उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के मुख्य सेवक सदन में एक विशेष जनसुनवाई कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दौरान प्रदेश के सुदूरवर्ती और दूरस्थ क्षेत्रों से आए सैकड़ों नागरिकों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी दैनिक समस्याओं, क्षेत्रीय विकास के मुद्दों और व्यक्तिगत शिकायतों को प्रत्यक्ष रूप से रखा। प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में सड़क निर्माण, पेयजल की उपलब्धता, विद्युत आपूर्ति, स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, राजस्व संबंधी विवादों, पेंशन योजनाओं, रोजगार के अवसरों और आर्थिक सहायता से जुड़े विभिन्न प्रकरण प्रमुखता से उठाए गए। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक नागरिक की बात को अत्यंत संवेदनशीलता और ध्यानपूर्वक सुना और मौक़े पर मौजूद उच्च अधिकारियों को इन समस्याओं के शीघ्र, प्रभावी और समयबद्ध निस्तारण के कड़े निर्देश दिए।
जनता दरबार के माध्यम से न केवल आम नागरिकों को अपनी बात सीधे प्रदेश के सर्वोच्च प्रशासनिक पद तक पहुँचाने का अवसर मिला, बल्कि इसने यह भी स्पष्ट कर दिया कि शासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त करना वर्तमान सरकार का मुख्य ध्येय है। पहाड़ी और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों वाले उत्तराखंड जैसे राज्य में, जहाँ आम नागरिकों के लिए राजधानी तक पहुँचना कई बार कठिन और खर्चीला होता है, वहाँ इस प्रकार के सीधे संवाद कार्यक्रम लोक कल्याणकारी राज्य की भावना को सशक्त बनाते हैं।
स्थानीय स्तर पर समस्याओं के निस्तारण की आवश्यकता और प्रशासनिक जवाबदेही
जनसुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यशैली और ढिलाई पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिन समस्याओं और शिकायतों का समाधान जिला या विभागीय स्तर पर आसानी से हो सकता है, उनका अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर लंबित रहना बिल्कुल भी उचित नहीं है। अक्सर यह देखा गया है कि छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों, जैसे पेंशन स्वीकृति, मामूली भूमि विवाद या बिजली-पानी के स्थानीय कनेक्शन के लिए भी ग्रामीणों को जिला मुख्यालयों और राजधानी के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने स्तर पर जनसमस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करें। अधिकारियों की जिम्मेदारी केवल फ़ाइलों को आगे बढ़ाने की नहीं, बल्कि आम जनता को त्वरित और न्यायसंगत राहत पहुँचाने की है। जब तक निचले और मध्यम स्तर के अधिकारी अपनी जवाबदेही को पूरी निष्ठा से नहीं निभाएंगे, तब तक आम नागरिक को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझना पड़ेगा। इसलिए, कार्यप्रणाली में सुधार लाकर उसे अधिक परिणामोन्मुखी बनाना अनिवार्य है ताकि किसी भी व्यक्ति को अपने जायज काम के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों की चौखट पर न भटकना पड़े।
डिजिटल और धरातलीय अभियानों का समन्वय: सीएम हेल्पलाइन और प्रशासनिक तंत्र
जन शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए उत्तराखंड सरकार वर्तमान में एक बहुस्तरीय रणनीति पर काम कर रही है। इसमें एक तरफ जहाँ आधुनिक तकनीक का उपयोग करके सीएम हेल्पलाइन-1905 को सशक्त बनाया गया है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर प्रत्यक्ष संवाद के लिए विभिन्न कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि शिकायत निवारण प्रणाली केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसका वास्तविक लाभ धरातल पर पीड़ित व्यक्ति को दिखना चाहिए।
राज्य में चलाए जा रहे ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का मुख्य उद्देश्य यही है कि प्रशासन स्वयं चलकर जनता के घर तक पहुँचे। इसके अंतर्गत दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जहाँ विभिन्न विभागों के अधिकारी एक ही छत के नीचे बैठकर जनता की शिकायतों का तत्काल समाधान करते हैं। इन शिविरों के माध्यम से न केवल शिकायतों का निवारण किया जा रहा है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े पात्र व्यक्तियों को सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे आयुष्मान योजना, वृद्धावस्था पेंशन, किसान सम्मान निधि और स्वरोजगार योजनाओं से भी सीधे जोड़ा जा रहा है।
सेवा संकल्प अभियान और सेवा सेतु: अंतिम व्यक्ति तक पहुँचने का विस्तृत खाका
उत्तराखंड में जनसेवा को एक वृहद रूप देने के लिए 17 सितंबर से एक विशेष ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई है, जो 17 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में व्यापक स्तर पर आयोजित किया जा रहा है। एक माह तक चलने वाले इस विस्तृत अभियान का मूल आधार चार स्तंभों पर टिका है—सेवा, जनभागीदारी, संवाद और नवाचार। इस अभियान के माध्यम से सरकार राज्य के प्रत्येक नागरिक तक सरकारी सेवाओं की आसान पहुँच सुनिश्चित करना चाहती है।
अभियान के अंतर्गत ‘सेवा सेतु अभियान’ की विशेष परिकल्पना की गई है। इसके तहत ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रमों के साथ-साथ वृहद स्वास्थ्य शिविरों और बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपस्थिति में स्वास्थ्य परीक्षण, नि:शुल्क दवाओं का वितरण, दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करना, और विभिन्न प्रमाण पत्रों का मौके पर ही निर्माण शामिल है। इसका उद्देश्य यह है कि केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का दायरा राज्य के सबसे दूरस्थ गाँव तक फैले और कोई भी पात्र व्यक्ति जानकारी या संसाधनों के अभाव में लाभ से वंचित न रहे।
केवल कागजी निस्तारण नहीं, धरातल पर मिले वास्तविक राहत
जनसुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक बेहद महत्त्वपूर्ण और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शिकायतों के निस्तारण को केवल आँकड़ों या फाइलों की रिपोर्ट तक सीमित न माना जाए। कई बार प्रशासनिक अधिकारी कागजों पर शिकायत का निस्तारण दिखाकर केस बंद कर देते हैं, जबकि धरातल पर नागरिक की समस्या जस की तस बनी रहती है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त होने वाले प्रत्येक प्रकरण पर गहराई और गंभीरता से कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही, शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित करने की हिदायत दी गई। उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय-समय पर शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लें और यह सुनिश्चित करें कि शिकायतकर्ता सरकारी समाधान से पूरी तरह संतुष्ट है या नहीं। जब तक किसी व्यक्ति की समस्या का स्थायी और व्यावहारिक समाधान नहीं हो जाता, तब तक उस फाइल को बंद न माना जाए। यह प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और संवेदनशीलता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
खेल और युवाओं का प्रोत्साहन: अंतरराष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड का परचम
मुख्य सेवक सदन में आयोजित इस जनसुनवाई कार्यक्रम का एक बेहद सुखद और प्रेरणादायक पहलू तब देखने को मिला जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाने वाले होनहार खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की। थाईलैंड के पटाया (चोनबुरी) में आयोजित ‘9वीं हीरोज अंतरराष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप’ में शानदार प्रदर्शन कर पदक जीतने वाले उत्तराखंड के युवा खिलाड़ियों ने मुख्यमंत्री से भेंट कर अपनी खुशियाँ साझा कीं।
इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए कुल छह पदक अपने नाम किए। पदक विजेताओं का विवरण इस प्रकार है:
मन्नू सोनकर: स्वर्ण पदक
शिवानी दाबसा: स्वर्ण पदक
मोहम्मद जकी: स्वर्ण पदक
मुकुल: स्वर्ण पदक
मेघा शर्मा: कांस्य पदक
धनंजय धारीवाल: कांस्य पदक
मुख्यमंत्री ने सभी विजेता खिलाड़ियों को उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य के युवाओं का अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना संपूर्ण प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। राज्य सरकार युवाओं में खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई खेल नीति के तहत निरंतर कार्य कर रही है, ताकि भविष्य में भी उत्तराखंड के खिलाड़ी देश का नाम रोशन करते रहें।
प्रशासनिक समन्वय और भविष्य की प्रशासनिक दिशा
इस महत्त्वपूर्ण जनसुनवाई और संवाद कार्यक्रम के दौरान राज्य प्रशासनिक ढाँचे के कई शीर्ष अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख सचिव आर. के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप, अपर सचिव जे.सी. कांडपाल, देहरादून के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोभाल प्रमुख रूप से शामिल थे। शीर्ष अधिकारियों की इस सीधी उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि शासन जनसमस्याओं के प्रति कितना गंभीर है।
स्थल पर ही उच्च अधिकारियों की मौजूदगी से कई जटिल और अंतर-विभागीय मामलों पर तुरंत सहमति बनी और संबंधित अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के आदेश जारी किए गए। यह प्रशासनिक समन्वय यह दर्शाता है कि यदि नेतृत्व दृढ़ संकल्पित हो, तो नौकरशाही को भी अधिक सक्रिय, जवाबदेह और जन-उन्मुख बनाया जा सकता है।
उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से विषम राज्य में जहाँ प्राकृतिक आपदाओं, दुर्गम मार्गों और विकास की चुनौतियों के बीच आम जनजीवन प्रभावित होता है, वहाँ मुख्य सेवक सदन जैसी जनसुनवाइयाँ और ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ जैसे अभियान शासन के प्रति आम जनता के विश्वास को पुनर्स्थापित करते हैं। मुख्यमंत्री का यह स्पष्ट रुख कि सरकारी तंत्र को जनता के प्रति जवाबदेह होना होगा, आने वाले समय में उत्तराखंड में गुड गवर्नेंस यानी सुशासन की नई मिसाल कायम कर सकता है।


