
अजय सिंह
रामगढ़ (नैनीताल)। नैनीताल के पर्वतीय अंचल रामगढ़ ब्लॉक के आधा दर्जन से अधिक गांवों में इन दिनों गुलदार का खौफ चरम पर है। स्थिति यह हो चुकी है कि जंगली जानवर अब रात के बजाय दिन के उजाले में ही रिहाइशी इलाकों, घरों के आंगनों और यहां तक कि शिक्षण संस्थानों के आसपास खुलेआम घूम रहे हैं। इस वन्यजीव आतंक के कारण स्थानीय जनजीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है।
एक महीने में कई मवेशियों को बनाया निवाला
गुलदार की बढ़ती सक्रियता का सबसे ज्यादा असर छीमी मटेला गांव में देखने को मिल रहा है। बीते एक माह के भीतर गुलदार ने इस गांव में भारी आतंक मचाया है:
शिकार: एक गाय के बछड़े और चार पालतू कुत्तों को गुलदार अब तक अपना निवाला बना चुका है।
स्कूल पर पहरा: सबसे चिंताजनक बात यह है कि मटेला प्राथमिक विद्यालय और स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र के आसपास गुलदार को लगातार चहलकदमी करते देखा गया है, जिससे नौनिहालों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
सन्नाटा और झाड़ियां बनीं मददगार
ग्रामीणों के मुताबिक, पलायन के कारण गांवों में आबादी लगातार कम हो रही है। इसी सूनेपन का फायदा उठाकर जंगली जानवर बेखौफ घूम रहे हैं। इसके अलावा, गांव के चारों तरफ उगी ऊंची-ऊंची झाड़ियों ने गुलदार के लिए मुफीद छिपने की जगह (सेफ हाइडआउट) बना दी है। इस डर से लोग दोपहर बाद 3 से 4 बजे ही अपने जरूरी काम समेटकर घरों के भीतर कैद हो जाते हैं।
ग्रामीणों की मांग: पिंजरा लगे और झाड़ियां कटें
ग्राम प्रधान से गुहार: छीमी मटेला के ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान मदन सिंह छीमवाल से मुलाकात कर वन विभाग के आला अधिकारियों तक अपनी आवाज पहुंचाने की मांग की है, ताकि किसी बड़ी जनहानि को समय रहते रोका जा सके।
परेशान ग्रामीणों ने वन विभाग के समक्ष दो प्रमुख मांगें रखी हैं, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा का माहौल बन सके:
पिंजरा लगाना: मटेला प्राथमिक विद्यालय के परिसर या उसके समीप तुरंत गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाए।
झाड़ियों का कटान: गांवों के रास्तों और रिहाइशी मकानों के आसपास उगी बड़ी-बड़ी झाड़ियों को तत्काल साफ करवाया जाए ताकि गुलदार को छिपने का मौका न मिले।