प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर यमुना तट हरिपुर कालसी का यह पावन परिसर अलौकिक सौंदर्य और अटूट श्रद्धा से सराबोर हो उठा, जब संपूर्ण क्षेत्र दीयों की रोशनी से जगमगाया। इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अवसर पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया‘ कार्यक्रम के दौरान 2100 से अधिक दीपों की जगमगाहट ने माँ यमुना के पावन तट को एक दिव्य रूप प्रदान कर दिया। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न सम्पूज्य साधु-संतों, अपार श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों के साथ मिलकर पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से माँ यमुना की भव्य आरती में सहभागिता निभाई। इस पूरे आयोजन ने न केवल स्थानीय लोगों के भीतर सांस्कृतिक चेतना का संचार किया, बल्कि क्षेत्र के धार्मिक परिदृश्य में एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत भी की।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं के भारी उत्साह के बीच माँ यमुना की दिव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया और नवनिर्मित हरिघाट को आम जनता के लिए समर्पित कर दिया गया। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण द्वारा अत्यंत द्रुत गति और उच्च गुणवत्ता के साथ निर्मित 7.52 करोड़ रुपये की लागत वाले विशाल स्नान घाट का लोकार्पण भी मुख्यमंत्री के हाथों संपन्न हुआ। इसके साथ ही, आने वाले समय में यहाँ श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक तृप्ति के लिए माँ यमुना कृष्ण मंदिर का औपचारिक शिलान्यास भी किया गया। इस महायोजन ने पूरे जौनसार-भाबर क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बना दिया, जहाँ हर कोई इस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बनने के लिए उत्सुक दिखाई दे रहा था।
यमुना तट हरिपुर कालसी का धार्मिक और पौराणिक महत्व
यमुना तट हरिपुर कालसी सदियों से सनातन परंपरा, अटूट आस्था और समृद्ध भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख स्तंभ रहा है। देहरादून-चकराता राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 507 पर स्थित हरिपुर कालसी को जौनसार-भाबर क्षेत्र का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। यह स्थान न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि इसका ऐतिहासिक और पौराणिक आधार भी अत्यंत गहरा और गौरवशाली है। प्राचीन काल से ही यह क्षेत्र तपस्वियों और साधकों की भूमि रहा है, जहाँ की पावन मिट्टी और यमुना नदी का निर्मल प्रवाह हर किसी को आत्मिक शांति का अनुभव कराता है।
इस क्षेत्र के आसपास कई ऐसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल मौजूद हैं जो भारत की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। यहाँ प्रसिद्ध सम्राट अशोक के ऐतिहासिक शिलालेख मौजूद हैं, जो प्राचीन कालीन ज्ञान और संदेशों को आज भी जीवंत रखे हुए हैं। इसके अलावा प्राचीन देवस्थल मंदिर और ऐतिहासिक अश्वमेघ यज्ञ स्थल जैसे अति महत्वपूर्ण और पवित्र स्थान भी इसके निकट ही स्थित हैं। इन सभी स्थलों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि प्राचीन काल में भी यह क्षेत्र सांस्कृतिक और धार्मिक गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र हुआ करता था। नवनिर्मित घाट और मंदिर की स्थापना से इस पूरे क्षेत्र की पौराणिक पहचान को एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा और मजबूती मिलेगी।
अत्याधुनिक सुविधाओं और आधारभूत ढांचे का भव्य निर्माण
एमडीडीए द्वारा यमुना नदी के दाहिने किनारे पर बेहद खूबसूरती और मजबूती से स्नान घाट का निर्माण कार्य पूरा किया गया है। यह नया घाट 170 मीटर लंबा और 15 मीटर चौड़ा है, जिसे आधुनिक निर्माण तकनीकों और श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। लगभग 7.52 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तैयार की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना में सुरक्षा, सौंदर्य और जनसुविधाओं का अद्भुत तालमेल देखने को मिलता है। अब यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को स्नान और पूजन के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
घाट के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री और उसकी मजबूती पर विशेष ध्यान दिया गया है ताकि बाढ़ या मानसून के दौरान नदी के तेज प्रवाह से तट को कोई नुकसान न पहुँचे। निर्माण कार्य में प्रयुक्त आधारभूत संरचना की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
मजबूत सुरक्षा दीवारें: नदी की ओर 170 मीटर लंबी और 5 मीटर ऊंची दो विशाल आरसीसी सुरक्षा दीवारों का निर्माण किया गया है, जो जलस्तर बढ़ने पर तट की सुरक्षा करेंगी।
विशाल प्लेटफॉर्म: लगभग 2000 वर्गमीटर के विशाल क्षेत्र में आरसीसी और लाल बलुआ पत्थरों का उपयोग करके दो भव्य और आकर्षक प्लेटफॉर्म तैयार किए गए हैं।
सुरक्षित सीढ़ियां और आरती स्थल: नदी के जल तक सुरक्षित पहुँच के लिए चौड़ी सीढ़ियों का निर्माण किया गया है, साथ ही माँ यमुना की दैनिक महाआरती के संचालन हेतु चार अलग-अलग आरती स्थल विशेष रूप से विकसित किए गए हैं।
सुरक्षा घेरा: नदी किनारे सुरक्षा के कड़े इंतजाम करते हुए लगभग 300 मीटर लंबी स्टेनलेस स्टील की मजबूत रेलिंग और चेन लगाई गई है, जिससे बच्चे और बुजुर्ग भी सुरक्षित रूप से स्नान कर सकें।
श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए जनसुविधाओं का विस्तार
यमुना तट हरिपुर कालसी पर आने वाले तीर्थयात्रियों और देशी-विदेशी पर्यटकों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए विकास प्राधिकरण ने व्यापक स्तर पर जनसुविधाओं का जीर्णोद्धार और निर्माण किया है। अक्सर धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता था, लेकिन यहाँ हर छोटी से छोटी आवश्यकता का बारीकी से ध्यान रखा गया है।
पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पूरे घाट परिसर में रात के समय बेहतर उजाले के लिए 25 आधुनिक सोलर लाइटें स्थापित की गई हैं। इसके अलावा, दूर-दराज से आने वाले यात्रियों के विश्राम के लिए छायादार शेड और 12 सुंदर बेंचों का निर्माण किया गया है। परिसर में जगह-जगह सुंदर पौधे लगाकर वातावरण को हरा-भरा और आकर्षक बनाया गया है।
महिला और पुरुष श्रद्धालुओं की गरिमा और सुविधा का ध्यान रखते हुए आधुनिक शौचालयों और कपड़े बदलने वाले कक्षों का पूरी तरह से कायाकल्प किया गया है। इसके साथ ही, यहाँ आने वाले लोगों को स्वच्छ और शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जगह-जगह वाटर स्पाउट की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है। इन सभी सुविधाओं के एक ही स्थान पर मिल जाने से धार्मिक आयोजनों के दौरान भीड़ को नियंत्रित करना और उन्हें बेहतर माहौल प्रदान करना बेहद आसान हो जाएगा।
दैनिक महाआरती और स्थानीय पर्यटन को नई उड़ान
मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के आला अधिकारियों के अनुसार, यह तट हमेशा से ही स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं की अगाध श्रद्धा का केंद्र रहा है। पहले यहाँ केवल साप्ताहिक रूप से ही माँ यमुना की आरती का आयोजन किया जाता था, क्योंकि पर्याप्त व्यवस्थाओं और सुरक्षित स्थान का अभाव था। लेकिन अब इतने बड़े और सर्वसुविधायुक्त घाट के बन जाने से यहाँ हर शाम वाराणसी और हरिद्वार की तर्ज पर भव्य रूप से प्रतिदिन महाआरती आयोजित करने की सभी राहें आसान हो गई हैं।
दैनिक आरती की शुरुआत होने से न केवल यहाँ का आध्यात्मिक वातावरण निरंतर ऊर्जावान बना रहेगा, बल्कि इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी एक बहुत बड़ा बढ़ावा मिलेगा। जब किसी स्थान पर बुनियादी ढांचा मजबूत होता है, तो वहाँ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में स्वतः ही वृद्धि दर्ज की जाती है। इस नए परिसर के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, छोटे व्यापारियों, हस्तशिल्पकारों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े लोगों की आय में बढ़ोतरी होगी। इस प्रकार यह परियोजना न केवल सांस्कृतिक रूप से बल्कि आर्थिक रूप से भी जौनसार-भाबर क्षेत्र के लिए एक बड़ा वरदान साबित होने जा रही है।
संस्कृति, सुरक्षा और भविष्य की राह
हरिपुर कालसी में नदी के किनारे बनाई गई ऊँची और मजबूत सुरक्षा दीवारें सिर्फ घाट की सुंदरता ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि मानसून के मौसम में जब यमुना नदी का जलस्तर अपने चरम पर होता है, तब ये तटवर्ती इलाकों और आसपास के गांवों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत कवच का काम करेंगी। बाढ़ और भू-कटाव के खतरे को कम करने में ये दीवारें बेहद कारगर साबित होंगी।
सुरक्षा के साथ-साथ इस पूरे क्षेत्र को एक सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। जिस तरह से माँ यमुना कृष्ण मंदिर का शिलान्यास किया गया है, आने वाले समय में यह स्थान उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक पर्यटन परिपथ का एक अभिन्न हिस्सा बन जाएगा। अपनी ऐतिहासिक जड़ों, प्राकृतिक छटा और नए अत्याधुनिक स्वरूप के साथ यह पावन धाम आने वाले वर्षों में लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करेगा और राज्य की समृद्ध विरासत का परचम पूरे देश में लहराएगा।


