
अजय सिंह
रुद्रपुर: तराई केंद्रीय वन प्रभाग के जंगल इन दिनों लकड़ी तस्करों के लिए ‘सेफ हेवन’ बनते जा रहे हैं। हल्द्वानी और टांडा रेंज के बाद अब पीपल पड़ाव रेंज से भी अवैध कटान के तार जुड़ने लगे हैं, जिसने वन विभाग की सुरक्षा दावों की पोल खोल कर रख दी है।
ताजा मामले में, टांडा और पीपल पड़ाव रेंज की संयुक्त टीम ने सीमा पार उत्तर प्रदेश के रामपुर (स्वार क्षेत्र) में छापेमारी कर करीब एक लाख रुपये कीमत की आठ गिल्टे अवैध सागौन की लकड़ी बरामद की। हालांकि, हमेशा की तरह तस्कर वन विभाग की आहट पाकर भागने में सफल रहे। यह कार्रवाई वन क्षेत्राधिकारी रूपनारायण गौतम के नेतृत्व में की गई। विभाग ने अज्ञात तस्करों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बड़ा सवाल: सिर्फ लकड़ी की जब्ती कब तक?
वन विभाग भले ही अपनी पीठ थपथपा ले, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि तस्कर हर बार चकमा देकर निकल जाते हैं। सवाल उठता है कि क्या विभाग का सूचना तंत्र लीक हो रहा है? सिर्फ माल बरामद करना काफी नहीं है; जब तक इस सिंडिकेट के सरगनाओं को सलाखों के पीछे नहीं भेजा जाता, तब तक तराई के कीमती जंगल सुरक्षित नहीं हैं।