना, नेतृत्व क्षमता और अनुशासन जैसे मानवीय गुणों का भी विकास होगा। यह पहल आने वाले समय में उत्तराखंड को देश का एक नया ‘स्पोर्ट्स हब’ बनाने में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

देहरादून के आमवाला में मिनी स्टेडियम और अग्निवीर प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण
युवाओं के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनके करियर और रोजगार के अवसरों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने एक और बड़ा निर्णय लिया। देहरादून के आमवाला स्थित युवा केंद्र से सटी खाली पड़ी सरकारी भूमि को अब औपचारिक रूप से युवा कल्याण विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाएगा। इस बहुमूल्य भूमि का उपयोग एक आधुनिक मिनी स्टेडियम और समर्पित ‘अग्निवीर प्रशिक्षण केंद्र’ के निर्माण के लिए किया जाएगा।

उत्तराखंड को देवभूमि के साथ-साथ वीरभूमि भी कहा जाता है, जहां के लगभग हर घर से कोई न कोई सदस्य भारतीय सशस्त्र बलों में सेवा दे रहा है या दे चुका है। भारतीय सेना में शामिल होकर देश की रक्षा करना यहां के युवाओं का सबसे बड़ा सपना होता है। इस नए प्रशिक्षण केंद्र के बनने से सेना और सुरक्षा बलों में भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं को एक ही छत के नीचे शारीरिक धीरज, दौड़, और लिखित परीक्षाओं के लिए विशेषज्ञ कोचिंग मिल सकेगी। इसके साथ ही, मिनी स्टेडियम स्थानीय खिलाड़ियों को अपनी खेल प्रतिभा को निखारने का एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म प्रदान करेगा।

मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी: पुरस्कार राशि और खेलों के दायरे में ऐतिहासिक वृद्धि
राज्य में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री चैंपियनशिप ट्रॉफी की संरचना में व्यापक बदलाव किए गए हैं। प्रतियोगिता के हर स्तर पर विजेता खिलाड़ियों को दी जाने वाली नकद पुरस्कार राशि को बढ़ा दिया गया है, ताकि खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा साबित करने का उचित फल मिल सके।

पुरस्कार राशि में की गई वृद्धि का विवरण इस प्रकार है:

न्याय पंचायत स्तर: प्रथम पुरस्कार को तीन सौ रुपये से बढ़ाकर चार सौ रुपये, द्वितीय पुरस्कार को दो सौ रुपये से बढ़ाकर तीन सौ रुपये और तृतीय पुरस्कार को एक सौ पचास रुपये से बढ़ाकर दो सौ रुपये कर दिया गया है।

विधानसभा स्तर: प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों की प्रोत्साहन राशि को क्रमशः पांच सौ, चार सौ और तीन सौ रुपये से बढ़ाकर सात सौ, पांच सौ और चार सौ रुपये किया गया है।

संसदीय क्षेत्र स्तर: यहां प्रथम पुरस्कार आठ सौ से बढ़ाकर एक हजार रुपये, द्वितीय पुरस्कार छह सौ से बढ़ाकर आठ सौ रुपये और तृतीय पुरस्कार चार सौ से बढ़ाकर छह सौ रुपये कर दिया गया है।

राज्य स्तर: राज्य स्तर पर मिलने वाली सबसे बड़ी सम्मान राशि में बड़ा इजाफा किया गया है। अब प्रथम स्थान पाने वाले खिलाड़ी को पंद्रह सौ के बजाय दो हजार रुपये, द्वितीय स्थान वाले को एक हजार के बजाय पंद्रह सौ रुपये और तृतीय स्थान पाने वाले खिलाड़ी को सात सौ के बजाय एक हजार रुपये की राशि दी जाएगी।

इसके अतिरिक्त, प्रतियोगिता में ओवरऑल चैंपियन बनने वाले जिले को मिलने वाली प्रतिष्ठित ‘मुख्यमंत्री कप’ की राशि को सीधा दोगुना करते हुए पांच लाख रुपये से बढ़ाकर दस लाख रुपये कर दिया गया है।

केवल पुरस्कार राशि ही नहीं बढ़ाई गई है, बल्कि चैंपियनशिप के तहत आयोजित होने वाले खेलों की संख्या को भी 32 से बढ़ाकर 50 करने का बड़ा फैसला लिया गया है। सबसे खास बात यह है कि इस विस्तार में उत्तराखंड के पारम्परिक और लोक खेलों को प्रमुखता से शामिल किया जाएगा। इससे जहां एक तरफ आधुनिक खेलों के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ेगा, वहीं दूसरी तरफ उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक खेल भी विलुप्त होने से बच सकेंगे।

नशामुक्त उत्तराखंड का संकल्प और युवा शक्ति का आह्वान
आज के दौर में नशे की लत युवा पीढ़ी के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर उभरी है। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में युवाओं से सीधे संवाद करते हुए अपील की कि वे अपनी दैनिक दिनचर्या में खेल, योग, ध्यान और नियमित व्यायाम को अनिवार्य रूप से शामिल करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक स्वस्थ और अनुशासित युवा ही एक विकसित और समृद्ध भारत का आधार बन सकता है।

मुख्यमंत्री ने ‘नशामुक्त उत्तराखंड’ के संकल्प को राज्य के हर नागरिक तक पहुंचाने की बात कही। उन्होंने युवाओं को इस सामाजिक अभियान का ब्रांड एंबेसडर बनने का आह्वान किया, ताकि राज्य के कोने-कोने में नशे के खिलाफ एक प्रभावी जन-जागरूकता अभियान चलाया जा सके। जब युवा शक्ति अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में, खेलों में और राष्ट्र निर्माण में लगाएगी, तभी उत्तराखंड को नशा मुक्त और पूरी तरह से सशक्त बनाया जा सकेगा।

जोशीमठ हेलीकॉप्टर हादसे पर दुख और संवेदना
उत्साही माहौल के बीच मुख्यमंत्री ने हाल ही में बदरीनाथ धाम से लौटते समय जोशीमठ क्षेत्र में हुए दर्दनाक हेलीकॉप्टर हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने इस भीषण दुर्घटना में अपनी जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं और क्रू सदस्यों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुख की इस घड़ी में राज्य सरकार पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। इस संवेदनशील संदेश ने यह दर्शाया कि सरकार उत्सव और विकास के कार्यों के साथ-साथ आपदाओं और व्यक्तिगत दुखों के प्रति भी उतनी ही संवेदनशील और जिम्मेदार है।

प्रशासनिक सहभागिता और कार्यक्रम की गरिमा
पवेलियन ग्राउंड में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम राज्य के शीर्ष नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति से और भी गरिमामय बन गया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल, विधायक बृजभूषण गैरोला, उत्तराखंड राज्य स्तरीय खेल परिषद के अध्यक्ष कुलदीप बुटोला, उपाध्यक्ष हेमराज बिष्ट, विशेष प्रमुख सचिव अमित सिन्हा, और खेल निदेशक दीप्ति सिंह सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, खेल प्रेमी और हजारों की संख्या में छात्र एवं युवा मौजूद थे।

राष्ट्रीय एकता दिवस पर आयोजित यह ‘रन फॉर यूनिटी’ केवल एक औपचारिक दौड़ नहीं थी, बल्कि यह उत्तराखंड के सुनहरे भविष्य की एक नई शुरुआत का प्रतीक बनी। खेल सुविधाओं का विस्तार, पारम्परिक खेलों को प्रोत्साहन, सुरक्षा बलों का कल्याण, सेना भर्ती के लिए विशेष कोचिंग सेंटर और नशामुक्त समाज का संकल्प – ये सभी घोषणाएं यदि धरातल पर पूरी निष्ठा से लागू की जाती हैं, तो आने वाले समय में उत्तराखंड न केवल राष्ट्रीय एकता की मिसाल बनेगा, बल्कि देश के युवा विकास के मानचित्र पर एक अग्रणी राज्य के रूप में उभरेगा।

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