नैनीताल में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने और अदालती आदेशों की साख बनाए रखने के लिए नैनीताल पुलिस ने एक बेहद व्यापक और रणनीतिक अभियान छेड़ रखा है। ‘ऑपरेशन प्रहार’ के नाम से चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत पुलिस प्रशासन ने उन असामाजिक तत्वों और लंबे समय से कानून से आंख-मिचौली खेल रहे अपराधियों पर नकेल कसना शुरू कर दिया है, जो अदालती प्रक्रिया को लगातार ठेंगा दिखा रहे थे। हालिया कार्रवाई में नैनीताल जनपद की पुलिस ने दो ऐसे अभ्यस्त वारंटियों को गिरफ्तार कर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है, जो न्यायालय द्वारा जारी गैर-जमानती वारंट और दंड प्रक्रिया संहिता की अवहेलना कर लगातार फरार चल रहे थे। यह सिर्फ दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी का मामला नहीं है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट संदेश है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और पेशेवर पुलिसिंग का मेल होता है, तो कानून के लंबे हाथों से बचना नामुमकिन हो जाता है।
ऑपरेशन प्रहार की पृष्ठभूमि और वरिष्ठ नेतृत्व का दिशा-निर्देश
नैनीताल जनपद में आपराधिक गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने और न्यायालय द्वारा जारी आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. के नेतृत्व में रणनीति तैयार की गई है। पुलिस कप्तान का स्पष्ट मानना है कि अगर किसी क्षेत्र में कानून का भय खत्म होने लगे, तो सबसे पहले अदालती प्रक्रियाओं की अवहेलना शुरू होती है। जब अभियुक्त तारीखों पर हाजिर नहीं होते या गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद पुलिस की पकड़ से बाहर रहते हैं, तो इससे आम जनता का न्याय प्रणाली पर से विश्वास डगमगाने लगता है।
इसी व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए ‘ऑपरेशन प्रहार’ का खाका खींचा गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ऐसे तमाम फरार अपराधियों, हिस्ट्रीशीटरों और वारंटियों की पहचान कर उन्हें दबोचना है जो लंबे समय से फरार रहकर समानांतर व्यवस्था चलाने की कोशिश कर रहे हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के स्पष्ट और कड़े निर्देशों के बाद पूरे जिले में खुफिया तंत्र को सक्रिय किया गया और थानेवार फरार अपराधियों की सूची तैयार कर विशेष टीमों का गठन किया गया।
बिंदुखत्ता और लालकुआं पुलिस की रणनीतिक सफलता
इस बड़े अभियान के तहत मैदानी इलाकों में जमीनी कार्रवाई का जिम्मा पुलिस अधीक्षक हल्द्वानी मनोज कुमार कत्याल और क्षेत्राधिकारी लालकुआं विमल प्रसाद के पर्यवेक्षण में दिया गया। लालकुआं कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक बृजमोहन सिंह राणा के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने इस पूरी कार्रवाई को अंजाम देने के लिए एक ठोस योजना बनाई।
पुलिस टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि संबंधित अभियुक्त अपना ठिकाना बदलकर लगातार पुलिस को चकमा दे रहे थे। चौकी बिंदुखत्ता की पुलिस टीम, जिसकी कमान उपनिरीक्षक गौरव जोशी के हाथों में थी, ने अभियुक्तों के संभावित ठिकानों पर लगातार निगरानी रखनी शुरू की। कांस्टेबल प्रहलाद सिंह और कांस्टेबल दयाल नाथ को इस गुप्त ऑपरेशन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। इन पुलिसकर्मियों ने स्थानीय सूचना तंत्र, मैन्युअल इनपुट और तकनीकी निगरानी के दम पर दोनों वारंटियों के आवागमन के रास्ते पर जाल बिछाया।
दिन-रात की कड़ी मेहनत और सटीक सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने दोनों अभ्यस्त वारंटियों को धर दबोचा। पकड़े गए अभियुक्तों की पहचान राम सिंह पुत्र प्रीतम सिंह और जसविन्दर पुत्र गुरदीप सिंह के रूप में हुई है। यह दोनों अभियुक्त मूल रूप से नजीमाबाद, धौरा डैम क्षेत्र, थाना किच्छा, जनपद ऊधम सिंह नगर के निवासी हैं।
कानून के पन्नों में मामला: आबकारी कानून और धारा 82 की गंभीरता
गिरफ्तार किए गए दोनों अभियुक्तों के खिलाफ आबकारी अधिनियम की धारा 60 के तहत मामले दर्ज थे। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और संवेदनशील राज्य में अवैध शराब का कारोबार और आबकारी से जुड़े अपराध एक गंभीर सामाजिक समस्या रहे हैं। अवैध शराब न केवल सरकारी राजस्व को बड़ा चूना लगाती है, बल्कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में अपराध, घरेलू हिंसा और सामाजिक ताने-बाने के बिगड़ने का मुख्य कारण भी बनती है।
मामले की गंभीरता इस बात से और बढ़ जाती है कि ये अभियुक्त केवल आबकारी कानून के उल्लंघन के आरोपी नहीं थे, बल्कि इन्होंने अदालत की अवहेलना की सभी सीमाएं लांघ दी थीं। इनके खिलाफ माननीय न्यायालय द्वारा गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। जब वारंट जारी होने के बाद भी ये हाजिर नहीं हुए, तो अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 82 के तहत भगोड़ा घोषित करने और कुर्की से पूर्व की उद्घोषणा की आदेशिका जारी कर दी थी।
कानूनी दृष्टि से धारा 82 की प्रक्रिया तब अपनाई जाती है जब अदालत को यह पक्का यकीन हो जाता है कि कोई व्यक्ति वारंट से बचने के लिए खुद को छिपा रहा है या फरार हो गया है। इसके बावजूद जब अभियुक्त पेश नहीं होते, तो यह न्याय व्यवस्था की साख पर सीधा हमला माना जाता है। ऐसे में नैनीताल पुलिस द्वारा इन दोनों अभियुक्तों की गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रियाओं की तामीली कराना एक बड़ी रणनीतिक और कानूनी जीत मानी जा रही है।
सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से कार्रवाई का महत्व
पहाड़ी और मैदानी सीमाओं से सटे जिलों में पुलिसिंग करना हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण कार्य रहा है। ऊधम सिंह नगर और नैनीताल जिले की सीमाएं आपस में सटी हुई हैं। अपराधी अक्सर एक जिले में अपराध करके दूसरे जिले या फिर पड़ोसी राज्यों के सीमावर्ती जंगलों व दूरदराज के इलाकों में जाकर छिप जाते हैं। धौरा डैम और किच्छा से सटे नजीमाबाद क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर ये आरोपी लंबे समय से कानून से बचते आ रहे थे।
इस गिरफ्तारी के सामाजिक और प्रशासनिक मायने बेहद व्यापक हैं:
न्याय प्रणाली में विश्वास की बहाली: जब न्यायालय के आदेशों पर त्वरित कार्रवाई होती है और लंबे समय से फरार अपराधी पकड़े जाते हैं, तो पीड़ित पक्ष और आम जनता को यह भरोसा होता है कि कानून देर से ही सही, पर अपना काम जरूर करता है।
अपराधियों में खौफ का माहौल: ‘ऑपरेशन प्रहार’ जैसी लक्षित कार्रवाइयों से उन लोगों को कड़ा संदेश जाता है जो यह सोचते हैं कि समय बीतने के साथ पुलिस उनके मामलों को भूल जाएगी या फाइलें ठंडे बस्ते में चली जाएंगी।
अंतर-जिला समन्वय की मिसाल: नैनीताल पुलिस द्वारा ऊधम सिंह नगर क्षेत्र से जुड़े अभियुक्तों को खोज निकालना और गिरफ्तार करना जिलों के बीच बेहतर खुफिया समन्वय को भी दर्शाता है।
अवैध गतिविधियों पर लगाम: आबकारी मामलों से जुड़े अपराधियों की धरपकड़ से क्षेत्र में अवैध शराब नेटवर्क की कमर टूटती है, जिससे स्थानीय स्तर पर शांति व्यवस्था बनाए रखने में मदद मिलती है।
उत्तराखंड पुलिस की आधुनिक और जन-केंद्रित कार्यशैली
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड पुलिस के काम करने के तरीके में काफी बदलाव आया है। अब केवल घटना घटने के बाद जांच करने की पारंपरिक शैली के बजाय, निरोधात्मक और आक्रामक पुलिसिंग पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। ‘ऑपरेशन प्रहार’ इसी नई कार्यशैली का एक बेहतरीन उदाहरण है।
वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि यदि जनपद में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ रखना है, तो तीन स्तरों पर काम करना होगा:
गैर-जमानती वारंटों का शत-प्रतिशत निष्पादन।
वांछित और इनामी अपराधियों की लगातार धरपकड़।
सूचना तंत्र को केवल थानों तक सीमित न रखकर जन-सामान्य के साथ मजबूत संवाद स्थापित करना।
बिंदुखत्ता और लालकुआं पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई दर्शाती है कि निचले स्तर का पुलिस बल भी अब अत्यधिक तत्परता और जिम्मेदारी के साथ काम कर रहा है। उपनिरीक्षक गौरव जोशी और उनके साथ तैनात कांस्टेबलों द्वारा की गई यह कार्रवाई फील्ड पुलिसिंग के उच्च मानकों को प्रदर्शित करती है।
भविष्य का खाका
नैनीताल पुलिस प्रशासन ने साफ कर दिया है कि ‘ऑपरेशन प्रहार’ कोई एक-दो दिन की तात्कालिक कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। आने वाले दिनों में जिले के सभी थाना क्षेत्रों में ऐसे अन्य मामलों की समीक्षा की जा रही है जहाँ वारंटी या वांछित अभियुक्त फरार चल रहे हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. के कड़े रुख से यह स्पष्ट है कि कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए नैनीताल जनपद में कोई सुरक्षित जगह नहीं बचेगी। पुलिस टीम को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसे सभी मामलों में शून्य-सहनशीलता की नीति अपनाएं और न्यायालय के आदेशों का कड़ाई से पालन करवाएं।
अदालती आदेशों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ यह आक्रामक अभियान राज्य के अन्य जिलों के लिए भी एक नजीर पेश कर रहा है। आम नागरिक भी पुलिस की इस मुस्तैदी की सराहना कर रहे हैं, क्योंकि एक भयमुक्त और कानून का पालन करने वाला समाज ही प्रगति के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है।


