उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड योजना के अंतर्गत पौड़ी गढ़वाल जिले के चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र में चलाए जा रहे विशेष पंजीकरण एवं नवीनीकरण शिविरों ने राज्य के श्रमिक वर्ग के जीवन में एक नई उम्मीद और सुरक्षा की भावना जगाई है। कैबिनेट मंत्री और क्षेत्रीय विधायक सतपाल महाराज की सीधी देखरेख तथा मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों का मुख्य ध्येय हर जरूरतमंद, गरीब और पात्र कामगार तक सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ बिना किसी बाधा के पहुंचाना है। उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी और ग्रामीण इलाकों में दूर-दराज रहने वाले मजदूरों को अक्सर अपने अधिकार और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, जिससे उनके समय और मेहनत के पैसों दोनों का भारी नुकसान होता था।
इस गंभीर समस्या को जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से अब पूरा प्रशासनिक अमला खुद जनता के द्वार तक पहुंच रहा है। सतपुली स्थित न्याय पंचायत में आयोजित एक भव्य शिविर के दौरान इस पूरी जनहितकारी व्यवस्था की जमीनी हकीकत देखने को मिली, जहां हजारों की संख्या में स्थानीय मजदूर अपना नया पंजीकरण कराने और पुराने कार्डों का नवीनीकरण कराने के लिए उत्साहपूर्वक पहुंचे। इस पूरे अभियान का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि राज्य सरकार अब श्रमिकों को केवल मजदूरी करने वाली इकाई नहीं मान रही है, बल्कि उन्हें उत्तराखंड के नवनिर्मित ढांचे और विकास की असली ताकत के रूप में स्वीकार कर रही है।
चार दिनों में हजारों श्रमिकों का हुआ पंजीकरण
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत होने के बाद प्रदेश के श्रमिक वर्ग को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की एक मजबूत गारंटी मिलती है। अक्सर जागरूकता की कमी या फिर समय पर नवीनीकरण प्रक्रिया पूरी न हो पाने के कारण बहुत से पात्र कामगार इन बेहद जरूरी योजनाओं का लाभ उठाने से वंचित रह जाते थे। इस समस्या का समाधान करने के लिए चौबट्टाखाल विधानसभा क्षेत्र से इस विशेष अभियान का आगाज किया गया है। इस अभियान के शुरुआती चार दिनों के भीतर ही क्षेत्र के विभिन्न विकासखंडों में शिविर आयोजित करके लगभग पौने तीन हजार से भी अधिक श्रम कार्ड सफलतापूर्वक बनाए जा चुके हैं। जनसभा को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय विधायक और कैबिनेट मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक क्षेत्र के अंतिम पात्र मजदूर का कार्ड नहीं बन जाता, तब तक यह अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि शिविरों की समय सीमा बढ़ाई जाए और कागजी प्रक्रियाओं को अत्यंत सरल रखा जाए ताकि आम गरीब जनता
को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
पंजीकृत कामगारों को मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अंतर्गत पंजीकृत होने वाले मजदूरों और उनके आश्रित परिवारों को राज्य सरकार की ओर से विभिन्न प्रकार की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इस योजना के माध्यम से पंजीकृत श्रमिकों की पुत्रियों के विवाह के समय आर्थिक सहायता दी जाती है, जिससे गरीब परिवारों पर शादी-ब्याह का आर्थिक बोझ कम हो सके। इसके अतिरिक्त, श्रमिकों के बच्चों को उच्च शिक्षा और बेहतर भविष्य प्रदान करने के उद्देश्य से नियमित छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है ताकि पैसों की तंगी किसी होनहार बच्चे की पढ़ाई में रुकावट न बने। इलाज के लिए चिकित्सा सहायता, महिला श्रमिकों के लिए मातृत्व लाभ, कार्य कुशलता बढ़ाने के लिए आवश्यक औजार खरीदने हेतु वित्तीय मदद और किसी दुर्घटना या अनहोनी की स्थिति में परिवार को तत्काल सुरक्षा राशि देने जैसे कई दूरगामी प्रावधान इस योजना में शामिल हैं।
नवीनीकरण की अनिवार्यता और समयबद्ध लाभ
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत मिलने वाली तमाम सुविधाओं का निरंतर लाभ उठाने के लिए श्रम कार्ड का समय-समय पर नवीनीकरण कराया जाना बेहद आवश्यक होता है। यदि कोई मजदूर समय पर अपने कार्ड का नवीनीकरण नहीं करा पाता, तो उसका पंजीकरण तकनीकी रूप से निष्क्रया हो जाता है, जिससे मिलने वाली सरकारी सहायता रुक जाती है। इस व्यावहारिक समस्या को दूर करने के लिए ही गांव-गांव और ब्लॉक स्तर पर इन विशेष शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति केवल कागजी औपचारिकताओं या जानकारी के अभाव में अपने कानूनी अधिकारों से वंचित न रहे। इन शिविरों के माध्यम से मौके पर ही दस्तावेजों की जांच कर कार्डों का नवीनीकरण किया जा रहा है, जिससे मजदूरों का कीमती समय बच रहा है।
मनरेगा मजदूरों का इस बोर्ड में ऐतिहासिक जुड़ाव
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के दायरे को अब राज्य सरकार द्वारा और अधिक व्यापक तथा समावेशी बना दिया गया है। एक ऐतिहासिक निर्णय के तहत राज्य सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा के अंतर्गत काम करने वाले सक्रिय मजदूरों को भी इस बोर्ड की योजनाओं से जोड़ने का काम शुरू किया है। इस नई व्यवस्था से प्रदेश भर के लगभग साढ़े नौ लाख सक्रिय मनरेगा श्रमिकों को सीधा फायदा मिलने जा रहा है। नियम के अनुसार, जिन मनरेगा मजदूरों ने एक वित्तीय वर्ष के दौरान न्यूनतम नब्बे दिनों का कार्य पूरा कर लिया है, वे सभी अब बोर्ड की इन सभी सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं के पूरी तरह हकदार होंगे। इस क्रांतिकारी कदम से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लाखों गरीब परिवारों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार आने की पूरी संभावना है।
अनुपस्थित अधिकारियों पर प्रशासनिक कड़ाई
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के तहत चलाए जा रहे इन जनसेवा शिविरों में प्रशासनिक लापरवाही को बिल्कुल भी स्थान नहीं दिया जा रहा है। सतपुली में आयोजित विशाल शिविर के दौरान जब कैबिनेट मंत्री ने सीधे जनता से संवाद किया और उनकी शिकायतें सुनीं, तो शिविर में गैर-हाजिर पाए गए अधिकारियों पर गहरा असंतोष व्यक्त किया गया। मंत्री ने मंच से ही उच्च अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए कि जनहित के इतने महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही बरतने वाले और बिना पूर्व सूचना के गायब रहने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उन्होंने साफ कहा कि जब पूरी सरकार जनता के दरवाजे पर जाकर समस्याओं के निस्तारण के लिए तत्पर है, तब अधिकारियों की ढिलाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उत्तराखंड के विकास में श्रमिकों का अतुलनीय योगदान
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड का यह पूरा अभियान राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की नींव रखने वाले हर एक कामगार के पसीने का सम्मान करने की एक कोशिश है। किसी भी पहाड़ी या मैदानी राज्य के निर्माण में वहां के मजदूर वर्ग का योगदान सबसे महत्वपूर्ण होता है। कठिन से कठिन परिस्थितियों, दुर्गम पहाड़ियों और विषम मौसम के बावजूद सड़कें बनाने, पुलों का निर्माण करने और भवनों को खड़ा करने में मजदूरों का श्रम ही मुख्य भूमिका निभाता है। सरकार का मानना है कि प्रधानमंत्री के मूल मंत्र के अनुरूप श्रमिकों का कल्याण ही राज्य की वास्तविक प्रगति की पहली शर्त है। शिविर के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी यह अपील की गई कि वे अंतिम पंक्ति तक जाकर लोगों को इन सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करें।
पारदर्शी व्यवस्था और बिचौलियों का अंत
उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड द्वारा ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर लगाए जा रहे इन सीधे शिविरों का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ है कि पूरी प्रक्रिया में शत-प्रतिशत पारदर्शिता आ गई है। पहले जहां कार्ड बनवाने या नवीनीकरण कराने के लिए मजदूरों को बिचौलियों के चक्कर लगाने पड़ते थे या कई दिनों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे, वहीं अब मौके पर ही सत्यापन होने से बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है। इस सीधी और पारदर्शी व्यवस्था से राज्य के गरीब श्रमिकों का भरोसा शासन और प्रशासन पर और अधिक मजबूत हुआ है। आने वाले समय में राज्य के अन्य सभी जिलों और विधानसभा क्षेत्रों में भी इसी तर्ज पर अभियान चलाकर हर एक श्रमिक को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाएगा।


