नैनीताल पुलिस ने गोरापड़ाव डकैती कांड का खुलासा करते हुए दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि इस सनसनीखेज वारदात के पीछे छिपी पूरी साजिश की परतें भी अब खुलकर सामने आ गई हैं। कुमाऊं क्षेत्र के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र हल्द्वानी में दो दिन पहले हुई लाखों रुपये की हथियारबंद डकैती से पूरे इलाके में दहशत और खौफ का माहौल बन गया था। पुलिस की दिन-रात की मुस्तैदी और गहन छानबीन के बाद अंततः इस बड़े अपराध की गुत्थी सुलझा ली गई है और वारदात में शामिल दो मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।
वारदात की पूरी कहानी: हथियारबंद नकाबपोशों ने मचाया था तांडव
उत्तराखंड के नैनीताल जिले के अंतर्गत आने वाले हल्द्वानी कोतवाली क्षेत्र में बीती उन्नीस तारीख की शाम अचानक उस वक्त हड़कंप मच गया, जब गोरापड़ाव तीनपानी इलाके में एक बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम दिया गया।
दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, शाम के समय आपातकालीन पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर एक बदहवास कॉल प्राप्त हुई। फोन करने वाले ने सूचना दी कि तीनपानी गोरापड़ाव स्थित एक प्रसिद्ध गाड़ी के बिक्री केंद्र के पीछे बने दफ्तर और गैराज परिसर में करीब दस से बारह की संख्या में हथियारबंद बदमाश जबरन घुस आए हैं और वहां मौजूद लोगों को बंधक बनाकर भारी लूटपाट कर रहे हैं।
सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में अफरा-तफरी मच गई। कंट्रोल रूम से तुरंत उच्च अधिकारियों को इस दुस्साहसिक वारदात की जानकारी दी गई और कोतवाली हल्द्वानी से भारी पुलिस बल को बिना कोई वक्त गंवाए घटनास्थल के लिए रवाना किया गया।
घटनास्थल पर पहुंचकर जब पुलिस ने शुरुआती जांच-पड़ताल शुरू की, तो वारदात की भयावहता सामने आई। पीड़ित व्यवसायी नारायण दास (पुत्र रोशन लाल), जो कि अम्बा बिहार तीनपानी हल्द्वानी के निवासी हैं, उन्होंने पुलिस को पूरी आपबीती सुनाई।
पीड़ित की तहरीर के मुताबिक, वह अपने कुछ परिचितों के साथ अपने कार्यालय में मौजूद थे। उसी दौरान अचानक दस अज्ञात बंदूकधारी नकाबपोश कमरे में दाखिल हुए। बदमाशों के हाथों में तमंचे और घातक हथियार थे। आते ही अपराधियों ने वहां मौजूद सभी लोगों को हथियारों के दम पर डराया-धमकाया और शोर मचाने पर जान से मारने की सीधी धमकी दे डाली।
नकाबपोश बदमाशों ने वहां मौजूद व्यवसायी और उनके साथियों से लगभग आठ लाख रुपये की भारी नकदी, तीन सोने की चेन, सोने की अंगूठियां और कुल बारह मोबाइल फोन जबरन छीन लिए। वारदात को इतनी तेजी और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया कि पीड़ित जब तक कुछ समझ पाते या विरोध करने की हिम्मत जुटा पाते, तब तक अपराधी सारा कीमती सामान और नकदी समेटकर मौके से रफूचक्कर हो चुके थे।
पीड़ित की लिखित शिकायत के आधार पर हल्द्वानी कोतवाली में तुरंत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा ३१०(२) के तहत दस अज्ञात बंदूकधारियों के खिलाफ डकैती का गंभीर मामला दर्ज कर लिया गया। मामले की प्राथमिक जांच और विवेचना की जिम्मेदारी कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक विजय मेहता को सौंपी गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक की त्वरित कार्रवाई और पचास सदस्यीय विशेष टीम
शहर के इतने व्यस्त और महत्वपूर्ण इलाके में ढीली सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली इस डकैती की घटना को जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बेहद गंभीरता से लिया। इलाके में आम जनता के बीच फैले डर को दूर करने और अपराधियों को तुरंत कानून के कटघरे में खड़ा करने के लिए उन्होंने खुद कमान संभाली।
एसएसपी के निर्देशों पर इस जटिल और हाई-प्रोफाइल मामले के शीघ्र निस्तारण तथा घटना में शामिल अपराधियों की धरपकड़ हेतु पचास पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की एक विशाल और विशेष जांच टीम का गठन किया गया। इस विशेष टीम में जिले के अनुभवी और दक्ष अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गईं।
जांच दल में अपराध और यातायात विभाग के पुलिस अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्र, हल्द्वानी के पुलिस अधीक्षक मनोज कत्याल, अपर पुलिस अधीक्षक व क्षेत्राधिकारी हल्द्वानी अमित कुमार सैनी, तथा लालकुआं के क्षेत्राधिकारी विमल प्रसाद को विशेष रूप से शामिल किया गया।
इसके अतिरिक्त, विभिन्न थानों के प्रभारी निरीक्षकों, विशेष कार्य दल (एसओजी), साइबर सेल के दक्ष कांस्टेबलों और अपराध मामलों के विशेषज्ञों को इस अभियान में लगाया गया। घटना की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच सुनिश्चित करने के लिए बम निरोधक दस्ते (बीडीएस), श्वान दस्ते (डॉग स्क्वायड) और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स को भी घटनास्थल पर भेजा गया ताकि कोई भी सूक्ष्म साक्ष्य छूट न जाए।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी ने स्वयं गोरापड़ाव स्थित घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अपराध स्थल के हर कोण का जायजा लिया, पीड़ितों और आसपास के प्रत्यक्षदर्शियों से गहन पूछताछ की और पूरी घटना का विस्तृत रिव्यू तैयार किया। इसके पश्चात उन्होंने अपनी गठित टीमों को रणनीतिक दिशा-निर्देश दिए और अलग-अलग टास्क सौंपकर तेजी से काम करने के आदेश दिए।
सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस की मदद से सुलझी गुत्थी
घटना के बाद गठित पुलिस की अलग-अलग टीमों ने मामले की तह तक जाने के लिए चौतरफा जांच शुरू की। एक तरफ जहां पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों के विस्तृत बयान दर्ज किए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ तकनीकी टीम ने घटनास्थल और उसके आसपास के मार्गों पर लगे तमाम सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू कर दी।
पुलिस टीमों ने कई किलोमीटर के दायरे में लगे दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की कई घंटों की रिकॉर्डिंग का बारीकी से विश्लेषण किया। साथ ही, सर्विलांस और मोबाइल नेटवर्क डेटा का भी गहराई से अध्ययन किया गया।
फुटेज के विश्लेषण और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से पुलिस को दो संदेहास्पद व्यक्तियों की लोकेशन और गतिविधियों के बारे में ठोस सुराग मिले। सुराग मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी की और दोनों संदिग्धों को हिरासत में ले लिया।
पकड़े गए संदिग्धों की पहचान इस प्रकार हुई:
वंशप्रीत सिंह उर्फ पन्नू: पुत्र सुखपाल सिंह, निवासी विथा अकबर, सितारगंज, जिला उधम सिंह नगर (उम्र २५ वर्ष)।
रखबीर सिंह: पुत्र हरविंदर सिंह, निवासी ईश्वरपुर, थाना शीषगढ़, जिला बरेली, उत्तर प्रदेश (उम्र २८ वर्ष)।
दोनों संदिग्धों को तुरंत हिरासत में लेकर हल्द्वानी कोतवाली लाया गया, जहां पुलिस की वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने उनसे अलग-अलग और आमने-सामने बैठाकर कड़ी पूछताछ शुरू की।
जुए की लत, भारी कर्ज और डकैती की पूरी साजिश का खुलासा
शुरुआती दौर में दोनों आरोपी पुलिस को गुमराह करने का प्रयास करते रहे, लेकिन जब पुलिस ने उनके सामने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और सर्विलांस रिपोर्ट रखी, तो वे टूट गए और उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पूछताछ के दौरान जो सच सामने आया, उसने सभी को हैरान कर दिया। इस पूरी डकैती की पटकथा जुए के दलदल और भारी-भरकम आर्थिक कर्ज के इर्द-गिर्द लिखी गई थी।
पूछताछ में यह बात सामने आई कि वंशप्रीत सिंह उर्फ पन्नू और रखबीर सिंह की मुलाकात किच्छा के रहने वाले यश सिडाना नाम के एक व्यक्ति से हुई थी। यश सिडाना खुद जुए की लत का शिकार था और जुए में लाखों रुपये हार चुका था। भारी कर्ज में डूबने के कारण वह भयंकर आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। इसके अलावा, उसकी माता का स्वास्थ्य भी लगातार खराब चल रहा था, जिसके इलाज के लिए उसे पैसों की सख्त दरकार थी।
अपनी इस बदहाली से निकलने के लिए यश सिडाना ने वंशप्रीत और रखबीर के साथ मिलकर एक खतरनाक योजना बनाई। यश ने दोनों को जानकारी दी कि हल्द्वानी के गोरापड़ाव स्थित इस दफ्तर/गैराज परिसर में बड़े पैमाने पर लाखों रुपये का लेन-देन और जुआ होता है, जहां हर समय भारी मात्रा में नकदी मौजूद रहती है।
इसके बाद तीनों ने मिलकर वहां डकैती डालने का पूरा खाका तैयार किया। योजना यह तय हुई थी कि डकैती से जो भी रकम हाथ लगेगी, उससे सबसे पहले यश द्वारा जुए में हारा गया कर्ज चुकाया जाएगा और उसके बाद बची हुई पूरी राशि को सभी आपस में बराबर-बराबर बांट लेंगे।
इस साजिश को अमलीजामा पहनाने के लिए उन्होंने अपने साथ कुछ अन्य आपराधिक मानसिकता वाले लोगों को भी जोड़ा। घटना को अंजाम देने से पहले आरोपियों ने कई दिनों तक गोरापड़ाव स्थित उस कार्यालय की रेकी की। उन्होंने वहां आने-जाने वाले लोगों के समय, दफ्तर के माहौल और भागने के रास्तों का पूरा जायजा लिया।
जब योजना पूरी तरह तैयार हो गई, तब तय रणनीति के तहत आरोपी अपने मुंह पर कपड़ा बांधकर यानी नकाबपोश होकर दफ्तर में घुसे और हथियारों के बल पर डकैती की इस बड़ी घटना को अंजाम देकर मौके से फरार हो गए।
डिजिटल निशानों को मिटाने की नाकाम कोशिश
डकैती की वारदात को अंजाम देने के बाद सभी आरोपी पहले से तय ठिकानों की ओर भाग निकले। रास्ते में ही उन्होंने लूटी गई नकदी को आपस में बांट लिया ताकि वे तुरंत अलग-अलग दिशाओं में गायब हो सकें।
कानून और पुलिस की डिजिटल सर्विलांस प्रणाली से बचने के लिए आरोपियों ने काफी होशियारी दिखाने की कोशिश की थी। उन्हें इस बात का भली-भांति अंदाजा था कि लूटे गए मोबाइल फोन की वजह से पुलिस उन तक आसानी से पहुंच सकती है।
इसीलिए, अपने डिजिटल फुटप्रिंट्स को मिटाने और अपनी लोकेशन को पुलिस से छिपाने की नीयत से आरोपियों ने छीने गए सभी बारह मोबाइल फोन भागते समय सुनसान रास्तों पर फेंक दिए। हालांकि, उनकी यह तमाम चालाकियां हल्द्वानी पुलिस की मुस्तैदी और आधुनिक साइबर जांच के आगे पूरी तरह विफल साबित हुईं।
बरामदगी, आपराधिक इतिहास और कठोर कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने पकड़े गए दोनों मुख्य अभियुक्तों को उनके अपराध से अवगत कराते हुए विधिवत गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपी वंशप्रीत सिंह उर्फ पन्नू के पास से पुलिस टीम ने ३१,००० रुपये की नकदी और ३१५ बोर के ४ अदद जिंदा कारतूस बरामद किए हैं।
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि गिरफ्तार अभियुक्त रखबीर सिंह कोई मामूली अपराधी नहीं है, बल्कि उसका एक लंबा और गंभीर आपराधिक इतिहास रहा है। वह पहले भी कई आपराधिक मामलों में संलिप्त रह चुका है। वहीं, दूसरे आरोपी वंशप्रीत सिंह के पिछले आपराधिक रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं और संबंधित थानों से उसकी जानकारी जुटाई जा रही है।
मामले में नई जानकारियां और सबूत सामने आने के बाद पुलिस ने दर्ज मुकदमे के दायरे को और बढ़ा दिया है। पुलिस ने शुरुआती मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा ६१(२) और ३१७(३) की बढ़ोतरी कर दी है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि चूंकि इस वारदात को एक पूर्व-नियोजित और संगठित तरीके से अंजाम दिया गया है, इसलिए आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता के नए और कड़े प्रावधानों के तहत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इन नए प्रावधानों के तहत ऐसे संगठित अपराधों के लिए आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक की सख्त सजा का प्रावधान है।
हल्द्वानी पुलिस का कहना है कि इस गिरोह के बाकी फरार सदस्यों और साजिश में शामिल अन्य चेहरों को भी बहुत जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस की कई टीमें संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं और मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई तेजी से जारी है।


