पुष्कर सिंह धामी ने अपने शासकीय निवास पर एक विशेष और गरिमापूर्ण कार्यक्रम का आयोजन कर ग्लासगो, स्कॉटलैंड में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में देश और राज्य का नाम रोशन करने वाले एथलीटों तथा उनके कोचों को सम्मानित किया। अंतर्राष्ट्रीय खेल मंच पर उत्तराखंड की प्रतिभा का लोहा मनवाने वाले इन खिलाड़ियों की सफलता को राज्य के लिए एक ऐतिहासिक पल बताते हुए, उन्होंने सभी विजेताओं और उनके मार्गदर्शकों को हार्दिक बधाई दी। इस अवसर पर खेल जगत से जुड़ी हस्तियां और शासन के प्रमुख लोग मौजूद रहे, जिन्होंने खिलाड़ियों के योगदान की जमकर सराहना की।
इस सम्मान समारोह के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री ने एथलीटों के प्रदर्शन को देश का मान बढ़ाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि ग्लासगो में मिली यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि उत्तराखंड की माटी में अपार खेल प्रतिभाएं छिपी हुई हैं। सही दिशा, कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयास के बल पर राज्य के युवा किसी भी वैश्विक मंच पर तिरंगा फहराने में सक्षम हैं। खिलाड़ियों को दिए गए इस सम्मान का मुख्य उद्देश्य न केवल उनकी मेहनत को पहचान देना है, बल्कि राज्य के बाकी युवाओं को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।
मेहनत, अनुशासन और लगन का परिणाम
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों ने अपनी इस सफलता के पीछे सालों की कड़ी मेहनत, कड़ा अनुशासन और अटूट संकल्प को मुख्य वजह बताया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में दुनिया भर के शीर्ष खिलाड़ियों का सामना करना आसान नहीं होता, लेकिन उत्तराखंड के इन होनहारों ने हर चुनौती को पार करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
खिलाड़ियों ने अपनी खेल यात्रा के दौरान कई कठिनाइयों का सामना किया, लेकिन उनके मन में देश का नाम ऊंचा करने की जो इच्छा थी, उसने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन एथलीटों ने जो सफलता पाई है, वह केवल खेल के पदकों तक सीमित नहीं है। यह जीत राज्य के हर उस युवा के लिए उम्मीद की एक नई किरण है, जो अपने जीवन में कुछ बड़ा हासिल करने का सपना देखता है। यह उपलब्धि यह दर्शाती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।
राज्य के युवाओं के लिए बना प्रेरणा का स्रोत
वैश्विक मंच पर मिली इस शानदार जीत का असर उत्तराखंड के पूरे खेल माहौल पर देखने को मिल रहा है। जब कोई खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराता है, तो उसकी गूंज गांव और कस्बों तक सुनाई देती है। इन एथलीटों की सफलता से राज्य के उन हजारों युवाओं को नया आत्मविश्वास मिला है, जो संसाधनों के अभाव या अन्य वजहों से पीछे हट जाते थे।
इस अवसर पर यह बात सामने आई कि इन खिलाड़ियों की जीत ने यह साबित कर दिया है कि लगन और सही मार्गदर्शन से कोई भी मुकाम पाया जा सकता है। खेल केवल शारीरिक विकास का माध्यम नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति में नेतृत्व क्षमता, धैर्य और टीम वर्क जैसे महत्वपूर्ण गुणों का विकास भी करता है। मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि इन विजेताओं की कहानियां आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक का काम करेंगी और राज्य में खेल संस्कृति को और अधिक मजबूती प्रदान करेंगी।
समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियां और एथलीट
शासकीय आवास पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में खेल और राजनीति जगत की कई प्रमुख हस्तियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए विशेष रूप से कैबिनेट मंत्री श्रीमती रेखा आर्या उपस्थित रहीं। उन्होंने खिलाड़ियों की इस उपलब्धि की भरपूर प्रशंसा की और खेल विभाग द्वारा खिलाड़ियों को दी जा रही सुविधाओं के बारे में जानकारी दी।
सम्मानित होने वाले मुख्य एथलीटों में पैरा खेल स्पर्धा में देश का मान बढ़ाने वाले शुभम जुयाल शामिल थे। उनकी इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने यह साबित कर दिया कि शारीरिक बाधाएं कभी भी बुलंद हौसलों के आगे टिक नहीं सकतीं। उनके साथ ही जूडो के क्षेत्र में देश को पहचान दिलाने वाली प्रतिभावान खिलाड़ी उन्नति शर्मा को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इन दोनों खिलाड़ियों ने अपने-अपने खेल में जो समर्पण दिखाया है, उसकी हर किसी ने दिल खोलकर तारीफ की।
कोच और मार्गदर्शकों का महत्वपूर्ण योगदान
किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे उसके कोच की वर्षों की तपस्या और मार्गदर्शन होता है। मैदान पर दिखने वाली चमक के पीछे पर्दे के पीछे काम करने वाले इन गुरुओं का सबसे बड़ा योगदान होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए समारोह में खिलाड़ियों के साथ-साथ उनके प्रशिक्षकों को भी विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
सम्मानित होने वाले मुख्य कोचों में श्री राकेश सिंह रावत, श्री सतीश चन्द्र शर्मा, श्री पुनेश कुमार सिंह और श्री खीमानन्द बेलवाल शामिल रहे। मुख्यमंत्री ने इन सभी प्रशिक्षकों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया और कहा कि एक बेहतरीन खिलाड़ी का निर्माण करना किसी शिल्पकार की कला से कम नहीं है। इन कोचों ने खिलाड़ियों की प्रतिभा को पहचाना, उन्हें सही दिशा दी, उनकी कमियों को सुधारा और उन्हें वैश्विक स्तर की प्रतियोगिताओं के लायक बनाया। इन प्रशिक्षकों का यह निस्वार्थ प्रयास ही है, जिसकी बदौलत आज राज्य के खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय फलक पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं।
उत्तराखंड में खेल का नया भविष्य
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में मिली यह सफलता उत्तराखंड के खेल इतिहास में एक नया पन्ना जोड़ती है। राज्य सरकार लगातार खेल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और ग्रामीण इलाकों से प्रतिभाओं को खोजकर बाहर लाने के लिए काम कर रही है। खिलाड़ियों और कोचों को शासकीय स्तर पर मिलने वाला यह सम्मान खेल के प्रति राज्य की गंभीर सोच को दिखाता है।
जब राज्य के शीर्ष नेतृत्व द्वारा खिलाड़ियों का इस तरह से हौसला बढ़ाया जाता है, तो इससे खिलाड़ियों का मनोबल कई गुना बढ़ जाता है। आने वाले समय में इस तरह के आयोजनों से राज्य के अन्य उदीयमान खिलाड़ियों को भी नई ऊर्जा मिलेगी, जिससे वे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित होंगे।
उत्तराखंड के इन होनहारों ने यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में भी देश का नाम इसी तरह रोशन करते रहेंगे। उनकी यह जीत केवल एक पदक की जीत नहीं है, बल्कि यह राज्य के गौरव, मेहनत और कभी न हार मानने वाले जज्बे की जीत है।


