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नरेंद्रनगर में 50वें सिद्धपीठ कुंजापुरी मेले का आगाज: मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कुंजापुरी मेले की स्वर्ण जयंती पर शहीदों को किया नमन, टिहरी झील और एडवेंचर टूरिज्म से संवर रहा क्षेत्र का भविष्य

नरेंद्रनगर में 50वें सिद्धपीठ श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेले का भव्य शुभारंभ उत्तराखंड के सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक परिदृश्य में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घटना है। इस स्वर्ण जयंती समारोह का उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने परंपरा के अनुसार ध्वजारोहण, दीप प्रज्वलन और मां कुंजापुरी की पूजा-अर्चना के साथ किया। शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर और अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के विशेष संयोग के साथ आयोजित यह मेला न केवल देवभूमि की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है, बल्कि यह क्षेत्र के समग्र विकास, साहसिक पर्यटन और स्थानीय आजीविका की नई दिशाओं को भी रेखांकित करता है। नरेंद्रनगर में आयोजित इस मेले ने सांस्कृतिक झांकियों, विकास प्रदर्शनियों, अमर शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि और जनकल्याणकारी घोषणाओं के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए आधुनिक विकास की नई ऊंचाइयों को छूने के लिए पूरी तरह तत्पर है।

50वें कुंजापुरी मेले का यह अवसर इसलिए भी विशेष बन जाता है क्योंकि यह केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आधी सदी के लंबे सफर, लोक परंपराओं के संरक्षण और क्षेत्रीय सशक्तिकरण का एक जीवंत प्रतीक है। मेले के परिसर में आयोजित भव्य झांकियां, स्थानीय कलाकारों द्वारा प्रस्तुत छोलिया नृत्य, गाडू घड़ा (तेल कलश) की पवित्र परंपराएं और पौराणिक आख्यानों पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां उत्तराखंड की पहचान को नए आयाम देती हैं। इसके साथ ही, सरकारी विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से जनता तक कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना यह साबित करता है कि ऐसे पारंपरिक मेले सामाजिक और आर्थिक जागरूकता फैलाने के एक सशक्त माध्यम के रूप में कार्य करते हैं।

सांस्कृतिक पुनर्जागरण और 50 वर्षों की गौरवशाली परंपरा

कुंजापुरी मेला टिहरी गढ़वाल क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित मेलों में से एक माना जाता है। सिद्धपीठ मां कुंजापुरी मंदिर का धार्मिक महत्व पूरे देश में विख्यात है। 50वें मेले का आयोजन इस बात की गवाही देता है कि विगत पांच दशकों से इस मेले ने किस प्रकार स्थानीय लोक कला, आस्था और सामाजिक समरसता को जीवित रखा है। इस वर्ष शारदीय नवरात्रि के पहले ही दिन मेले की शुरुआत होना एक अत्यंत सुखद और आध्यात्मिक संयोग माना जा रहा है।

मेले की शुरुआत के दौरान आयोजित झांकियां इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहीं। स्कूली बच्चों और स्थानीय सांस्कृतिक दलों द्वारा प्रस्तुत झांकियों में उत्तराखंड के लोक जीवन, पौराणिक कथाओं और आधुनिक भारत की उपलब्धियों का सुंदर संगम देखने को मिला। महिषासुर मर्दिनी का रूप हो या प्रह्लाद की भक्ति पर आधारित नरसिंह अवतार, प्रत्येक प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विशेष रूप से ‘भारत की गौरवशाली बेटियां’ और ‘बदलता एवं बढ़ता नरेंद्रनगर’ विषय पर निकाली गई झांकियों ने समाज को एक सकारात्मक और प्रगतिशील संदेश दिया।

अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस और नारी शक्ति का सम्मान

मेले का उद्घाटन अंतरराष्ट्रीय बालिका दिवस के दिन होना इसे और अधिक प्रासंगिक बनाता है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर राज्य और देश की बेटियों को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय दर्शन और देवभूमि की परंपरा में कन्याओं को सीधे मां भगवती का स्वरूप माना गया है। नारी शक्ति का सम्मान केवल बातों तक सीमित न रहकर राज्य की नीतियों में दिखाई देना चाहिए।

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने में महिलाओं की भूमिका हमेशा से रीढ़ की हड्डी रही है। पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि, पशुपालन, परिवार संभालने से लेकर अब होमस्टे, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार में भी महिलाएं आगे आ रही हैं। मेले में बालिका दिवस का उल्लेख इस बात का प्रतीक है कि राज्य सरकार बालिकाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

अमर शहीदों को नमन और स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों का स्मरण

नरेंद्रनगर के मेले का एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू देशभक्ति की भावना से जुड़ा हुआ है। मुख्यमंत्री ने शहीद स्थल पर पहुंचकर देश और क्षेत्र के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले अमर शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पचक्र अर्पित किए और स्वतंत्रता संग्राम शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

किसी भी समाज का विकास तब तक अधूरा माना जाता है जब तक कि वह अपने बलिदानियों के योगदान को याद न रखे। टिहरी और गढ़वाल का इतिहास जन-आंदोलनों, देशप्रेम और सैन्य सेवा के गौरव से भरा रहा है। शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित कर राज्य के युवाओं को यह संदेश दिया गया कि हमारी आज की शांति और समृद्धि उन्हीं वीरों के त्याग की बुनियाद पर टिकी है।

नीतिगत निर्णय, कठोर कानून और सुशासन का मॉडल

कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य की प्रशासनिक मजबूती और सामाजिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए कठोर और क्रांतिकारी कदमों का विस्तृत ब्योरा दिया। उत्तराखंड को एक सुरक्षित, पारदर्शी और कानून सम्मत राज्य बनाने के लिए सरकार द्वारा कई ऐतिहासिक नीतियां लागू की गई हैं।

  • समान नागरिक संहिता: राज्य में सभी नागरिकों को समान अधिकार देने और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समान नागरिक संहिता का लागू होना एक बड़ा कदम है।
  • सशक्त भू-कानून: राज्य की कृषि योग्य भूमि, स्थानीय संसाधनों और जनसांख्यिकीय संरचना की सुरक्षा के लिए कठोर भू-कानून पर बल दिया जा रहा है।
  • धर्मांतरण रोधी और दंगा रोधी कानून: अवैध धर्मांतरण को रोकने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए कानून बनाए गए हैं।
  • नकल विरोधी कानून: युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के लिए देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है।
  • अतिक्रमण मुक्त भूमि: राज्य में सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाया गया है, जिसके तहत 13 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है।

ये प्रशासनिक कदम दर्शाते हैं कि राज्य सरकार अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करने के साथ-साथ राज्य में कानून का शासन स्थापित करने के लिए पूर्णतः संकल्पबद्ध है।

टिहरी और नरेंद्रनगर का इंफ्रास्ट्रक्चर एवं पर्यटन मॉडल

पर्यटन और इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर टिहरी गढ़वाल क्षेत्र एक अभूतपूर्व बदलाव के दौर से गुजर रहा है। टिहरी झील केवल एक जल विद्युत परियोजना का जलाशय बनकर नहीं रह गई है, बल्कि यह अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के साहसिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो चुकी है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि टिहरी झील के चारों ओर रिंग रोड और नए पर्यटन मार्गों का निर्माण किया जा रहा है। इससे झील क्षेत्र में वाटर स्पोर्ट्स, पैराग्लाइडिंग, बोटिंग और एडवेंचर टूरिज्म को नया बल मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए होमस्टे योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पर्यटक उत्तराखंड की ग्रामीण संस्कृति और आतिथ्य का सीधा अनुभव कर पा रहे हैं।

इसके अलावा, नरेंद्रनगर और आसपास के क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर काम जारी है:

  1. शैक्षणिक संस्थान: नरेंद्रनगर स्थित राजकीय पॉलिटेक्निक का उच्चीकरण किया जा रहा है। इसके अलावा केंद्रीय विद्यालय, विधि महाविद्यालय और एक आधुनिक सभागार के निर्माण की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।
  2. स्वास्थ्य सेवाएं: स्थानीय निवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से गजा अस्पताल का उच्चीकरण किया जा रहा है।
  3. शहरी अवसंरचना: नरेंद्रनगर में स्वच्छता और आधुनिक नागरिक सुविधाओं के विस्तार के लिए लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत वाली सीवर लाइन परियोजना पर तेजी से कार्य चल रहा है।

ये सभी परियोजनाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि नरेंद्रनगर केवल धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र ही न रहे, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सुविधाओं के मामले में भी एक आदर्श शहर बनकर उभरे।

केदारखंड से मानसखंड तक सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का संवर्धन

उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और यहां के कण-कण में अध्यात्म बसा है। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में पूरे राज्य में धार्मिक स्थलों का पुनरोद्धार किया जा रहा है। केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम में चल रहे मास्टर प्लान के कार्यों के साथ-साथ अब केदारखंड (गढ़वाल क्षेत्र) और मानसखंड (कुमाऊं क्षेत्र) के अन्य प्रमुख मंदिरों को भी विकसित किया जा रहा है।

कुंजापुरी जैसे सिद्धपीठों का सौंदर्यीकरण और यहां सुविधाओं का विस्तार श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाएगा। जब मंदिरों का ढांचा सुदृढ़ होता है, तो धार्मिक पर्यटन बढ़ता है, जिससे स्थानीय दुकानदारों, होटल व्यवसायियों, टैक्सी चालकों और हस्तशिल्पकारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलता है।

जन-प्रतिनिधियों और अधिकारियों की साझा भागीदारी

50वें कुंजापुरी मेले के सफल शुभारंभ में शासन, प्रशासन और जन-प्रतिनिधियों की साझा सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम में उपस्थित कैबिनेट मंत्री श्री सुबोध उनियाल, मेले के संस्थापक श्री सुरेंद्र सिंह पांगती और नगर पालिका परिषद नरेंद्रनगर के अध्यक्ष श्री राजेंद्र विक्रम पंवार ने अपने विचार रखे और मेले के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया।

इसके अलावा, ब्लॉक प्रमुख नरेंद्रनगर, विभिन्न नगर पंचायतों के अध्यक्ष, मेयर ऋषिकेश, भाजपा जिलाध्यक्ष, जिला मजिस्ट्रेट टिहरी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिला मजिस्ट्रेट सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। यह व्यापक उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि यह मेला पूरे टिहरी जिले के लिए एक साझा उत्सव और गौरव का विषय है।

नरेंद्रनगर का 50वां सिद्धपीठ श्री कुंजापुरी पर्यटन एवं विकास मेला केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के गौरवशाली अतीत, जीवंत वर्तमान और उज्ज्वल भविष्य का एक मजबूत दस्तावेज है। आस्था, संस्कृति, शहीद सम्मान, नारी सशक्तिकरण और आधुनिक विकास का जो अनूठा मेल इस मेले में देखने को मिला है, वह निसंदेह राज्य के अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक अनुकरणीय उदाहरण है।

जब सांस्कृतिक परंपराओं को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुशासन का सहारा मिलता है, तो समाज का सर्वांगीण विकास होता है। कुंजापुरी मेला इसी विजन को साकार कर रहा है,जहां एक ओर मां भगवती के प्रति अटूट आस्था है, तो दूसरी ओर युवाओं के लिए रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, उत्कृष्ट शिक्षा और सुरक्षित सामाजिक वातावरण की गारंटी है। नरेंद्रनगर का यह स्वर्ण जयंती वर्ष उत्तराखंड के विकास यात्रा में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।

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