साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड में भारतीय संस्कृति और पर्यटन व्यवस्था की सराहना की
साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड में भारतीय संस्कृति और पर्यटन व्यवस्था की सराहना की है। ब्रिटेन के विख्यात साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय से आए छात्र-छात्राओं और शिक्षाविदों के एक उच्चस्तरीय दल ने राज्य के पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई, ग्रामीण निर्माण, धर्मस्व तथा संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज से उनके देहरादून स्थित कैंप कार्यालय में शिष्टाचार मुलाकात की। सुभाष मार्ग स्थित आवास पर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में विदेशी दल ने उत्तराखंड में पर्यटन विकास के लिए संचालित की जा रही विभिन्न योजनाओं, अवस्थापना सुविधाओं और नवाचारों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर प्रतिनिधियों ने राज्य में पर्यटन को और अधिक आकर्षक बनाने तथा वैश्विक स्तर पर इसकी ब्रांडिंग को मजबूत करने के संबंध में अपने बहुमूल्य सुझाव और विचार भी साझा किए।
यह अध्ययन दौरा भारत अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया है। इस विशेष शैक्षणिक अभियान का मुख्य ध्येय अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध विरासतों, विविध सांस्कृतिक मान्यताओं और ऐतिहासिक धरोहरों से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है। देश के विभिन्न प्रमुख सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों का गहन भ्रमण करने के उपरांत यह प्रतिनिधिमंडल देवभूमि उत्तराखंड की पावन धरा पर पहुँचा। राज्य में आगमन पर पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन की ओर से विदेशी अतिथियों का भव्य और पारंपरिक शैली में आत्मीय स्वागत किया गया।
विदेशी विद्यार्थियों के लिए भारत की भव्य विरासत और जीवनशैली को समझने का अनूठा अवसर
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने बैठक के दौरान पत्रकारों और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए कहा कि साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय की यह टीम भारत की प्राचीन सभ्यता, कला और गौरवशाली सांस्कृतिक मूल्यों को करीब से देखने और समझने के उद्देश्य से यहाँ आई है। साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय संस्थान है जहाँ दुनिया भर के विभिन्न देशों से आए प्रतिभावान छात्र-छात्राएं अध्ययन करते हैं। जब ये युवा भारत के अलग-अलग राज्यों का दौरा करते हैं और यहाँ की जीवनशैली, विविधता तथा ‘अतिथि देवो भवः’ की सनातन परंपरा को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करते हैं, तो इससे पूरे विश्व में भारत की एक बेहद सकारात्मक, उज्ज्वल और प्रभावशाली छवि का निर्माण होता है।
उन्होंने आगे कहा कि उत्तराखंड का शांत वातावरण, नैसर्गिक सुंदरता और आध्यात्मिक चेतना हर किसी को सम्मोहित कर लेती है। जब यह अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल अपने-अपने देशों में वापस लौटेगा, तो यहाँ से संजोई हुई सुखद यादों और अनुभवों को दुनिया भर के लोगों के साथ साझा करेगा। इससे वैश्विक स्तर पर उत्तराखंड के पर्यटन को एक नई और मजबूत पहचान मिलेगी, जिससे भविष्य में विदेशी पर्यटकों की आवक में भारी वृद्धि देखने को मिलेगी। इस विशेष अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से भी ब्रिटेन से आए सभी युवा प्रतिनिधियों और अध्यापकों का हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन व्यक्त किया गया।
देवभूमि का ऐतिहासिक आकर्षण और ऋषिकेश के विश्वप्रसिद्ध बीटल्स आश्रम की वैश्विक प्रासंगिकता
संवाद सत्र के दौरान पर्यटन मंत्री ने उत्तराखंड के समृद्ध इतिहास, आध्यात्मिक महत्व और इसके विश्वप्रसिद्ध आकर्षणों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने ऋषिकेश स्थित ऐतिहासिक बीटल्स आश्रम का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए बताया कि किस प्रकार साठ के दशक में दुनिया का मशहूर संगीत बैंड ‘बीटल्स’ मानसिक शांति, ध्यान और आत्मिक खोज में यहाँ आया था। पवित्र गंगा नदी के तट पर और हिमालय की गोद में स्थित इस पावन स्थल पर रहकर संगीतकारों ने माँ गंगा के आशीर्वाद से अपने जीवन के सबसे लोकप्रिय 48 गीतों की रचना की थी। यह ऐतिहासिक तथ्य इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि उत्तराखंड की माटी में अद्भुत सकारात्मक ऊर्जा, शांति और रचनात्मकता का वास है जो दुनिया भर के कलाकारों को आकर्षित करती है।
इसके अतिरिक्त मंत्री ने राज्य में पर्यावरण और वन्यजीव पर्यटन के मुख्य केंद्रों की चर्चा करते हुए जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किस तरह प्राकृतिक संतुलन और वन्यजीव संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए इको-टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है। राज्य में पर्यटकों को स्थानीय ग्रामीण जीवनशैली और लोक संस्कृति से जोड़ने के लिए होमस्टे योजना को तेजी से विस्तारित किया जा रहा है। इससे न केवल पर्यटकों को घर जैसा सुरक्षित माहौल और पौष्टिक स्थानीय खान-पान मिलता है, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं। इसके साथ ही खगोल विज्ञान में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए राज्य में एस्ट्रो-टूरिज्म यानी खगोलीय पर्यटन जैसी नवीन अवधारणाओं को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उत्तराखंड की व्यवस्थाओं, आतिथ्य और स्थानीय व्यंजनों की अंतरराष्ट्रीय दल द्वारा मुक्तकंठ से प्रशंसा
अध्ययन यात्रा पर आए दल के सदस्यों ने उत्तराखंड प्रवास के दौरान मिले शानदार आतिथ्य और राज्य सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं पर अपनी गहरी प्रसन्नता प्रकट की। छात्र-छात्राओं ने कहा कि यहाँ के निवासियों का सरल व्यवहार, मनमोहक संस्कृति और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद उनके लिए जीवन भर न भूलने वाला एक अद्वितीय अनुभव है। राज्य सरकार द्वारा उनके प्रवास, सुरक्षा और भ्रमण के लिए किए गए प्रबंध बेहद व्यवस्थित, सुरक्षित और आरामदायक रहे। दल के सदस्यों ने स्वीकार किया कि उत्तराखंड केवल अपनी अनुपम प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी विशिष्ट परंपराओं, समृद्ध इतिहास और आत्मीयता के लिए भी पूरी दुनिया में अनूठा है।
इस अध्ययन यात्रा का नेतृत्व साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय के इंडिया सेंटर के प्रथम आईसीसीआर चेयर ऑफ इंडिया स्टडीज और विजिटिंग प्रोफेसर चंद्र प्रकाश कांडपाल द्वारा किया जा रहा था। उनके योग्य मार्गदर्शन में दल ने राज्य के विभिन्न विभागों के कामकाज, ग्रामीण विकास मॉडल और सांस्कृतिक धरोहरों का बारीकी से अध्ययन किया। इस महत्वपूर्ण शिष्टाचार भेंट के दौरान कार्यक्रम के समन्वयक डॉक्टर अमित कुमार तथा प्रोफेसर साबू पदम दास भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। संपूर्ण प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड सरकार के दूरदर्शी प्रयासों की सराहना करते हुए संकल्प जताया कि वे अपने-अपने देशों में जाकर देवभूमि के पर्यटन स्थलों का व्यापक प्रचार-प्रसार करेंगे।
उत्तराखंड में पर्यटन के नए आयाम और वैश्विक मानचित्र पर मजबूत होती स्थिति
उत्तराखंड सरकार वर्तमान में राज्य को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए बहुआयामी रणनीतियों पर काम कर रही है। पारंपरिक धार्मिक यात्राओं से आगे बढ़ते हुए अब एडवेंचर स्पोर्ट्स, वेलनेस टूरिज्म, योग, होमस्टे और एस्ट्रो-टूरिज्म जैसे आधुनिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढाँचे का विकास किया जा रहा है। साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय जैसे विश्वस्तरीय संस्थानों के अध्ययन दलों का लगातार उत्तराखंड आना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राज्य का पर्यटन मॉडल अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी गहरी छाप छोड़ रहा है।
यह दौरा न केवल भारत और ब्रिटेन के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और कूटनीतिक संबंधों को अधिक प्रगाढ़ बनाएगा, बल्कि उत्तराखंड के युवाओं के लिए भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद और वैश्विक अवसरों के नए द्वार खोलेगा। स्थानीय हस्तशिल्प, खान-पान, लोक कला और संस्कृति को विदेशी अतिथियों के सामने प्रस्तुत करने से राज्य की स्थानीय अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। इस प्रकार के अनुभवात्मक शिक्षण अभियानों के माध्यम से भविष्य में और अधिक विदेशी शोधकर्ता, विद्यार्थी और पर्यटक देवभूमि उत्तराखंड की ओर आकर्षित होंगे।


