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उत्तराखण्ड को आत्मनिर्भर बनाने की पहल: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने छोटे कारोबारियों और स्थानीय उद्योगों के लिए खोला घोषणाओं का पिटारा।

उत्तराखण्ड के व्यावसायिक और औद्योगिक परिदृश्य के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित होते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज सभागार में आयोजित प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन का भव्य शुभारंभ किया। दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य की आर्थिक संरचना को मजबूती देने वाला व्यापारी वर्ग केवल करदाता मात्र नहीं है, बल्कि वह उत्तराखण्ड की प्रगति और समृद्धि का मुख्य आधार स्तंभ है। इस सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा की गई आठ ऐतिहासिक घोषणाएं न केवल व्यापारियों के लंबे समय से चले आ रहे संशय और समस्याओं का समाधान करेंगी, बल्कि प्रदेश में पारदर्शी, सुरक्षित और भयमुक्त व्यापारिक माहौल का निर्माण भी करेंगी। पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी बाजारों तक, छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े निवेशकों तक – हर स्तर पर व्यापार को गति देने के लिए राज्य सरकार का यह कदम दूरगामी सिद्ध होने वाला है।

उत्तराखण्ड जैसे भौगोलिक दृष्टि से विविध और विषम परिस्थितियों वाले राज्य में व्यापारिक गतिविधियां आसान नहीं रही हैं। प्राकृतिक आपदाओं की निरंतर चुनौती, दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र और सीमित संसाधनों के बावजूद प्रदेश का व्यापारी वर्ग अग्रिम पंक्ति में खड़े होकर राज्य की आजीविका चक्र को निरंतर चलायमान रखता है। मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में उपस्थित विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए भावुक और ओजस्वी शब्दों में कहा कि व्यापारी वर्ग केवल वस्तुओं और सेवाओं के लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह रोजगार के अवसरों का सृजन करता है, स्थानीय बाजारों में प्राण फूँकता है और राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में अपना अमूल्य योगदान देता है। कोविड जैसी भयानक वैश्विक महामारी के दौरान भी जब पूरा देश ठहराव के दौर से गुजर रहा था, तब प्रदेश के व्यापारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर खाद्य सामग्री और आवश्यक दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को टूटने नहीं दिया। समाज के प्रति व्यापारियों का यह समर्पण और सेवाभाव इस बात का प्रमाण है कि राज्य का विकास व्यापारियों के सहयोग के बिना अधूरा है।

व्यापारियों की सुरक्षा, सम्मान और उनके अधिकारों की रक्षा को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मुख्यमंत्री ने सरकार के दृष्टिकोण को पूरी स्पष्टता से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक लालफीताशाही, अनावश्यक कागजी प्रक्रियाओं और सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने की व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त किया जा रहा है। सरकार की मंशा एक ऐसा तंत्र विकसित करने की है, जहाँ कारोबारी बिना किसी अनपेक्षित भय और प्रशासनिक जटिलता के अपना व्यवसाय चला सकें। इसी सोच को धरातल पर उतारने के लिए मुख्यमंत्री ने प्रांतीय व्यापारी सम्मेलन में आठ बड़ी और अत्यंत व्यावहारिक घोषणाएं कीं, जो सीधे तौर पर हर छोटे-बड़े व्यापारी के जीवन पर सकारात्मक असर डालेंगी।

व्यापारी हितों के लिए की गई आठ ऐतिहासिक घोषणाएं

मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणाएं केवल आश्वासन नहीं हैं, बल्कि ये प्रदेश की प्रशासनिक और आर्थिक कार्यप्रणाली में बदलाव की रूपरेखा तैयार करती हैं। इन घोषणाओं का विस्तृत और व्यावहारिक विश्लेषण इस प्रकार है:

  1. आपदा प्रभावित व्यापारियों को त्वरित और पारदर्शी राहत: उत्तराखण्ड में हर वर्ष प्राकृतिक आपदाएं—जैसे भूस्खलन, अतिवृष्टि और बादल फटने जैसी घटनाएं—व्यापारिक परिसंपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाती हैं। मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि किसी भी प्राकृतिक या अपरिहार्य आपदा से प्रभावित व्यापारियों को नियमानुसार उचित और त्वरित आर्थिक राहत उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि वे बिना किसी विलंब के अपना कारोबार पुनः खड़ा कर सकें।
  2. उद्योग मित्र समितियों का पुनर्गठन और नियमित संवाद: राज्य और जिला स्तर पर व्यापारियों तथा शासन-प्रशासन के बीच सीधे संवाद की कमी को दूर करने के लिए ‘उद्योग मित्र समितियों’ का पुनर्गठन किया जाएगा। इन समितियों की नियमित बैठकें अनिवार्य की जाएंगी, जिससे जिला स्तर पर आने वाली स्थानीय व्यापारिक समस्याओं का निस्तारण समयबद्ध सीमा के भीतर मौके पर ही हो सके।
  3. जीएसटी दुर्घटना बीमा योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार: वस्तु एवं सेवा कर में पंजीकृत व्यापारियों के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले दुर्घटना बीमा लाभ से अधिकांश छोटे व्यापारी अनभिज्ञ रहते थे। इस जानकारी के अभाव को दूर करने के लिए सरकार इसका व्यापक प्रचार-प्रसार अभियान चलाएगी, जिससे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति में पात्र व्यापारी के आश्रित समय पर बीमा दावे की कागजी प्रक्रिया पूरी कर आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकें।
  4. पर्यटन व्यवसाय के लिए एकल खिड़की व्यवस्था और सरलीकरण: राज्य की अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन पर्यटन है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े छोटे-बड़े कारोबारियों को राहत देने के लिए पंजीकरण की जटिल प्रक्रिया को समाप्त कर अत्यंत सरल बनाया जाएगा। इसके साथ ही पर्यटन क्षेत्र में निवेश और पंजीकरण को सहज बनाने के लिए एकल खिड़की प्रणाली को सख्ती से लागू किया जाएगा।
  5. होमस्टे सुविधाओं का प्रांतीय विस्तार: पर्यटन बाहुल्य क्षेत्रों के साथ-साथ सभी जिला मुख्यालयों में होमस्टे योजना का तेजी से विस्तार किया जाएगा। इस पहल से न केवल बाहरी पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति का अनुभव मिलेगा, बल्कि स्थानीय निवासियों और युवाओं के लिए स्वरोजगार एवं अतिरिक्त आय के टिकाऊ अवसर पैदा होंगे।
  6. चारधाम यात्रा मार्ग पर बुनियादी पार्किंग व्यवस्था: चारधाम यात्रा उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यात्रा मार्ग पर लगने वाले जाम और पार्किंग की कमी के कारण व्यापारियों और श्रद्धालुओं दोनों को भारी असुविधा होती थी। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि यात्रा मार्ग के सभी प्रमुख स्थानों और बाजारों के पास सुव्यवस्थित पार्किंग स्थल विकसित किए जाएंगे, जिससे यातायात सुगम होगा और व्यापार में वृद्धि होगी।
  7. बाजार क्षेत्रों में सड़कों एवं नालियों का प्राथमिकता से कायाकल्प: राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य मार्गों और स्थानीय कस्बों के मुख्य बाजारों से जुड़ी सड़कों और नालियों की खस्ताहाल स्थिति व्यापार पर सीधा असर डालती है। सरकार ने इन सभी व्यापारिक क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण और मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता सूची में रखकर तुरंत पूरा करने का निर्देश दिया है।
  8. पंजीकृत व्यापारिक श्रमिकों को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ: व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और दुकानों में काम करने वाले कर्मचारी व्यापार का अभिन्न अंग हैं। श्रम विभाग में पंजीकृत ऐसे सभी श्रमिकों को कर्मकार कल्याण बोर्ड की सभी योजनाओं, स्वास्थ्य सुविधाओं और वित्तीय सहायता का सीधा लाभ दिया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।

ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस और डिजिटल क्रांति का प्रभाव

उत्तराखण्ड में व्यापारिक माहौल को आधुनिक और विश्वस्तरीय बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को धरातल पर उतारा जा रहा है। देश भर में डिजिटल लेनदेन, वित्तीय समावेशन और पारदर्शी नीतियों के माध्यम से जो क्रांतिकारी परिवर्तन आया है, उसका सीधा लाभ राज्य के कारोबारियों को मिल रहा है। राज्य सरकार ने ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ यानी व्यापार करने की सुगमता की दिशा में बड़े प्रशासनिक सुधार किए हैं। वर्तमान में एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से प्रदेश के २६ प्रमुख विभागों की २०६ से अधिक महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह ऑनलाइन उपलब्ध करा दी गई हैं। अब किसी भी नए उद्योग या व्यवसाय को शुरू करने के लिए एनओसी और स्वीकृतियां हासिल करना चुटकियों का काम बन गया है।

इसके अतिरिक्त, निवेशकों और उद्यमियों की दैनिक समस्याओं और प्रशासनिक अड़चनों को दूर करने के लिए ‘निवेश मित्र’ व्यवस्था लागू की गई है। यह व्यवस्था एक समर्पित साथी की तरह काम करती है, जो व्यवसायी को कागजी उलझनों से बचाकर पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाती है। जब प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता आती है, तो भ्रष्टाचार की गुंजाइश स्वतः समाप्त हो जाती है, जिससे व्यापारी बिना किसी भय के अपने व्यापार का विस्तार कर सकते हैं।

स्टार्टअप नीति और पर्वतीय क्षेत्रों का औद्योगिक संतुलन

उत्तराखण्ड की भौगोलिक विषमता को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक विकास को केवल मैदानी जिलों जैसे उधम सिंह नगर, हरिद्वार और देहरादून तक सीमित रखना एक बड़ी चुनौती थी। इस क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त करने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में एक दूरदर्शी नीति अपनाई गई है। राज्य में नवाचार और युवा सोच को बढ़ावा देने के लिए ‘उत्तराखण्ड स्टार्टअप नीति’ लागू की गई है, जिसके अंतर्गत २०० करोड़ रुपये के विशाल वेंचर फंड का प्रावधान किया गया है। यह फंड नए विचारों के साथ व्यापार क्षेत्र में उतरने वाले युवाओं को शुरुआती पूंजी और संबल प्रदान कर रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव पर्वतीय क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करना है। चमोली, पौड़ी और अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी जिलों में छोटे और मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष औद्योगिक पार्कों की स्थापना की जा रही है। इसके लिए भूमि चिह्नित करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जा चुका है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित लघु उद्योगों, प्रसंस्करणीय कृषि, हस्तशिल्प और जड़ी-बूटी आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि राज्य के पर्वतीय अंचलों से होने वाले पलायन पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।

प्रांतीय स्मारिका का विमोचन और व्यापारी सम्मान

सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल की विशेष स्मारिका का औपचारिक विमोचन किया। यह स्मारिका राज्य के व्यापारिक इतिहास, वर्तमान संभावनाओं और चुनौतियों का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसके साथ ही, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए व्यापार मंडल के वरिष्ठ और उत्कृष्ट कार्य करने वाले प्रतिनिधियों को मंच से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि राज्य निर्माण और विकास में व्यापारियों के असीम योगदान का सार्वजनिक रूप से किया गया आदर था।

कार्यक्रम में क्षेत्रीय सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक बंशीधर भगत एवं सरिता आर्या, नगर के महापौर गजराज सिंह बिष्ट, प्रांतीय उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश अध्यक्ष नवीन वर्मा, प्रदेश महामंत्री प्रकाश मिश्रा, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रताप बिष्ट, दर्जाधारी राज्यमंत्री डॉ. अनिल कपूर डब्बू, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. और मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पाण्डेय सहित शासन, प्रशासन और व्यापारिक संगठनों के दर्जनों उच्चाधिकारी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में माना कि सरकार और व्यापारियों का यह परस्पर समन्वय उत्तराखण्ड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने का काम करेगा।

दूरगामी सामाजिक-आर्थिक प्रभाव और भविष्य का दृष्टिकोण

हल्द्वानी में आयोजित इस प्रांतीय सम्मेलन से जो आठ बड़ी घोषणाएं निकलकर सामने आई हैं, उनका प्रभाव केवल तात्कालिक राहत तक सीमित नहीं रहेगा। यदि इन घोषणाओं के दूरगामी परिणामों का विश्लेषण किया जाए, तो यह स्पष्ट होता है कि इनसे राज्य के आर्थिक और सामाजिक ढांचे में व्यापक बदलाव आने वाला है:

  • स्थानीय स्वरोजगार में अभूतपूर्व वृद्धि: होमस्टे और पर्यटन पंजीकरण के सरलीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को अपने ही गांव और कस्बे में रोजगार मिलेगा। इससे आत्मनिर्भरता की भावना बढ़ेगी।
  • पूंजी का सुरक्षित प्रवाह: दुर्घटना बीमा का व्यापक प्रचार और आपदा राहत का पारदर्शी तंत्र व्यापारियों में सुरक्षा की भावना पैदा करेगा, जिससे वे बेझिझक अपनी पूंजी का निवेश नए कारोबार में कर सकेंगे।
  • सड़क और बुनियादी ढांचे का विकास: बाजारों में सड़कों, नालियों और पार्किंग के सुदृढ़ीकरण से पर्यटकों और आम ग्राहकों का अनुभव बेहतर होगा। इससे बाजारों में फुटफॉलो बढ़ेगा और सीधा आर्थिक लाभ दुकानदारों को मिलेगा।
  • श्रम सुधार और मानवीय दृष्टिकोण: व्यापारिक प्रतिष्ठानों में काम करने वाले श्रमिकों को कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ना एक सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करता है, जिससे मालिक और श्रमिक के बीच संबंध मजबूत होंगे और कार्य उत्पादकता में सुधार होगा।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लिया गया यह संकल्प इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राज्य सरकार व्यापारी वर्ग को महज राजस्व का स्रोत न मानकर उन्हें विकास यात्रा का सह-यात्री और महत्वपूर्ण भागीदार मानती है। स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पर्वतीय उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का जो विजन सरकार ने रखा है, वह आने वाले समय में ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड’ के सपने को साकार करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हल्द्वानी का यह सम्मेलन निश्चित रूप से राज्य के व्यावसायिक इतिहास में एक नए और स्वर्णिम युग के आरंभ के रूप में दर्ज किया जाएगा।

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