सिल्क मार्क एक्सपो 2026 देहरादून में 2 सितंबर से भव्य रूप से शुरू हो चुका है, जहाँ रेशम प्रेमियों को शुद्ध और प्रामाणिक सिल्क उत्पादों की विस्तृत श्रृंखला एक ही छत के नीचे देखने और खरीदने का अवसर मिल रहा है। भारतीय वस्त्र परंपरा में रेशम को न केवल सभी कपड़ों की रानी माना गया है, बल्कि इसे पवित्रता, भव्यता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी स्वीकार किया गया है। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के राजपुर रोड स्थित होटल मधुबन में इस 6-दिवसीय प्रदर्शनी का शानदार आगाज हुआ।
सिल्क मार्क संगठन (भारत) के नई दिल्ली अध्याय द्वारा आयोजित इस भव्य एक्सपो का मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को नकली या मिलावटी रेशम के धोखे से बचाना और उन्हें 100% शुद्ध प्राकृतिक सिल्क की पहचान कराना है। यह मेला 2 सितंबर से 7 सितंबर 2026 तक शहरवासियों और रेशम प्रेमियों के लिए पूरी तरह खुला रहेगा।
सिल्क मार्क एक्सपो 2026 देहरादून का औपचारिक उद्घाटन और गरिमामयी उपस्थिति
देहरादून में आयोजित सिल्क मार्क एक्सपो 2026 देहरादून का औपचारिक शुभारंभ 2 सितंबर 2026 को दोपहर बाद 4:00 बजे बेहद धूमधाम और गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड सरकार के कृषि, किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गणेश जोशी उपस्थित रहे। उन्होंने रिबन काटकर और दीप प्रज्वलित कर प्रदर्शनी का आधिकारिक उद्घाटन किया।
उद्घाटन समारोह के दौरान क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और रेशम उद्योग से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की उल्लेखनीय मौजूदगी रही। देहरादून छावनी विधानसभा क्षेत्र की माननीय विधायिका श्रीमती सविता कपूर ने कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। उनके साथ उत्तराखंड सहकारिता रेशम महासंघ के पूर्व अध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह और उत्तराखंड सरकार के रेशम निदेशालय के निदेशक श्री प्रदीप कुमार भी मंच पर मौजूद रहे।
केंद्रीय रेशम बोर्ड और सिल्क मार्क संगठन के पदाधिकारियों की बात करें तो सिल्क मार्क संगठन नई दिल्ली के प्रभारी एवं सहायक सचिव (तकनीकी) श्री शिबिल वी. के. तथा रेशम महासंघ के महाप्रबंधक श्री कंदारी ने कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का नेतृत्व किया। इसके अलावा केंद्रीय रेशम बोर्ड की विभिन्न इकाइयों के कई वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और उत्तराखंड रेशम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित रहे और उन्होंने बुनकरों का उत्साहवर्धन किया।
असली और नकली रेशम की चुनौती: सिल्क मार्क की आवश्यकता क्यों?
हमारे देश में रेशम का धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा है। विवाह, पूजा-पाठ या कोई भी शुभ अवसर हो, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की उपस्थिति अनिवार्य मानी जाती है। प्राकृतिक चमक, अद्वितीय बुनाई और बेजोड़ मजबूती के कारण सिल्क हमेशा से वस्त्रों में शीर्ष स्थान पर रहा है। भारत दुनिया में रेशम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक होने के साथ-साथ इसका सबसे बड़ा उपभोक्ता देश भी है। प्राचीन काल से ही पारंपरिक रूप से कुशल कारीगर अपनी कला, जटिल डिजाइनों और जीवंत रंगों के माध्यम से सिल्क पर खूबसूरत रचनाएं उकेरते आ रहे हैं।
हालांकि, हाल के वर्षों में सिल्क बाजार में एक गंभीर समस्या सामने आई है। कुछ अनैतिक व्यापारी कृत्रिम या सिंथेटिक धागों से बने कपड़ों को असली रेशम बताकर ऊंचे दामों पर बेच देते हैं। आम खरीदार के लिए आंखों से देखकर असली और नकली सिल्क में अंतर कर पाना लगभग नामुमकिन होता है। परिणामस्वरूप, खरीदार पूरा पैसा देने के बावजूद ठगी का शिकार हो जाते हैं।
इसी शोषण और धोखाधड़ी से आम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के लिए भारत सरकार के कपड़ा मंत्रालय ने केंद्रीय रेशम बोर्ड के माध्यम से एक विशेष योजना की शुरुआत की है, जिसे ‘सिल्क मार्क’ कहा जाता है। जिस प्रकार सोने की शुद्धता के लिए हॉलमार्क होता है, ठीक उसी प्रकार प्राकृतिक और शुद्ध रेशम की प्रामाणिकता की गारंटी ‘सिल्क मार्क’ का लेबल देता है।
6 राज्यों के 25 बुनकर और हस्तशिल्पी एक ही मंच पर
देहरादून में आयोजित इस राष्ट्रीय स्तर के एक्सपो में देश के 6 प्रमुख राज्यों से आए 25 से अधिक बुनकर, निर्माता, सहकारी समितियाँ, गैर-सरकारी संगठन, प्रमुख रेशम व्यापारी, निर्यातक और सरकारी एजेंसियाँ भाग ले रही हैं।
इनमें मुख्य रूप से शामिल राज्य हैं:
कर्नाटक: अपनी बेहतरीन शहतूती (मलबरी) सिल्क और कांजीवरम शैली की साड़ियों के लिए प्रसिद्ध।
पश्चिम बंगाल: बालूचरी, कांता वर्क और तंत सिल्क के शानदार संग्रह के साथ।
झारखंड: प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल वन्य सिल्क (टसर सिल्क) के विशेष उत्पादों के साथ।
उत्तर प्रदेश (वाराणसी): विश्वप्रसिद्ध बनारसी सिल्क साड़ियों, ज़री के काम और पारंपरिक पोशाकों के साथ।
नई दिल्ली: आधुनिक डिजाइन और आधुनिक रेशमी वस्त्रों के विपणन केंद्र के रूप में।
उत्तराखंड: स्थानीय रेशम उत्पादन, गढ़वाली एवं कुमाऊंनी शैली से प्रेरित रेशमी पहनावों के साथ।
इस प्रदर्शनी में रेशम की दो प्रमुख श्रेणियाँ—मलबरी (शहतूती रेशम) और वैन्या (वन्य रेशम जैसे टसर, एरिया और मूगा)—के उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है। खरीदार यहाँ सीधे कारीगरों और बुनकरों से संवाद कर सकते हैं, जिससे बीच के बिचौलियों की भूमिका समाप्त होती है और ग्राहकों को सही कीमत पर प्रामाणिक सामान मिलता है।
ग्राहकों के लिए मुफ्त सिल्क टेस्टिंग लैब: एक्सपो का मुख्य आकर्षण
सिल्क मार्क एक्सपो 2026 देहरादून की सबसे बड़ी और अनूठी विशेषता यह है कि आयोजकों ने प्रदर्शनी स्थल पर ही एक ‘मुफ्त सिल्क परीक्षण सुविधा’ (फ्री सिल्क टेस्टिंग फैसिलिटी) की व्यवस्था की है।
यदि किसी ग्राहक को एक्सपो में खरीदे गए या अपने पास मौजूद किसी भी रेशमी कपड़े की शुद्धता पर थोड़ा सा भी संदेह होता है, तो वह तुरंत इस टेस्टिंग काउंटर पर जाकर विशेषज्ञों से उसकी जांच करवा सकता है।
केंद्रीय रेशम बोर्ड के वैज्ञानिक और तकनीशियन आधुनिक तकनीकों (जैसे बर्निंग टेस्ट और रासायनिक परीक्षण) के माध्यम से मौके पर ही कपड़े के धागे की जांच करके बताते हैं कि कपड़ा 100% शुद्ध प्राकृतिक सिल्क है या उसमें मिलावट है। इस नि:शुल्क सेवा ने उपभोक्ताओं के भीतर विश्वास की एक नई लहर पैदा की है।
सीधे बुनकरों से जुड़ने और भारतीय धरोहर को बढ़ावा देने का मौका
सिल्क मार्क संगठन का यह प्रयास न केवल उपभोक्ताओं को शुद्धता का भरोसा देता है, बल्कि देश के कोने-कोने में फैले बुनकरों और कारीगरों की आजीविका को भी मजबूती प्रदान करता है। जब ग्राहक सीधे बुनकरों से कपड़े खरीदते हैं, तो मेहनत का पूरा लाभ उन कारीगरों तक पहुंचता है जो हफ्तों और महीनों की मेहनत से एक साड़ी या दुपट्टा तैयार करते हैं।
होटल मधुबन में चल रही यह प्रदर्शनी 7 सितंबर 2026 तक रोजाना सुबह से लेकर शाम तक आम जनता के लिए खुली रहेगी। अगर आप भी भारतीय पारंपरिक वस्त्रों, शुद्ध बनारसी, टसर, मलबरी या कांजीवरम सिल्क के शौकीन हैं, तो यह एक्सपो आपके लिए अपनी अलमारी में असली और प्रामाणिक सिल्क संग्रह जोड़ने का बेहतरीन अवसर है।


