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नैनीताल जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की पहल से 1 साल में 31 हजार से ज्यादा राजस्व वादों का निस्तारण

नैनीताल जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता, जनसमस्याओं के समयबद्ध समाधान और राजस्व व्यवस्था को दुरुस्त करने की दिशा में पिछला एक साल बेहद महत्वपूर्ण और उपलब्धियों से भरा रहा है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के नेतृत्व में जिला प्रशासन ने आम जनता से सीधे जुड़े राजस्व मुकदमों, भूमि विवादों, अवैध अतिक्रमण और वर्षों से लटकी विरासत दर्ज करने की प्रक्रियाओं में अभूतपूर्व तेजी दिखाई है। किसी भी जिले की प्रशासनिक दक्षता का असली मापदंड वहां की राजस्व अदालतें, पैमाइश की गति और जनता को मिलने वाली त्वरित राहत होती है। नैनीताल जिले के आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि बीते एक वर्ष में कागजी औपचारिकताओं से परे हटकर धरातल पर ठोस कार्रवाई की गई है। लगभग 98 प्रतिशत राजस्व प्रवर्तन मामलों का निपटारा होना और हजारों परिवारों को चौपालों के जरिए बिना दफ्तरों के चक्कर काटे उनका वाजिब हक मिलना एक ऐसी प्रशासनिक पहल है, जिसने न केवल आम नागरिकों का सरकारी तंत्र पर भरोसा मजबूत किया है बल्कि सुशासन की नई मिसाल भी कायम की है।

राजस्व प्रवर्तन में ऐतिहासिक सफलता: 98 प्रतिशत मामलों का समाधान
किसी भी क्षेत्र में सुचारू विकास और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह आवश्यक है कि भूमि विवादों और राजस्व संबंधी शिकायतों का जल्द से जल्द निपटारा हो। नैनीताल जिले में 14 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2026 तक राजस्व प्रवर्तन समिति के सामने कुल 5,745 मामले दर्ज किए गए। इनमें पिछले समय से चले आ रहे 5,603 पुराने मामले और इस अवधि में आए 142 नए प्रकरण शामिल थे।

जिला प्रशासन की त्वरित कार्यशैली का ही नतीजा है कि इनमें से 5,611 प्रकरणों को पूरी तरह हल कर दिया गया। केवल 134 मामले ही लंबित रहे। इसका अर्थ यह हुआ कि दर्ज मामलों में से लगभग 97.67 प्रतिशत यानी करीब 98 प्रतिशत मामलों का निस्तारण कर दिया गया। यह आंकड़ा बताता है कि प्रशासन ने शिकायतों को दबाने या टालने के बजाय उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने की रणनीति अपनाई, जिससे लंबे समय से चले आ रहे विवादों का अंत हुआ।

अवैध अतिक्रमण और सार्वजनिक रास्तों की मुक्ति पर सख्त रुख
सरकारी भूमि, सिंचाई की नहरों, गूलों और सार्वजनिक रास्तों पर अवैध कब्जा हमेशा से आम जनता के लिए बड़ी परेशानी का कारण रहा है। अतिक्रमण के कारण जहां एक ओर विकास कार्य बाधित होते हैं, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों को आवाजाही और सिंचाई में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिलाधिकारी के कार्यकाल में अतिक्रमण के खिलाफ बिना किसी दबाव के जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि मार्गों पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण के 857 मामलों में से 856 का सफलता पूर्वक निपटारा कर दिया गया और अब केवल एक मामला प्रक्रिया में है। इसी तरह सिंचाई गूलों पर अतिक्रमण के 83 में से 78 मामले सुलझाए गए। मार्ग निर्माण में बाधा डालने वाले 71 प्रकरणों में से 70 को समाप्त कराया गया। सबसे सराहनीय बात यह रही कि सार्वजनिक रास्तों और नहरों में अतिक्रमण से जुड़े सभी 100 मामलों का शत-प्रतिशत निस्तारण दर्ज किया गया। इस कार्रवाई से आम लोगों को निर्बाध आवाजाही की सुविधा मिली है और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हुई है।

भूमि पैमाइश, मेड़ विवाद और नाम संशोधन में राहत
गांवों और कस्बों में सबसे ज्यादा आपसी रंजिशें और अदालती चक्कर भूमि की पैमाइश और सीमाओं (मेड़ विवाद) को लेकर होते हैं। छोटा सा भूमि विवाद वर्षों तक परिवारों को मुकदमों में उलझाए रखता है। नैनीताल जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से सीधे जुड़े इन संवेदनशील मामलों पर सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित किया।

इस अवधि में भूमि पैमाइश के कुल 2,491 मामले सामने आए, जिनमें से 2,398 मामलों को निपटाया गया। मेड़ विवाद और खेतों की सीमाओं से जुड़े 957 मामलों में से 945 का निस्तारण किया गया, जिससे ग्रामीणों को अदालतों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली। इसके अतिरिक्त, जमीनी नक्शों की कमियों (कुर्री नक्शा) से जुड़े 131 मामलों में से 117 और नाम संशोधन के 290 मामलों में से 284 मामलों को सही किया गया। अन्य विविध प्रकार के 765 राजस्व मामलों में से 763 का निपटारा हुआ। यह आंकड़े दिखाते हैं कि आम जनता की रोजमर्रा की जमीनी समस्याओं को सुलझाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता रही।

न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी: 85.54 प्रतिशत वादों का फैसला
अदालतों में मुकदमों का लंबित रहना न्याय प्रणाली की एक बड़ी चुनौती रहा है। लेकिन नैनीताल जिले की विभिन्न राजस्व अदालतों में बीते एक वर्ष के भीतर मामलों को तेजी से निपटाने की एक नई संस्कृति देखने को मिली। 1 अक्टूबर 2025 से 30 सितंबर 2026 तक जिले की विभिन्न राजस्व अदालतों में कुल 37,383 वाद विचाराधीन थे।

जिलाधिकारी के निर्देश पर मुकदमों की नियमित सुनवाई और समयबद्ध प्रक्रिया के चलते 31,979 वादों का निस्तारण किया गया। इस प्रकार वादों के निस्तारण की दर 85.54 प्रतिशत रही। वहीं, स्वयं जिलाधिकारी/कलेक्टर न्यायालय की बात करें तो वहां दर्ज 472 मुकदमों में से 364 का निस्तारण किया गया, जो 77.11 प्रतिशत की सफलता दर को दर्शाता है। इन मुकदमों में भूमि सुधार अधिनियम, सरकारी अनुदान अधिनियम, उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम, शस्त्र अधिनियम और अन्य महत्वपूर्ण प्रशासनिक व राजस्व कानूनों के तहत दर्ज मामले शामिल थे। मुकदमों के त्वरित निस्तारण से न केवल वादियों को समय पर न्याय मिला, बल्कि अदालतों का बोझ भी काफी हद तक कम हुआ है।

चौपाल व्यवस्था: दरवाजे पर पहुंचा प्रशासन, 34 हजार से अधिक वारिसों को मिला हक
अक्सर देखा जाता है कि परिवार के मुख्य खातेदार या बुजुर्ग की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों के नाम सरकारी अभिलेखों (खतौनी) में दर्ज कराने के लिए परिजनों को महीनों तहसीलों के चक्कर काटने पड़ते हैं। दलालों की मध्यस्थता और कागजी पेचीदगियों के कारण आम ग्रामीण परेशान होते थे। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने के लिए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने ‘गांव-गांव चौपाल’ की व्यवस्था को मजबूती से लागू किया।

14 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2026 के दौरान जिले की सभी तहसीलों में विशेष चौपालों का आयोजन किया गया। इन चौपालों के जरिए 9,783 नए विरासत प्रकरण दर्ज किए गए। कुल 18,906 खातों को अद्यतन करते हुए 34,897 वारिसों और लाभार्थियों के नाम सीधे राजस्व अभिलेखों में दर्ज किए गए। नैनीताल, हल्द्वानी, रामनगर, कालाढूंगी, लालकुआं, धारी, खनस्यूं, श्री कैंचीधाम और बेतालघाट जैसी तहसीलों में इस अभियान का बड़ा असर देखा गया। अधिकारियों ने खुद गांवों में जाकर कागजात जांचे और मौक़े पर ही विरासत दर्ज करने की प्रक्रिया को पूरा किया। इससे न केवल सरकारी रिकॉर्ड शत-प्रतिशत अपडेट हुए, बल्कि हजारों परिवारों को भूमि स्वामित्व के अधिकार और बैंक लोन जैसी सुविधाओं का रास्ता साफ हुआ।

प्रशासनिक दृष्टिकोण, चुनौतियां और भविष्य की दिशा
किसी भी पर्वतीय और मैदानी भू-भाग वाले जिले में राजस्व प्रशासन चलाना चुनौतियों से भरा होता है। एक ओर जहां हल्द्वानी और रामनगर जैसे शहरी इलाकों में भूमि की कीमतें बढ़ने से अतिक्रमण और भू-माफिया की सक्रियता रहती है, वहीं धारी, बेतालघाट और कैंचीधाम जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में पैमाइश और उत्तराधिकार के मामले अधिक जटिल होते हैं।

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के एक साल के कार्यकाल का निष्पक्ष विश्लेषण करें तो स्पष्ट होता है कि उन्होंने पारंपरिक ढर्रे को बदलकर तकनीक, पारदर्शिता और सीधे जनसंवाद का रास्ता चुना। हालांकि, अभी भी लगभग 5,400 से अधिक राजस्व वाद और सैकड़ों पैमाइश के मामले लंबित हैं, जिन्हें निपटाना आने वाले समय में बड़ी चुनौती होगी। प्रशासन का कहना है कि लंबित पड़े मामलों को भी समयबद्ध सीमा के भीतर हल करने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त बनाए रखना और चौपालों के माध्यम से जनसेवा को जारी रखना भविष्य की प्राथमिकताओं में शामिल है।

नैनीताल जिले में बीते एक वर्ष के दौरान राजस्व और प्रशासनिक तंत्र ने अपनी कार्यकुशलता की एक मजबूत छाप छोड़ी है। सरकारी आंकड़ों और धरातल की स्थिति का यह मेल दर्शाता है कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो जटिल से जटिल राजस्व प्रणाली को भी आम जनता के लिए सरल, पारदर्शी और सुलभ बनाया जा सकता है।

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