अजय भट्ट, जो ऊधमसिंह नगर संसदीय क्षेत्र के सांसद और पूर्व केंद्रीय रक्षा एवं पर्यटन राज्य मंत्री हैं, उन्होंने संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में देश और विशेष रूप से उत्तराखंड में महिलाओं के स्वरोजगार और उद्यमशीलता से जुड़ा एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण सवाल उठाया। लोकसभा में उनके अतारांकित प्रश्न संख्या 3217 के उत्तर में केंद्र सरकार ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए चलाई जा रही राष्ट्रीय योजनाओं, उनके क्रियान्वयन और उत्तराखंड राज्य में उनके प्रभाव की विस्तृत और प्रामाणिक रिपोर्ट सदन के पटल पर प्रस्तुत की है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की ओर से दिए गए इस जवाब से यह स्पष्ट हुआ है कि राज्य में महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए सरकारी स्तर पर किस प्रकार वित्तीय और तकनीकी सहयोग दिया जा रहा है।
संसद में गूंजा महिला सशक्तिकरण का सवाल
सांसद अजय भट्ट ने सरकार से यह जानने का प्रयास किया था कि देश में महिलाओं को नया व्यवसाय शुरू करने और बने-बनाये व्यापार को विस्तार देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से क्या-क्या कदम उठाए गए हैं। उन्होंने विशेष रूप से यह पूछा था कि उद्यम सखी पोर्टल जैसी योजनाओं के विकास और संचालन पर कितनी राशि खर्च की गई और इससे राज्यवार कितनी महिला उद्यमियों को वास्तविक लाभ मिला।
इसके अतिरिक्त, अजय भट्ट ने उत्तराखंड राज्य में महिलाओं द्वारा संचालित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को मिली वित्तीय सहायता, क्रेडिट गारंटी और महिला नेतृत्व वाले नए स्टार्टअप्स के लिए दी गई सुविधाओं का पूरा विवरण मांगा था। उनके इस प्रश्न के उत्तर में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने सरकार का आधिकारिक पक्ष और आंकड़े पेश किए।
उद्यम सखी पोर्टल का सफर और नया डिजिटल एकीकरण
केंद्र सरकार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देश में महिला उद्यमिता को एक नया मंच देने और उन्हें स्वरोजगार की योजनाओं से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में ‘उद्यम सखी पोर्टल’ की शुरुआत की गई थी। इस विशेष डिजिटल प्लेटफॉर्म को बनाने और उसके विकास कार्य पर सरकार ने कुल 43.52 लाख रुपये की राशि खर्च की थी। इस पोर्टल का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को व्यापार संबंधी परामर्श, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं की सही जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराना था।
हालांकि, समय के साथ डिजिटल व्यवस्था को और अधिक सुलभ, पारदर्शी तथा एकीकृत बनाने के लिए मंत्रालय ने एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया। 1 जनवरी 2026 से उद्यम सखी पोर्टल को स्वतंत्र रूप से संचालित करने के बजाय बंद कर दिया गया और उसे सरकार के मुख्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ जोड़ दिया गया।
अब उद्यम सखी पोर्टल पर पहले से पंजीकृत सभी महिला उद्यमियों के डेटा और खातों को ‘उद्यम पंजीकरण पोर्टल’ तथा ‘उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म’ पर सफलतापूर्वक स्थानांतरित कर दिया गया है। इससे महिला उद्यमियों को अलग-अलग पोर्टल पर जाने की आवश्यकता नहीं होगी और वे एक ही जगह से अपनी व्यावसायिक जरूरतों और सरकारी सुविधाओं का लाभ ले सकेंगी।
उद्यम सखी पोर्टल पर पंजीकरण के आंकड़े
सदन में प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जब तक उद्यम सखी पोर्टल स्वतंत्र रूप से कार्यरत था, तब तक पूरे भारत में कुल 4,580 महिला उद्यमियों ने इस पर अपना पंजीकरण कराया था।
राष्ट्रीय स्तर पर कुल पंजीकरण: 4,580 महिला उद्यमी
उत्तराखंड राज्य से पंजीकरण: 26 महिला उद्यमी
हालांकि उत्तराखंड से यह संख्या राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले सीमित प्रतीत होती है, परंतु सरकार का मानना है कि नए एकीकृत प्लेटफॉर्म पर जाने के बाद राज्य की अधिक से अधिक महिलाओं को इस व्यवस्था से जोड़ा जा सकेगा।
क्रेडिट गारंटी योजना: उत्तराखंड की महिलाओं को 2,726 करोड़ रुपये की सहायता
केंद्र सरकार के जवाब में सबसे बड़ा और महत्त्वपूर्ण आंकड़ा क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्राइजेज के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता का सामने आया है। बैंक से बिना किसी कठिन जमानत या संपत्ति को गिरवी रखे ऋण दिलाने वाली इस योजना ने उत्तराखंड की महिला उद्यमियों को सबसे बड़ा संबल प्रदान किया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2000 से लेकर 31 जुलाई 2026 तक की पूरी अवधि में उत्तराखंड में महिला स्वामित्व वाले उद्योगों को बड़े पैमाने पर वित्तीय सुरक्षा दी गई:
| विवरण श्रेणी | सरकारी आंकड़े |
| लाभान्वित महिला उद्योग (एमएसएमई) | 30,861 |
| कुल स्वीकृत गारंटी राशि | 2,726 करोड़ रुपये |
| समय सीमा | वर्ष 2000 से 31 जुलाई 2026 |
यह आंकड़ा यह साबित करता है कि उत्तराखंड में महिलाओं को अपना व्यवसाय स्थापित करने और उसे बढ़ाने के लिए बैंकों के माध्यम से भारी-भरकम वित्तीय मदद उपलब्ध कराई गई है, जिससे राज्य की ग्रामीण और शहरी अर्थव्यवस्था दोनों को गति मिली है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) की स्थिति
स्वरोजगार स्थापित करने और नए सूक्ष्म उद्यमों को जन्म देने के लिए केंद्र सरकार की सबसे प्रमुख योजनाओं में से एक ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम’ है। इस योजना के अंतर्गत नए उद्योग लगाने के लिए सरकार द्वारा सब्सिडी और ऋण की सुविधा दी जाती है।
वर्षवार आंकड़ों का स्पष्ट विवरण:
वर्ष 2021-22: इस वित्तीय वर्ष में उत्तराखंड की 489 महिला उद्यमियों को अपना नया काम शुरू करने के लिए इस योजना के तहत मदद मिली।
वर्ष 2022-23: इस दौरान कुल 484 महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म उद्यमों को वित्तीय सब्सिडी और सहायता प्रदान की गई।
वर्ष 2023-24: इस वर्ष सहायता प्राप्त करने वाले महिला उद्यमों की संख्या 377 दर्ज की गई।
वर्ष 2024-25: इस वित्तीय वर्ष में 213 महिला सूक्ष्म उद्यमों को योजना के तहत लाभान्वित किया गया।
वर्ष 2025-26: वर्तमान अवधियों के आंकड़ों के अनुसार अब तक 158 महिला उद्यमों को इस योजना से जोड़ा जा चुका है।
महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाली अन्य प्रमुख केंद्रीय योजनाएं
सांसद के प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि केवल एक या दो योजनाओं तक ही महिलाओं की सहायता सीमित नहीं है, बल्कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा कई अन्य महत्वपूर्ण योजनाएं भी चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ उत्तराखंड सहित देश भर की महिलाएं उठा रही हैं:
स्फूर्ति योजना: पारंपरिक उद्योगों और कारीगरों को क्लस्टर के रूप में विकसित करने के लिए इस योजना के जरिए वित्तीय सहायता और आधुनिक मशीनें उपलब्ध कराई जाती हैं।
आस्पायर योजना: ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार, नए विचारों और कृषि आधारित उद्योगों में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए यह योजना काम करती है।
कैरियर विकास योजना और ईएसडीपी: महिलाओं में व्यावसायिक कौशल विकसित करने, प्रबंधन सिखाने और उद्यमिता विकास के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
सूक्ष्म एवं लघु उद्योग क्लस्टर विकास कार्यक्रम: उद्योगों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए साझा सुविधा केंद्र स्थापित करने में मदद दी जाती है।
आइडिया योजना: नए और अभिनव व्यावसायिक विचारों को आर्थिक सहयोग देकर धरातल पर उतारने की पहल की जाती है।
उत्तराखंड में योजनाओं के प्रभाव का विश्लेषण
लोकसभा में प्रस्तुत इन आंकड़ों से यह साफ झलकता है कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और भौगोलिक रूप से विषम राज्य में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास निरंतर जारी हैं। राज्य में पारंपरिक खेती और हस्तशिल्प से हटकर अब महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण, पैकेजिंग, स्थानीय उत्पादों के निर्माण और सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से आगे आ रही हैं।
क्रेडिट गारंटी योजना के माध्यम से 2,726 करोड़ रुपये की बड़ी राशि का प्रवाह यह दर्शाता है कि महिलाओं में जोखिम लेने और नए उद्यम शुरू करने की क्षमता बढ़ी है। हालांकि, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के आंकड़ों में पिछले कुछ वर्षों में आए उतार-चढ़ाव यह संकेत भी देते हैं कि जमीनी स्तर पर प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाने तथा अधिक से अधिक महिलाओं को जागरूक करने की आवश्यकता बनी हुई है।
लोकसभा में सांसद अजय भट्ट द्वारा पूछा गया यह अतारांकित प्रश्न उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण की वर्तमान स्थिति की एक स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करता है। केंद्र सरकार द्वारा दिए गए आधिकारिक आंकड़ों से स्पष्ट है कि राज्य में 30 हजार से अधिक महिला उद्योगों को क्रेडिट गारंटी और हजारों महिलाओं को प्रत्यक्ष रोजगार योजनाओं का लाभ मिला है।
उद्यम सखी पोर्टल के नए डिजिटल प्लेटफॉर्मों में विलय के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि उत्तराखंड के दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को भी डिजिटल माध्यम से योजनाओं की सीधी जानकारी और त्वरित लाभ मिल सकेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी और अधिक सशक्त होगी।


