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उत्तराखंड अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं व्यापारी: हल्द्वानी में बोले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हर समस्याओं के समाधान का दिया भरोसा

उत्तराखंड अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं व्यापारी और राज्य सरकार उनके हितों की सुरक्षा, कल्याण तथा व्यापारिक माहौल को सुगम बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। कुमाऊं मंडल की आर्थिक गतिविधियों को एक नई दिशा देने और स्थानीय उद्योगपतियों एवं व्यापारिक वर्ग से सीधा संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में एक विशाल व्यापारी संवाद सम्मेलन को संबोधित किया।

राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रमों के समापन के तुरंत बाद आईटीसी फॉर्च्यून, हल्द्वानी में इस विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि व्यापारी केवल कर एकत्र करने वाले या व्यापार करने वाले लोग नहीं हैं, बल्कि वे राज्य में रोजगार के नए अवसर पैदा करने और आर्थिक चक्र को लगातार गति देने वाले सबसे मुख्य वाहक हैं। सरकार का मूल उद्देश्य है कि राज्य के हर छोटे-छोटे दुकानदार से लेकर बड़े उद्योगपति तक को एक पूरी तरह से सुरक्षित, पारदर्शी, सुगम और सरल वातावरण मिले, ताकि वे बिना किसी भय या प्रशासनिक बाधा के अपने कारोबार का विस्तार कर सकें।

व्यापारिक समुदाय की समस्याओं और मांगों पर गहन मंथन
हल्द्वानी में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में कुमाऊं क्षेत्र के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों व्यापार मंडलों के पदाधिकारियों, उद्योगपतियों, निर्यातकों और सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों ने भाग लिया। संवाद सत्र के दौरान व्यापारियों ने पूरी खुलकर अपनी दैनिक व्यावहारिक समस्याओं, प्रशासनिक चुनौतियों और भावी अपेक्षाओं को मुख्यमंत्री के समक्ष रखा।

व्यापारिक प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुख्य मुद्दों का विस्तृत विवरण इस प्रकार है:
1. जीएसटी प्रक्रियाओं का सरलीकरण
व्यापारिक प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मांग की कि माल एवं सेवा कर से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं, नोटिसों और ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करने की प्रणाली को अत्यधिक सरल बनाया जाए। छोटे व्यापारियों के पास बड़ी तकनीकी टीम नहीं होती, इसलिए कागजी और तकनीकी पेचीदगियों के कारण उन पर अनावश्यक कानूनी बोझ पड़ता है। इसे दूर करने के लिए विशेष राहत दी जानी चाहिए।

2. मंडी शुल्क की दरों में संशोधन
राज्य की कृषि मंडियों में लगने वाले शुल्क और उसकी व्यवस्था को लेकर भी व्यापारियों ने अपनी बात रखी। उन्होंने मांग की कि स्थानीय उपज और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए मंडी शुल्क की दरों को व्यावहारिक बनाया जाए और जहां आवश्यक हो, वहां व्यापारियों को राहत दी जाए।

3. अतिक्रमण और पार्किंग व्यवस्था का समाधान
शहरों और मुख्य व्यावसायिक बाजारों में लगातार बढ़ती यातायात की समस्या पर चिंता व्यक्त की गई। व्यापारियों ने मांग की कि बाजारों से अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ ग्राहकों और व्यापारियों के लिए आधुनिक मल्टी-लेवल पार्किंग स्थलों का निर्माण किया जाए, ताकि बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही आसान हो सके।

4. लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया में तेजी
औद्योगिक और व्यावसायिक जमीनों के लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया में होने वाली देरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। उद्यमियों ने मांग की कि लीज नवीनीकरण की फाइलें महीनों तक न लटकें और इसके लिए एक पारदर्शी तथा समयबद्ध समय-सीमा तय की जाए।

5. औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
सिडकुल और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत उद्योगपतियों ने सड़कों की स्थिति, निर्बाध बिजली आपूर्ति, जल निकासी और कचरा प्रबंधन जैसी मूलभूत सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने की मांग की।

6. स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय मंच और बाजार
पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार होने वाले हस्तशिल्प, जड़ी-बूटियों और कृषि उत्पादों की बिक्री के लिए उचित विपणन (मार्केटिंग) सुविधाएं प्रदान करने और उन्हें देश के बड़े बाजारों से जोड़ने का आग्रह किया गया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी प्रतिनिधियों की बातों को न केवल बेहद ध्यानपूर्वक और गंभीरता से सुना, बल्कि कार्यक्रम में ही मौजूद प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों को इन सभी बिंदुओं पर त्वरित समीक्षा करने और समाधान के लिए प्रभावी योजना बनाने के कड़े निर्देश दिए।

संकट काल में व्यापारियों की भूमिका और सामाजिक उत्तरदायित्व
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने वैश्विक महामारी जैसे बेहद कठिन समय को याद करते हुए व्यापारी समाज की निस्वार्थ सेवा और साहस की मुक्तकंठ से सराहना की।
उन्होंने कहा कि जब पूरा देश और दुनिया कोरोना जैसी गंभीर बीमारी के डर से अपने-अपने घरों में बंद थी, उस दौर में भी उत्तराखंड के किराना, दवा, सब्जी और परचून के छोटे-छोटे व्यापारियों ने अपनी जान की परवाह किए बिना आम नागरिकों तक जरूरी राशन और आवश्यक दवाइयां पहुंचाईं।

मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि व्यापारी वर्ग केवल अपना व्यापार चलाने या लाभ कमाने का काम नहीं करता, बल्कि जब भी देश या प्रदेश के सामने कोई संकट या विपदा आती है, तो व्यापारी समाज सबसे आगे बढ़कर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करता है। हमारे व्यापारी वास्तव में “ब्रांड इंडिया” के सच्चे प्रतिनिधि और मजबूत स्तंभ हैं। जब कोई व्यापारी ईमानदारी से अपना व्यवसाय बढ़ाता है, तो वह केवल अपना परिवार नहीं चलाता, बल्कि पूरे राज्य की विकास यात्रा में एक प्रमुख हिस्सेदार बनता है।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में बदला देश का व्यापारिक माहौल
देश में व्यापार और उद्यमिता के क्षेत्र में आए बदलावों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में देश के भीतर व्यापार, नवाचार और नए उद्योगों को लेकर एक नया विश्वास पैदा हुआ है।
केंद्र और राज्य सरकार का निरंतर यह प्रयास रहा है कि देश में एक ऐसा वातावरण तैयार किया जाए, जहां एक साधारण और सामान्य परिवार का युवा भी केवल नौकरी की तलाश करने वाला न बने, बल्कि खुद का उद्योग स्थापित करके सैकड़ों अन्य लोगों को नौकरी देने वाला बने।

आज देश की सोच में यह बड़ा बदलाव आया है कि युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरकारें अब उद्योगों के लिए किसी रुकावट या बाधा के रूप में नहीं, बल्कि एक सहयोगी, मार्गदर्शक और साझेदार के रूप में काम कर रही हैं। जब राज्य में नए उद्योग लगेंगे, तो रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे और इससे राज्य की संपूर्ण आर्थिकी को एक नई ऊर्जा मिलेगी।

राज्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डिजिटल पारदर्शी व्यवस्था
उत्तराखंड में व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियों को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए ठोस कदमों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी और कागजरहित बनाने का काम तेजी से जारी है।

राज्य सरकार द्वारा व्यापार को आसान बनाने के लिए किए गए प्रमुख सुधार:
सिंगल विंडो पोर्टल की मजबूती: निवेशकों और नए व्यवसायियों को अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम को बेहद आधुनिक और मजबूत बनाया गया है।

206 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन: वर्तमान समय में उत्तराखंड सरकार के 26 मुख्य विभागों की 206 से अधिक व्यावसायिक सेवाएं, अनुमतियां और स्वीकृतियां सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से पूरी तरह से ऑनलाइन उपलब्ध करा दी गई हैं।

‘निवेश मित्र’ से समस्याओं का समाधान: स्थापित उद्योगपतियों और नए निवेशकों की दैनिक समस्याओं या शिकायतों के तुरंत निपटारे के लिए ‘निवेश मित्र’ जैसी प्रभावी व्यवस्था लागू की गई है।

व्यवसाय-अनुकूल नीतियां: वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान उद्योग जगत और व्यापारियों से प्राप्त बहुमूल्य सुझावों को आधार बनाकर राज्य सरकार ने 30 से अधिक नई नीतियां बनाई हैं और पुरानी नीतियों में व्यापक सुधार किए हैं।
इन सभी प्रशासनिक सुधारों के सकारात्मक परिणाम अब धरातल पर दिखाई दे रहे हैं और राज्य में बड़े पैमाने पर औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार हो रहा है।

एमएसएमई क्षेत्र में अभूतपूर्व वृद्धि और युवाओं के लिए रोजगार
राज्य में छोटे और मध्यम उद्योगों के आंकड़ों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) ही किसी भी राज्य की आर्थिक रीढ़ होते हैं।
उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों के भीतर 29 हजार से भी अधिक नई एमएसएमई इकाइयां सफलतापूर्वक स्थापित की जा चुकी हैं। इन नई औद्योगिक इकाइयों के शुरू होने से राज्य के लगभग 1.27 लाख युवाओं को उनके अपने ही घर-राज्य में प्रत्यक्ष रोजगार प्राप्त हुआ है।

सरकार की नीति बिल्कुल स्पष्ट है कि यदि राज्य के युवाओं का पलायन रोकना है, तो गांव और कस्बों के स्तर पर ही छोटे उद्योगों का जाल बिछाना होगा। जब स्थानीय स्तर पर विनिर्माण और सेवाएं बढ़ेंगी, तो युवाओं को काम की तलाश में अपने घर से दूर नहीं जाना पड़ेगा।

पर्वतीय क्षेत्रों का संतुलित विकास और उद्योगों का विकेंद्रीकरण
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात पर विशेष बल दिया कि औद्योगिक विकास और रोजगार का लाभ केवल मैदानी जिलों जैसे हरिद्वार या ऊधमसिंह नगर तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। पहाड़ी जिलों की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार एक व्यापक रणनीति के तहत कार्य कर रही है।

1. पर्वतीय जनपदों में विशेष औद्योगिक पार्क
चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी जनपदों में स्थानीय संसाधनों, जड़ी-बूटियों और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए विशेष औद्योगिक पार्कों हेतु भूमि का चयन कर लिया गया है।

2. आधुनिक फ्लैटेड फैक्ट्रियों का निर्माण
पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में जहां भूमि की उपलब्धता कम है, वहां छोटे उद्यमियों को आधुनिक सुविधाएं प्रदान करने के लिए बहुमंजिला ‘फ्लैटेड फैक्ट्री’ का ढांचा तैयार किया जा रहा है। हरिद्वार में इस पर काम जारी है और आने वाले समय में सेलाकुई तथा पंतनगर में भी इसी प्रकार की बहुमंजिला फैक्ट्रियां विकसित करने की योजना है।

3. स्टार्टअप नीति और 200 करोड़ का फंड
राज्य के प्रतिभावान युवाओं की नई सोच और नवाचार को व्यापार में बदलने के लिए ‘उत्तराखंड स्टार्टअप नीति’ को लागू किया गया है। इसके अलावा, नए और छोटे उद्यमियों को शुरुआती पूंजी की समस्या न हो, इसके लिए 200 करोड़ रुपये के विशेष ‘वेंचर फंड’ की स्थापना की गई है।

सरकार का सपना है कि पहाड़ का युवा अपने गांव या कस्बे में रहकर ही अपनी प्रतिभा के दम पर देश और दुनिया के बड़े बाजारों के लिए अपना कारोबार खड़ा कर सके।

‘वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट’ और ‘मेक इन उत्तराखंड’ की वैश्विक पहचान
उत्तराखंड के पारंपरिक शिल्प, जैविक कृषि उत्पादों और स्थानीय कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार विशेष अभियानों पर काम कर रही है।
“वन डिस्ट्रिक्ट, टू प्रोडक्ट” (एक जिला, दो उत्पाद) जैसी दूरदर्शी योजना के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक जिले के दो विशिष्ट उत्पादों को चुनकर उन्हें बेहतर पैकेजिंग, गुणवत्ता मानक और बड़े राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जा रहा है। सरकार का मुख्य लक्ष्य है कि “मेड इन उत्तराखंड” केवल राज्य के भीतर एक पहचान न रहे, बल्कि अपनी उच्च गुणवत्ता और विश्वसनीयता के बल पर विश्व बाजार में एक स्थापित ब्रांड बने।

आज उत्तराखंड में दवा निर्माण (फार्मा), हर्बल उत्पाद, आयुष, इंजीनियरिंग उपकरण और ऑटो-कंपोनेंट के क्षेत्र बेहद तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जहां राज्य के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों के रूप में अपनी मजबूत धाक जमा चुके हैं, वहीं पहाड़ी जिले अब प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और जड़ी-बूटियों के उत्पादन का केंद्र बन रहे हैं।

सशक्त और विकसित उत्तराखंड का सामूहिक संकल्प
संवाद कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सम्मेलन में मौजूद सभी व्यापारिक संगठनों, उद्योगपतियों और युवा उद्यमियों से राज्य की विकास यात्रा में पूरी ऊर्जा के साथ जुड़ने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने व्यापारियों को पूर्ण भरोसा दिलाते हुए कहा, “आप निसंकोच होकर अपना व्यापार और उद्योग बढ़ाइए, राज्य सरकार हर मोड़ पर एक मजबूत ढाल की तरह आपके साथ खड़ी है।”

उन्होंने कहा कि जब व्यापारी तरक्की करता है, तो राज्य में राजस्व बढ़ता है, रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं और आम नागरिक का जीवन खुशहाल होता है। इसलिए सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है कि राज्य के हर व्यापारी को एक सुरक्षित माहौल, पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था, आसान प्रक्रियाएं और नए निवेश के बेहतरीन अवसर मिलें।
राज्य सरकार उत्तराखंड को देश का सबसे अग्रणी और विकसित राज्य बनाने के अपने “विकल्प रहित संकल्प” के साथ आगे बढ़ रही है। व्यापार और उद्योग जगत की सक्रिय भागीदारी से ही एक विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध उत्तराखंड का निर्माण संभव हो सकेगा, जो आने वाले समय में विकसित भारत के सपने को साकार करने में अपनी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

इस भव्य आयोजन के अवसर पर नैनीताल-ऊधमसिंह नगर क्षेत्र के सांसद अजय भट्ट, विधायक राम सिंह कैड़ा, शासन के वरिष्ठ दायित्वधारी नवीन लाल वर्मा, डॉ. अनिल कपूर ‘डब्बू’, शंकर कोरंगा, हुकुम सिंह कुंवर, व्यापार मंडल के वरिष्ठ प्रतिनिधि कश्मीरी लाल गोयल, नीरज शारदा, विनय लोहाटी, राधेराम अग्रवाल, साकेत अग्रवाल, दीपक माहेश्वरी, गौरव गोयल, जूही गोयल, नवीन अग्रवाल, राजाराम अग्रवाल सहित नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी., मुख्य विकास अधिकारी अरविन्द कुमार पाण्डे एवं उद्योग, सिडकुल तथा जीएसटी विभाग के सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का सफल संचालन अपर सचिव मनमोहन मैनाली द्वारा किया गया।

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