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बी. डी. खर्कवाल के पार्थिव शरीर पर SSP डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने अर्पित की श्रद्धांजलि, नैनीताल पुलिस ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर

आर्यन सिंह, हल्द्वानी: बी. डी. खर्कवाल का निधन पुलिस महकमे के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है जिसकी भरपाई होना बेहद कठिन है। असम कैडर के 1959 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और असम के पूर्व पुलिस महानिदेशक बी. डी. खर्कवाल ने 90 वर्ष की आयु में 17 सितंबर 2026 की सुबह इस दुनिया को अलविदा कह दिया। मूल रूप से उत्तराखंड से ताल्लुक रखने वाले इस दिग्गज अधिकारी ने लंबी बीमारी के बाद हल्द्वानी स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। उनके जाने की खबर मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक महकमे में शोक की लहर दौड़ गई। उत्तराखंड पुलिस प्रमुख दीपम सेठ ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे एक पूरे युग का अंत करार दिया। बी. डी. खर्कवाल का जीवन साहस, दूरदर्शिता और राष्ट्र सेवा का एक ऐसा मिसाल रहा है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान
पूर्वोत्तर भारत में जब अशांति और उग्रवाद का दौर चरम पर था, तब बी. डी. खर्कवाल ने अत्यंत सूझबूझ और दृढ़ता के साथ राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाली थी। सेवानिवृत्ति के पश्चात वह हल्द्वानी के जज फार्म स्थित अपने निवास पर परिवार के साथ रह रहे थे। उनके निधन की खबर से न केवल उत्तराखंड बल्कि असम और मेघालय पुलिस बल में भी शोक का माहौल है। पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक सहयोगियों और स्थानीय नागरिकों ने उनके बहुमूल्य योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उनका जाना एक ऐसे मार्गदर्शक का चले जाना है जिसने जीवन भर देश की सेवा को सर्वोपरि रखा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने में अपनी अहम भूमिका निभाई।

पूर्वोत्तर में उग्रवाद के खिलाफ बी. डी. खर्कवाल की ऐतिहासिक भूमिका
बी. डी. खर्कवाल ने अपने लंबे और गौरवशाली सेवाकाल के दौरान कई कठिन परिस्थितियों का सामना किया। नब्बे के दशक में जब असम उग्रवाद की भारी समस्या से जूझ रहा था, तब उन्होंने कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाने में सबसे प्रमुख भूमिका निभाई थी। नवंबर 1990 के दौरान जब असम में उग्रवादी संगठन के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया गया था, तब वह गुवाहाटी में केंद्रीय खुफिया अधिकारियों के साथ इस पूरे अभियान की योजना बनाने वाले मुख्य अधिकारियों में शामिल थे। उनकी रणनीति और जमीनी हकीकत की गहरी समझ ने उस दौर में सुरक्षा बलों को भारी सफलता दिलाई थी।

असम पुलिस महानिदेशक के रूप में पुलिस बल का सफल मार्गदर्शन
उनकी काबिलियत और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए वर्ष 1993 से 1994 के दौरान उन्हें असम पुलिस महानिदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई। राज्य के पुलिस प्रमुख के रूप में उन्होंने न केवल उग्रवादी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया, बल्कि पुलिस बल के मनोबल को भी नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। असम-मेघालय पुलिस बल में उन्हें आज भी एक सख्त, निष्पक्ष और संवेदनशील अधिकारी के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान दर्जनों युवा अधिकारियों का मार्गदर्शन किया, जो आगे चलकर देश के विभिन्न हिस्सों में उच्च पदों पर आसीन हुए।

देवभूमि उत्तराखंड और कुमाऊं से बी. डी. खर्कवाल का अटूट रिश्ता
भले ही बी. डी. खर्कवाल का मुख्य कार्यक्षेत्र असम और पूर्वोत्तर भारत रहा, लेकिन अपनी जड़ों यानी उत्तराखंड से उनका लगाव हमेशा बना रहा। उन्होंने अपने सेवाकाल के दौरान उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई थी। उन्होंने रानीखेत में सीमा सुरक्षा बल के भीतर अपनी सेवाएं दीं और इसके साथ ही नैनीताल में गुप्तचर संस्था के महत्वपूर्ण पद पर तैनात रहे। इन तैनातियों के दौरान उन्होंने क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय गुप्तचर तंत्र को धार देने में अहम भूमिका निभाई थी।

सेवानिवृत्ति के बाद हल्द्वानी में प्रशासनिक अधिकारियों का मार्गदर्शन
सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने हल्द्वानी को अपना आशियाना बनाया। वह हल्द्वानी के धान मिल, जज फार्म स्थित अपने घर में अपने परिवार के साथ जीवन व्यतीत कर रहे थे। स्थानीय लोगों के साथ उनका व्यवहार बेहद सरल और आत्मीय था। प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के लिए उनका घर ज्ञान और अनुभव का एक केंद्र हुआ करता था। जहां भी सुरक्षा या कानून-व्यवस्था से जुड़े जटिल मुद्दों पर सलाह की जरूरत होती, वरिष्ठ अधिकारी उनके पास मार्गदर्शन के लिए पहुंचते थे। उनका जाना हल्द्वानी और पूरे कुमाऊं क्षेत्र के लिए एक व्यक्तिगत क्षति जैसा है।

हल्द्वानी आवास पर पुलिस महकमे द्वारा भावभीनी श्रद्धांजलि
दिवंगत पूर्व पुलिस महानिदेशक बी. डी. खर्कवाल के निधन की सूचना मिलते ही वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी उनके हल्द्वानी स्थित आवास पर जुटने लगे। नैनीताल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉक्टर मंजूनाथ टी. सी. ने दिवंगत अधिकारी के निवास पर पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और शोकाकुल परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने बी. डी. खर्कवाल द्वारा देश और पुलिस बल के लिए दी गई सेवाओं को याद करते हुए कहा कि उनका समर्पण हम सभी के लिए एक मार्गदर्शक का काम करेगा।

चित्रशिला घाट पर गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम संस्कार
इस दौरान पुलिस महकमे, सशस्त्र सीमा बल और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों ने उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम सलामी दी। जवानों द्वारा दिए गए इस विशेष सम्मान के दौरान वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को रानीबाग स्थित चित्रशिला घाट ले जाया गया। वहां पूर्ण सैन्य और पुलिस सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। अंतिम यात्रा में पुलिस और नागरिक प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक शामिल हुए, जिन्होंने नम आंखों से इस महान सपूत को अपनी अंतिम विदाई दी।

उत्तराखंड पुलिस प्रमुख दीपम सेठ एवं अन्य अधिकारियों की संवेदनाएं
बी. डी. खर्कवाल के निधन पर उत्तराखंड पुलिस के महानिदेशक दीपम सेठ ने अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बी. डी. खर्कवाल का जाना पूरी पुलिस बिरादरी के लिए एक बहुत बड़ा झटका है। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में जिस साहस और कुशलता से उन्होंने पुलिस बल का नेतृत्व किया, वह मिसाली है। उनका जीवन ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और अनुशासन का बेहतरीन उदाहरण था।

प्रशासनिक एवं सुरक्षा बलों के शीर्ष अधिकारियों द्वारा शोक व्यक्त
शोक जताने वालों में सशस्त्र सीमा बल की 57वीं वाहिनी के सेनानायक गंगा सिंह उदावत और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के उप सेनानायक अजय प्रताप सिंह भी शामिल रहे। इसके अलावा नैनीताल जिले के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी जैसे नगर पुलिस अधीक्षक मनोज कुमार कत्याल, अपर पुलिस अधीक्षक अमित सैनी, प्रतिसार निरीक्षक हरकेश सिंह, गुप्तचर निरीक्षक ज्ञानेंद्र शर्मा, और कई थाना प्रभारियों ने उपस्थित होकर अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि समर्पित की। सभी अधिकारियों ने एक स्वर में माना कि बी. डी. खर्कवाल जैसी शख्सियतें सदियों में कभी-कभी ही जन्म लेती हैं।

अनुशासित पारिवारिक पृष्ठभूमि और गरिमापूर्ण पारिवारिक विरासत
बी. डी. खर्कवाल का पारिवारिक जीवन भी उतना ही अनुशासित और गरिमापूर्ण रहा जितना कि उनका पेशेवर जीवन। अपने पीछे वह अपनी धर्मपत्नी श्रीमती निर्मला, एक पुत्र और एक पुत्री का रोता-बिलखता परिवार छोड़ गए हैं। उनके पुत्र अमिताभ खर्कवाल भी अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए देश सेवा में समर्पित रहे। वह भारतीय डाक सेवा के सर्वोच्च पद यानी महानिदेशक पद की जिम्मेदारी संभालने के बाद वर्ष 2024 में ही सेवानिवृत्त हुए हैं।

दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना और अंतिम नमन
पूरे परिवार ने बी. डी. खर्कवाल के उच्च मूल्यों और आदशों को हमेशा बनाए रखा। परिजनों के अनुसार, वह अंतिम समय तक देश और समाज के घटनाक्रमों में रुचि लेते रहे और हमेशा पुलिस बल के कल्याण की बात सोचते थे। उनके निधन से पूरा परिवार और परिचित गहरे शोक में हैं। नैनीताल पुलिस और उत्तराखंड पुलिस प्रशासन ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की है और शोकाकुल परिवार को इस बेहद कठिन और दुखद घड़ी को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की है। बी. डी. खर्कवाल का नाम भारत के पुलिस इतिहास में हमेशा सुनहरे अक्षरों में दर्ज रहेगा।

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