उत्तराखंड की कृषि क्रांति पर सीएम पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान – “हरित क्रांति का अग्रदूत है पंतनगर विश्वविद्यालय”, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान संग की समीक्षा।

अजय सिंह
पंतनगर (ऊधम सिंह नगर): उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देश में कृषि सुधारों और किसानों की समृद्धि के लिए ‘पंतनगर विश्वविद्यालय’ के योगदान को ऐतिहासिक बताया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पंतनगर आगमन पर मुख्यमंत्री धामी ने जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान दोनों नेताओं ने उत्तराखंड में आधुनिक, वैज्ञानिक और प्राकृतिक खेती की संभावनाओं पर उच्च स्तरीय चर्चा की।
ऐतिहासिक संग्रहालय का निरीक्षण और रोपाई में सहभागिता
केंद्रीय कृषि मंत्री ने गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय परिसर में स्थित ऐतिहासिक संग्रहालय (म्यूजियम) का सूक्ष्म निरीक्षण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा किए जा रहे शोध और अनुसंधानों की प्रगति की समीक्षा की। इसके उपरांत, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री ने कृषि फार्म का दौरा किया।
इस यात्रा का सबसे आकर्षक और प्रेरणादायक क्षण तब रहा जब केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि छात्रों और शोधार्थियों का उत्साहवर्धन करने के लिए स्वयं खेत में कदम रखा और पारंपरिक शैली में धान की रोपाई की।
रासायनिक खादों के विकल्प पर जोर: ‘खेत बचाओ अभियान’
कार्यक्रम के दौरान कृषि विकास और पर्यावरण संरक्षण के संतुलन पर विशेष विमर्श हुआ:
हरित खाद को बढ़ावा: केंद्रीय मंत्री ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध उपयोग पर चिंता व्यक्त की और ‘ग्रीन मैन्योर’ (हरित खाद) के उपयोग को अनिवार्य रूप से बढ़ाने की बात कही।
युवाओं की भूमिका: कृषि क्षेत्र में आ रहे युवा वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक और वैज्ञानिक सोच ही भारत के कृषि क्षेत्र का भविष्य तय करेगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रेखांकित की पंतनगर की भूमिका
संस्थान के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देश की पहली हरित क्रांति की नींव इसी संस्थान से पड़ी थी।
मुख्यमंत्री का वक्तव्य:
“गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि भारत की खाद्य सुरक्षा और हरित क्रांति का अग्रदूत रहा है। हमारी सरकार उत्तराखंड के भौगोलिक परिवेश के अनुकूल प्राकृतिक और टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि में नवाचार लाने के लिए पंतनगर के वैज्ञानिकों का शोध मील का पत्थर साबित हो रहा है।”
इस महत्वपूर्ण विमर्श में देश के प्रतिष्ठित कृषि वैज्ञानिक, विश्वविद्यालय के संकाय सदस्य, युवा शोधार्थी और क्षेत्र के कई प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे। सभी हितधारकों ने प्राकृतिक खेती को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाने का संकल्प लिया।

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