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जनसुनवाई में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत का चौतरफा एक्शन: 5 लाख की वापसी, 7 लाख लौटाने का अल्टीमेटम और सरकारी जमीन पर सख्त रुख

जनसुनवाई में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत का बड़ा एक्शन: भू-माफियाओं, मनमाने स्कूलों और धोखाधड़ी करने वालों पर कड़ा प्रहार
जनसुनवाई में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने जनता की विभिन्न जटिल समस्याओं का सीधे मौके पर निपटारा करते हुए प्रशासनिक सतर्कता और कड़ा रुख दिखाया। कुमाऊं मंडल के नागरिकों की वर्षों से अटकी समस्याओं, जमीनी विवादों, अवैध कब्जों, स्कूल प्रबंधन की मनमानी और वित्तीय धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामलों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए उन्होंने न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाया बल्कि दोषी पक्षों को स्पष्ट चेतावनी भी जारी की।

कुमाऊं मंडल विकास आयुक्त कार्यालय में आयोजित इस जनसुनवाई का मुख्य उद्देश्य आम जनता को त्वरित न्याय दिलाना और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करना रहा। मंडलायुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व्यवस्था में लापरवाही, धोखाधड़ी और आम नागरिकों के अधिकारों का हनन करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
जनसुनवाई के दौरान जमीन की खरीद-फरोख्त में हुई गड़बड़ी से लेकर लिव-इन पार्टनर द्वारा की गई वित्तीय धोखाधड़ी तक कई चौंकाने वाले मामले सामने आए। आयुक्त ने प्रत्येक मामले की गहराई से समीक्षा की, दोनों पक्षों के साक्ष्यों की जांच की और मौके पर ही न्यायपूर्ण फैसले सुनाए। इस दौरान कई शिकायतों में तुरंत राहत प्रदान की गई, तो कुछ जटिल मामलों में जांच अधिकारियों की समितियां गठित कर निश्चित समयावधि के भीतर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

भूमि विवाद में तुरंत फैसला: पीड़ित को वापस मिले पूरे 5 लाख रुपये
जनसुनवाई में एक मुख्य मामला जमीन खरीद-फरोख्त और दाखिल-खारिज में आ रही रुकावट से जुड़ा हुआ सामने आया। बनभूलपुरा निवासी अदनान अंसारी ने नवाड़ खेड़ा, गौलापार क्षेत्र में सलीम सैफी नामक व्यक्ति से एक भूखंड क्रय किया था। पीड़ित ने इस जमीन के एवज में 5 लाख रुपये का भुगतान किया था और नियमानुसार भूखंड का पंजीकरण भी करा लिया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर विभिन्न आपत्तियों के कारण उक्त जमीन का दाखिल-खारिज नहीं हो पा रहा था, जिससे क्रेता अपनी ही खरीदी हुई जमीन का मालिकाना हक प्राप्त करने में असमर्थ था।

आयुक्त दीपक रावत ने पिछले सत्र की जनसुनवाई में प्राप्त इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर मध्यस्थता कराई। प्रशासनिक हस्तक्षेप और निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से समझौता कराया गया। पूर्व में निर्धारित शर्तों के तहत 4.50 लाख रुपये की धनराशि क्रेता को लौटा दी गई थी, जबकि बची हुई 50 हजार रुपये की अंतिम किश्त जनसुनवाई के दौरान ही वापस दिलवाई गई। अपनी पूरी धनराशि सुरक्षित वापस पाने के बाद पीड़ित अदनान अंसारी ने आयुक्त की इस त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई के प्रति आभार व्यक्त किया।

लिव-इन पार्टनरशिप में वित्तीय धोखाधड़ी: 3 महीने में 7 लाख रुपये लौटाने का सख्त आदेश
प्रशासनिक सुनवाई के दौरान एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया, जिसमें लिव-इन संबंध में रह रही एक युवती के साथ आर्थिक धोखाधड़ी की गई थी। पीड़िता ने आयुक्त के समक्ष अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि वह पिछले तीन महीनों से अपने साथी के साथ रह रही थी। इस अवधि के दौरान उसके साथी ने उससे लगभग 7 लाख रुपये मूल्य का सोना और नकद धनराशि हासिल कर ली। जब युवती ने अपनी संपत्ति और पैसे वापस मांगे, तो युवक टालमटोल करने लगा और धनराशि लौटाने से साफ इनकार कर दिया।

पीड़िता द्वारा प्रस्तुत सभी साक्ष्यों, रसीदों और लेन-देन के विवरणों की आयुक्त ने गहनता से जांच की। सुनवाई के दौरान जब आरोपी युवक से पूछताछ की गई, तो उसने युवती द्वारा प्रस्तुत सभी साक्ष्यों को पूरी तरह सही स्वीकार किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडलायुक्त दीपक रावत ने आरोपी युवक को सख्त निर्देश दिए कि वह आगामी 3 महीने के भीतर पीड़िता की पूरी 7 लाख रुपये की राशि वापस लौटाए। आयुक्त ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर धनराशि का भुगतान नहीं किया गया, तो आरोपी के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

सफाई व्यवस्था में लापरवाही पर सख्त रुख: बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू करने के निर्देश
शहरी क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था की समीक्षा करते हुए आयुक्त ने नगर निगम के कर्मचारियों की गैर-हाजिरी और कार्य में ढिलाई पर गहरा असंतोष व्यक्त किया। विभिन्न वार्डों के स्थानीय निवासियों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अधिकांश सफाई कर्मचारी अपने निर्धारित ड्यूटी क्षेत्र से गायब रहते हैं और नियमित रूप से सफाई कार्य नहीं करते हैं, जिससे मोहल्लों में गंदगी का अंबार लग रहा है।

इस नागरिक समस्या का संज्ञान लेते हुए कुमाऊं आयुक्त ने नगर आयुक्त को तत्काल प्रभाव से कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए:
बायोमेट्रिक उपस्थिति: नगर निगम के सभी वार्डों में कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए तुरंत बायोमेट्रिक मशीनें स्थापित की जाएं।
सघन निरीक्षण: नगर निगम के क्षेत्रीय पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) प्रतिदिन अपने-अपने वार्डों में जाकर कर्मचारियों की उपस्थिति का औचक निरीक्षण करें।
जवाबदेही तय करना: ड्यूटी से नदारद रहने वाले सफाई कर्मचारियों पर कार्रवाई के साथ-साथ कार्य में लापरवाही बरतने वाले पर्यवेक्षकों के खिलाफ भी सख्त दंडात्मक कदम उठाए जाएं।

तुमड़िया डैम क्षेत्र में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा: 5 दिनों के भीतर कार्रवाई की समय-सीमा तय
सरकारी जमीनों पर भू-माफियाओं के अवैध कब्जे और उनकी अवैध खरीद-फरोख्त से जुड़े एक बड़े मामले का पर्दाफाश दुर्गापुर के पूर्व प्रधान गुरमुख सिंह की शिकायत के बाद हुआ। शिकायतकर्ता ने साक्ष्यों के साथ आयुक्त को अवगत कराया कि तुमड़िया डैम के समीप स्थित ग्राम समाज की भूमि, बंजर भूमि तथा सिंचाई विभाग की अति-महत्वपूर्ण सरकारी भूमि पर स्थानीय भू-माफियाओं ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और आम जनता को गुमराह करके इस जमीन की बेधड़क खरीद-फरोख्त की जा रही है।

सरकारी संपत्ति पर इस तरह के अतिक्रमण को अत्यंत गंभीर मानते हुए आयुक्त दीपक रावत ने तुरंत अंतर-विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए:
संयुक्त निरीक्षण: उप-जिलाधिकारी, नायब तहसीलदार और संबंधित चकबंदी अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे तुरंत तुमड़िया डैम क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करें।
अतिक्रमण हटाना: सरकारी और सिंचाई विभाग की भूमि पर किए गए सभी अवैध निर्माणों और कब्जों को तुरंत ध्वस्त कर जमीन को मुक्त कराया जाए।
5 दिनों का अल्टीमेटम: आयुक्त ने पुलिस क्षेत्राधिकारी (चकबंदी) और उप-जिलाधिकारी को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे अगले 5 दिनों के भीतर पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार कर कार्यालय को प्रेषित करें।
दस्तावेजों की जांच: भूमि रिकॉर्ड और अभिलेखों की गहनता से जांच की जाए। यदि राजस्व अभिलेखों में किसी भी प्रकार की हेरफेर, धोखाधड़ी या दस्तावेजों से छेड़छाड़ पाई जाती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों और भू-माफियाओं के खिलाफ कठोर आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाए।

निजी स्कूल प्रबंधन की मनमानी पर लगाम: मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी जांच
शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शी प्रक्रियाओं के अभाव और आम अभिभावकों के उत्पीड़न की शिकायतों को भी जनसुनवाई में प्रमुखता से सुना गया। शिकायतकर्ता अनीता बिष्ट ने आयुक्त के समक्ष गुहार लगाई कि उन्होंने अपने पुत्र के कक्षा 9 में प्रवेश के लिए गुरु तेग बहादुर स्कूल में आवेदन जमा किया था। विद्यालय प्रबंधन द्वारा छात्र की प्रवेश परीक्षा ली गई, जिसमें छात्र ने सफलता प्राप्त की। हालांकि, परीक्षा उत्तीर्ण करने के बावजूद स्कूल प्रबंधन ने छात्र को दाखिला देने से इनकार कर दिया और सीटों के आवंटन में मनमानी की।

इस मामले में दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कुमाऊं आयुक्त ने स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली पर गहरा ऐतराज जताया। उन्होंने पाया कि प्रवेश प्रक्रिया में पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव था, आवेदकों से संपर्क करने के बजाय अपनी मर्जी से दाखिले किए जा रहे थे और निर्धारित नियमों की अनदेखी की जा रही थी। आयुक्त ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच का जिम्मा सौंपा। उन्होंने निर्देश दिया कि 15 दिनों के भीतर जांच प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए ताकि दोषी पाए जाने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा सके।

आम नागरिकों की विविध समस्याओं का मौके पर समाधान
उपरोक्त मुख्य मामलों के अलावा, जनसुनवाई में पहुंचे दर्जनों अन्य फरियादियों की समस्याओं का भी आयुक्त ने संवेदनशीलता से संज्ञान लिया और संबंधित अधिकारियों को तुरंत निस्तारण के आदेश दिए:
स्कूल फीस माफी: गौजाजाली निवासी नाहिदा द्वारा आर्थिक तंगी के कारण प्रस्तुत की गई स्कूल फीस माफी की अर्जी पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए गए।
वृद्ध भरण-पोषण: शांति भट्ट द्वारा अपनी बहू से भरण-पोषण भत्ता दिलवाने की गुहार पर कानून के मुताबिक त्वरित सहायता का आश्वासन दिया गया।
आर्थिक सहायता: आर्थिक रूप से कमजोर किरण जोशी की आर्थिक मदद संबंधी प्रार्थना पत्र को प्रक्रिया में लाकर राहत कोष से सहायता देने का निर्देश दिया गया।
अवैध अतिक्रमण: हिमानी त्रिपाठी की पड़ोसियों द्वारा किए गए अवैध निर्माण को हटाने संबंधी शिकायत पर स्थानीय प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करने को कहा गया।
पारिवारिक विवाद: बागजाला निवासी फरहीन द्वारा घरेलू खर्च न मिलने और राहुल लोहनी द्वारा अपनी निजी भूमि से अवैध कब्जा छुड़ाने के आवेदनों पर भी मौके पर ही कानूनी दिशा-निर्देश जारी किए गए।

निष्पक्ष न्याय और पारदर्शी प्रशासन का संदेश
कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत की इस विस्तृत जनसुनवाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड में आम जनता के अधिकारों की सुरक्षा और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। चाहे वह भू-माफियाओं द्वारा किया गया अतिक्रमण हो, शैक्षणिक संस्थानों की मनमानी हो या आम नागरिकों से जुड़ी वित्तीय धोखाधड़ी का मामला हो, हर स्तर पर जवाबदेही तय की जा रही है। जनसुनवाई के दौरान अधिकांश शिकायतों का मौके पर ही समाधान होने से फरियादियों को बड़ी राहत मिली है। आयुक्त द्वारा तय की गई समय-सीमा और जांच के सख्त आदेशों से यह संदेश साफ है कि प्रशासनिक कार्यों में ढिलाई या आम जनता के उत्पीड़न को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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