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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान: देवभूमि में शिवभक्तों का सम्मान सर्वोपरि, आस्था से खिलवाड़ करने वालों को मिलेगा करारा जवाब

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बड़ा बयान: उत्तराखंड की पावन धरती पर हर वर्ष आयोजित होने वाली कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, भक्ति और सांस्कृतिक पहचान का एक विशाल प्रतीक है। देवभूमि उत्तराखंड के मुख्य सेवक के रूप में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पावन अवसर पर राज्य सरकार की नीतियों, श्रद्धालुओं के प्रति आदर भाव और सनातन संस्कृति की रक्षा को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश देश के सामने रखा है। राज्य सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तर भारत की इस सबसे बड़ी धार्मिक यात्रा में भाग लेने वाले प्रत्येक शिवभक्त की सुरक्षा, सुविधा और आत्मसम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

शिवभक्तों का सेवा-सत्कार राज्य सरकार का परम कर्तव्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में पधारने वाले प्रत्येक कांवड़ यात्री और शिवभक्त का स्वागत करना पूरे प्रदेश के लिए अत्यंत सौभाग्य की बात है। जब देश के कोने-कोने से लाखों-करोड़ों श्रद्धालु सैकड़ों किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा तय करके पवित्र गंगाजल लेने हरिद्वार और ऋषिकेश पहुँचते हैं, तो उनकी निष्ठा और भक्ति भाव दर्शनीय होता है। ऐसे में राज्य सरकार का यह नैतिक और प्रशासनिक दायित्व बन जाता है कि वह इन श्रद्धालुओं के मार्ग में आने वाली हर बाधा को दूर करे।

उत्तराखंड सरकार द्वारा यात्रा मार्गों पर कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा करने, उनके विश्राम के लिए उचित स्थान की व्यवस्था करने और उनके चरण पखारकर उनका अभिनंदन करने का जो कार्य किया जा रहा है, वह किसी दिखावे का हिस्सा नहीं है। यह कदम हमारी प्राचीन भारतीय अतिथि देवो भवः की परंपरा और सनातन संस्कृति के गहरे संस्कारों का प्रतीक है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि भगवान शिव के भक्तों की निःस्वार्थ भाव से की गई सेवा ही वास्तव में ईश्वर की सबसे बड़ी पूजा और आराधना है। इसी भावना के साथ शासन और प्रशासन का हर अधिकारी व कर्मचारी दिन-रात शिवभक्तों की सहायता में जुटा रहता है।

सनातन परंपरा और संत समाज पर आघात करने वाली मानसिकता पर करारा प्रहार
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धार्मिक प्रतीकों, साधु-संतों की वेशभूषा और सनातन मान्यताओं का उपहास उड़ाने वाली प्रवृत्तियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहाँ भारत की बहुसंख्यक आबादी और शिवभक्त पूरी श्रद्धा, समर्पण और सेवा भाव के साथ धर्म के गौरव को बढ़ाने में लगे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ असामाजिक तत्व और संकीर्ण सोच वाले लोग संतों के रूप का मज़ाक उड़ाकर तथा सनातन धर्म की मूल आस्था पर चोट पहुँचाकर अपनी घटिया मानसिकता को उजागर कर रहे हैं।

उन्होंने अत्यंत सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि सनातन संस्कृति, साधु-संतों और करोड़ों श्रद्धालुओं के धार्मिक विश्वास का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। भारत की असली आत्मा, उसका इतिहास और उसकी पहचान सनातन जीवन मूल्यों में ही निहित है। जो लोग राजनीतिक या व्यक्तिगत लाभ के लिए सनातन धर्म और उसकी महान परंपराओं को नीचा दिखाने का दुस्साहस करते हैं, उन्हें यह भली-भांति समझ लेना चाहिए कि देश का जागरूक नागरिक और श्रद्धालु समाज अपनी आस्था पर होने वाले हर प्रहार का जवाब देना जानता है। लोकतंत्र की शक्ति के माध्यम से ऐसी विघटनकारी और अपमानजनक सोच को सही समय पर करारा जवाब दिया जाएगा।

कांवड़ यात्रा: भारतीय संस्कृति, संस्कार और सामाजिक समरसता का अनुपम प्रतीक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांवड़ यात्रा के व्यापक सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे मात्र एक सामान्य यात्रा मान लेना इसकी महत्ता को कम आंकना होगा। वास्तव में कांवड़ यात्रा भारत की उस अखंड आध्यात्मिक चेतना का जीवंत उदाहरण है जो पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करती है।

इस यात्रा के दौरान जाति, वर्ग, ऊँच-नीच और क्षेत्र के सारे बंधन टूट जाते हैं। जब देश के अलग-अलग राज्यों से आए करोड़ों श्रद्धालु एक ही रंग में रंगे होकर, ‘बम-बम भोले’ और ‘जय शिव शंभू’ के दिव्य जयकारों के साथ एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो उससे समाज में अभूतपूर्व एकता, अनुशासन और भाईचारे का संदेश फैलता है। यह यात्रा हमारी आने वाली पीढ़ियों को अपने धर्म, संस्कारों और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने का एक सशक्त माध्यम है। इसलिए इस महापर्व की पवित्रता और गरिमा को बनाए रखना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।

सुरक्षा, स्वच्छता और नागरिक सुविधाओं के लिए अभूतपूर्व प्रशासनिक प्रबंध
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के स्पष्ट निर्देशों के बाद उत्तराखंड प्रशासन ने कांवड़ यात्रा को सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारियाँ की हैं। लाखों की संख्या में उमड़ने वाली भीड़ को नियंत्रित करने और उन्हें बेहतरीन सुविधाएँ देने के लिए निम्नलिखित विशेष व्यवस्थाएँ लागू की गई हैं:
आधुनिक तकनीक से सुरक्षा निगरानी: पूरे कांवड़ मेला क्षेत्र और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर शांति व सुरक्षा बनाए रखने के लिए सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन कैमरों से लगातार निगरानी की जा रही है।
निःशुल्क स्वास्थ्य एवं चिकित्सा व्यवस्था: लंबी दूरी तय करने वाले कांवड़ियों की शारीरिक थकान और स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए यात्रा मार्ग पर जगह-जगह आधुनिक चिकित्सा शिविर, प्राथमिक उपचार केंद्र और एम्बुलेंस की तैनाती की गई है।
स्वच्छ पेयजल और भोजन की उत्तम व्यवस्था: यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से विशाल भंडारों का आयोजन किया गया है।
सफाई अभियान और कचरा प्रबंधन: देवभूमि की प्राकृतिक सुंदरता और पवित्रता बनी रहे, इसके लिए चौबीसों घंटे विशेष सफाई कर्मचारियों की टीम तैनात की गई है जो स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है।
यातायात और मार्ग परिवर्तन (डायवर्जन): आम जनता और तीर्थयात्रियों दोनों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सुव्यवस्थित ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है।

आस्था और कानून व्यवस्था का संतुलन बनाए रखना सरकार का लक्ष्य
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मानना है कि आस्था के इस विशाल समागम में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति को सुदृढ़ रखना बेहद ज़रूरी है। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि कांवड़ यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अराजकता, हुड़दंग या असामाजिक गतिविधियों को बर्दाश्त न किया जाए।

एक तरफ जहाँ सच्चे शिवभक्तों को हर संभव सुविधा और सम्मान दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ यात्रा की आड़ में माहौल खराब करने वाले तत्वों पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। सरकार का यह सुनिश्चित प्रयास है कि हर श्रद्धालु देवभूमि से एक सुखद, सुरक्षित और आध्यात्मिक अनुभव लेकर अपने घर वापस लौटे।

सनातन धर्म की रक्षा और संवर्धन के लिए राज्य सरकार का दृढ़ संकल्प
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन के समापन में दोहराया कि देवभूमि उत्तराखंड युगों-युगों से भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बिंदु रही है। यहाँ की नदियाँ, पर्वत और देवालय पूरे विश्व को शांति और भक्ति का मार्ग दिखाते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, देवस्थलों के संरक्षण और श्रद्धालुओं के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी विरोधी या असामाजिक सोच को आस्था के इस पावन पर्व में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उत्तराखंड सरकार शिवभक्तों की सेवा में कोई कसर नहीं छोड़ेगी और सनातन परंपरा के गौरव को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने का अपना अभियान निरंतर जारी रखेगी।

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