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चारधाम यात्रा 2026 व्यवस्थाओं को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिए सख्त निर्देश, श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सर्वोपरी

चारधाम यात्रा 2026 व्यवस्थाएं पूरी तरह सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित हों, इसके लिए उत्तराखंड सरकार ने अपनी तैयारियां बहुत बड़े पैमाने पर तेज कर दी हैं। राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान यह पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया है कि देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और सुविधा ही राज्य सरकार की सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई इस महत्वपूर्ण और व्यापक बैठक में यात्रा से सीधे जुड़े सभी सीमावर्ती और पर्वतीय जिलों के जिलाधिकारियों, पुलिस अधीक्षकों तथा शासन के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

मुख्यमंत्री ने बैठक के दौरान यात्रा मार्गों की वर्तमान स्थिति, यातायात नियंत्रण के उपाय, स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, आपदा प्रबंधन और सुरक्षा के सभी इंतजामों की विस्तृत और गहराई से समीक्षा की। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देश दिए कि सभी संबंधित विभाग आपस में बेहतर समन्वय, संवाद और तालमेल बनाकर काम करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि अंतर-विभागीय समन्वय ऐसा होना चाहिए जिससे किसी भी संभावित आपातकालीन स्थिति में तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके। सरकार का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि देवभूमि आने वाले किसी भी श्रद्धालु को अपनी पवित्र यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा, अव्यवस्था या परेशानी का सामना न करना पड़े।

आपदा प्रबंधन, भूस्खलन नियंत्रण और सुगम यातायात व्यवस्था
उत्तराखंड के उच्च हिमाचली और संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के अचानक बदलने, अत्यधिक वर्षा होने और भूस्खलन की निरंतर संभावना को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने संवेदनशील स्थानों की लगातार और 24 घंटे निगरानी करने के कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि यात्रा मार्गों पर मौसम के बदलते मिजाज और संभावित भूस्खलन क्षेत्रों पर आधुनिक तकनीक की मदद से पैनी नजर रखी जाए। किसी भी प्राकृतिक आपदा या अचानक मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त सुरक्षा बल, आपदा प्रबंधन दल और त्वरित राहत टीमों को हमेशा मुस्तैद रखा जाए।

इसके साथ ही, यात्रा के मुख्य समय में सड़कों पर लगने वाले भारी जाम से आम जनता और श्रद्धालुओं को निजात दिलाने के लिए मुख्य मार्गों पर होल्डिंग एरिया विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन होल्डिंग क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल, विश्राम स्थल, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा जैसी सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह सुव्यवस्थित रखने को कहा गया है। यातायात प्रबंधन को इस प्रकार से संचालित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं जिससे श्रद्धालुओं के वाहनों की आवाजाही बिना किसी अनावश्यक रुकावट या देरी के सुचारू रूप से चलती रहे।

यमुनोत्री मार्ग का सुदृढ़ीकरण, बुनियादी सुधार और वैकल्पिक रास्ते का विकास
यमुनोत्री धाम में हर साल श्रद्धालुओं की बढ़ती हुई भारी भीड़ और संकरे आवागमन मार्गों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने वहां के बुनियादी ढांचे में त्वरित सुधार करने के विशेष निर्देश दिए हैं। उन्होंने यमुनोत्री धाम से लगभग 500 मीटर पहले एक नया और आधुनिक घोड़ा पड़ाव विकसित करने का निर्देश दिया है, ताकि मुख्य पैदल मार्ग पर घोड़ों और खच्चरों के जमावड़े तथा उससे होने वाले दबाव को काफी हद तक कम किया जा सके। इसके अलावा, स्थानीय स्तर पर दी जाने वाली डंडी-कंडी सेवाओं को अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने खरसाली से एक नए वैकल्पिक मार्ग का निर्माण करने और उससे संबंधित आवश्यक कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रियाओं को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा है। यमुनोत्री के मुख्य पैदल ट्रैक पर पैदल यात्रियों तथा घोड़े-खच्चरों की आवाजाही को पूरी तरह नियंत्रित और अलग-अलग रखने पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही, अति-संवेदनशील और धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण सूर्यकुंड परिसर में अत्यधिक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एक व्यावहारिक और प्रभावी भीड़ प्रबंधन योजना लागू करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

पशु कल्याण, केदारनाथ पैदल मार्ग और संवेदनशील क्षेत्रों की सतत निगरानी
चारधाम यात्रा के दौरान यात्रा मार्गों पर सेवा देने वाले घोड़े-खच्चरों के संचालन और उनके कल्याण को लेकर भी राज्य सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पशुओं के संचालन में तय किए गए सभी मापदंडों और पशु क्रूरता निवारण नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि यात्रा शुरू होने से पूर्व और यात्रा के दौरान पशुओं का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य रूप से किया जाए। जो भी संचालक नियमों का उल्लंघन करता हुआ पाया जाए या पशुओं के साथ क्रूरता करे, उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

दूसरी ओर, विश्वप्रसिद्ध केदारनाथ पैदल मार्ग के चीरबासा और भैरव ग्लेशियर जैसे अत्यधिक संवेदनशील और जोखिम भरे क्षेत्रों में विशेष सतर्कता और सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में भूस्खलन और ग्लेशियर पिघलने का खतरा बना रहता है, इसलिए यहां से गुजरने वाले श्रद्धालुओं, डंडी-कंडी और घोड़े-खच्चरों की आवाजाही पर सुरक्षा कर्मियों द्वारा कड़ी नजर रखी जाए। इन स्थानों पर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए कि किसी भी अनहोनी की स्थिति में तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया जा सके।

मार्गों का चौड़ीकरण, गड्ढामुक्त सड़कें और आधुनिक मशीनरी की तैनाती
यात्रा को सुरक्षित और आरामदेह बनाने के लिए यमुनोत्री पैदल मार्ग के चौड़ीकरण के कार्य को तेजी से पूरा करने और गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग को पूरी तरह से गड्ढामुक्त व चौड़ा करने के काम में गति लाने के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं। उत्तरकाशी जिले में स्थित स्यानाचट्टी क्षेत्र में लगातार होने वाले भूस्खलन के खतरे को देखते हुए वहां विशेष सतर्कता बरतने और निगरानी चौकियां स्थापित करने को कहा गया है।

इसके अतिरिक्त, ज्योतिर्मठ से मारवाड़ी मार्ग पर वाहनों के सुरक्षित और निर्बाध आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए यातायात पुलिस को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टान खिसकने या मलबा गिरने के कारण यदि कोई मुख्य रास्ता बंद होता है, तो उसे कम से कम समय में पुनः खोलने के लिए भारी मशीनरी जैसे जेसीबी, पोकलैंड और कुशल कार्यबल को 24 घंटे संवेदनशील स्थानों पर तैनात रखने का निर्देश दिया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, बुनियादी ढांचा और हेली सेवाओं पर प्रशासनिक सख्ती
चारधाम के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम की प्रचंड ठंड और कम ऑक्सीजन की स्थिति को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह पर्याप्त अलाव, रैन बसेरों और गर्म पानी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से श्री केदारनाथ और श्री बदरीनाथ यात्रा मार्गों पर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन मार्गों पर पर्याप्त संख्या में अनुभवी डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ, जीवन रक्षक दवाओं और मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

पहाड़ी क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क की समस्या वाले स्थानों पर आपातकालीन संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी प्रमुख दूरसंचार कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा गया है। इसके अलावा, पूरे यात्रा मार्ग पर पर्याप्त संख्या में बायो-टॉयलेट, पीने का साफ पानी, बिजली, प्रकाश व्यवस्था और शटल बस सेवाओं की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। शौचालयों की नियमित सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को औचक निरीक्षण करने के आदेश दिए गए हैं।

नागरिक उड्डयन और हेली सेवाओं के संदर्भ में सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि हेलीकॉप्टर टिकट केवल अधिकृत वेबसाइट के माध्यम से निर्धारित दरों पर ही उपलब्ध कराए जाएं। यदि कोई भी एजेंसी, एजेंट या व्यक्ति निर्धारित दर से अधिक धनराशि वसूलता है या अनधिकृत रूप से टिकट बेचता हुआ पाया जाता है, तो उसके खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कर कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए। खराब मौसम की स्थिति में हेलीकॉप्टर संचालन को तुरंत रोककर श्रद्धालुओं की जान-माल की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

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