अजय भट्ट, जो नैनीताल-उधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र से लोकप्रिय सांसद और पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री हैं, ने संसद की कार्यवाही के दौरान विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस पार्टी के नकारात्मक रवैये पर अत्यंत कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने विपक्षी खेमे के आचरण की तीखी आलोचना करते हुए आरोप लगाया है कि विपक्ष पूरी तरह से सोची-समझी रणनीति के तहत देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी संसद के काम में अड़चनें पैदा कर रहा है।
सांसद अजय भट्ट ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में संसद का स्थान सर्वोच्च है। देश की महान जनता अपने-अपने क्षेत्रों से प्रतिनिधियों को चुनकर दिल्ली की पंचायत में इसलिए भेजती है ताकि वे देश की तरक्की, आर्थिक मजबूती, सुरक्षा और आम नागरिकों के जीवन से जुड़ी जमीनी समस्याओं पर गंभीर चर्चा कर सकें। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि विपक्षी दल जनहित के इन प्राथमिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय पूरे सदन को केवल शोर-शराबे और हंगामे की भेंट चढ़ाने का काम कर रहे हैं।
सांसद अजय भट्ट का विपक्ष की कार्यशैली पर सीधा प्रहार
सांसद अजय भट्ट ने संसदीय गरिमा और लोकतंत्र की बुनियाद का जिक्र करते हुए कहा कि जब चुनाव होते हैं, तब देश का आम नागरिक बहुत सारी उम्मीदों और आकांक्षाओं के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग करता है। जनता यह सोचकर अपने सांसद को चुनती है कि उनके क्षेत्र की आवाज देश की संसद में गूंजेगी और वहां उनके हितों की रक्षा के लिए नीतियां बनाई जाएंगी।
जब भी संसद का नया सत्र शुरू होता है, तो पूरे देश के नागरिकों, युवाओं, किसानों और व्यापारियों की निगाहें इस बात पर टिकी होती हैं कि देश के विकास के लिए कौन-कौन से नए कानून बनाए जा रहे हैं। परंतु मौजूदा समय में विपक्ष का जो रवैया सामने आ रहा है, वह लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है। विपक्षी दल जनता की समस्याओं पर बात करने के बजाय केवल राजनीतिक स्वार्थ साधने के उद्देश्य से सदन के भीतर गतिरोध पैदा करने का काम कर रहे हैं। इस प्रकार के आचरण से न केवल आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं पर से भरोसा कमजोर होता है, बल्कि देश के करदाताओं के करोड़ों रुपये और संसद का बेहद मूल्यवान समय भी पूरी तरह से नष्ट हो जाता है।
सरकार की पहल और विपक्ष का बेनकाब होता दोहरा रवैया
अपनी बात को विस्तार से रखते हुए अजय भट्ट ने वर्तमान सत्र के दौरान घटे घटनाक्रमों का ब्योरा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार हमेशा से ही देश के हर महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय पर विपक्ष के साथ बैठकर खुली चर्चा करने के लिए पूरी तरह तत्पर रही है।
उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं आगे बढ़कर विपक्षी नेताओं को बार-बार आमंत्रित किया। सरकार का स्पष्ट संदेश था कि विपक्ष जिस भी मुद्दे पर बात करना चाहता है, नियमानुसार सदन के पटल पर आए और रचनात्मक चर्चा में हिस्सा ले। सरकार विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह से तैयार थी।
लेकिन इसके विपरीत, विपक्षी नेताओं ने सरकार की इस सकारात्मक पहल और आमंत्रण को सिरे से खारिज कर दिया। वे चर्चा की मेज पर आने के बजाय लगातार बहानेबाजी करते रहे और बहस से दूर भागते रहे। अजय भट्ट ने विपक्ष के इस आचरण को उनका “दोहरा चरित्र” करार दिया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष का यह दोहरा रवैया अब देश के सामने पूरी तरह से उजागर हो चुका है। एक तरफ तो विपक्षी नेता संसद परिसर के बाहर, मीडिया के कैमरों के सामने और जनता के बीच जाकर यह झूठा प्रचार करते हैं कि उन्हें सदन के अंदर बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है और सरकार उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। वहीं दूसरी तरफ, जब सरकार खुद उन्हें पटल पर आकर बहस करने का औपचारिक न्योता देती है, तो वे चर्चा का सामना करने से घबराकर सदन से भाग जाते हैं। कथनी और करनी का यह अंतर अब पूरी तरह साफ हो चुका है।
छात्र और युवा हित से जुड़े कानूनों पर भी असहयोग का आरोप
जनप्रतिनिधियों के मौलिक कर्तव्यों को रेखांकित करते हुए अजय भट्ट ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि का पहला कर्तव्य देश और समाज के हर वर्ग के हितों की रक्षा करना होता है। उन्होंने विपक्ष की संवेदनहीनता का उदाहरण देते हुए बताया कि परीक्षाओं में होने वाली धांधली और पेपर लीक जैसी कुरीतियों को रोकने के लिए सरकार संसद में एक कड़ा संशोधन विधेयक लेकर आई थी।
यह कानून देश के करोड़ों छात्रों, युवाओं और प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के भविष्य से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था। देश का युवा लंबे समय से यह मांग कर रहा था कि परीक्षाओं में पूरी पारदर्शिता लाई जाए और धांधली करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी प्रावधान किए जाएं।
अजय भट्ट ने खेद जताते हुए कहा कि इतने महत्वपूर्ण और युवाओं के भविष्य से जुड़े संवेदनशील कानून पर भी कांग्रेस और उसके सहयोगी दल बात करने को तैयार नहीं हुए। वे इस बिल पर भी बहस करने के बजाय हंगामा करते रहे। इससे यह स्पष्ट रूप से साबित होता है कि विपक्ष को देश के युवाओं और छात्रों के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। उन्हें केवल राजनीतिक हथकंडे अपनाने और सरकार के विकास कार्यों में अड़चन डालने से मतलब है।
विपक्षी साजिशों के बीच सरकार ने पास कराए 12 महत्वपूर्ण बिल
सांसद अजय भट्ट ने बताया कि विपक्षी दलों के इस तरह के गैर-जिम्मेदाराना रवैये, बहिष्कार और लगातार किए जा रहे हंगामे के बावजूद, केंद्र सरकार ने देश की प्रगति को रुकने नहीं दिया। सरकार ने देश की जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझा और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए पूरी दृढ़ता के साथ काम किया।
परिणामस्वरूप, तमाम बाधाओं के बाद भी सरकार ने इस सत्र के दौरान 12 अति महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद से सफलतापूर्वक पारित कराया। ये सभी विधेयक देश की सुरक्षा, आर्थिक स्थिति में सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास और आम नागरिकों के सामाजिक कल्याण की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक थे।
अजय भट्ट ने आरोप लगाया कि विपक्ष न केवल सदन का बहिष्कार कर रहा था, बल्कि उसकी अंदरूनी कोशिश और साजिश यह थी कि देश हित में लाए जा रहे इन जरूरी विधेयकों को किसी भी तरह से पास न होने दिया जाए ताकि सरकार का कामकाज ठप हो सके। लेकिन सरकार ने जनहित के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को साबित करते हुए विपक्ष के सभी षड्यंत्रों को नाकाम कर दिया और देश के विकास के लिए जरूरी कानूनों को लागू करने का मार्ग प्रशस्त किया।
लोकतंत्र के सर्वोच्च मंच की गरिमा और जनता का अंतिम फैसला
संसद को भारत के लोकतंत्र का सबसे पवित्र और सर्वोच्च मंदिर बताते हुए अजय भट्ट ने कहा कि संसद का एक-एक मिनट देश के लिए बहुत अनमोल है। इस मंच का इस्तेमाल देश के भविष्य को संवारने, नई नीतियां बनाने और देश को आगे ले जाने वाले विचारों पर मंथन करने के लिए होना चाहिए। इसे केवल राजनीतिक नफे-नुकसान और नारेबाजी की भेंट चढ़ाना देश की जनता के साथ अन्याय है।
उन्होंने बेहद आत्मविश्वास और कड़े शब्दों में कहा कि देश की समझदार और जागरूक जनता संसद के भीतर घट रही एक-एक गतिविधि को बहुत गौर से देख रही है। आज के समय में देश का आम नागरिक यह अच्छी तरह समझ चुका है कि कौन सी पार्टी देश के निर्माण और प्रगति के लिए दिन-रात ईमानदारी से काम कर रही है, और कौन से दल केवल काम रोकने और विकास के मार्ग में रोड़े अटकाने की नकारात्मक राजनीति में लगे हुए हैं।
अजय भट्ट ने अंत में कहा कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन होती है और वह सब कुछ देख रही है। जब भी चुनाव का सही समय आएगा, देश की जनता अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल करके इस तरह की नकारात्मक और बाधक राजनीति करने वाले विपक्ष को बहुत ही करारा और ऐतिहासिक जवाब देगी।


