मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक में उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास, प्रशासनिक सुधार, श्रमिक कल्याण, न्यायिक ढांचागत विकास और रोजगार सृजन से जुड़े 15 अहम प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान की गई। देहरादून स्थित राज्य सचिवालय में संपन्न हुई इस उच्चस्तरीय कैबिनेट बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा प्रस्तुत जनहितकारी योजनाओं और नीतिगत संशोधनों पर विस्तार से मंथन किया गया।
इस कैबिनेट बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की विस्तृत जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री के अपर सचिव बंशीधर तिवारी ने आधिकारिक तौर पर बताया कि राज्य सरकार जन-आकांक्षाओं को पूरा करने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए ये 15 निर्णय न केवल आम नागरिकों के जीवन को सुलभ बनाएंगे, बल्कि राज्य के औद्योगिक, सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य में भी बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएंगे।
हल्द्वानी के गौलापार में उत्तराखंड उच्च न्यायालय के लिए 30 हेक्टेयर भूमि आवंटन
उत्तराखंड कैबिनेट का सबसे बड़ा और दूरगामी असर डालने वाला फैसला नैनीताल स्थित उत्तराखंड उच्च न्यायालय के स्थान परिवर्तन एवं भूमि आवंटन से जुड़ा हुआ है। मंत्रिमंडल ने सर्वसम्मति से निर्णय लेते हुए नैनीताल हाईकोर्ट को हल्द्वानी स्थानांतरित करने की दिशा में औपचारिक मुहर लगा दी है। इसके लिए हल्द्वानी के गौलापार क्षेत्र में 30 हेक्टेयर महत्वपूर्ण भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है।
इस निर्णय से अब यह पूरी तरह से तय हो गया है कि उत्तराखंड का नया और आधुनिक उच्च न्यायालय परिसर हल्द्वानी के गौलापार में ही स्थापित किया जाएगा। नैनीताल में भौगोलिक सीमाओं, सीमित स्थान और लगातार बढ़ती यातायात समस्याओं के कारण अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों और दूर-दराज से आने वाले वादकारियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। गौलापार में 30 हेक्टेयर विस्तृत भूमि मिलने से एक सर्वसुविधायुक्त, आधुनिक और विशाल न्यायिक परिसर का निर्माण हो सकेगा, जिससे आम जनता को न्याय प्रणाली तक पहुंचने में अत्यधिक सुगमता होगी।
गो-पालन योजना का विस्तार: सामान्य वर्ग के पशुपालकों को भी मिलेगी सब्सिडी
राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने, पशुपालकों की आय में वृद्धि करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल ने गो-पालन योजना में एक बड़ा और समावेशी बदलाव किया है।
सामान्य वर्ग को योजना से जोड़ना: कैबिनेट के नए निर्णय के अनुसार, अब राज्य की गो-पालन योजना का लाभ केवल विशेष वर्गों तक सीमित न रहकर सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को भी प्रदान किया जाएगा।
दुधारू पशुओं की खरीद पर अनुदान: इस योजना के तहत अब सामान्य वर्ग के पात्र पशुपालक और किसान भी उन्नत किस्म की गाय और भैंस की खरीद कर सकेंगे, जिस पर राज्य सरकार की ओर से नियमानुसार आर्थिक सब्सिडी (अनुदान) प्रदान की जाएगी।
ग्रामीण स्वरोजगार को बढ़ावा: इस फैसले का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ाना, दुग्ध प्रसंस्करण को मजबूती देना और गांव के स्तर पर ही आजीविका के नए अवसर पैदा करना है।
श्रम एवं श्रमिक कल्याण: उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली को मंजूरी
राज्य के संगठित और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों और कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा तथा उनके आर्थिक शोषण को रोकने के लिए कैबिनेट ने उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली को अपनी पूर्ण प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इस नियमावली के लागू होने से श्रमबल को कई महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा कवच प्राप्त होंगे:
समयबद्ध वेतन का भुगतान: इस नियमावली के तहत राज्य के सभी निजी और सरकारी संस्थानों, कारखानों तथा नियोक्ताओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे अपने कर्मचारियों और श्रमिकों को हर महीने की 7 तारीख तक उनके वेतन का भुगतान सुनिश्चित करें। वेतन में देरी करने वाले नियोक्ताओं पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
समान कार्य के लिए समान मजदूरी: कार्यस्थल पर किसी भी प्रकार के लैंगिक भेदभाव को पूरी तरह समाप्त करते हुए यह प्रावधान किया गया है कि एक ही प्रकार के कार्य के लिए पुरुष और महिला श्रमिकों को एक समान मजदूरी दी जाएगी।
श्रमिकों के हितों का व्यापक संरक्षण: नियमावली के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान की गई है, जिससे राज्य में एक स्वस्थ और सुरक्षित कार्य वातावरण का निर्माण होगा।
उत्तराखंड औद्योगिक नियमावली: नियोक्ता और कर्मचारियों के रिश्तों में सुधार
राज्य में औद्योगिक निवेश को आकर्षित करने और वर्तमान में संचालित उद्योगों के सुचारू संचालन के लिए मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड औद्योगिक नियमावली को मंजूरी दी है। इस निर्णय का सीधा उद्देश्य उद्योगों के मालिकों (नियोक्ताओं) और वहां काम करने वाले कर्मचारियों (कर्मकारों) के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करना है।
त्वरित शिकायत निवारण प्रणाली: कार्यस्थल पर उठने वाले विवादों, शिकायतों और समस्याओं के तत्काल निपटारे के लिए एक पारदर्शी शिकायत समिति के गठन की प्रक्रिया को स्पष्ट और सरल बनाया गया है।
समिति के चयन में स्पष्टता: शिकायत समिति के सदस्यों का चयन किस प्रकार होगा, इसकी पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी नियमावली के दायरे में लाया गया है, ताकि पारदर्शी तरीके से निर्णय लिए जा सकें।
छंटनी से प्रभावित कर्मचारियों को मिलेगा पुनः रोजगार का अवसर
औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों के हित में एक और अत्यंत संवेदनशील फैसला लेते हुए कैबिनेट ने छंटनी किए गए कर्मचारियों के पुनर्वास का मार्ग प्रशस्त किया है।
उत्तराखंड औद्योगिक नियमावली में किए गए प्रावधानों के अनुसार, जिन कर्मचारियों को पूर्व में विभिन्न कारणों से संस्थानों या उद्योगों से छंटनी करके हटा दिया गया था, उन्हें दोबारा रोजगार पाने का मौका दिया जाएगा। इस नीति से प्रभावित परिवारों को आर्थिक संबल मिलेगा और अनुभवी कार्यबल को पुनः रोजगार से जोड़ा जा सकेगा।
खेल एवं युवा विकास: उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय के लिए 122 पद स्वीकृत
राज्य के युवाओं की खेल प्रतिभा को निखारने और उन्हें राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से हल्द्वानी में स्थापित किए जा रहे उत्तराखंड राज्य क्रीड़ा विश्वविद्यालय (स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी) के लिए कैबिनेट ने एक बड़ा फैसला लिया है।
मंत्रिमंडल ने इस क्रीड़ा विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और शैक्षणिक गतिविधियों को गति देने हेतु 122 नए पदों के सृजन को अपनी स्वीकृति दे दी है। इन पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू होने से जहां एक ओर राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड के उदीयमान खिलाड़ियों को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय खेल प्रशिक्षण और खेल विज्ञान से जुड़ी उच्च शिक्षा प्राप्त हो सकेगी।
जड़ी-बूटी विकास और ईको-टूरिज्म प्रोत्साहन नीति
उत्तराखंड के विशाल वन क्षेत्रों में पाई जाने वाली बहुमूल्य और दुर्लभ जड़ी-बूटियों के व्यावसायिक तथा वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के साथ-साथ ईको-टूरिज्म को नई दिशा देने के लिए कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लिया है।
उच्चाधिकार प्राप्त समिति में संशोधन: राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में पूर्व में गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति की संरचना और अधिकारों में आवश्यक संशोधन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
स्थानीय आजीविका में सुधार: इस संशोधन के माध्यम से वन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से उगने वाली जड़ी-बूटियों का पारदर्शी संकलन, प्रसंस्कर और विपणन किया जा सकेगा। इससे वनों पर निर्भर स्थानीय ग्रामीणों और स्वयं सहायता समूहों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होगी और राज्य में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन (ईको-टूरिज्म) को नए आयाम मिलेंगे।
सामाजिक समानता: कुष्ठ पीड़ितों को सहकारी समितियों में सदस्यता का अधिकार
सामाजिक समरसता और मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड सहकारी समिति नियमावली में एक ऐतिहासिक संशोधन किया है।
अब तक चले आ रहे पुराने और भेदभावपूर्ण नियमों को बदलते हुए राज्य सरकार ने यह व्यवस्था की है कि कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्ति भी अब सहकारी समितियों के पूर्ण सदस्य बन सकेंगे। इस फैसले से कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों को समाज की मुख्यधारा से जुड़ने, आर्थिक गतिविधियों में भाग लेने और सहकारिता आंदोलन का लाभ उठाने का पूर्ण कानूनी अधिकार मिल गया है। यह निर्णय राज्य सरकार की समावेशी विकास नीति को दर्शाता है।
अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी: मेरठ से हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेस-वे के विस्तार पर सहमति
उत्तराखंड में यातायात और पर्यटन को सुगम बनाने के लिए कैबिनेट ने पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचागत समझौते को हरी झंडी दी है।
प्रस्ताव के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मेरठ से शुरू होने वाले महत्वाकांक्षी गंगा एक्सप्रेस-वे का विस्तार उत्तराखंड के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र हरिद्वार तक किया जाएगा। इस परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए उत्तराखंड सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक औपचारिक द्विपक्षीय समझौता (MoU) हस्ताक्षरित किया जाएगा। इस एक्सप्रेस-वे के बनने से दिल्ली और उत्तर प्रदेश से हरिद्वार तथा ऋषिकेश आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के समय की भारी बचत होगी और राज्य में व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संशोधन अध्यादेश को मंजूरी
राज्य के राजस्व प्रबंधन को अधिक मजबूत, आधुनिक और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड माल एवं सेवा कर संशोधित अध्यादेश को अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी है।
इस अध्यादेश के लागू होने से केंद्र सरकार की जीएसटी नीति के अनुरूप राज्य के कर कानूनों में आवश्यक संशोधन हो सकेंगे। इससे करदाताओं को कर जमा करने में सरलता होगी, कर चोरी पर प्रभावी अंकुश लगेगा और राज्य के अपने राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की जाएगी।
जल जीवन मिशन: पेयजल योजनाओं का हस्तांतरण और बेहतर संचालन
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने की दिशा में जल जीवन मिशन के अंतर्गत कैबिनेट ने एक महत्वपूर्ण परिचालन फैसला लिया है।
केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों का पालन: जल जीवन मिशन के तहत केंद्र सरकार द्वारा जारी किए गए नवीनतम दिशानिर्देशों को उत्तराखंड में पूरी तरह लागू करने की स्वीकृति दी गई है।
योजनाओं का सुचारू हस्तांतरण: इसके अंतर्गत मिशन के तहत पूरी हो चुकी पेयजल योजनाओं को स्थानीय निकायों, ग्राम पंचायतों या संबंधित रखरखाव एजेंसियों को हस्तांतरित किया जा सकेगा। इससे पेयजल योजनाओं का रख-रखाव स्थानीय स्तर पर बेहतर ढंग से हो सकेगा और आम जनता को निरंतर एवं स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
वन विकास निगम भर्ती परीक्षा: स्केलर पदों के लिए 100 अंकों की लिखित परीक्षा
राज्य वन विकास निगम के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए वन विकास निगम सेवा संशोधन नियमावली को कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है।
पारदर्शी चयन प्रक्रिया: नियमावली में किए गए नए संशोधन के अनुसार, निगम में स्केलर (Scalar) के पदों पर होने वाली भर्तियों के लिए अब 100 अंकों की निष्पक्ष लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी।
मेधावी युवाओं को अवसर: इस कदम से भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह से वस्तुनिष्ठ, पारदर्शी और योग्यता-आधारित हो जाएगी, जिससे राज्य के मेहनती और योग्य युवाओं को वन विकास निगम में रोजगार पाने का समान और निष्पक्ष अवसर प्राप्त होगा।
उत्तराखंड कैबिनेट के प्रमुख फैसलों का सारांश
न्यायिक ढांचे के विकास के तहत नैनीताल हाईकोर्ट को हल्द्वानी के गौलापार में स्थानांतरित करने के लिए 30 हेक्टेयर भूमि मंजूर की गई है। पशुपालन क्षेत्र में बड़ा बदलाव करते हुए गो-पालन योजना में सामान्य वर्ग को भी शामिल किया गया है, जिसके तहत गाय और भैंस की खरीद पर सब्सिडी दी जाएगी। श्रम एवं रोजगार के क्षेत्र में मजदूरी संहिता लागू कर दी गई है, जिससे अब हर महीने की 7 तारीख तक वेतन का भुगतान अनिवार्य होगा और पुरुष व महिला श्रमिकों को समान काम के लिए समान वेतन मिलेगा।
उद्योगों के बेहतर संचालन के लिए औद्योगिक नियमावली को मंजूरी दी गई है, जिसमें शिकायत निवारण समिति का स्पष्ट गठन करने के साथ छंटनी का शिकार हुए श्रमिकों को दोबारा रोजगार का मौका देने का प्रावधान है। खेल एवं युवा विकास को बढ़ावा देने के लिए हल्द्वानी स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के सुचारू संचालन हेतु 122 पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है।
सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश के साथ मिलकर मेरठ से हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेस-वे के विस्तार पर समझौता किया गया है। सामाजिक कल्याण के दृष्टिकोण से ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए कुष्ठ रोग से पीड़ित व्यक्तियों को सहकारी समितियों की सदस्यता प्राप्त करने का कानूनी अधिकार दिया गया है। वहीं वन एवं ईको-टूरिज्म के विकास हेतु जड़ी-बूटी समिति के ढांचे में संशोधन किया गया है और वन विकास निगम में स्केलर पद पर पारदर्शी भर्ती के लिए 100 अंकों की लिखित परीक्षा का प्रावधान लागू किया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित यह कैबिनेट बैठक उत्तराखंड के बहुआयामी विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। हल्द्वानी के गौलापार में उच्च न्यायालय के स्थानांतरण के लिए 30 हेक्टेयर भूमि आवंटन से लेकर श्रमिकों के लिए नियत समय पर वेतन भुगतान, सामान्य वर्ग के लिए गो-पालन योजना का विस्तार और हरिद्वार तक गंगा एक्सप्रेस-वे के विस्तार जैसे निर्णय यह दर्शाते हैं कि राज्य सरकार बुनियादी ढांचे, जन-कल्याण और सामाजिक न्याय को एक साथ लेकर आगे बढ़ रही है।
इन 15 प्रस्तावों के स्वीकृत होने से न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी और कुशल बनेगी, बल्कि राज्य के किसानों, पशुपालकों, श्रमिकों, युवाओं और आम जनता को प्रत्यक्ष रूप से बड़ा लाभ पहुंचेगा।


