लोक मिलन कार्यक्रम के तहत राजभवन के प्रांगण में जनसुनवाई का एक बेहद अहम और संवेदनशील आयोजन संपन्न हुआ। उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने प्रदेश के कोने-कोने से आए आम नागरिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों से सीधी बातचीत की। इस विशेष आयोजन में राज्य के दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों से पहुंचे लोगों ने अपनी दैनिक जीवन से जुड़ी व्यक्तिगत, सामाजिक और प्रशासनिक समस्याओं को राज्यपाल के सामने रखा।
राज्यपाल ने एक-एक फरियादी की बात को पूरे धैर्य और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने मौके पर मौजूद प्रशासनिक तंत्र को स्पष्ट संदेश दिया कि जनहित के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनावश्यक देरी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी व्यवस्था का मूल उद्देश्य ही जनता की सेवा करना है, इसलिए हर जायज समस्या का निवारण तय समय सीमा के भीतर होना अनिवार्य है।
इस विशेष जनसुनवाई के दौरान केवल समस्याएं ही नहीं सुनी गईं, बल्कि राज्य का नाम रोशन करने वाले अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर के उत्कृष्ट खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन भी किया गया। इसके साथ ही, साहित्य जगत से जुड़ी हस्तियों ने भी अपनी नव-प्रकाशित कृतियों के साथ राजभवन में उपस्थिति दर्ज कराई। यह आयोजन एक ऐसा मंच बनकर उभरा, जहां प्रशासनिक जवाबदेही, खेल भावना का सम्मान और साहित्यिक प्रतिभा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
प्रदेश के छह प्रमुख जनपदों से पहुंचे फरियादी
लोक मिलन कार्यक्रम में राज्य के अलग-अलग दुर्गम और सुदूर जनपदों से आए नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस दौरान उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार और देहरादून जैसे छह प्रमुख जिलों से आए १४ नागरिकों ने राज्यपाल के समक्ष अपनी बात रखी। इन फरियादियों में कई पूर्व सैनिक और उनके आश्रित भी शामिल थे, जो अपनी लंबे समय से लंबित मांगों और समस्याओं को लेकर पहुंचे थे।
आवेदकों ने जो मुद्दे उठाए, वे मुख्यतः प्रशासनिक प्रक्रियाओं, भूमि विवादों और रोजगार के अवसरों से जुड़े हुए थे। जनसुनवाई में प्रमुख रूप से उठाए गए विषयों को निम्नलिखित श्रेणियों में देखा जा सकता है:
भूमि एवं राजस्व संबंधी मामले: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जमीनों से जुड़े विवाद, सीमांकन की समस्याएं और स्वामित्व से संबंधित अड़चनों को राज्यपाल के सामने प्रमुखता से रखा गया।
रोजगार के अवसर और सहायता: स्थानीय युवाओं और पूर्व सैनिकों के परिजनों के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने तथा स्वरोजगार योजनाओं में सहयोग से जुड़े आवेदन प्रस्तुत किए गए।
ग्रामीण विकास कार्य: विभिन्न पंचायतों और गांवों में ढांचागत विकास, रास्तों के निर्माण, जल निकासी और सामुदायिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सहयोग की मांग की गई।
व्यक्तिगत व सामाजिक समस्याएं: पारिवारिक पेंशन, पेंशन संबंधी विसंगतियों, चिकित्सा सहायता और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े व्यक्तिगत मामलों पर भी राज्यपाल का ध्यान आकर्षित कराया गया।
अधिकारियों को समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई के सख्त आदेश
लोक मिलन कार्यक्रम में प्रस्तुत सभी १४ प्रकरणों का संज्ञान लेते हुए राज्यपाल ने बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शासन और प्रशासन की असली कसौटी यह है कि वह आम आदमी की समस्या का समाधान कितनी तेजी से और कितनी संवेदनशीलता के साथ करता है। राज्यपाल ने संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राप्त सभी शिकायतों को नियमानुसार और एक तय समय सीमा के अंदर सुलझाया जाए। किसी भी फाइल को बेवजह एक टेबल से दूसरी टेबल पर घुमाने की संस्कृति पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए।
प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त और उत्तरदायी बनाने के लिए राज्यपाल ने मौके पर उपस्थित शिकायत निवारण अधिकारी को विशेष जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने निर्देश दिए कि:
त्वरित प्रेषण: जनसुनवाई में प्राप्त सभी आवेदनों को बिना किसी विलंब के संबंधित जनपदों के जिलाधिकारियों और संबंधित विभागों के उच्च अधिकारियों को तुरंत भेजा जाए।
नियमित निगरानी: केवल पत्र भेजना ही काफी नहीं होगा, बल्कि शिकायत निवारण अधिकारी खुद हर मामले की प्रगति पर नजर रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि समाधान कागजों पर न होकर धरातल पर दिखाई दे।
जवाबदेही तय करना: यदि किसी स्तर पर बिना किसी ठोस वजह के काम अटका हुआ पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारी से जवाब-तलब किया जाए।
राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि राजभवन में ऐसे आयोजनों का मूल उद्देश्य यही है कि राज्य के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी यह विश्वास रहे कि उसकी बात सुनने वाला कोई है। विशेष रूप से हमारे पूर्व सैनिक और उनके परिवार, जिन्होंने देश की रक्षा में अपना जीवन खपा दिया है, उन्हें अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पदक विजेताओं का बढ़ाया मान
लोक मिलन कार्यक्रम केवल जनसमस्याओं के समाधान तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राज्य की खेल प्रतिभाओं को सम्मानित करने का एक यादगार जरिया भी बना। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में उत्तराखंड का परचम लहराने वाले खिलाड़ियों ने राज्यपाल से मुलाकात की। राज्यपाल ने सभी विजेता खिलाड़ियों की जमकर सराहना की और उन्हें भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया।
राजभवन पहुंचे प्रमुख खिलाड़ियों और उनकी उपलब्धियों का विवरण इस प्रकार है:
मलेशिया में चमके दिव्यांग खिलाड़ी: मलेशिया की धरती पर आयोजित द्वितीय एशियन पैरा थ्रो-बॉल प्रतियोगिता में देश के लिए पदक जीतने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों ने राज्यपाल से भेंट की। राज्यपाल ने उनके अदम्य साहस, समर्पण और खेल के प्रति निष्ठा की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
काठमांडू कराटे प्रतियोगिता के विजेता: नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कराटे प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन कर पदक हासिल करने वाले खिलाड़ियों ने भी अपनी ट्रॉफी और पदक राज्यपाल को दिखाए।
शीतकालीन खेलों में उपलब्धि: विंटर गेम्स के तहत आयोजित आइस स्टॉक नेशनल गेम्स में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने वाली शालिनी राणा ने भी राज्यपाल से मुलाकात की। राज्यपाल ने उनकी इस विशिष्ट उपलब्धि पर विशेष रूप से खुशी जताई।
राज्यपाल ने सभी खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा कि राज्य के युवाओं में अपार प्रतिभा है। कठिन परिस्थितियों के बावजूद हमारे खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश और प्रदेश का नाम रोशन कर रहे हैं। सरकार और समाज का यह कर्तव्य है कि वह ऐसी प्रतिभाओं को हर संभव संबल प्रदान करे। उन्होंने सभी पदक विजेताओं के उज्ज्वल और स्वर्णिम भविष्य की कामना की।
साहित्यिक कृतियों का विमोचन और रचनाकारों का प्रोत्साहन
लोक मिलन कार्यक्रम के दौरान राज्य के बौद्धिक और साहित्यिक परिवेश की झलक भी देखने को मिली। समाज, विज्ञान और विचार जगत से जुड़े तीन प्रमुख विद्वानों ने अपने द्वारा लिखित नई पुस्तकें राज्यपाल को समर्पित कीं।
राजभवन में अपनी पुस्तकें भेंट करने वाले विद्वानों में डॉक्टर रमेश सिंह पाल, डॉक्टर कमल किशोर डुकलान और डॉक्टर हरेंद्र चौधरी शामिल रहे। इन रचनाकारों ने अपनी-अपनी पुस्तकों की मूल विषयवस्तु, शोध कार्य और उनके लेखन के पीछे छिपे मुख्य उद्देश्यों के बारे में राज्यपाल को विस्तार से जानकारी दी।
राज्यपाल ने तीनों लेखकों के साहित्यिक प्रयासों और गहन अध्ययन की दिल से सराहना की। उन्होंने कहा कि पुस्तकें समाज को नई दिशा देने का काम करती हैं। ज्ञानवर्धक और विचारात्मक साहित्य से आने वाली पीढ़ियों को सही मार्गदर्शन मिलता है। उन्होंने तीनों विद्वानों को उनके उत्कृष्ट लेखन कार्य के लिए बधाई दी और भविष्य में भी इसी प्रकार समाज हित में अपनी लेखनी चलाते रहने के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं।
संवेदनशीलता और पारदर्शी शासन की ओर बढ़ते कदम
लोक मिलन कार्यक्रम जैसी पहल यह साबित करती है कि जब संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति सीधे जनता से जुड़ता है, तो प्रशासनिक मशीनरी में एक नई ऊर्जा और जवाबदेही का संचार होता है। सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों उत्तरकाशी, अल्मोड़ा, टिहरी और पौड़ी से आए ग्रामीणों के लिए राजभवन के दरवाजे खुलना और उनकी बात का तुरंत संज्ञान लिया जाना लोकतंत्र की मूल भावना को मजबूत करता है।
जनता की शिकायतों को सुनकर उनका समयबद्ध निवारण करना, दिव्यांग और प्रतिभावान खिलाड़ियों की हौसला अफजाई करना और साहित्यकारों के बौद्धिक योगदान को सम्मान देना, ये सभी बातें मिलकर इस आयोजन को केवल एक औपचारिक बैठक से परे एक मानवीय और जीवंत संवाद का रूप देती हैं। राज्यपाल द्वारा जिलाधिकारियों और विभागीय प्रमुखों को दिए गए कड़े निर्देशों का असर अब धरातल पर दिखेगा, जिससे निश्चित रूप से आम नागरिकों को अपनी समस्याओं से राहत मिलेगी और सरकारी कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता आएगी।


