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कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत का बड़ा एक्शन: बिना रजिस्ट्रेशन दोपहिया वाहन बेचने वाले शोरूम चालकों की खैर नहीं

कुमाऊं मंडल में सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने एक बेहद कड़ा और बड़ा फैसला लिया है। मंडल में लगातार बढ़ रही यातायात संबंधी अनियमितताओं और बिना नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ते नए दोपहिया वाहनों का संज्ञान लेते हुए कमिश्नर ने ऑटोमोबाइल डीलरों और शोरूम मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अब यदि कोई भी डीलर या शोरूम मालिक किसी ग्राहक को बिना वैध रजिस्ट्रेशन नंबर के गाड़ी की डिलीवरी देता है, तो उसके खिलाफ भारी-भरकम आर्थिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्षेत्रीय निरीक्षण के दौरान सामने आई गंभीर लापरवाही
कुमाऊं मंडल के विभिन्न जिलों और मैदानी व पर्वतीय क्षेत्रों के हालिया दौरे के दौरान आयुक्त दीपक रावत के सामने यह गंभीर बात उजागर हुई। निरीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि कई नए दोपहिया वाहन चालकों द्वारा बिना किसी रजिस्ट्रेशन नंबर, यहाँ तक कि बिना अस्थाई (टेंपरेरी) नंबर के भी सड़कों पर बेधड़क गाड़ियां दौड़ाई जा रही हैं।

जब प्रशासनिक स्तर पर इस मामले की गहराई से जांच की गई, तो यह पाया गया कि गाड़ी बेचते समय कई शोरूम मालिक और ऑटोमोबाइल डीलर ग्राहकों को नियमों के विपरीत तुरंत डिलीवरी दे देते हैं। ग्राहक को जल्द से जल्द गाड़ी देने की होड़ और अपने फायदे के चक्कर में डीलर परिवहन विभाग की अनिवार्य प्रक्रियाओं को दरकिनार कर देते हैं। इस लापरवाही के कारण सड़कों पर बिना पहचान वाले वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

सड़क सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए बना बड़ा खतरा
यातायात नियमों और मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, भारतीय सड़कों पर बिना वैध रजिस्ट्रेशन नंबर के किसी भी प्रकार के वाहन का संचालन पूरी तरह से गैर-कानूनी और प्रतिबंधित है। बिना नंबर के वाहन न केवल सड़क सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा करते हैं, बल्कि राज्य की कानून व्यवस्था के लिए भी एक बड़ी चुनौती साबित होते हैं।

दुर्घटनाओं के मामलों में पहचान की कठिनाई: यदि कोई बिना नंबर की गाड़ी सड़क दुर्घटना का शिकार होती है या किसी पैदल यात्री को टक्कर मारकर भाग जाती है, तो सीसीटीवी कैमरों या प्रत्यक्षदर्शियों के जरिए वाहन और उसके मालिक की पहचान करना लगभग असंभव हो जाता है।
अपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल: बिना नंबर प्लेट वाले वाहनों का इस्तेमाल असामाजिक और आपराधिक तत्वों द्वारा चोरी, लूटपाट, और अन्य अवैध गतिविधियों में किए जाने की संभावना सबसे अधिक होती है, क्योंकि इन्हें ट्रैक करना पुलिस के लिए कठिन होता है।
हिट एंड रन मामले: पीड़ित परिवार को कानूनी न्याय और बीमा दावा मिलने में भारी अड़चनों का सामना करना पड़ता है।
इस गंभीर स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए ही कुमाऊं कमिश्नर ने प्रशासनिक स्तर पर यह कड़ा रुख अपनाया है।

डीलरों पर लगेगा लाइफ टाइम टैक्स का 15 गुना जुर्माना
प्रशासन ने इस बार सीधे वाहन खरीदारों के बजाय उन ऑटोमोबाइल डीलरों पर शिकंजा कसा है जो नियमों की अनदेखी करके गाड़ियां बेच रहे हैं। आयुक्त ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है कि वाहन बेचने वाले डीलरों की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है कि वे गाड़ी को शोरूम की चौखट से बाहर (सड़क पर) निकालने से पहले उसका रजिस्ट्रेशन और नंबर आवंटन पूरा कराएं।

यदि कोई भी ऑटोमोबाइल डीलर इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो उस पर संबंधित वाहन के लाइफ टाइम टैक्स का 15 गुना जुर्माना लगाया जाएगा।

यह पेनल्टी की राशि इतनी बड़ी है कि नियमों की अनदेखी करने वाले डीलरों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी वाहन का रोड टैक्स कई हजार रुपये बनता है, तो उसका 15 गुना जुर्माना लाखों रुपये में पहुंचेगा। प्रशासन का मानना है कि केवल मौखिक हिदायत देने से बात नहीं बनेगी, इस प्रकार की कड़क और भारी आर्थिक कार्रवाई से ही लापरवाही बरतने वाले वाहन विक्रेताओं पर प्रभावी लगाम कसी जा सकती है।

परिवहन अधिकारियों को 7 दिन का कड़ा अल्टीमेटम
आयुक्त दीपक रावत ने इस संबंध में केवल निर्देश ही जारी नहीं किए हैं, बल्कि विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही भी तय कर दी है। उन्होंने हल्द्वानी (नैनीताल) और अल्मोड़ा के संभागीय परिवहन अधिकारियों (RTO) और सहायक संभागीय परिवहन अधिकारियों (ARTO) को तुरंत एक्शन मोड में आने के सख्त निर्देश दिए हैं।
कमिश्नर द्वारा दिए गए प्रमुख निर्देश:
सघन चेकिंग अभियान: RTO और ARTO अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों के मैदानी और पहाड़ी मार्गों पर विशेष चेकिंग अभियान चलाएं और ऐसे सभी वाहनों को चिन्हित करें जो बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के चल रहे हैं।
डीलरों की बैक-ट्रैकिंग: पकड़े गए वाहनों के चेसिस नंबर और कागजात से यह पता लगाया जाए कि यह गाड़ी किस शोरूम से और किस डीलर द्वारा बिना नंबर के बेची गई है।
तत्काल कानूनी कार्रवाई: दोषी पाए जाने वाले ऑटोमोबाइल डीलरों के खिलाफ नियमों के तहत तत्काल चालान और नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जाए।
7 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करना: पूरी जांच और इस अभियान के तहत की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट 07 दिनों के भीतर आयुक्त कार्यालय में अनिवार्य रूप से जमा करनी होगी।
समय सीमा तय हो जाने से अब परिवहन विभाग के अधिकारियों के पास ढिलाई बरतने की कोई गुंजाइश नहीं बची है और उन्हें जल्द से जल्द धरातल पर ठोस कार्रवाई करके दिखानी होगी।

मोटर वाहन अधिनियम के तहत क्या हैं नियम?
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार, भारत में कोई भी वाहन निर्माता या डीलर किसी भी खरीदार को बिना ट्रेड प्रमाण पत्र और बिना वाहन का रजिस्ट्रेशन/अस्थाई रजिस्ट्रेशन नंबर आवंटित किए डिलीवरी नहीं दे सकता।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के संशोधित नियमों के तहत अब गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन ट्रेड सर्टिफिकेट धारक डीलरों के माध्यम से ऑनलाइन ही कर दिया जाता है। नंबर अलॉट होने और नंबर प्लेट लगने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही वाहन को सड़क पर चलाने की अनुमति होती है। जो डीलर बिना इस प्रक्रिया के वाहन बाहर भेजते हैं, वे सीधे तौर पर मोटर वाहन अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हैं।

सड़क सुरक्षा और पारदर्शी व्यवस्था को प्राथमिकता
इस पूरी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना या राजस्व बढ़ाना नहीं है, बल्कि आम जनता की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
सख्त नियम लागू होने से जहां एक तरफ सरकार को मिलने वाले रोड टैक्स और राजस्व के नुकसान (Tax Evasion) पर रोक लगेगी, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर चलने वाले आम यात्रियों और पैदल चलने वालों की सुरक्षा भी मजबूत होगी। जब हर वाहन का सही रिकॉर्ड परिवहन विभाग और पुलिस के पास दर्ज होगा, तो यातायात व्यवस्था अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी।

वाहन खरीदारों और शोरूम मालिकों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश
इस नए प्रशासनिक आदेश के बाद वाहन खरीदारों और शोरूम मालिकों दोनों के लिए कुछ अत्यंत आवश्यक बातें ध्यान रखना जरूरी हैं:
1. वाहन खरीदारों (Buyers) के लिए:
बिना नंबर गाड़ी न लें: शोरूम से नया दोपहिया या चौपहिया वाहन लेते समय इस बात पर जोर दें कि आपको नंबर अलॉटमेंट का प्रमाण पत्र या HSRP नंबर प्लेट लगाकर ही गाड़ी दी जाए।
कानूनी जोखिम से बचें: बिना नंबर के गाड़ी सड़क पर ले जाने पर पुलिस या RTO द्वारा गाड़ी सीज की जा सकती है, जिसका खामियाजा ग्राहक को भी भुगतना पड़ सकता है।
बीमा का खतरा: यदि बिना रजिस्ट्रेशन नंबर की गाड़ी का दुर्घटना में नुकसान होता है, तो बीमा कंपनियां (Insurance Companies) क्लेम खारिज कर सकती हैं।
2. शोरूम मालिकों और डीलरों (Dealers) के लिए:
नियमों का पालन अनिवार्य: गाड़ी की डिलीवरी से पहले उसका रजिस्ट्रेशन प्रोसेस पूरा करना सुनिश्चित करें।
15 गुना पेनल्टी का खतरा: किसी भी ग्राहक के दबाव या जल्दबाजी के चक्कर में बिना नंबर गाड़ी बाहर न निकालें, अन्यथा 15 गुना भारी टैक्स जुर्माना भरना पड़ेगा।
ट्रेड लाइसेंस पर खतरा: बार-बार नियम तोड़ने वाले डीलरों का ट्रेड सर्टिफिकेट और शोरूम का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।

धरातल पर बदलाव की उम्मीद
प्रशासन का यह कड़ा रुख उत्तराखंड राज्य में एक सुरक्षित, अनुशासित और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था बनाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत की इस सख्ती से उन डीलरों में हड़कंप मच गया है जो अब तक कागजी प्रक्रियाओं को दरकिनार कर वाहनों की धड़ल्ले से बिक्री कर रहे थे।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि परिवहन विभाग के अधिकारी इस 7 दिन के अल्टीमेटम के दौरान कितनी मुस्तैदी से कार्रवाई करते हैं। हालांकि, इस फैसले ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि आम जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले और नियमों को ताक पर रखकर व्यापार करने वाले शोरूम चालकों की अब कुमाऊं मंडल में बिल्कुल खैर नहीं है।

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