SIR प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिशों के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी का देहरादून में जोरदार प्रदर्शन सामने आया है। देहरादून महानगर में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया है। मतदाता सूची के इस विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य को सुचारू रूप से चलाने और चुनावी प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए भाजपा नेताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची की शुद्धता और उसकी विश्वसनीयता सर्वोपरि मानी जाती है। जब भी निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची के पुनरीक्षण का कार्य शुरू किया जाता है, तो उसका मुख्य मकसद यही होता है कि हर योग्य नागरिक का नाम इसमें शामिल हो और किसी भी तरह की गड़बड़ी को दूर किया जाए। लेकिन जब इस प्रकार के प्रशासनिक और संवैधानिक कार्यों में राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू होता है, तो इससे न केवल सरकारी कामकाज प्रभावित होता है बल्कि आम जनता के बीच भी संशय और भ्रम की स्थिति पैदा होने लगती है। इसी पूरी स्थिति को ध्यान में रखते हुए देहरादून में यह व्यापक राजनीतिक विरोध देखने को मिला है।
SIR प्रक्रिया में बाधा और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठते सवाल
निर्वाचन आयोग की तरफ से समय-समय पर मतदाता सूचियों को अद्यतन करने के लिए विशेष अभियान चलाए जाते हैं। इस अभियान के तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, पुराने या स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हटाने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को सुधारने का काम किया जाता है। इस बार चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य को लेकर राजधानी में राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है।
भाजपा नेताओं का स्पष्ट कहना है कि निर्वाचन आयोग की यह कवायद पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष चुनाव प्रणाली की नींव तैयार करने के लिए है। किसी भी चुनाव की नींव उसकी मतदाता सूची ही होती है। अगर मतदाता सूची ही साफ-सुथरी और त्रुटिरहित नहीं होगी, तो चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ऐसे में इस महत्वपूर्ण काम को बिना किसी रुकावट के पूरा होना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
लेकिन विरोध दर्ज करा रहे नेताओं का आरोप है कि विपक्षी दल इस प्रक्रिया में लगातार अड़ंगे डालने की कोशिश कर रहे हैं। नेताओं का मानना है कि समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर किए जा रहे अनैतिक प्रदर्शनों का सीधा असर सरकारी कर्मचारियों के काम पर पड़ रहा है। जब सरकारी अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है, तो इससे पूरी व्यवस्था के काम करने की गति धीमी हो जाती है और जनता के बीच बेवजह की गलतफहमियां फैलने लगती हैं।
कलेक्ट्रेट में गूंजा विरोध
देहरादून के कलेक्ट्रेट परिसर में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं का जमावड़ा देखा गया। प्रदर्शनकारियों ने एकत्रित होकर अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया और प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखा।
इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पार्टी के महानगर अध्यक्ष ने पूरे मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मतदाता सूची का पुनरीक्षण एक संवैधानिक और विधिक कार्य है। इसे बिना किसी भय, दबाव या राजनीतिक हस्तक्षेप के पूरा किया जाना चाहिए। प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को एक औपचारिक ज्ञापन भी सौंपा।
सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि जिला प्रशासन को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पुनरीक्षण कार्य पूरी निष्पक्षता और स्वतंत्रता के साथ संपन्न हो। यदि कोई भी व्यक्ति या संगठन इस सरकारी और संवैधानिक प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास करता है, या इसमें रुकावट डालता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
पार्टी नेतृत्व ने साफ किया कि लोकतंत्र में हर नागरिक और राजनीतिक दल को अपनी बात रखने तथा अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का पूरा अधिकार है। लेकिन अधिकार का इस्तेमाल नियमों के दायरे में रहकर ही किया जाना चाहिए। यदि किसी को मतदाता सूची या किसी नाम को लेकर कोई वास्तविक शिकायत या आपत्ति है, तो उसके समाधान के लिए निर्वाचन आयोग ने एक तय प्रक्रिया और कानूनी ढांचा बनाया हुआ है। उस कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बजाय सड़कों पर प्रदर्शन करके सरकारी काम को रोकने का प्रयास करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है।
मतदाता सूची की शुद्धता और लोकतांत्रिक मर्यादा का महत्व
किसी भी जीवंत लोकतंत्र की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वहां की चुनावी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। मतदाता सूची यदि सही और अद्यतन होगी, तो चुनाव के परिणाम भी जनमत का सच्चा प्रतिनिधित्व करेंगे। यही कारण है कि विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे अभियानों को बेहद गंभीरता से लिया जाता है।
इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसका वोट बनाने का अधिकार सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है या जो उस क्षेत्र से कहीं और चले गए हैं, उनके नाम सूची से नियमानुसार हटाए जाते हैं। यह एक बेहद बारीक और जिम्मेदारी भरा काम होता है, जिसमें बीएलओ से लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तक दिन-रात मेहनत करते हैं।
इस तरह के जटिल और संवेदनशील कार्य में जब राजनीतिक दल सहयोग करने के बजाय भ्रम फैलाने का काम करते हैं, तो इससे न केवल प्रशासनिक कर्मचारियों का मनोबल गिरता है बल्कि आम जनता में भी व्यवस्था के प्रति अविश्वास की भावना पैदा होती है। इसीलिए यह जरूरी हो जाता है कि सभी पक्ष जिम्मेदारी का परिचय दें और संवैधानिक संस्थाओं को अपना काम स्वतंत्रता से करने दें।
वरिष्ठ नेताओं का यह भी कहना था कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने के लिए जरूरी है कि हर पात्र नागरिक का नाम सूची में सुरक्षित रहे और जो अपात्र नाम हैं, उन्हें कानून के तहत हटाया जाए। इसमें किसी भी प्रकार की राजनीति या दबाव की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। मतदाता सूची की साख से खिलवाड़ करना सीधे तौर पर लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला करने जैसा है।
व्यापक कार्यकर्ता भागीदारी और भावी रणनीति
कलेक्ट्रेट में आयोजित इस विशाल धरना-प्रदर्शन के दौरान संगठन के लगभग सभी प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद नेताओं ने एक स्वर में कहा कि वे मतदाता सूची की शुद्धता के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी सूरत में चुनाव प्रणाली से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
प्रदर्शन के दौरान संगठन के कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे। इनमें महानगर उपाध्यक्ष, महामंत्री, मंत्री स्तर के पदाधिकारियों से लेकर विभिन्न मंडलों के प्रतिनिधि और जन-प्रतिनिधि शामिल थे।
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं में:
राजेंद्र ढिल्लों
सुनील शर्मा
संकेत नौटियाल
ओम कक्कड़
संदीप मुखर्जी
विजेंद्र थपलियाल
मोहित शर्मा
जगदीश सेमवाल
समीर डोभाल
विनोद शर्मा
अक्षत जैन
मोतीराम
सुरेंद्र राणा
कुलदीप पंत
सुमन सिंह
सुरेंद्र घेल
बलदेव नेगी
संजीव बालियान
सुमित पांडे
आशीष शर्मा
प्रदीप रावत
पूनम शर्मा
सुषमा कुकरेती
सौरभ शर्मा
इन जनप्रतिनिधियों के साथ साथ जमीनी कार्यकर्ता भी कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में कहा कि प्रशासन को बिना किसी दबाव के अपना काम करते रहना चाहिए और आम जनता को भी इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर सहयोग करना चाहिए।
प्रदर्शन के अंत में यह संदेश पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया कि यदि आगे भी इस संवैधानिक पुनरीक्षण कार्य में किसी भी तरह का व्यवधान उत्पन्न करने की कोशिश की गई, तो पार्टी चुप नहीं बैठेगी और लोकतांत्रिक तरीकों से इसका पुरजोर विरोध करती रहेगी। प्रशासन से भी यह अपेक्षा जताई गई है कि वह निष्पक्ष चुनाव प्रणाली को बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए।


