भारतीय संस्कृति और अर्थव्यवस्था की रीढ़ हमेशा से हमारा किसान और कृषि क्षेत्र रहा है। आज जब देश आत्मनिर्भरता और आधुनिकता के नए आयाम छू रहा है, तब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार की प्राथमिकता में अन्नदाताओं का कल्याण सबसे ऊपर है।
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में देहरादून में आयोजित ‘पीएम किसान उत्सव दिवस’ का भव्य कार्यक्रम इसी प्रतिबद्धता का एक जीवंत उदाहरण रहा। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में न केवल देश के करोड़ों किसानों के बैंक खातों में सम्मान निधि की राशि सीधे अंतरित की गई, बल्कि उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में खेती-किसानी के भविष्य को लेकर एक नई उम्मीद और जोश भी देखने को मिला।
गुजरात से प्रधानमंत्री के ओजस्वी उद्बोधन को वर्चुअल माध्यम से सुनने के बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ देहरादून की देवतुल्य जनता और उपस्थित किसानों के चेहरों पर जो संतोष और उत्साह था, वह देश की बदलती कृषि व्यवस्था की कहानी खुद ब खुद कह रहा था। इस सफल आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में जब नीति और नीयत साफ हो, तो विकास की किरणें राज्य के अंतिम छोर पर बैठे किसान तक भी आसानी से पहुंच सकती हैं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना: देश के किसानों के लिए आर्थिक संबल
जब देश के करोड़ों किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने की बात आती है, तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यह योजना केवल कुछ पैसों का हस्तांतरण भर नहीं है, बल्कि यह किसानों के मन का वह संबल है जो उन्हें अगली फसल की बुवाई के समय बीज और खाद खरीदने के लिए किसी साहूकार के आगे हाथ फैलाने से बचाता है। हाल ही में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान इस योजना की चौबीसवीं किश्त के रूप में देश भर के नौ करोड़ चौतीस लाख से अधिक किसानों के बैंक खातों में अट्ठारह हजार छह सौ नब्बे करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि सीधे उनके खातों में भेजी गई। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी के माध्यम से इस पूरी प्रक्रिया को इतनी पारदर्शिता के साथ अंजाम दिया गया कि एक भी रुपया बिचौलियों की भेंट नहीं चढ़ सका। यह इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल भारत का यह मजबूत ढांचा अब गांव के एक छोटे से किसान के जीवन में भी सीधे तौर पर सकारात्मक बदलाव ला रहा है।
उत्तराखंड के किसानों के लिए विशेष सौगात और वित्तीय सहायता
पहाड़ी राज्यों में खेती करना मैदानी इलाकों की तुलना में काफी कठिन और चुनौतियों से भरा होता है। यहां की भौगोलिक परिस्थितियां, छोटे खेत और मौसम की अनिश्चितता किसानों के लिए हमेशा से बड़ी बाधा रही हैं। ऐसे में उत्तराखंड के आठ लाख अस्सी हजार से अधिक किसानों के खातों में एक सौ इकसठ करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का हस्तांतरण होना किसी बड़े वरदान से कम नहीं है। देहरादून के इस कार्यक्रम में जब राज्य के किसानों को यह राशि प्राप्त हुई, तो पर्वतीय अंचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक नया संचार देखने को मिला। राज्य सरकार और केंद्र सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही हैं कि उत्तराखंड के किसानों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिले। सेब के बागवान हों या कीवी की खेती करने वाले युवा किसान, हर किसी के लिए यह आर्थिक मदद खाद, बीज और जरूरी कृषि उपकरणों की खरीद में बेहद मददगार साबित हो रही है।
कृषि विविधीकरण और नवाचार: पारंपरिक खेती से आधुनिक कृषि की ओर
आज का दौर केवल पारंपरिक गेहूं और धान की खेती तक सीमित रहने का नहीं है, बल्कि कृषि में विविधीकरण और नवाचार अपनाने का है। प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व और दूरदर्शी मार्गदर्शन का ही असर है कि आज देश भर में कृषि क्षेत्र में नए प्रयोग हो रहे हैं। उत्तराखंड जैसे राज्य में अब पारंपरिक फसलों के साथ-साथ उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेष रूप से मिलेट यानी श्री अन्न, कीवी, सेब और ड्रैगन फ्रूट जैसे मिशनों के माध्यम से किसानों की आय को कई गुना बढ़ाने का काम किया जा रहा है। सरकार किसानों को यह समझा रही है कि वे अपनी पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकलकर उन फलों और अनाजों की खेती करें जिनकी बाजार में मांग बहुत अधिक है और जिनकी कीमत भी अच्छी मिलती है। पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु इन विशेष फलों और फसलों के लिए बेहद अनुकूल है, और जब इसमें सरकारी योजनाओं का साथ मिल जाता है, तो सफलता के द्वार अपने आप खुल जाते हैं।
किसानों को मिल रही सहूलियतें: ब्याजमुक्त ऋण से लेकर मुफ्त सिंचाई तक
कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए केवल वित्तीय सहायता देना ही काफी नहीं है, बल्कि किसानों के सामने आने वाली रोजमर्रा की अड़चनों को दूर करना भी उतना ही जरूरी है। उत्तराखंड सरकार किसानों के कल्याण के लिए कई ऐसी अनूठी पहल चला रही है जो देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल बन सकती हैं। किसानों को खेती के शुरुआती खर्चों से उबारने के लिए उन्हें ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि वे बिना किसी आर्थिक तनाव के अपनी फसल तैयार कर सकें। इसके अलावा, आधुनिक युग की मांग को देखते हुए कृषि यंत्रों की खरीद पर भारी अनुदान दिया जा रहा है, जिससे छोटे किसान भी ट्रैक्टर, कल्टीवेटर और आधुनिक सिंचाई उपकरणों का उपयोग कर सकें। सबसे बड़ी राहत सिंचाई के मोर्चे पर दी गई है, जहां किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए निःशुल्क नहर सुविधा का लाभ मिल रहा है। पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने से अब किसानों को मानसून की बेवफाई पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता।
सम्मानित अतिथियों की उपस्थिति और सामूहिक संकल्प
किसी भी बड़े जन कल्याणकारी कार्यक्रम की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसमें नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी कितनी है। देहरादून के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उत्तराखंड के कई दिग्गज और जनप्रिय नेता उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रदेश के माननीय कैबिनेट मंत्री गणेश जी और स्थानीय जनता के चहेते विधायक बृजभूषण गैरोला जी की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम के उत्साह को और अधिक बढ़ा दिया। इन नेताओं ने न केवल किसानों से सीधा संवाद किया, बल्कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया। इस तरह के आयोजनों से शासन और जनता के बीच की दूरी कम होती है और जनता का लोकतंत्र तथा सरकारी तंत्र पर विश्वास और अधिक मजबूत होता है।
कृषि क्षेत्र का भविष्य और ग्रामीण भारत की नई तस्वीर
आने वाले समय में भारत का कृषि क्षेत्र और अधिक तकनीक-आधारित, समृद्ध और आत्मनिर्भर होने जा रहा है। देहरादून में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह साफ कर दिया है कि उत्तराखंड के किसान अब पीछे रहने वाले नहीं हैं। वे सरकारी योजनाओं, आधुनिक तकनीकों, और नई कृषि नीतियों का पूरा लाभ उठाकर अपनी आय को लगातार बढ़ा रहे हैं। जब देश का अन्नदाता खुशहाल होगा, तभी राष्ट्र सच्चे अर्थों में विकसित और संपन्न बन पाएगा। आज जरूरत इस बात की है कि इन योजनाओं का लाभ देश के कोने-कोने में बैठे हर उस किसान तक पहुंचे जो अभी भी इनसे अछूता है। केंद्र और राज्य सरकारों का यह साझा प्रयास आने वाले दिनों में ग्रामीण भारत की तस्वीर पूरी तरह से बदल कर रख देगा, और हमारा किसान देश की आर्थिक धुरी के रूप में और अधिक गर्व के साथ सिर उठा कर खड़ा होगा।


