मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश के युवाओं को उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला लिया है। उत्तराखंड सरकार राज्य के विद्यार्थियों को विभिन्न प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने के उद्देश्य से एक नई व्यवस्था लागू करने जा रही है।
इस व्यवस्था के अंतर्गत राज्य के छात्र-छात्राओं को अब महंगी कोचिंग कक्षाओं में भारी-भरकम फीस चुकाने की आवश्यकता नहीं होगी। सरकार जल्द ही एक विशेष राज्यस्तरीय कार्यक्रम शुरू करने जा रही है, जिसके माध्यम से युवाओं को घर बैठे इंटरनेट के जरिए निशुल्क डिजिटल मार्गदर्शन, बेहतर अध्ययन सामग्री और ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस जनकल्याणकारी सोच को धरातल पर उतारने के लिए राज्य शासन स्तर पर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
क्या है यह नई योजना और इसका मूल उद्देश्य?
उत्तराखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे लाखों विद्यार्थियों के लिए यह कदम एक बहुत बड़ी राहत लेकर आया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य के उन मेधावी और साधनहीन युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर देना है, जो आर्थिक तंगी या भौगोलिक विषमताओं के कारण बड़े शहरों में जाकर महंगी कोचिंग संस्थाओं में पढ़ाई नहीं कर पाते हैं।
इस व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को न केवल उच्च स्तर का शैक्षणिक मार्गदर्शन दिया जाएगा, बल्कि उन्हें परीक्षाओं के बदलते स्वरूप के अनुसार अद्यतन (अपडेटेड) अध्ययन सामग्री भी ऑनलाइन माध्यम से दी जाएगी। इस योजना का सीधे तौर पर लाभ राज्य में स्थित सभी सरकारी विश्वविद्यालयों, उनसे संबद्ध महाविद्यालयों तथा राज्य सरकार द्वारा वित्तीय सहायता प्राप्त (एडेड) कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं को मिलेगा।
किन-किन प्रतियोगी परीक्षाओं की होगी ऑनलाइन तैयारी?
सरकार द्वारा तैयार किए गए इस खाके में देश और राज्य स्तर की लगभग सभी प्रमुख भर्ती परीक्षाओं को शामिल किया गया है। योजना के शुरू होने के बाद विद्यार्थी एक ही प्लेटफॉर्म के जरिए विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की गुणवत्तापूर्ण तैयारी कर सकेंगे।
सिविल सेवा और रक्षा क्षेत्र: देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा यानी यूपीएससी (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा और राज्य लोक सेवा आयोग (PCS) की परीक्षाओं के लिए विशेष मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त रक्षा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के लिए सीडीएस (CDS) जैसी कठिन परीक्षाओं की तैयारी भी इसमें शामिल है।
बैंकिंग, रेलवे और एसएससी: केंद्र और राज्य सरकार के विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों में क्लर्क, अधिकारी और तकनीकी पदों पर भर्ती के लिए आयोजित होने वाली बैंकिंग, रेलवे और एसएससी (SSC) की परीक्षाओं की तैयारी भी इस निशुल्क व्यवस्था का हिस्सा होगी।
उच्च शिक्षा और तकनीकी प्रवेश परीक्षाएं: स्नातक के बाद उच्च शिक्षा या शोध के क्षेत्र में जाने वाले छात्रों के लिए कैट (CAT), मैट (MAT), गेट (GATE), नेट (NET) और सीएसआईआर-नेट (CSIR-NET) जैसी राष्ट्रीय स्तर की कठिन प्रवेश परीक्षाओं के लिए भी ऑनलाइन मार्गदर्शन और विशेष कक्षाएं आयोजित की जाएंगी।
गैरसैंण कैबिनेट में हुई थी योजना की आधारशिला पर चर्चा
इस दूरगामी नीतिगत निर्णय की पृष्ठभूमि राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में तैयार हुई थी। गैरसैंण में आयोजित विधानसभा सत्र के दौरान जब राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई थी, तब इस योजना की आवश्यकता और इसके कानूनी व वित्तीय पहलुओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया था।
कैबिनेट स्तर पर मिली सहमति के बाद अब शासन के संबंधित विभागों को इसके क्रियान्वयन का जिम्मा सौंपा गया है। सरकार की मंशा है कि इस योजना की रूपरेखा को अंतिम रूप देकर बिना किसी विलंब के इसे पूरे प्रदेश में एक साथ लागू कर दिया जाए, ताकि चालू शैक्षणिक सत्र में ही विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलना शुरू हो सके।
महंगी प्राइवेट कोचिंग से मिलेगी बड़ी आर्थिक राहत
वर्तमान समय में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी एक बेहद खर्चीला काम बन चुका है। बड़े शहरों में कोचिंग सेंटरों की फीस हजारों से लेकर लाखों रुपये तक होती है। इसके अलावा, छात्रों को वहां रहने, खाने और आने-जाने पर भी बहुत बड़ा खर्च उठाना पड़ता है।
ग्रामीण और मध्यमवर्गीय परिवारों के माता-पिता के लिए अपने बच्चों को इतनी महंगी पढ़ाई कराना अक्सर संभव नहीं हो पाता है। सरकार की इस निशुल्क ऑनलाइन कोचिंग पहल से राज्य के लाखों परिवारों को बड़ा आर्थिक सहारा मिलेगा। अब विद्यार्थियों को अपने घर या कॉलेज परिसर में रहकर ही देश के बेहतरीन विषय विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त हो सकेगा, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होगी।
पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों के युवाओं के लिए वरदान
उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति मैदानी राज्यों से काफी भिन्न है। राज्य का एक बड़ा हिस्सा पर्वतीय है, जहां दूर-दराज के गांवों और कस्बों में रहने वाले प्रतिभाशाली युवाओं के पास गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संसाधनों की कमी रहती थी।
डिजिटल माध्यम से दी जाने वाली यह ऑनलाइन कोचिंग पहाड़ी क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए एक वरदान सिद्ध होगी।
इंटरनेट नेटवर्क के माध्यम से अब चमोली, पिथौरागढ़, उत्तरकाशी या रुद्रप्रयाग जैसे सीमांत जिलों में बैठा छात्र भी उसी गुणवत्ता की अध्ययन सामग्री और कक्षाएं ले सकेगा, जो देहरादून या दिल्ली जैसे बड़े शहरों के छात्रों को उपलब्ध होती हैं। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच शिक्षा के स्तर में मौजूद अंतर को समाप्त करने में मदद मिलेगी।
डिजिटल तकनीक से सुदृढ़ होगी प्रदेश की शिक्षा प्रणाली
इस योजना के लागू होने से राज्य का उच्च शिक्षा ढांचा भी आधुनिक और डिजिटल तकनीक से लैस होगा। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में उपलब्ध इंटरनेट व कंप्यूटर प्रयोगशालाओं का उपयोग छात्र इस कोचिंग कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कर सकेंगे।
ऑनलाइन कक्षाओं के दौरान छात्रों को लाइव संवाद करने, अपनी शंकाओं का निवारण करने और नियमित रूप से मॉक टेस्ट देने की सुविधा भी मिलेगी। इससे विद्यार्थियों में परीक्षा को लेकर आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अधिक सफलता हासिल कर सकेंगे।
योजना पर काम करने का आगे का प्लान
उत्तराखंड सरकार का शिक्षा विभाग और उच्च शिक्षा निदेशालय इस योजना को तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाने पर काम कर रहे हैं। योजना का डिजिटल पोर्टल और मोबाइल ऐप इस तरह तैयार किया जा रहा है कि विद्यार्थी आसानी से अपनी पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकें और अपनी रुचि तथा आवश्यकता के अनुसार संबंधित परीक्षा के कोर्स का चुनाव कर सकें।
जल्द ही राज्य स्तर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन कर इस महत्वाकांक्षी योजना का औपचारिक शुभारंभ किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से राज्य सरकार का प्रयास है कि उत्तराखंड का कोई भी होनहार युवा संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को पूरा करने से वंचित न रहे।


