एक बार फिर एक्शन मोड में दिखे पुष्कर सिंह धामी ने चमोली जिले के तमकनाला क्षेत्र में हुई भारी प्राकृतिक आपदा और उसके बाद की स्थिति का खुद जायजा लेते हुए एक अहम समीक्षा बैठक की है। उत्तराखंड के इस पर्वतीय क्षेत्र में बीते दिनों तमकनाला के उफान पर आने से आसपास के इलाके और मुख्य मोटर मार्ग को गहरा नुकसान पहुंचा है। इस स्थिति की गंभीरता को समझते हुए मुख्यमंत्री ने शासन और जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों के साथ सीधी बातचीत की और धरातल पर चल रहे राहत कार्यों की प्रगति रिपोर्ट मांगी।
मुख्यमंत्री का स्पष्ट मानना है कि पर्वतीय राज्यों में मानसून या मौसम के बदलाव के समय आने वाली ऐसी चुनौतियां बेहद संवेदनशील होती हैं, और ऐसे समय में जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार का सबसे पहला कर्तव्य है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं होनी चाहिए और प्रभावित लोगों तक तुरंत सहायता पहुंचाई जानी चाहिए।
तमकनाला में जलप्रवाह से उत्पन्न हुई विषम स्थिति
चमोली का ज्योतिर्मठ और मलारी क्षेत्र उत्तराखंड का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील इलाका है। इस क्षेत्र में बहने वाला तमकनाला अचानक पानी का बहाव अत्यधिक बढ़ जाने के कारण बेकाबू हो गया। पहाड़ों पर हुई भारी बारिश और जलधारा के तेज होने से नाले के आसपास की जमीन और मुख्य सड़क का एक बड़ा हिस्सा कटकर बह गया। तमकनाला में आए इस उफान की वजह से मुख्य रास्ते पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई, जिससे सीमावर्ती इलाकों का संपर्क जिला मुख्यालय से कट गया।
रास्ता बंद होते ही कई वाहन और स्थानीय लोग जहां-तहां फंस गए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय आपदा प्रबंधन टीम, पुलिस प्रशासन और राहत कर्मियों को तुरंत मौके पर भेजा गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने सबसे पहले सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रभावित क्षेत्र के दोनों ओर से यातायात को रोक दिया ताकि तेज बहाव के कारण कोई दुर्घटना न होने पाए। इसके बाद नुकसान के विस्तार का शुरुआती जायजा लिया गया, जिसमें पाया गया कि रास्ते को दोबारा सामान्य करने के लिए बड़े पैमाने पर मरम्मत कार्य की आवश्यकता होगी।
प्रभावित क्षेत्रों में जरूरी सामान और दवाओं की सीधी आपूर्ति
समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सबसे ज्यादा चिंता इस बात पर व्यक्त की कि सड़क मार्ग कटने से गांवों में दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कमी न होने पाए। उन्होंने खाद्य आपूर्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग को विशेष निर्देश जारी किए कि तमकनाला के पार बसे गांवों और बस्तियों में राशन, पीने का साफ पानी, रसोई गैस और आवश्यक दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक रखा जाए।
यदि किसी जगह पर गाड़ियों के जरिए सामान पहुंचाना संभव न हो रहा हो, तो वहां वैकल्पिक माध्यमों से या राहत कर्मियों की मदद से सामान घर-घर तक पहुंचाया जाए। इसके अलावा, क्षेत्र के छोटे बच्चों के लिए दूध और बीमार या बुजुर्ग लोगों के लिए आपातकालीन दवाओं की उपलब्धता को प्राथमिकता पर रखने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित क्षेत्रों के आसपास एंबुलेंस और मेडिकल टीमों को तैयार रखें ताकि किसी भी आपात स्थिति में मरीजों को इलाज के लिए अस्पतालों तक आसानी से पहुंचाया जा सके।
अधिकारियों को सीधे ग्राउंड जीरो पर उतरने का सख्त आदेश
आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी और त्वरित बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर बहुत स्पष्ट निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि केवल दफ्तरों में बैठकर फाइलों और रिपोर्टों के जरिए आपदा राहत का संचालन नहीं किया जा सकता। जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों को खुद उस जगह पर पहुंचना होगा जहां नुकसान हुआ है, जिसे ग्राउंड जीरो कहा जाता है।
जब जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी खुद मौके पर मौजूद रहते हैं, तो वहां चल रहे काम की गति अपने आप तेज हो जाती है। इसके साथ ही, स्थानीय ग्रामीणों को भी यह अहसास होता है कि संकट की घड़ी में पूरी सरकार उनके साथ खड़ी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे प्रभावित परिवारों से सीधा संवाद करें, उनकी समस्याओं को समझें और मुआवजे या आर्थिक सहायता की प्रक्रिया को बिना किसी कागजी देरी के तुरंत पूरा करें।
युद्ध स्तर पर वैकल्पिक रास्ते का निर्माण शुरू
तमकनाला में मुख्य रास्ते का बड़ा भाग बह जाने के कारण तुरंत नया पक्का रास्ता बनाना संभव नहीं है। इसमें समय लग सकता है, लेकिन जनता की सुविधा और राहत सामग्री के परिवहन के लिए इंतजार नहीं किया जा सकता। इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर एक वैकल्पिक अस्थायी मोटर मार्ग बनाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है।
निर्माण कार्य के लिए भारी जेसीबी, पोकलैंड और अन्य जरूरी मशीनों को तमकनाला के दोनों छोर पर तैनात कर दिया गया है। लोक निर्माण विभाग और संबंधित एजेंसियों के इंजीनियर तथा कर्मचारी दिन-रात मेहनत करके पहाड़ी के किनारे नया कच्चा रास्ता तैयार कर रहे हैं। यद्यपि पहाड़ी इलाकों में खराब मौसम और लगातार गिरते मलबे के कारण काम में कई व्यावहारिक चुनौतियां आ रही हैं, फिर भी लक्ष्य यही है कि सबसे पहले छोटे और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही को तुरंत बहाल किया जाए।
ज्योतिर्मठ-मलारी मार्ग का विशेष सामाजिक और सामरिक महत्व
चमोली जिले में स्थित यह मार्ग केवल स्थानीय लोगों की आवाजाही तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका महत्व बहुत व्यापक है। यह सड़क भारत के अंतिम सीमावर्ती गांवों को मुख्यधारा से जोड़ती है। नीति घाटी और मलारी घाटी के दर्जनों गांवों के लोग अपने दैनिक कामकाज, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए इसी एक रास्ते पर पूरी तरह निर्भर हैं।
इसके अलावा, सामरिक दृष्टि से भी यह रास्ता बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसका उपयोग सुरक्षा बलों की आवाजाही और रसद पहुंचाने के लिए भी होता है। रास्ते के अवरुद्ध होने से पूरे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक गतिविधियां ठहर जाती हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार इस मार्ग की बहाली को साधारण सड़क निर्माण की तरह न देखकर एक अत्यंत आवश्यक और प्राथमिकता वाले काम के रूप में पूरा करा रही है।
संवेदनशील जगहों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने की हिदायत
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में अक्सर मानसून के समय या भारी जलप्रवाह के दौरान नदियां और बरसाती नाले अचानक विकराल रूप ले लेते हैं। तमकनाला में हुई घटना के बाद मुख्यमंत्री ने पूरे चमोली जिले के ऐसे सभी स्थानों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं जो भूस्खलन या बाढ़ के लिहाज से अति संवेदनशील हैं।
प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि वे इन संवेदनशील बिंदुओं पर 24 घंटे पहरा और निगरानी रखें। इसके लिए राज्य आपदा परिचालन केंद्र को अलर्ट पर रखा गया है और स्थानीय स्तर पर वॉचमैन व होमगार्ड के जवानों की तैनाती की गई है। यदि किसी नाले या नदी में जलस्तर अचानक बढ़ता हुआ दिखाई दे, तो तुरंत निचले इलाकों में चेतावनी जारी की जाए ताकि समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
प्रभावित ग्रामीणों के लिए सुरक्षित आश्रय और खान-पान की व्यवस्था
जिन परिवारों के मकान तमकनाला के उफान या भूस्खलन के खतरे की जद में आ गए हैं, उनके लिए सुरक्षित स्थानों पर रहने की व्यवस्था की जा रही है। जिला प्रशासन ने आसपास के सुरक्षित सरकारी भवनों, स्कूलों और पंचायत घरों को अस्थायी राहत शिविरों में बदल दिया है।
इन राहत शिविरों में विस्थापित लोगों के ठहरने, गर्म कपड़ों, भोजन और स्वच्छता का पूरा ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ किया है कि आपदा से प्रभावित किसी भी व्यक्ति या परिवार को किसी भी चीज की कमी महसूस नहीं होनी चाहिए। जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती और उनके घर सुरक्षित नहीं हो जाते, तब तक उनके रहने और खाने का पूरा खर्च प्रशासन द्वारा उठाया जाएगा।
भविष्य की सुरक्षा और स्थायी निर्माण पर भी ध्यान
तमकनाला की इस घटना से सीख लेते हुए सरकार अब केवल तात्कालिक राहत कार्यों तक सीमित नहीं रहना चाहती। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि तमकनाला और ऐसे अन्य पहाड़ी नालों के ऊपर बनने वाले पुलों और सड़कों के ढांचे का दोबारा वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए।
भविष्य में जब भी इस रास्ते का स्थायी पुननिर्माण कराया जाए, तो उसमें आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए ताकि भविष्य में अत्यधिक जलप्रवाह होने पर भी सड़क को नुकसान न पहुंचे। इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन को आपातकालीन फंड से तुरंत धनराशि खर्च करने के अधिकार दिए गए हैं ताकि पैसे की कमी की वजह से कोई भी राहत या निर्माण कार्य रुकने न पाए।
चमोली के तमकनाला में अत्यधिक जलप्रवाह से उत्पन्न हुई इस आपदा के बीच राज्य सरकार का त्वरित और सख्त रुख यह साबित करता है कि जनता की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री द्वारा खुद पूरी स्थिति पर नजर रखना, अधिकारियों को फील्ड में भेजना और युद्ध स्तर पर वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कराना राहत कार्यों को गति दे रहा है। राशन, दवाइयों और रोजमर्रा की वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति से प्रभावित ग्रामीणों को बड़ी राहत मिल रही है। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ ही दिनों में वैकल्पिक मार्ग तैयार हो जाएगा और तमकनाला क्षेत्र में जनजीवन एक बार फिर से पूरी तरह सामान्य हो सकेगा।


