पुष्कर सिंह धामी, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, ने राज्य के जाने-माने लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी को उनके जन्मदिन पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। देहरादून में आयोजित ‘संस्कृति सम्मान समारोह’ के दौरान मुख्यमंत्री ने लोक कला और संगीत के क्षेत्र में नरेंद्र सिंह नेगी के अतुलनीय योगदान की जमकर तारीफ की। इस खास मौके पर उन्होंने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी ने अपने गीतों के जरिए उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और जनजीवन को एक नई पहचान दी है। उनकी आवाज में राज्य की मिट्टी की खुशबू है, जिसने हर उत्तराखंडी के दिल को छुआ है।
देहरादून में आयोजित यह सांस्कृतिक कार्यक्रम पूरी तरह से राज्य की लोक कला और परंपराओं को समर्पित था। इसमें कला, साहित्य और समाज के कई बड़े दिग्गजों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह से उत्तराखंडी संस्कृति के रंग में रंगा हुआ था। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर नरेंद्र सिंह नेगी के लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना की, ताकि वे आने वाले कई सालों तक अपनी गायकी से राज्य की सेवा करते रहें और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते रहें।
‘माउंटेन मेलोडीज ऑफ नरेंद्र सिंह नेगी’ पुस्तक का हुआ शानदार विमोचन
इस गरिमामयी समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों पर आधारित एक विशेष पुस्तक का विमोचन रहा। इस पुस्तक का नाम “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” है। यह पुस्तक नरेंद्र सिंह नेगी के प्रसिद्ध और लोकप्रिय गीतों के अंग्रेजी अनुवाद का एक सुंदर संग्रह है। इस किताब के जरिए उत्तराखंड के लोक संगीत और सांस्कृतिक संदेश को केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में नए पाठकों तक पहुंचाया जा सकेगा।
पुस्तक का विमोचन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह किताब एक मील का पत्थर साबित होगी। जो लोग उत्तराखंडी भाषा या बोली को सीधे तौर पर नहीं समझ पाते, वे भी अब इस पुस्तक के माध्यम से यहां के पहाड़ों के दर्द, सुंदरता, संस्कृति और परंपराओं को गहराई से महसूस कर सकेंगे। यह पहल राज्य की लोककला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने में बहुत मददगार साबित होगी।
‘माउंटेन मेलोडीज’ पुस्तक की विशेषताएं और महत्व
नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” केवल एक साहित्यिक कृति नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की संस्कृति को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक बहुत बड़ा और प्रभावी कदम है।
इस पुस्तक की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
वैश्विक पहुंच: यह पुस्तक उन लोगों के लिए एक बेहतरीन माध्यम है जो गढ़वाली या कुमाऊंनी बोली-भाषा नहीं जानते, लेकिन उत्तराखंड के लोक साहित्य और सोच को समझना चाहते हैं।
संस्कृतिक भाषान्तरण: गीतों का अंग्रेजी में अनुवाद इस प्रकार किया गया है कि मूल भाव, संवेदना और पर्वतीय जीवन की प्रासंगिकता पूरी तरह बनी रहे।
शोधार्थियों के लिए उपयोगी: लोक कला, संस्कृति और पर्वतीय जीवन पर अध्ययन करने वाले शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए यह पुस्तक एक प्रामाणिक संदर्भ ग्रंथ के रूप में कार्य करेगी।
सांस्कृतिक धरोहर का दस्तावेज: इस पुस्तक के माध्यम से नेगी जी के ऐतिहासिक गीतों को भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक लिखित दस्तावेज के रूप में सुरक्षित कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पुस्तक के विमोचन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयास हमारी लोककला को राज्य की सीमाओं से बाहर निकालकर अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध होते हैं।
ताई तुगुंग को मिला ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’
कार्यक्रम के दौरान केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के पूर्वोत्तर राज्य की महान प्रतिभा को भी सम्मानित किया गया। अरुणाचल प्रदेश के मशहूर अभिनेता, रंगकर्मी और नाटककार ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ से नवाजा गया। कला और मंच के क्षेत्र में उनके बेहतरीन काम और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान दिया गया।
ताई तुगुंग को यह सम्मान मिलने से पूर्वोत्तर और उत्तरी भारत के बीच सांस्कृतिक संबंध और भी मजबूत हुए हैं। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि कला की कोई सीमा नहीं होती और यह विभिन्न राज्यों तथा संस्कृतियों को आपस में जोड़ने का सबसे मजबूत माध्यम है। अरुणाचल प्रदेश के किसी कलाकार को उत्तराखंड में आयोजित इस समारोह में सम्मानित किया जाना इस बात का जीता-जागता सबूत है।
लोकभाषा और लोककला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में नेगी जी का योगदान
उत्तराखंड की लोकभाषा, लोककला और सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने में नरेंद्र सिंह नेगी की भूमिका बहुत बड़ी रही है। उन्होंने अपने लंबे संगीतमय सफर में सैकड़ों ऐसे गीत गाए हैं जो केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं, बल्कि वे उत्तराखंड के इतिहास, सामाजिक मुद्दों, प्रकृति और जन-भावनाओं का सजीव दस्तावेज हैं।
उनकी स्वर-साधना केवल संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अपनी जड़ों के प्रति अगाध प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। आज जब नई पीढ़ी आधुनिकता के दौर में अपनी पुरानी परंपराओं से दूर होती दिख रही है, तब नरेंद्र सिंह नेगी के गीत युवाओं को अपनी मिट्टी और संस्कृति से जोड़ने का एक मजबूत काम करते हैं। उनका काम आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण और संवर्धन
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि राज्य सरकार उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को बचाने और उसे आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। राज्य के लोक कलाकारों, साहित्यकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं को हर संभव मदद दी जाएगी ताकि उत्तराखंड की समृद्ध परंपराएं कभी धुंधली न पड़ें।
समारोह में उपस्थित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी अपने विचार रखे और नरेंद्र सिंह नेगी के जीवन सफर पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह नेगी जी ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी लोककला का साथ नहीं छोड़ा और हमेशा पहाड़ों की आवाज बनकर उभरे। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने नरेंद्र सिंह नेगी को बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उत्तराखंडी संस्कृति और लोकसंगीत की विकास यात्रा
उत्तराखंड की सांस्कृतिक यात्रा में लोकसंगीत का हमेशा से एक केंद्रीय स्थान रहा है। पर्वतीय अंचल के जीवन, वहां के संघर्ष, प्राकृतिक सौंदर्य और सामाजिक बदलावों को अभिव्यक्ति देने का काम यहां के लोकगीतों ने किया है। इस पूरी यात्रा में नरेंद्र सिंह नेगी का योगदान एक ऐसा अध्याय है जिसने उत्तराखंडी लोकसंगीत को नया आयाम और सम्मान दिलाया।
दशकों पूर्व जब साधन सीमित थे और लोककला को व्यापक मंच मिलना कठिन था, तब नेगी जी ने अपनी संवेदनशील लेखनी और सुरीली आवाज के बल पर उत्तराखंड के जन-जन के हृदय में जगह बनाई। उनके गीतों में केवल मनोरंजन का तत्व नहीं होता, बल्कि वे पहाड़ की कठोर जीवनशैली, पलायन की पीड़ा, महिलाओं का संघर्ष और युवाओं की आकांक्षाओं को बहुत ही बारीकी से उजागर करते हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा आयोजित इस सम्मान समारोह का मुख्य उद्देश्य भी यही था कि इस समृद्ध विरासत को सम्मानित किया जाए और नई पीढ़ी को इसके ऐतिहासिक महत्व से अवगत कराया जाए।
अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक आदान-प्रदान: अरुणाचल प्रदेश और उत्तराखंड का मिलन
समारोह में अरुणाचल प्रदेश के प्रसिद्ध रंगकर्मी, अभिनेता और नाटककार ताई तुगुंग को ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान-2026’ से सम्मानित किया जाना इस कार्यक्रम की एक बड़ी उपलब्धि रही। भारत एक विविधतापूर्ण देश है और इसके विभिन्न राज्यों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने का सबसे सशक्त जरिया है।
पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक समृद्धता और उत्तराखंड के पर्वतीय लोकजीवन में कई समानताएं देखने को मिलती हैं। दोनों ही क्षेत्र प्रकृति के करीब हैं और वहां की कला-परंपराओं में मिट्टी से जुड़ाव साफ नजर आता है। ताई तुगुंग को यह सम्मान प्रदान करके उत्तराखंड ने न केवल उनकी कला का आदर किया है, बल्कि पूर्वोत्तर और उत्तरी राज्यों के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक पुल का निर्माण भी किया है। इस प्रकार के सम्मान समारोह कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे से जोड़ने और अपनी कलात्मक विधाओं का आदान-प्रदान करने का अवसर देते हैं।
नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा और राज्य सरकार के प्रयास
आज के डिजिटल और आधुनिक युग में जब युवा वर्ग वैश्विक संस्कृति से तेजी से प्रभावित हो रहा है, तब अपनी मूल भाषा, बोली और परंपराओं को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस संदर्भ में नरेंद्र सिंह नेगी जैसे महान कलाकारों का जीवन और उनका कार्य युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है।
राज्य सरकार ने इस बात पर जोर दिया है कि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को संजोने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
लोक कलाकारों का प्रोत्साहन: राज्य के उदीयमान और वरिष्ठ लोक कलाकारों को आर्थिक सहायता, पेंशन और सम्मान देने की योजनाएं।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन: राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड के लोक उत्सवों और कला मेलों का नियमित आयोजन।
लोकभाषा का संरक्षण: विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में स्थानीय बोलियों और लोक साहित्य को बढ़ावा देने के प्रयास।
डिजिटल अभिलेखीकरण: राज्य के पारंपरिक संगीत, लोकगाथाओं और नृत्य रूपों को डिजिटल माध्यमों से भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की यह स्पष्ट नीति है कि विकास के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
देहरादून में आयोजित यह ‘संस्कृति सम्मान समारोह’ केवल एक जन्मदिन की बधाई या सम्मान देने तक सीमित कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना का एक उत्सव था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति और उनके विचारों ने यह स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार अपनी लोककला और साहित्यकारों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है।
नरेंद्र सिंह नेगी के लोकगीतों की गूंज और उनकी स्वर-साधना हमेशा उत्तराखंड के पहाड़ों, घाटियों और लोगों के दिलों में जीवंत रहेगी। ‘माउंटेन मेलोडीज’ पुस्तक का विमोचन और ताई तुगुंग का सम्मान इस बात का प्रतीक है कि उत्तराखंड की संस्कृति अब अपनी सीमाओं को पार कर व्यापक पहचान बना रही है। यह आयोजन निश्चित रूप से राज्य की भावी पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और अपनी लोककला पर गर्व करने की प्रेरणा देगा।


