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उत्तराखंड – बड़ोन हाईस्कूल के इंटरमीडिएट में उच्चीकरण से बदली दूरस्थ ग्रामीण शिक्षा की तस्वीर: मंत्री राम सिंह कैड़ा के प्रयासों से साकार हुआ वर्षों पुराना सपना

आर्यन सिंह: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था में सुधार और सुदूर ग्रामीण अंचलों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुँच हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। भौगोलिक विकटताओं, कठिन पैदल रास्तों और जंगली जानवरों के खतरों के बीच अपने उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने वाले बच्चों के लिए कोई भी नया प्रशासनिक प्रयास एक जीवनदायिनी उम्मीद की तरह आता है। भीमताल विधानसभा क्षेत्र के अत्यंत दूरस्थ ओखलकांडा ब्लॉक के अंतर्गत स्थित ग्राम सभा बड़ोन में भी ऐसा ही एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। स्थानीय ग्रामीणों की दशकों पुरानी मांग को साकार करते हुए बड़ोन स्थित सरकारी हाईस्कूल का आधिकारिक रूप से इंटरमीडिएट विद्यालय के रूप में उच्चीकरण कर दिया गया है। क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और मंत्री राम सिंह कैड़ा के निरंतर, अनथक और समर्पित प्रयासों के बल पर आखिरकार इस दूरस्थ क्षेत्र के बच्चों के सामने से उच्च शिक्षा की राह में खड़ी सबसे बड़ी बाधा दूर हो गई है। स्वयं मंत्री कैड़ा ने इस नवनिर्मित इंटर कॉलेज का औपचारिक उद्घाटन किया, जिसके साथ ही यहाँ कक्षा ग्यारहवीं में छात्र-छात्राओं के विधिवत प्रवेश की प्रक्रिया और पठन-पाठन की गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं। यह कदम न केवल ग्राम सभा बड़ोन बल्कि आसपास के दर्जन भर छोटे-बड़े गांवों की शैक्षणिक दिशा और सामाजिक दशा को बदलने वाला एक बड़ा ऐतिहासिक पड़ाव साबित हो रहा है।

वर्षों का संघर्ष और कठिनाइयों से भरा शैक्षणिक सफर
ओखलकांडा ब्लॉक का बड़ोन गांव अपने अनूठे नैसर्गिक सौंदर्य के साथ-साथ अत्यंत दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है। इस पूरे क्षेत्र में लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं का अभाव रहा है, लेकिन सबसे गंभीर संकट विद्यार्थियों के सामने दसवीं के बाद की पढ़ाई को लेकर खड़ा होता था। गाँव में हाईस्कूल स्तर तक का विद्यालय उपलब्ध होने की वजह से बच्चे दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई तो जैसे-तैसे पूरी कर लेते थे, परंतु उसके बाद इंटरमीडिएट की शिक्षा प्राप्त करने के लिए उन्हें अपने गाँव से कई किलोमीटर दूर स्थित विद्यालयों का रुख करना पड़ता था।

दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन की कोई नियमित व्यवस्था न होने के कारण छात्र-छात्राओं को रोज कई किलोमीटर घने जंगलों, उबड़-खाबड़ पगडंडियों और नदी-नालों को पार करके जाना पड़ता था। बरसात के मौसम में यह राह और भी विकराल तथा जानलेवा हो जाती थी। इसके अलावा, जंगली जानवरों के हमले का डर हमेशा विद्यार्थियों और उनके चिंतित अभिभावकों के दिलों में बना रहता था। कई बार परिस्थितियां इतनी प्रतिकूल हो जाती थीं कि गरीब और सामान्य परिवारों के बच्चे चाहकर भी दसवीं के आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पाते थे।

छात्राओं पर पड़ता था सबसे अधिक प्रतिकूल प्रभाव
इस कठिन व्यवस्था का सबसे दर्दनाक और प्रतिकूल असर क्षेत्र की बालिकाओं पर पड़ता था। दूर-दराज़ के कठिन और असुरक्षित रास्तों से होकर प्रतिदिन दूसरे दूरस्थ गांवों में स्थित विद्यालयों तक जाना लड़कियों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। सुरक्षा संबंधी चिंताओं, सामाजिक बंधनों और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण बहुत से माता-पिता अपनी बेटियों को दसवीं के बाद आगे पढ़ाने में असमर्थता व्यक्त कर देते थे।

इसके परिणामस्वरूप, दूरस्थ क्षेत्रों में बालिकाओं की शिक्षा बीच में ही छूट जाने की दर काफी अधिक देखी जा रही थी। जो बेटियां अपने जीवन में डॉक्टर, शिक्षक, अधिकारी या प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना देखती थीं, उन्हें गांव की भौगोलिक परिस्थितियों और उच्च शिक्षण संस्थान न होने की वजह से अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ती थी। यही कारण था कि ग्रामीणों द्वारा पिछले कई वर्षों से लगातार प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर इस बात की पुरज़ोर मांग उठाई जा रही थी कि बड़ोन स्थित हाईस्कूल को जल्द से जल्द इंटरमीडिएट कॉलेज के रूप में विकसित किया जाए।

मंत्री राम सिंह कैड़ा के प्रयासों से साकार हुआ सपना
ग्रामीणों की इस ज्वलंत और जायज समस्या की गंभीरता को समझते हुए भीमताल के क्षेत्रीय विधायक और मंत्री राम सिंह कैड़ा ने इसे अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया। उन्होंने इस मुद्दे को केवल एक राजनीतिक वादे तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शासकीय और प्रशासनिक स्तर पर इसके समाधान के लिए एक लंबी और सुदृढ़ लड़ाई लड़ी।

राम सिंह कैड़ा ने समय-समय पर शासन स्तर पर पत्राचार करने के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के समक्ष बड़ोन और उसके आसपास के गांवों की वास्तविक स्थिति का खाका पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि किस तरह से एक दूरस्थ विद्यालय का उच्चीकरण सैकड़ों बच्चों, विशेषकर बालिकाओं के भविष्य को एक नई दिशा दे सकता है। उनके इस निरंतर और ठोस पैरवी का ही प्रतिफल था कि राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने बड़ोन हाईस्कूल को इंटरमीडिएट में उच्चीकृत करने की मंजूरी प्रदान की।

उद्घाटन समारोह के अवसर पर जैसे ही विद्यालय के नए स्वरूप का पर्दापण हुआ, पूरे गांव में एक उत्सव जैसा माहौल बन गया। वर्षों का सपना सच होने पर उत्साहित ग्रामीणों ने मंत्री राम सिंह कैड़ा का पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और भव्य फूल-मालाओं के साथ जोरदार नागरिक अभिनंदन किया और उनके प्रति अपना गहरा आभार व्यक्त किया।

प्रवेश प्रक्रिया शुरू: नई उम्मीदों के साथ 11वीं की कक्षाएं संचालित
उच्चीकरण की प्रक्रिया केवल कागज़ों तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि तुरंत धरातल पर भी अमल में लाई गई है। विद्यालय के इंटरमीडिएट कॉलेज बनते ही कक्षा 11वीं में छात्र-छात्राओं के दाखिले की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी गई है और नियमित कक्षाएं भी संचालित होने लगी हैं।

अब इस क्षेत्र के बच्चों को दसवीं के बाद अपने सपनों को दबाने या जान जोखिम में डालकर दूर के जंगलों से होकर गुजरने की कोई मजबूरी नहीं होगी। गाँव के ही सुरक्षित और परिचित वातावरण में उन्हें 12वीं तक की पढ़ाई करने का अवसर प्राप्त होगा। इससे विशेष रूप से बालिकाओं के विद्यालय छोड़ने की दर में भारी कमी आएगी और वे बिना किसी डर के अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकेंगी। स्थानीय अभिभावकों के चेहरे पर यह सोचकर ही राहत और खुशी की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही है कि अब उनकी बेटियों का भविष्य उनके अपने गाँव में सुरक्षित हाथों में है।

बहुउद्देशीय शिविर: गाँव के द्वार पर समस्याओं का त्वरित समाधान
बड़ोन इंटर कॉलेज के उद्घाटन समारोह के साथ-साथ मंत्री राम सिंह कैड़ा की पहल पर गाँव में एक विशाल बहुउद्देशीय प्रशासनिक शिविर का आयोजन भी किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य दूरस्थ ग्रामीण इलाकों में रहने वाले आम नागरिकों को अपनी छोटी-छोटी समस्याओं, शिकायतों और प्रशासनिक कार्यों के लिए जिला या तहसील मुख्यालय के चक्कर काटने की मजबूरी से मुक्ति दिलाना था।

इस शिविर में ओखलकांडा ब्लॉक और आसपास की विभिन्न न्याय पंचायतों से आए लगभग 350 से अधिक ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और अपनी दैनिक समस्याओं से शासन-प्रशासन को अवगत कराया।

शिविर की मुख्य उपलब्धियां और जनता को तुरंत राहत
समस्याओं का त्वरित निस्तारण: शिविर में सड़क, पेयजल, बिजली, पेंशन, राशन कार्ड, और भूमि विवादों से जुड़ी कुल 45 मुख्य समस्याएं और शिकायतें दर्ज की गईं।

मौके पर निस्तारण: मंत्री कैड़ा और उपस्थित प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में कुल 45 में से 43 समस्याओं का समाधान तुरंत मौके पर ही कर दिया गया।

कम समय में राहत: केवल 2 बची हुई जटिल समस्याओं के समयबद्ध निस्तारण के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए गए।

जनता दरबार का लाभ: सैकड़ों लोगों ने सीधे जनता दरबार में उपस्थित होकर अपनी अर्ज़ियां सौंपी और सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त की।

इस अवसर पर बोलते हुए मंत्री राम सिंह कैड़ा ने कहा कि राज्य सरकार का मूल मंत्र ही यही है कि अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक सरकार की पहुँच हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को अपनी समस्याओं के हल के लिए दूर-दराज़ के सरकारी दफ़्तरों में न भटकना पड़े, इसके लिए न्याय पंचायत स्तर पर ऐसे बहुउद्देशीय शिविर लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे।

शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री का जताया आभार
समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री राम सिंह कैड़ा ने इस ऐतिहासिक सौगात के लिए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और प्रदेश के शिक्षा मंत्री का विशेष आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पर्वतीय और दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास और विशेष रूप से शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

कैड़ा ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि भीमताल विधानसभा क्षेत्र के हर एक गाँव में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल की बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना उनका मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने कहा कि बड़ोन स्कूल का उच्चीकरण इस दिशा में केवल एक पड़ाव है, और आने वाले समय में क्षेत्र के अन्य दूरस्थ विद्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों की दशा सुधारने के लिए भी इसी गति से प्रयास जारी रहेंगे।

सामाजिक और आर्थिक प्रभाव: एक नई क्रांति का आगाज़
बड़ोन में हाईस्कूल के इंटरमीडिएट में उच्चीकृत होने के कई दूरगामी सामाजिक और आर्थिक प्रभाव देखने को मिलेंगे:

पलायन पर रोक: जब गांवों में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बुनियादी ढांचा मिलेगा, तो ग्रामीणों को बच्चों की पढ़ाई के लिए कस्बों और शहरों की तरफ जबरन पलायन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा: उच्च शिक्षा तक बालिकाओं की आसान पहुँच होने से वे आत्मनिर्भर बनेंगी, जिससे समाज में लैंगिक समानता को बल मिलेगा।

आर्थिक बचत: ग्रामीणों को अपने बच्चों को बाहर भेजने पर होने वाले रहने, खाने और आने-जाने के भारी-भरकम खर्चों से मुक्ति मिलेगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।

स्थानीय विकास: एक इंटरमीडिएट कॉलेज के बनने से आसपास के क्षेत्रों में भी सामाजिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और विकास के नए रास्ते खुलते हैं।

ओखलकांडा ब्लॉक के ग्राम सभा बड़ोन में हाईस्कूल का इंटरमीडिएट के रूप में उच्चीकरण केवल एक सरकारी इमारत या कागज़ी आदेश भर नहीं है, बल्कि यह दुर्गम पहाड़ के बच्चों की आकांक्षाओं और सपनों को नई उड़ान देने वाली एक क्रांतिकारी पहल है। वर्षों के इंतजार के बाद मिला यह उपहार यह साबित करता है कि जब इच्छाशक्ति और समर्पित जनसेवा का भाव हो, तो कठिन से कठिन राहें भी आसान हो जाती हैं। मंत्री राम सिंह कैड़ा के निरंतर प्रयासों, मुख्यमंत्री के सहयोग और ग्रामीणों के धैर्य के बल पर शुरू हुआ यह नया शैक्षणिक सफर निसंदेह भीमताल क्षेत्र के उज्ज्वल, शिक्षित और सशक्त भविष्य की एक नई पटकथा लिखेगा।

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