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भारत गौरव पुरस्कार समारोह: राज्यपाल गुरमीत सिंह ने प्रतिभाओं को सराहा, परमवीर चक्र विजेता की बहादुरी को किया नमन और कहा इन लोगों ने दिखाई असाधारण प्रतिभा।

भारत गौरव पुरस्कार 2026 का भव्य और गरिमामय आयोजन उत्तराखंड की सुरम्य राजधानी देहरादून के मुख्य सभागार में अत्यंत उत्साह और सम्मान के वातावरण में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस विशेष और ऐतिहासिक अवसर पर राज्य के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई और देश के कोने-कोने से आई 15 उत्कृष्ट प्रतिभाओं को अपने कर-कमलों से सम्मानित किया। इस भव्य समारोह का प्राथमिक उद्देश्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी, वैज्ञानिक अनुसंधान, खेल जगत, उद्योग, कला, साहित्य और समाज सेवा जैसे विविध क्षेत्रों में असाधारण, अद्वितीय और प्रेरणादायक योगदान देने वाली महान हस्तियों को एक साझा मंच प्रदान करना और उनके अतुलनीय कार्यों को सार्वजनिक रूप से सराहा जाना था।

राज्यपाल ने अपने अत्यंत ओजस्वी और विचारशील संबोधन में सभी पुरस्कार विजेताओं को बधाई दी और इस बात पर विशेष बल दिया कि किसी भी व्यक्ति की व्यक्तिगत क्षमता, ज्ञान और योग्यता की वास्तविक सार्थकता तभी सिद्ध होती है जब उसका उपयोग समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान और संपूर्ण राष्ट्र की प्रगति में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए किया जाता है। पूरे कार्यक्रम के दौरान राष्ट्र निर्माण, भावी पीढ़ी के सही मार्गदर्शन, सामाजिक संवेदनशीलता और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।

देहरादून में प्रतिभाओं का भव्य समागम और राज्यपाल का ओजस्वी संदेश
देवभूमि की पावन धरा देहरादून में आयोजित यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम देश भर की ऐसी महान प्रतिभाओं को समर्पित था जिन्होंने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में असाधारण निष्ठा, अपार धैर्य और अटूट लगन के साथ नए-नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। भारत गौरव अवॉर्ड फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस सम्मान समारोह का मुख्य ध्येय उन निस्वार्थ सेवकों, वैज्ञानिकों, कलाकारों और उद्यमियों के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना था जो बिना किसी प्रचार की इच्छा के चुपचाप समाज की बेहतरी और देश के नवनिर्माण में अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए आयोजक संस्था की इस अनूठी और सराहनीय पहल की दिल से प्रशंसा की। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि किसी भी जीवंत समाज और शक्तिशाली देश की असली पूंजी और सबसे बड़ी ताकत उसकी प्रतिभाशाली जनता होती है। जब इन प्रतिभावान व्यक्तियों को सही समय पर उनके अच्छे कार्यों के लिए सराहना और प्रोत्साहन मिलता है, तो उनके भीतर देश के लिए कुछ कर गुजरने का उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने यह बात पूरी स्पष्टता के साथ कही कि इस प्रकार के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान न केवल सम्मानित होने वाले व्यक्तियों का आत्मविश्वास और मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि पूरे समाज और विशेष रूप से युवा पीढ़ी के मन में भी कुछ नया, सकारात्मक और उत्कृष्ट करने की तीव्र इच्छा जगाते हैं।

राज्यपाल ने अपने संबोधन में सफलता के वास्तविक अर्थ को रेखांकित करते हुए एक बहुत ही विचारणीय बिंदु उठाया। उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर बड़ी-बड़ी उपलब्धियां हासिल करना, धन कमाना या पद पाना एक बात है, लेकिन यदि उस अर्जित सफलता और ज्ञान का लाभ समाज के अन्य जरूरतमंद लोगों को न मिले, तो वह सफलता अधूरी मानी जाती है। एक इंसान की मेहनत और योग्यता तभी वास्तव में सार्थक और वंदनीय बनती है जब वह अपनी क्षमताओं का उपयोग करके दूसरों के दुख-दर्द को कम कर सके और उनके जीवन में एक बड़ा और सकारात्मक परिवर्तन ला सके।

समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और भावी पीढ़ी के मार्गदर्शन का आह्वान
समारोह के दौरान राज्यपाल ने मंच से उपस्थित सभी सम्मानित हस्तियों और प्रबुद्ध नागरिकों से एक अत्यंत भावुक, गंभीर और दूरदर्शी अपील की। उन्होंने कहा कि आज इस मंच से जिन्हें भी उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया गया है, वे अपने-अपने क्षेत्रों के सिद्धहस्त विद्वान हैं और उनके पास अनुभवों का एक असीमित भंडार मौजूद है। इस बहुमूल्य अनुभव और ज्ञान को केवल अपने स्वयं के करियर या अपनी संस्था तक सीमित रखना सही नहीं होगा, बल्कि इसे आने वाली नई पीढ़ी के साथ खुलकर साझा किया जाना बेहद आवश्यक है।

राज्यपाल के अनुसार, वर्तमान समय में देश की युवा पीढ़ी के पास असीम ऊर्जा और नई सोच तो है, लेकिन उन्हें सही दिशा और अनुभवी मार्गदर्शन की सबसे ज्यादा जरूरत है। यदि देश के अनुभवी, सफल और स्थापित लोग आगे आकर युवाओं का हाथ थामें और उन्हें अपनी सीख प्रदान करें, तो भारत की इस अपार युवा शक्ति को राष्ट्र निर्माण की दिशा में पूरी तरह से मोड़ा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि हर सफल और सक्षम नागरिक का यह नैतिक और सामाजिक दायित्व है कि वह समाज के उन वर्गों के प्रति संवेदनशील रहे जो किसी कारणवश पिछड़ गए हैं या वंचित रह गए हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि हमें ऐसे वातावरण का निर्माण करना होगा जहाँ समाज के हर जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में आशा, विश्वास और अवसरों का संचार हो सके। सफल व्यक्तियों को आगे आकर ऐसे लोगों के लिए नए रास्ते बनाने होंगे ताकि वे भी विकास की मुख्यधारा से जुड़ सकें। राज्यपाल ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि जब समाज का हर वर्ग एक-दूसरे का सहारा बनेगा और ज्ञान का प्रकाश नीचे से नीचे के स्तर तक पहुंचेगा, तभी देश का समावेशी विकास संभव हो पाएगा। किसी असहाय के चेहरे पर मुस्कान लाना और उसके जीवन स्तर को सुधारना ही मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।

परमवीर चक्र विजेता जोगिंदर सिंह यादव के शौर्य और बलिदान की भव्य सराहना
इस भव्य सम्मान समारोह का सबसे ज्यादा भावुक, गर्व से भर देने वाला और प्रेरणादायक क्षण वह था जब देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान से अलंकृत परमवीर चक्र विजेता जोगिंदर सिंह यादव का राज्यपाल द्वारा विशेष उल्लेख किया गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने उनके अदम्य साहस, असाधारण बहादुरी, सर्वोच्च राष्ट्रभक्ति और मातृभूमि के प्रति उनके असीम समर्पण की खुले दिल से और बेहद ऊंचे शब्दों में प्रशंसा की।

राज्यपाल ने अपने भावुक भाषण में कहा कि भारतीय सेना में सेवा करते हुए परमवीर चक्र जैसा सर्वोच्च वीरता पदक हासिल करना कोई आम बात नहीं है। यह ऐतिहासिक सम्मान केवल उन्हीं विरले योद्धाओं को प्राप्त होता है जो युद्ध के मैदान में अपनी जान की परवाह किए बिना, अत्यंत कठिन परिस्थितियों में भी असाधारण साहस, अभूतपूर्व धैर्य और मातृभूमि के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने का सर्वोच्च जज्बा दिखाते हैं। उन्होंने कहा कि परमवीर चक्र विजेता जोगिंदर सिंह यादव का पूरा जीवन और उनका संघर्ष हर भारतीय नागरिक, विशेषकर हमारे सैनिकों और युवाओं के लिए एक अमर और प्रेरणादायक मिसाल है। देश की रक्षा के लिए उनके द्वारा दिए गए ऐतिहासिक योगदान और अतुलनीय बलिदान को यह राष्ट्र हमेशा गर्व के साथ याद रखेगा।

राज्यपाल ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से अपनी ओर से तथा पूरे प्रदेश की ओर से ढेरों शुभकामनाएं और बधाइयां दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे महान वीर योद्धाओं की मंच पर उपस्थिति ही इस पूरे कार्यक्रम की गरिमा और शोभा को कई गुना बढ़ा देती है। उन्होंने इस बात पर भी विशेष बल दिया कि जो वीर जवान हमारी सीमाओं पर चौबीसों घंटे तस्तैद रहकर देश की रक्षा करते हैं, उनका सम्मान करना और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना पूरे देश का परम कर्तव्य है। उन्हीं वीरों के त्याग और तपस्या के कारण आज सवा सौ करोड़ से अधिक देशवासी अपने घरों में पूरी तरह से सुरक्षित माहौल में चैन की सांस ले पा रहे हैं।

विकसित और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने का अटूट संकल्प
अपने संबोधन के अंतिम पड़ाव में राज्यपाल ने पुरस्कार प्राप्त करने वाले सभी विधाओं के विजेताओं के उज्ज्वल, यशस्वी और सुखद भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि आज हमारा प्यारा भारत दुनिया के मंच पर जिस तीव्र गति से विकास और समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ रहा है, उस यात्रा में देश के हर एक नागरिक का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण और बहुमूल्य है। भारत को आने वाले समय में एक पूर्णतः विकसित, समृद्ध और पूरी तरह से आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए हर क्षेत्र के विशेषज्ञों और कर्मयोगियों को अपनी पूरी क्षमता, निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम करना होगा।
उन्होंने विस्तार से समझाते हुए कहा कि आज विज्ञान, आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, खेल, उद्योग, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में दिन-रात काम कर रहे लोग वास्तव में नए और आधुनिक भारत की मजबूत नींव रख रहे हैं।

राज्यपाल ने यह आशा व्यक्त की कि आज इस ऐतिहासिक मंच से सम्मानित होकर लौट रहे सभी गुणीजन अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में और अधिक नए जोश, नई ऊर्जा और नए संकल्प के साथ काम करेंगे। वे अपने ज्ञान से दूसरों को आलोकित करेंगे और एक शक्तिशाली, स्वावलंबी और गौरवशाली भारत के निर्माण में निरंतर अपनी महत्वपूर्ण सहभागिता निभाते रहेंगे।

समारोह के समापन पर राज्यपाल ने भारत गौरव अवॉर्ड फाउंडेशन की संपूर्ण कार्यकारिणी और आयोजकों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया कि उन्होंने देश के दूर-दराज के इलाकों से ऐसी अनमोल और छिपी हुई प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें एक इतना बड़ा और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल गुणीजनों का सम्मान करते हैं, बल्कि देश की सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता, अखंडता और विकास की गति को एक नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

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