आर्यन सिंह, देहरादून: जनगणना-2027 का दूसरा चरण देश के भविष्य के विकास, सामाजिक नीतियों के निर्माण और संसाधनों के सटीक वितरण की दिशा में एक बेहद निर्णायक पड़ाव साबित होने जा रहा है। इसी ऐतिहासिक और राष्ट्रव्यापी अभियान को सुचारु, पारदर्शी और त्रुटिरहित ढंग से पूरा करने के उद्देश्य से देहरादून नगर निगम सभागार में आयोजित किया गया दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर बुधवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, चार्ज अधिकारियों, सहायक चार्ज अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। शिविर के समापन सत्र के दौरान जिलाधिकारी सह जिला जनगणना अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए कि इस पूरे महाअभियान को तय सीमा के भीतर और शून्य-त्रुटि के साथ पूरा करना हर हाल में सुनिश्चित किया जाए।
प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को जनगणना के तकनीकी पहलुओं, फील्ड में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और डेटा संग्रह की बारीकियों से अवगत कराया गया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनगणना केवल आंकड़ों का एक समूह मात्र नहीं है, बल्कि यह देश के हर नागरिक के जीवन स्तर में सुधार लाने और दूरगामी योजनाएं तैयार करने का मूल आधार है। इस बार के अभियान में आधुनिक डिजिटल माध्यमों और नई तकनीकों का अभूतपूर्व स्तर पर इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि जमीनी स्तर पर एकत्र किए गए आंकड़े शत-प्रतिशत सटीक और भरोसेमंद हों।
विकास योजनाओं के लिए ऐतिहासिक और अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रव्यापी अभियान
किसी भी प्रगतिशील देश के लिए उसकी आबादी का सटीक आंकड़ा होना अत्यंत आवश्यक होता है। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने प्रशिक्षण समापन के दौरान सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को संबोधित करते हुए इस बात पर विशेष बल दिया कि यह कार्य राष्ट्रीय महत्व का है। उन्होंने कहा कि जनगणना का यह विशाल अभियान देश की भावी ढांचागत योजनाओं, बजट आवंटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास और रोजगार जैसे मूलभूत क्षेत्रों में संसाधनों के समुचित नियोजन का मार्ग प्रशस्त करता है।
अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारी का बोध कराते हुए यह समझाया गया कि फील्ड में किया गया उनका एक-एक कार्य देश के नीति-निर्माण को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा। इसलिए इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही या लापरवाही की गुंजाइश नहीं छोड़ी जा सकती। पूरी प्रक्रिया को अत्यंत गंभीरता, सावधानी, योजनाबद्ध रणनीति और पूर्ण निष्ठा के साथ संचालित करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। प्रशासनिक मशीनरी को निर्देशित किया गया है कि वे हर क्षेत्र की भौगोलिक और सामाजिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारी पूरी रखें।
आधुनिक डिजिटल तकनीक और चालिस प्रश्नों का व्यापक ढांचा
इस बार का यह महाअभियान अपनी नवीन कार्यशैली और डिजिटल पहुंच के कारण बेहद खास माना जा रहा है। अभियान के अंतर्गत पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ उच्चस्तरीय डिजिटल तकनीकों का व्यापक प्रयोग किया जा रहा है, जिससे आंकड़ों का संकलन न केवल तेज होगा बल्कि उसमें गलतियों की संभावना भी ना के बराबर रह जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत आम जनता से पूछे जाने वाले सवालों का एक सुव्यवस्थित ढांचा तैयार किया गया है, जिसमें कुल मिलाकर लगभग चालिस प्रश्न शामिल किए गए हैं।
ये प्रश्न नागरिकों के सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और बुनियादी जीवन स्तर से जुड़े होंगे। डेटा एकत्र करने के लिए आधुनिक मोबाइल ऐप्लिकेशन और डिजिटल फॉर्म का सहारा लिया जाएगा, जिससे सीधे मुख्य सर्वर पर जानकारी दर्ज हो सकेगी। कागजी लिखापढ़ी के बोझ को कम करते हुए डिजिटल माध्यमों को प्राथमिकता देने का मुख्य उद्देश्य यह है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे और कम से कम समय में सटीक रिपोर्ट तैयार की जा सके। तकनीकी सहायकों को यह विशेष दायित्व सौंपा गया है कि वे प्रगणकों को डिजिटल टूल्स के प्रयोग में पूरी तरह निपुण बनाएं।
स्वगणना की विशेष अवधि और जन-जागरूकता पर विशेष जोर
जनगणना की इस नई व्यवस्था में आम नागरिकों की सीधी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए स्वगणना की एक अनूठी और बेहद उपयोगी व्यवस्था की गई है। योजना के अनुसार, आगामी सोलह नवंबर से तीस नवंबर के बीच स्वगणना की अवधि निर्धारित की गई है। इस पंद्रह दिवसीय विशेष अवधि के दौरान आम नागरिक स्वयं अपने परिवार का विवरण पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं।
जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्वगणना के प्रति व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाएं। लोगों को इसके लाभ समझाए जाएं और उन्हें खुद अपना विवरण दर्ज करने के लिए प्रेरित किया जाए। यदि अधिक से अधिक लोग स्वगणना के विकल्प को चुनते हैं, तो इससे प्रशासनिक अमले का काम काफी आसान हो जाएगा। इसके बाद एक दिसंबर से शुरू होने वाले घर-घर गणना अभियान के दौरान प्रगणकों को फील्ड में जाकर सत्यापन करने में काफी सुगमता होगी और समय की भी भारी बचत होगी।
समयबद्ध और त्रुटिरहित कार्य संपादन हेतु विस्तृत मास्टर प्लान
किसी भी विशाल प्रशासनिक आयोजन की सफलता उसकी पूर्व-तैयारी और मजबूत योजना पर निर्भर करती है। इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए जिलाधिकारी ने सभी चार्ज अधिकारियों को अभी से एक विस्तृत और मजबूत मास्टर प्लान तैयार करने का आदेश दिया है। इसमें प्रत्येक क्षेत्र की मैपिंग, प्रगणकों की तैनाती, बैकअप टीमों का गठन और आपातकालीन स्थितियों से निपटने की योजनाएं शामिल हैं।
प्रशासन का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि गणना के काम में किसी भी तरह की दोहरी प्रविष्टि या कोई भी परिवार छूटने न पाए। इसके लिए जिला स्तर पर नियमित निगरानी और समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी। हर दिन की प्रगति की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। अगर किसी भी स्तर पर कोई तकनीकी या व्यावहारिक समस्या आती है, तो उसका तुरंत निपटारा करने के लिए एक त्वरित प्रतिक्रिया टीम भी सक्रिय रहेगी। समयबद्धता और शुद्धता ही इस पूरे अभियान का मूलमंत्र होगी।
वरिष्ठ अधिकारियों का मार्गदर्शन और शंकाओं का समाधान
दो दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशासन के कई वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय और अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा ने उपस्थित सभी अधिकारियों को जनगणना से जुड़ी जटिल प्रक्रियाओं, कानूनी पहलुओं और तकनीकी मापदंडों की विस्तार से जानकारी दी।
इस दौरान मैदानी स्तर पर काम करने वाले कार्मिकों के सामने आने वाली संभावित व्यावहारिक चुनौतियों पर भी खुलकर चर्चा की गई। प्रशिक्षण शिविर में तेईस चार्ज अधिकारियों, तेईस सहायक चार्ज अधिकारियों, विभिन्न क्षेत्रों के तकनीकी सहायकों तथा जनगणना से जुड़े कई अन्य प्रमुख कार्मिकों ने हिस्सा लिया। सत्र के अंतिम चरण में अधिकारियों और कर्मचारियों के मन में उठने वाली तमाम शंकाओं, तकनीकी प्रश्नों और फील्ड गाइडलाइंस से जुड़े सवालों का प्रशिक्षकों द्वारा संतोषजनक ढंग से समाधान किया गया, ताकि मैदान में उतरते समय कोई भ्रम की स्थिति न रहे।
प्रशासनिक तालमेल और विभागीय समन्वय का मजबूत ढांचा
इस विशाल आयोजन में विभिन्न विभागों के बीच आपसी सामंजस्य और बेहतर तालमेल होना बेहद जरूरी है। देहरादून में आयोजित इस समापन अवसर पर जनगणना निदेशालय और जिला प्रशासन के कई प्रमुख चेहरे उपस्थित रहे। इनमें जनगणना के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इनायत सिद्दीकी, जनगणना निदेशालय के मुख्य प्रशिक्षक प्रदीप यादव एवं कुलदीप चौहान प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को केस स्टडीज और व्यावहारिक अभ्यासों के जरिए हर नियम और मानक संचालन प्रक्रिया की बारीकियां समझाईं। उन्होंने बताया कि किस प्रकार अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों को एक टीम की तरह मिलकर काम करना है। पंचायती राज, नगर निगम, राजस्व और शिक्षा विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, ताकि दुर्गम और घनी आबादी वाले दोनों प्रकार के क्षेत्रों में गणना का काम बिना किसी रुकावट के लगातार चलता रहे।
डेटा सुरक्षा और गोपनियता के कड़े नियम
डिजिटल माध्यम से संकलित किए जा रहे इतने विशाल डेटा की सुरक्षा को लेकर भी प्रशिक्षण में विशेष सत्र आयोजित किया गया। अधिकारियों को बताया गया कि आम नागरिकों द्वारा दी गई कोई भी व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह से सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएगी। इसका उपयोग केवल और केवल सांख्यिकी तथा विकास योजनाओं के निर्माण के लिए किया जाएगा।
प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को यह सख्त हिदायत दी गई है कि वे किसी भी नागरिक का विवरण किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के साथ साझा नहीं करेंगे। डेटा हैंडलिंग के समय साइबर सुरक्षा के सभी मानकों का कड़ाई से पालन किया जाएगा। हर कर्मचारी को अपने लॉगिन क्रेडेंशियल और डिजिटल उपकरणों का इस्तेमाल पूरी सावधानी से करने के निर्देश दिए गए हैं।
भावी विकास की नींव रखेगा जनगणना का यह दूसरा चरण
देहरादून में संपन्न हुआ यह दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आगामी जनगणना-2027 के दूसरे चरण को निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और प्रभावी कदम है। जिस तरह से जिला प्रशासन ने तकनीकी, प्रशासनिक और जनजागरूकता के मोर्चों पर तैयारी की है, उससे इस विशाल राष्ट्रीय कार्य के सफलतापूर्वक पूरे होने की पूरी उम्मीद है।
आने वाले महीनों में जब फील्ड वर्क शुरू होगा, तब यह देखना महत्वपूर्ण रहेगा कि स्वगणना और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का आम जनता कितना लाभ उठाती है। प्रशासनिक मुस्तैदी और नागरिकों के सहयोग से तैयार होने वाला यह डेटा ही आने वाले दशक में हमारे शहरों, गांवों और पूरे राज्य के समग्र विकास की नई इबारत लिखेगा।


