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उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह की पहल, अब विदेश में भी रोजगार पा सकेंगे राज्य के पूर्व सैनिक

उत्तराखंड में पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के मान-सम्मान, पुनर्वास और कल्याण को लेकर राज्य सरकार और राजभवन एक नए विजन के साथ आगे बढ़ रहे हैं। देवभूमि के नाम से विख्यात यह प्रदेश न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि भारत मां की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों की भूमि भी है। इस राज्य का लगभग हर दूसरा घर सेना या अर्धसैनिक बलों से किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ है। ऐसे में जब एक पूर्व सैन्य अधिकारी राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है, तो सैनिकों के प्रति संवेदना, उनकी जरूरतों की समझ और उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दृष्टि और भी ज्यादा स्पष्ट और प्रभावी हो जाती है।

हाल ही में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह और सैनिक कल्याण व संस्कृति विभाग के सचिव युगल किशोर पंत के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक इसी सोच का एक मजबूत उदाहरण है। इस मुलाकात में केवल औपचारिक चर्चा नहीं हुई, बल्कि पूर्व सैनिकों के जीवन को सुगम बनाने, उन्हें डिजिटल क्रांति से जोड़ने, वैश्विक स्तर पर रोजगार के अवसर देने और अग्निपथ योजना से बाहर आने वाले युवाओं के सुरक्षित भविष्य का खाका खींचा गया। इसके साथ ही देवभूमि को नशे की सामाजिक बुराई से बचाने के लिए संस्कृति विभाग की भूमिका पर भी विस्तार से विचार किया गया। यह पहल उत्तराखंड के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव लाने का सामर्थ्य रखती है।

पूर्व सैनिकों के लिए डिजिटल क्रांति और एकीकृत मोबाइल ऐप
आज का युग तकनीक का युग है और यदि सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक समय पर और बिना किसी जटिलता के न पहुंचे, तो योजनाओं का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए राज्यपाल ने पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लिए एक समर्पित मोबाइल ऐप विकसित करने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड के दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले पूर्व सैनिकों के लिए जिला सैनिक कल्याण कार्यालयों या सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाना एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती रहा है। उम्र के इस पड़ाव पर दूर-दराज़ के गांवों से शहरों तक का सफर तय करना शारीरिक और आर्थिक दोनों रूप से थका देने वाला होता है।

प्रस्तावित मोबाइल ऐप इस पूरी व्यवस्था को बदलकर रख देगा। इस ऐप के माध्यम से पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को राज्य तथा केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही सभी कल्याणकारी योजनाओं की सटीक और अद्यतन जानकारी एक ही स्थान पर मिल सकेगी। इतना ही नहीं, भविष्य में पात्र लाभार्थी इसी डिजिटल माध्यम से विभिन्न योजनाओं, वित्तीय सहायता, पेंशन संबंधी प्रश्नों और छात्रवृत्तियों के लिए सीधे आवेदन भी कर सकेंगे। यह कदम पारदर्शी शासन और उत्तरदायी प्रशासन की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव सिद्ध होगा, जिससे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और सही व्यक्ति तक सही समय पर सहायता पहुंच सकेगी।

सेना से नागरिक जीवन में परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण में अनुभव का उपयोग
सैनिक जब वर्षों की कठिन सेवा के बाद सेवानिवृत्त होकर नागरिक जीवन में लौटता है, तो उसके पास अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, त्वरित निर्णय लेने का कौशल और विपरीत परिस्थितियों में काम करने का समृद्ध अनुभव होता है। देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में विषम परिस्थितियों में डटे रहने वाले ये वीर केवल सेवानिवृत्त कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वे हमारे समाज की एक बहुत बड़ी बौद्धिक और व्यावहारिक पूंजी हैं। राज्यपाल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि पूर्व सैनिकों के इस अनुशासन और अनुभव को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखकर राज्य के विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाना चाहिए।

उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील और आपदा संभावित राज्य में पूर्व सैनिकों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और बचाव कार्य हों, दुर्गम क्षेत्रों में सामुदायिक विकास का काम हो, या फिर युवा पीढ़ी को अनुशासित और देशभक्त बनाने का संकल्प हो—पूर्व सैनिक हर क्षेत्र में नेतृत्व प्रदान कर सकते हैं। इसके लिए आवश्यकता इस बात की है कि उनके कौशल का सही आकलन किया जाए और उन्हें राज्य के प्रशासनिक, सामाजिक और आर्थिक ढांचे में उचित जिम्मेदारी दी जाए।

उपनल का कायाकल्प: वैश्विक मंच पर उत्तराखंड का हुनर
बैठक का एक सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी पहलू उपनल यानी उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड को एक ओवरसीज मैनपावर रिक्रूटमेंट एजेंसी के रूप में विकसित करने का निर्णय है। अब तक उपनल मुख्य रूप से राज्य के भीतर ही विभिन्न सरकारी विभागों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराने का काम करता रहा है। लेकिन इस नई सोच से उपनल का दायरा राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैलने जा रहा है।

विदेशों में विशेष रूप से मध्य पूर्व, यूरोपीय देशों और अन्य विकसित राष्ट्रों में अनुशासित, कुशल और भरोसेमंद जनशक्ति की भारी मांग रहती है। भारतीय सेना से सेवानिवृत्त सैनिक और उनके तकनीकी रूप से दक्ष आश्रित इस मांग को पूरा करने के लिए सबसे उपयुक्त प्रत्याशी माने जाते हैं। उपनल को आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय भर्ती एजेंसी का दर्जा मिलने से पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और राज्य के हुनरमंद युवाओं को बिना किसी धोखाधड़ी या निजी एजेंटों के शोषण के विदेशों में सम्मानजनक और उच्च वेतन वाले रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। यह न केवल उत्तराखंड के परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि राज्य में विदेशी मुद्रा के प्रवाह को भी बढ़ावा देगा।

अग्निवीर सेल का गठन: युवाओं के सुरक्षित भविष्य का नया आधार
भारत सरकार की अग्निपथ योजना के तहत चार साल की सेवा पूरी करके लौटने वाले युवाओं, जिन्हें अग्निवीर कहा जाता है, के पुनर्वास को लेकर उत्तराखंड सरकार बेहद गंभीर है। अग्निवीर अपनी सेवा अवधि के दौरान जिस प्रकार का कड़ा प्रशिक्षण और सैन्य अनुभव प्राप्त करते हैं, वह उन्हें असाधारण रूप से सक्षम बनाता है। हालांकि, सेवामुक्ति के बाद नागरिक जीवन में उनके समायोजन और नए करियर की शुरुआत को लेकर समाज में कई सवाल और चिंताएं थीं।
उत्तराखंड सरकार द्वारा ‘अग्निवीर सेल’ के गठन का निर्णय इन तमाम चिंताओं का एक ठोस और स्थाई समाधान है। यह समर्पित सेल केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं होगा, बल्कि अग्निवीरों के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा।

इसके मुख्य कार्यों में निम्नलिखित बिंदु शामिल होंगे:
रोजगार और प्लेसमेंट: सरकारी और निजी क्षेत्रों में अग्निवीरों के लिए आरक्षित पदों और प्राथमिकताओं के आधार पर उन्हें उपयुक्त नौकरियां दिलाना।
स्वरोजगार प्रोत्साहन: जो अग्निवीर अपना स्वयं का व्यवसाय या स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं, उन्हें बिना किसी प्रशासनिक बाधा के ऋण, सब्सिडी और तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराना।
कौशल विकास: बाजार की आधुनिक जरूरतों के अनुसार उन्हें अतिरिक्त तकनीकी प्रशिक्षण देना, ताकि वे कॉर्पोरेट जगत में भी अपनी जगह बना सकें।
शिकायत निवारण: सेवामुक्ति के बाद आने वाली किसी भी प्रकार की प्रशासनिक, कानूनी या व्यक्तिगत समस्या के समाधान के लिए एक त्वरित सिंगल-विंडो सिस्टम प्रदान करना।
यह पहल न केवल अग्निवीरों का भविष्य सुरक्षित करेगी, बल्कि राज्य के अन्य युवाओं को भी सेना में शामिल होने और देश सेवा करने के लिए प्रेरित करेगी।

देवभूमि की सांस्कृतिक चेतना और नशामुक्ति का जन-अभियान
बैठक में केवल सैन्य कल्याण ही नहीं, बल्कि राज्य के सामाजिक ताने-बाने को सुरक्षित रखने पर भी गंभीर मंथन हुआ। उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है, लेकिन वर्तमान समय में युवाओं के बीच बढ़ती नशे की लत एक चिंताजनक सामाजिक चुनौती बनकर उभरी है। संस्कृति विभाग के साथ हुई चर्चा में राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि सांस्कृतिक आयोजनों का उपयोग केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम बनाया जाना चाहिए।

देवभूमि को नशामुक्त बनाने के लिए एक व्यापक जन-अभियान चलाने की आवश्यकता है। इसमें संस्कृति विभाग के लोक कलाकारों, स्ट्रीट थिएटर और पारंपरिक सांस्कृतिक मंचों का उपयोग करके युवाओं को नशे के भयानक दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा। जब समाज के प्रबुद्ध वर्ग, पूर्व सैनिक और सांस्कृतिक मंच एक साथ मिलकर नशे के खिलाफ आवाज उठाएंगे, तो यह एक जनांदोलन का रूप ले लेगा। पूर्व सैनिकों का अनुशासन और समाज में उनका आदर इस अभियान को एक नई दिशा और गति देने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

समृद्ध और सुरक्षित उत्तराखंड का रोडमैप
राज्यपाल और सैनिक कल्याण सचिव के बीच हुई यह बैठक केवल एक सामान्य प्रशासनिक समीक्षा नहीं थी, बल्कि यह उत्तराखंड के समग्र विकास का एक नीतिगत खाका है। जब देश की रक्षा करने वाले वीरों को सम्मान, डिजिटल सुविधाएं, वैश्विक रोजगार और उनके बच्चों को सुरक्षित भविष्य मिलता है, तो संपूर्ण समाज का मनोबल बढ़ता है।

डिजिटल ऐप के जरिए पारदर्शी व्यवस्था, उपनल का वैश्विक विस्तार, अग्निवीर सेल के जरिए युवाओं का पुनर्वास और संस्कृति के माध्यम से नशामुक्त समाज का निर्माण—ये सभी बिंदु एक दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि इन निर्णयों को धरातल पर पूरी निष्ठा और समयबद्ध तरीके से लागू किया जाता है, तो उत्तराखंड न केवल अपने सैनिकों का ध्यान रखने वाला देश का अग्रणी राज्य बनेगा, बल्कि विकास, अनुशासन और सामाजिक चेतना का एक नया आदर्श प्रस्तुत करेगा।

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