नई दिल्ली में आयोजित ‘बिजनेस टुडे @100’ के भव्य और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मेलन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य वक्ता के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस महत्वपूर्ण आयोजन के दौरान ‘उत्तराखंड: पावराइंग इंडियाज इंडस्ट्रियल ग्रोथ’ विषय पर अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने देश के शीर्ष उद्योगपतियों, नीति-निर्माताओं और कॉर्पोरेट दिग्गजों के समक्ष राज्य के भविष्य का एक स्पष्ट और मजबूत विजन रखा।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने विस्तार से बताया कि किस प्रकार उत्तराखंड आज अपनी भौगोलिक सीमाओं से आगे निकलकर देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास में एक प्रमुख साझेदार बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने राज्य में निवेश की असीम संभावनाओं, तेजी से सुदृढ़ होते परिवहन व लॉजिस्टिक्स तंत्र, पारदर्शी भर्ती प्रक्रियाओं, युवाओं के लिए तैयार हो रहे रोजगार व स्वरोजगार के अवसरों और मैदानी व पर्वतीय क्षेत्रों के समावेशी विकास मॉडल का खाका पूरे देश के सामने बेहद बेबाकी से पेश किया।
उत्तराखंड का औद्योगिक विकास आज एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां राज्य अपनी पारंपरिक पहचान से आगे बढ़कर देश के नक्शे पर एक मजबूत आर्थिक केंद्र के रूप में उभर रहा है। नई दिल्ली में आयोजित एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर राज्य की आर्थिक क्षमता, निवेश के अपार अवसरों, बुनियादी ढांचे के विस्तार और रोजगार की नई दिशा पर देश के शीर्ष उद्योगपतियों के सामने एक व्यापक और पारदर्शी रूपरेखा रखी गई। इस संबोधन का मुख्य ध्येय यह स्पष्ट करना था कि हिमालयी राज्य अब केवल पर्यटन और प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की औद्योगिक तरक्की को रफ्तार देने के लिए पूरी तरह तैयार है।
राज्य के विकास मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें मैदानी इलाकों के साथ-साथ दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। उद्योगों को धरातल पर उतारने से लेकर युवाओं को पारदर्शी रोजगार देने और पलायन को रोकने तक, सरकार ने हर मोर्चे पर अपनी रणनीतिक सोच को सामने रखा है।
निवेश का नया दौर और नीतियां: केवल समझौते नहीं, धरातल पर काम
उत्तराखंड का औद्योगिक विकास केवल कागजी वादों या एमओयू तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे वास्तविकता में बदलने के लिए जमीनी स्तर पर व्यापक बदलाव किए गए हैं। वर्ष 2023 में आयोजित वैश्विक निवेशक सम्मेलन के बाद से राज्य की औद्योगिक साख में क्रांतिकारी सुधार आया है। उस आयोजन में दुनिया के 50 से भी अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था, जिससे यह साबित हुआ कि वैश्विक निवेशक इस राज्य की संभावनाओं को लेकर बेहद गंभीर हैं।
सरकार ने निवेशकों को लुभाने के लिए पुरानी और जटिल प्रक्रियाओं को खत्म कर 30 से अधिक नई और सरल नीतियां तैयार की हैं। इन नीतिगत सुधारों का ही नतीजा है कि जो निवेश प्रस्ताव मिले थे, वे अब तेजी से जमीन पर उतर रहे हैं।
हालाँकि, एक पहाड़ी राज्य होने के नाते उत्तराखंड की अपनी भौगोलिक सीमाएं हैं। यहाँ मैदानी राज्यों की तरह विशाल भूमि बैंक एक जगह उपलब्ध होना मुश्किल है। लेकिन इस चुनौती को ध्यान में रखते हुए सरकार ने रणनीतिक संतुलन बनाया है:
हरिद्वार, देहरादून और ऊधमसिंह नगर: इन मैदानी जिलों में उद्योगों के लिए जरूरी पर्याप्त और उपयुक्त भूमि पहले से तैयार है।
सुलभ प्रक्रिया: निवेशकों को भूमि आवंटन से लेकर आवश्यक स्वीकृतियां बिना किसी प्रशासनिक देरी के उपलब्ध कराई जा रही हैं।
निवेशक-अनुकूल माहौल: सुरक्षा, शांति और बेहतर प्रशासनिक सहयोग के कारण उद्योगपति यहाँ अपने प्रोजेक्ट लगाने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं।
मजबूत कनेक्टिविटी: परिवहन के साधनों से मिली औद्योगिक रफ्तार
किसी भी राज्य में उद्योगों की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां माल की आवाजाही और लोगों का आना-जाना कितना आसान है। उत्तराखंड का औद्योगिक विकास इसी आधुनिक कनेक्टिविटी के दम पर नई ऊंचाइयों को छू रहा है।
राज्य के मुख्य औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों को देश के बड़े बाजारों से जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत किया गया है:
सड़क मार्ग का कायाकल्प: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने से राष्ट्रीय राजधानी और उत्तराखंड के बीच की दूरी और समय में भारी कमी आई है। इससे लॉजिस्टिक्स और व्यापारिक यात्रा बेहद आसान हो गई है।
हवाई सेवाओं का विस्तार: राज्य की राजधानी देहरादून से देश के तमाम प्रमुख शहरों के लिए 50 से अधिक दैनिक उड़ानें संचालित हो रही हैं, जिससे कॉर्पोरेट जगत के लिए आवागमन सुगम हुआ है।
पंतनगर का नया स्वरूप: कृषि केंद्र के रूप में पहचाना जाने वाला पंतनगर अब एक प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक hub बन चुका है। यहाँ बनने वाला नया ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा इस पूरे क्षेत्र के व्यापार को वैश्विक स्तर पर जोड़ने का काम करेगा।
पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्र: हरिद्वार पहले से ही राज्य के सबसे बड़े निर्माण और औद्योगिक केंद्रों में से एक बना हुआ है।
पर्वतीय क्षेत्रों तक विस्तार: पहाड़ के पानी का सही उपयोग
उत्तराखंड का औद्योगिक विकास तब तक अधूरा माना जाएगा जब तक इसका लाभ राज्य के दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों तक न पहुंचे। अक्सर यह देखा गया है कि उद्योग केवल मैदानी जिलों तक सिमट कर रह जाते हैं, लेकिन मौजूदा रणनीति के तहत इस अंतर को पाटने का प्रयास किया जा रहा है।
पहाड़ी जिलों में रोजगार के अवसर पैदा करने और स्थानीय संसाधनों को बाजार देने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:
नए औद्योगिक पार्कों का निर्माण: पौड़ी, अल्मोड़ा और चमोली जैसे पर्वतीय जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं।
एक जिला-दो उत्पाद योजना: इस पहल के जरिए हर जिले के दो खास स्थानीय उत्पादों को पहचान देकर उन्हें बड़े राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जा रहा है। इससे छोटे उद्यमियों, हस्तशिल्पियों और किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है।
सुशासन और नीतियां: राष्ट्रीय रैंकिंग में अग्रणी स्थान
उत्तराखंड का औद्योगिक विकास इसलिए भी खास है क्योंकि इसे नीति आयोग और अन्य राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा भी सराहा गया है। राज्य सरकार ने पारदर्शी नीतियों और बेहतर कानून-व्यवस्था के बल पर निवेशकों के भीतर भरोसा जगाया है।
सतत विकास में शीर्ष स्थान: नीति आयोग की सतत विकास लक्ष्य (SDG) रैंकिंग में उत्तराखंड ने देश भर में पहला स्थान हासिल करके अपनी प्रशासनिक क्षमता को साबित किया है।
पहाड़ी राज्यों में मिसाल: पर्वतीय और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड निवेश के लिए सबसे अनुकूल और पारदर्शी नीतिगत माहौल तैयार करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है।
युवा, रोजगार और पारदर्शी पारदर्शी प्रक्रिया: व्यवस्था में आया बड़ा बदलाव
उत्तराखंड का औद्योगिक विकास तभी टिकाऊ हो सकता है जब राज्य के युवाओं को उनकी योग्यता के अनुसार सही और पारदर्शी अवसर मिलें। अतीत में सरकारी भर्तियों में धांधली और पेपर लीक जैसी समस्याओं ने युवाओं के मनोबल को तोड़ा था, लेकिन हाल के वर्षों में इस व्यवस्था को पूरी तरह से साफ-सुथरा बना दिया गया है।
सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए नकल माफिया के खिलाफ ऐतिहासिक कदम उठाए हैं:
कड़ा नकल विरोधी कानून: देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू करके पारदर्शी परीक्षाएं आयोजित कराई जा रही हैं।
कठोर कार्रवाई: परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले लगभग 100 से अधिक आरोपियों को जेल भेजा गया, जिससे व्यवस्था में विश्वास बहाल हुआ।
रिकॉर्ड सरकारी नियुक्तियां: राज्य गठन के बाद शुरुआती दो दशकों में जहां महज 16 हजार के करीब सरकारी नौकरियां दी गई थीं, वहीं पिछले पांच वर्षों के भीतर 34 हजार से भी ज्यादा पारदर्शी नियुक्तियां की जा चुकी हैं।
स्टार्टअप और नई ऊर्जा: युवाओं को नौकरी देने वाला बनाने की पहल
उत्तराखंड का औद्योगिक विकास अब केवल सरकारी नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य का युवा अब खुद का व्यवसाय शुरू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में एक नया व्यावसायिक माहौल तैयार हुआ है जो युवाओं और महिलाओं को स्वावलंबी बना रहा है।
स्टार्टअप की संख्या में उछाल: कुछ साल पहले तक राज्य में करीब 700 पंजीकृत स्टार्टअप थे, जिनकी संख्या अब बढ़कर लगभग 2,000 के आंकड़े को पार कर चुकी है।
स्थानीय पर्यटन और स्वरोजगार: होमस्टे योजना, छोटे होटल, जड़ी-बूटी उत्पादन, जैविक खेती और बागवानी के माध्यम से हजारों युवा अपने गांव और कस्बों में ही बेहतर कमाई कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री उद्यमशाला की भूमिका: इस विशेष पहल के तहत युवाओं और महिलाओं को नया व्यवसाय शुरू करने, उत्पाद की पैकेजिंग, ब्रांडिंग, बाजार से जोड़ने और बैंक ऋण प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 13 हजार से अधिक लोग इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित होकर अपने पैरों पर खड़े हो चुके हैं।
धार्मिक और साहसिक पर्यटन: अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा स्तंभ
उत्तराखंड का औद्योगिक विकास और इसकी पूरी अर्थव्यवस्था काफी हद तक पर्यटन से जुड़ी हुई है। आस्था और कुदरत के इस केंद्र में हर साल करोड़ों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, जो स्थानीय स्तर पर व्यापार और रोजगार का सबसे बड़ा जरिया बनते हैं।
हाल के समय में पर्यटन के आंकड़ों ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं:
चारधाम यात्रा: यात्रा के शुरुआती चरण में ही 47 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के दर्शन किए।
कांवड़ मेला: वार्षिक कांवड़ यात्रा के दौरान लगभग 4.80 करोड़ श्रद्धालु राज्य में पहुंचे, जिससे स्थानीय छोटे व्यापारियों, परिवहन क्षेत्र और होटल व्यवसाय को भारी आर्थिक लाभ मिला।
सीमांत क्षेत्रों का विकास: देश के अंतिम गांवों और आदि कैलाश जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद पर्यटकों की संख्या में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है। इससे भारत की सीमाओं से लगे अत्यंत दुर्गम इलाकों में भी पर्यटन आधारित नई अर्थव्यवस्था खड़ी हो रही है।
Gen-Z और भविष्य का विजन
उत्तराखंड का औद्योगिक विकास आज के आधुनिक और तकनीक से जुड़े युवाओं की आकांक्षाओं को ध्यान में रखकर तय किया जा रहा है। आज की युवा पीढ़ी वैश्विक स्तर पर सोचती है, इंटरनेट और डिजिटल तकनीकों से पूरी तरह से जुड़ी हुई है और अपने करियर को लेकर बेहद स्पष्ट है।
सरकार का मानना है कि इस नई पीढ़ी को केवल पारम्परिक तरीकों से नहीं बांधा जा सकता। इसलिए, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सूचना प्रौद्योगिकी और नए जमाने के उद्योगों को राज्य में बढ़ावा दिया जा रहा है। ऑटोमोबाइल क्षेत्र की बड़ी कंपनियों से लेकर तकनीक और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र के दिग्गजों को उत्तराखंड में अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
एक संतुलित और समृद्ध उत्तराखंड का निर्माण
संक्षेप में कहें तो, उत्तराखंड का औद्योगिक विकास अब एक नया मोड़ ले चुका है। यह मॉडल केवल बड़े-बड़े कारखाने लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण की रक्षा, पर्वतीय क्षेत्रों का संतुलन, युवाओं को पारदर्शी अवसर, महिलाओं को स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार देने की एक समग्र सोच शामिल है।
आधुनिक बुनियादी ढांचे, मजबूत सड़क-हवाई कनेक्टिविटी, पारदर्शी शासन और निवेशकों के अनुकूल नीतियों के बल पर उत्तराखंड तेजी से देश के सबसे पसंदीदा औद्योगिक और व्यावसायिक गंतव्यों में अपनी जगह पक्की कर रहा है। मैदान से लेकर पहाड़ तक फैल रहा यह विकास का दायरा राज्य को आने वाले वर्षों में देश की आर्थिक प्रगति का एक मुख्य इंजन बनाने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ा रहा है।


