HomeCMमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल 'जन-जन की सरकार' से 1.34 लाख...

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की पहल ‘जन-जन की सरकार’ से 1.34 लाख नागरिकों को मिला सीधा लाभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी और जन कल्याण को समर्पित विशेष पहल ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ के दूसरे चरण ने सफलता का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। प्रदेश के कोने-कोने में आम जनता तक सरकारी सेवाओं को सीधे पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के दौरान जनसेवा का अभूतपूर्व विस्तार देखने को मिला है। इस दूसरे चरण के तहत पूरे राज्य में कुल 198 बहुउद्देशीय शिविरों का भव्य आयोजन किया गया, जिनमें 1.34 लाख से भी अधिक नागरिकों ने बड़े उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और शासन की सुविधाओं का लाभ उठाया।

अभियान की मुख्य उपलब्धियां
‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के दूसरे चरण के अंतर्गत प्रदेशभर में कुल 198 बहुउद्देशीय शिविरों का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। इस व्यापक जनसेवा अभियान के दौरान 1.34 लाख से भी अधिक नागरिकों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।

इन शिविरों का प्राथमिक और मूल उद्देश्य सरकारी सेवाओं को सीधे जनता के घर तक पहुंचाना तथा उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान करना रहा। इस पहल के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए 20 हजार से अधिक शिकायतों का तुरंत निस्तारण किया गया, जबकि विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के जरिए 81 हजार से अधिक लाभार्थियों को सीधा लाभ प्रदान किया गया।

‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान का दूसरा चरण
राज्य में सुशासन की अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए शुरू किया गया यह अभियान अब अपने दूसरे चरण में और अधिक प्रभावी एवं परिणामउन्मुख होकर उभरा है। इस अभियान का मूल दर्शन यही है कि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिकों को अपनी छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान या सरकारी प्रमाणपत्रों को बनवाने के लिए जिला मुख्यालयों या राज्य राजधानी के चक्कर न लगाने पड़ें।

दूसरे चरण में प्रशासनिक तंत्र को पूरी तरह से सक्रिय किया गया। राज्य के विभिन्न विकासखंडों, तहसीलों और दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में शिविर आयोजित किए गए। इन शिविरों में सभी प्रमुख विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी सुनिश्चित की गई, ताकि आम जनता को एक ही स्थान पर अपनी बात रखने और अपनी समस्याओं का समाधान पाने का अवसर मिल सके। प्रशासनिक अधिकारियों की इस सीधी मौजूदगी ने जनता और सरकार के बीच की दूरी को समाप्त करने का काम किया है।

198 शिविरों में 1.34 लाख से अधिक नागरिकों की ऐतिहासिक भागीदारी
इस अभियान के दूसरे चरण की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राज्यभर में आयोजित किए गए 198 शिविरों में कुल 1.34 लाख से अधिक लोगों ने सहभागिता की। इतनी बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि जनता का इस अभियान और राज्य सरकार की नीयत पर पूरा भरोसा है।

इन शिविरों में समाज के हर वर्ग के लोग पहुंचे। वृद्ध, महिलाएं, युवा, किसान और समाज के वंचित वर्ग के लोगों ने आगे बढ़कर इस पहल का लाभ उठाया। शिविरों में स्वास्थ्य जांच, पेंशन योजनाएं, आय और जाति प्रमाणपत्र, राजस्व संबंधी मामले और अन्य आवश्यक कागजी प्रक्रियाओं को एक ही स्थान पर निपटाने की व्यवस्था की गई थी। इतने बड़े पैमाने पर लोगों की भागीदारी ने इस अभियान को केवल एक प्रशासनिक कार्यक्रम न बनाकर एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप दे दिया है।

20 हजार से अधिक शिकायतों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण
किसी भी पारदर्शी और संवेदनशील शासन व्यवस्था की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने नागरिकों की समस्याओं को कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से सुलझाती है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के दूसरे चरण में इस दिशा में ऐतिहासिक कार्य हुआ है। आयोजित शिविरों में आई शिकायतों में से 20 हजार से अधिक शिकायतों का मौके पर ही त्वरित समाधान किया गया।

आमतौर पर देखा जाता है कि आम नागरिकों को अपनी सामान्य प्रशासनिक शिकायतों के निस्तारण के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ता है। लेकिन इस अभियान के तहत संबंधित विभागों के उच्च अधिकारी स्वयं शिविरों में उपस्थित रहे, जिससे फाइलों की पेंडेंसी समाप्त हुई और मामलों का निपटारा तुरंत कर दिया गया। जिन मामलों में जांच या अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता थी, उनके लिए भी समय सीमा तय की गई, जिससे जनता में प्रशासन के प्रति एक नया विश्वास पैदा हुआ है।

81 हजार से अधिक लाभार्थियों को मिला योजनाओं का सीधा फायदा
सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब उनका लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी बाधा के पहुंचे। इस विशेष अभियान के अंतर्गत 81 हजार से अधिक नागरिकों को सीधे तौर पर विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया।

शिविरों के दौरान कई पात्र लोगों के नए राशन कार्ड बनाए गए, वृद्धावस्था और विधवा पेंशन के आवेदन स्वीकृत किए गए, किसान सम्मान निधि और अन्य कृषि संबंधी सहायता योजनाओं से जोड़ा गया। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य कार्ड, श्रम कल्याण योजनाओं के पंजीकरण और स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी और स्वीकृति भी एक ही छत के नीचे प्रदान की गई। 81 हजार से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलना इस बात का प्रमाण है कि यह अभियान कागजी दावों से आगे बढ़कर धरातल पर काम कर रहा है।

शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और घर-घर तक सेवा वितरण
‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ की यह पूरी अवधारणा राज्य में प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुई है। जब प्रशासनिक मशीनरी स्वयं गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले जाकर लोगों की बात सुनती है, तो बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म हो जाती है।

इस व्यवस्था से न केवल समय और पैसे की बचत हो रही है, बल्कि आम जनता को यह भी महसूस हो रहा है कि सरकार उनके कल्याण के लिए पूरी तरह सजग है। सेवाओं की इस सीधे दरवाजे तक पहुंच ने राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों के विकास को भी नई दिशा दी है। जनता और प्रशासन के बीच जो संवादहीनता की स्थिति कभी-कभार बन जाती थी, उसे इस पहल ने पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।

जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता
इस अभियान के दूसरे चरण के ये परिणाम केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि यह उस जन-सहानुभूति और प्रशासनिक दक्षता का प्रतीक हैं जो वर्तमान सरकार का मुख्य उद्देश्य है। 198 शिविरों के माध्यम से जिस प्रकार 1.34 लाख लोगों को जोड़ा गया और हजारों समस्याओं का समाधान किया गया, उससे स्पष्ट है कि राज्य सरकार जनकल्याण के प्रति पूरी तरह समर्पित है।

यह पहल यह संदेश देती है कि राज्य सरकार का मुख्य ध्यान राज्य के हर नागरिक के जीवन को सुगम बनाना है। आने वाले समय में भी इस तरह के अभियानों के माध्यम से राज्य के अंतिम व्यक्ति तक विकास और जनसुविधाओं की पहुंच को और अधिक मजबूत किया जाएगा, ताकि हर नागरिक को अपने अधिकारों और सरकारी सुविधाओं का पूरा लाभ आसानी से मिल सके।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments