मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। यह पूरी पहल राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत देहरादून और मसूरी क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों, यात्रियों और स्थानीय निवासियों को आधुनिक एवं विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में देहरादून स्थित अंतरराज्यीय बस अड्डे और प्रसिद्ध मॉल परिसर के जीर्णोद्धार, सुरक्षा व्यवस्था, वित्तीय प्रबंधन तथा तकनीकी सुधारों पर गहनता से चर्चा की गई और कई ठोस निर्णय लिए गए।
समीक्षा बैठक के दौरान मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देशित किया कि सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही सहन नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों का उद्देश्य केवल कागजी प्रस्ताव बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ धरातल पर उतारना है। प्राधिकरण का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि बस अड्डे और मॉल परिसर में आने वाले हर व्यक्ति को एक सुरक्षित, स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण मिल सके।
आईएसबीटी के जीर्णोद्धार और व्यापक सुधार की कार्ययोजना
अंतरराज्यीय बस अड्डा किसी भी शहर का मुख्य प्रवेश द्वार होता है और शहर की छवि को दर्शाने में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए बैठक में आईएसबीटी के संपूर्ण कायाकल्प की योजना स्वीकृत की गई। इस योजना के तहत बस अड्डे की पुरानी संरचना को आधुनिक रूप दिया जाएगा ताकि यहां प्रतिदिन आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बस अड्डे की दुकानों, व्यावसायिक कार्यालयों, खान-पान के रेस्टोरेंट और छोटे कियोस्क के किराए की दरों का नए सिरे से मूल्यांकन और निर्धारण किया जाएगा। इसके साथ ही, जो व्यावसायिक अनुबंध या ठेके लंबे समय से लंबित पड़े थे, उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया को भी तुरंत पूरा करने के आदेश दिए गए हैं। इस व्यवस्था से न केवल व्यावसायिक गतिविधियों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि प्राधिकरण के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।
व्यापारियों के पुनर्वास और पारदर्शी व्यवस्था का निर्माण
आईएसबीटी परिसर में काफी समय से काम कर रहे पुराने लाइसेंस धारक दुकानदारों और स्टाल स्वामियों के हित का भी ध्यान रखा गया है। बैठक में सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया कि पुराने लाइसेंस धारकों को परिसर में निर्मित होने वाले नए और आधुनिक कियोस्क में व्यवस्थित रूप से स्थानांतरित किया जाएगा।
इस प्रक्रिया से बस अड्डे के भीतर अवैध अतिक्रमण और अव्यवस्थित स्टालों की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। नए और सुसज्जित कियोस्क बनने से यात्रियों को खाने-पीने और अन्य जरूरी सामान की खरीदारी के लिए बेहतर और साफ-सुथरा माहौल मिलेगा। व्यापारियों को भी अपना व्यवसाय चलाने के लिए एक संगठित और सुरक्षित स्थान प्राप्त होगा, जिससे पूरे परिसर का स्वरूप अधिक सुंदर और व्यवस्थित नजर आएगा।
यात्री सुविधाओं का आधुनिकरण और प्लेटफार्म का नवीनीकरण
यात्रियों की सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए आईएसबीटी के भौतिक ढांचे में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। योजना के अनुसार, बस अड्डे के भूतल यानी निचले हिस्से का अधिक से अधिक और बेहतर उपयोग किया जाएगा ताकि यात्रियों के बैठने और आवागमन के लिए अधिक स्थान उपलब्ध हो सके।
इसके साथ ही, परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के लिए नए और आधुनिक सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण कराया जाएगा। बस प्लेटफार्मों की स्थिति को सुधारने के लिए फर्श के जीर्णोद्धार का काम चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जाएगा। टूटे हुए फर्श की मरम्मत और नए सिरे से निर्माण होने से यात्रियों को पैदल चलने में आसानी होगी और दुर्घटनाओं की संभावना भी खत्म होगी।
सुरक्षा व्यवस्था और ऑनलाइन कैब सेवाओं के लिए नई व्यवस्था
बस अड्डे पर यात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। वर्तमान समय में ऑनलाइन टैक्सी सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए यह तय किया गया है कि ऐप आधारित कैब सेवाओं के लिए परिसर के भीतर ही समर्पित और निर्धारित बूथ बनाए जाएंगे। इससे यात्रियों को बस से उतरते ही टैक्सी पाने में आसानी होगी और बाहर होने वाली भीड़-भाड़ से मुक्ति मिलेगी।
सुरक्षा के मोर्चे पर भी कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। बस अड्डे पर असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाने और यात्रियों को सुरक्षित माहौल देने के लिए स्थानीय पुलिस प्रशासन के सहयोग से नियमित गश्त की व्यवस्था को लागू किया जाएगा। पुलिस बल की लगातार मौजूदगी से देर रात यात्रा करने वाले यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों में सुरक्षा का भाव मजबूत होगा।
विद्युत प्रणाली का सुधार और बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण
आईएसबीटी परिसर की आंतरिक रोशनी और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक व्यापक योजना पर सहमति बनी है। काफी समय से जर्जर हो चुकी पुरानी स्ट्रीट लाइटों, लाइट के खंभों और पुरानी पावर केबलों को पूरी तरह से हटाकर नई तकनीक के उपकरणों को लगाया जाएगा।
नई और मजबूत केबल प्रणाली लगने से बार-बार बिजली गुल होने की समस्या खत्म होगी। पर्याप्त रोशनी होने से पूरे परिसर में रात के समय भी दृश्यता बनी रहेगी, जो सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत आवश्यक है। बिजली की नई लाइन बिछाने से ऊर्जा की बचत भी होगी और तकनीकी खराबी के कारण होने वाले हादसों का जोखिम भी कम हो जाएगा।
अनुपयोगी सामग्री का चरणबद्ध निस्तारण
निर्माण और जीर्णोद्धार कार्यों के दौरान निकलने वाले पुराने, टूटे-फूटे सामान और निर्माण सामग्री के सुरक्षित निपटारे के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। बस अड्डे के आसपास या भीतर पड़े अनुपयोगी सामान से न केवल गंदगी फैलती है, बल्कि यात्रियों के आवागमन में भी बाधा उत्पन्न होती है।
प्राधिकरण ने तय किया है कि इस निष्प्रयोज्य सामग्री का चरणबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाएगा। कबाड़ को समय पर हटाए जाने से परिसर की स्वच्छता बनी रहेगी और निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों को भी काम करने में कोई असुविधा नहीं होगी। इस कदम से बस अड्डे का पूरा परिसर साफ-सुथरा और आकर्षक नजर आएगा।
मॉल परिसर का सौंदर्यीकरण और बागवानी कार्य
बैठक के दूसरे चरण में प्रसिद्ध मॉल परिसर की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। मॉल परिसर शहर का एक प्रमुख व्यावसायिक और पर्यटन केंद्र है, इसलिए इसके रखरखाव और सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
परिसर को अधिक सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए बागवानी और इंजीनियरिंग से जुड़े विकास कार्य कराए जाएंगे।
पेड़-पौधों की नई प्रजातियां लगाकर हरियाली बढ़ाई जाएगी, जिससे वहां आने वाले लोगों को एक सुखद और प्राकृतिक वातावरण मिल सके। इसके अलावा, मॉल के बाहरी और आंतरिक ढांचे के सौंदर्यीकरण के लिए आवश्यक सिविल मरम्मत कार्य भी जल्द शुरू किए जाएंगे।
तकनीकी समस्याओं और जलभराव का स्थायी समाधान
मॉल परिसर में लंबे समय से चली आ रही तकनीकी समस्याओं को हल करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाई गई है। विशेष रूप से मानसून के दौरान होने वाली जलभराव की समस्या को दूर करने के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं।
वॉटर पंप रूम, बिजली कक्षों और पेयजल पैनल वाले क्षेत्रों में पानी भरने की समस्या को स्थायी रूप से ठीक किया जाएगा ताकि बिजली और पानी की आपूर्ति बाधित न हो। इसके अलावा, परिसर के चिलर सिस्टम यानी वातानुकूलन प्रणाली की तकनीकी खामियों को दूर करके उसे पूरी तरह दुरुस्त किया जाएगा। स्वच्छ पेयजल की निर्बाध आपूर्ति के लिए ड्रिंकिंग वाटर पैनल की ओवरहालिंग की जाएगी।
गुणवत्ता और समयबद्धता पर प्राधिकरण का सख्त रुख
समीक्षा बैठक के अंत में मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने अधिकारियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि स्वीकृत की गई सभी परियोजनाओं की प्रक्रियाएं जल्द से जल्द पूरी की जाएं। उन्होंने कहा कि कागजी कार्यवाही में लगने वाले समय को कम करके तुरंत धरातल पर निर्माण कार्य शुरू कराया जाए।
उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। कार्यों की प्रगति की नियमित जांच की जाएगी और किसी भी स्तर पर पाई गई कमी के लिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
उच्च स्तरीय बैठक में अधिकारियों की मौजूदगी
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में प्राधिकरण के सचिव मोहन सिंह बर्निया सहित विकास प्राधिकरण के कई वरिष्ठ अधिकारी, अभियंता और कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में मौजूद सभी अधिकारियों ने उपाध्यक्ष द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने और निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी कार्यों को पूरा करने की प्रतिबद्धता जताई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सोच के अनुरूप, मसूरी और देहरादून क्षेत्र को आधुनिक, सुंदर और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में यह बैठक एक बड़ा कदम साबित होगी। इन सभी विकास कार्यों के पूरा होने से न केवल स्थानीय नागरिकों का जीवन आसान होगा, बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों के मन में भी राज्य की एक सकारात्मक और आधुनिक छवि बनेगी।


