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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खटीमा को दी ₹108.84 करोड़ की सौगात, गौशाला लोकार्पण के साथ 15 विकास योजनाओं का किया शिलान्यास

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उधम सिंह नगर जिले के खटीमा स्थित हल्दीघेरा में ₹7.23 करोड़ की लागत से नवनिर्मित आधुनिक गौशाला का लोकार्पण कर राज्य में पशुधन संरक्षण और ग्रामीण विकास के एक नए अध्याय की शुरुआत की है। इस विशेष अवसर पर मुख्यमंत्री ने न केवल गौ-सेवा के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता जताई, बल्कि पूरे क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूती देने के लिए ₹108.84 करोड़ की 15 विभिन्न विकास योजनाओं का शिलान्यास भी किया।

इन योजनाओं में सबसे प्रमुख ₹34.44 करोड़ की लागत से बनने वाली राज्य मार्ग-70 के सत्रहमील से नानक सागर प्रभाग तक 13.60 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य है। देवभूमि उत्तराखंड में यह कदम केवल आधारभूत ढांचे का विकास नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक परंपराओं, पशुधन संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को एक सूत्र में पिरोने का एक दूरदर्शी प्रयास माना जा रहा है।

हल्दीघेरा गौशाला: निराश्रित गोवंश के संरक्षण और सम्मान का नया केंद्र
हल्दीघेरा में बनी यह नई गौशाला उत्तराखंड में निराश्रित और बेसहारा गोवंश के लिए एक सुरक्षित, व्यवस्थित और सम्मानजनक आश्रय स्थल के रूप में उभरी है। ₹7.23 करोड़ के बजट से तैयार इस आधुनिक परिसर में पशुओं के स्वास्थ्य, चारे, पानी और रहने की विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं।

लोकार्पण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि इस गौशाला का विस्तार भविष्य की जरूरतों के अनुसार लगातार किया जाएगा, ताकि आसपास के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से सड़कों पर भटकने वाले अधिक से अधिक गोवंश को यहाँ सुरक्षित स्थान मिल सके। बेघर गोवंश को आश्रय मिलने से न केवल पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि सड़कों पर होने वाली दुर्घटनाओं पर भी प्रभावी रोक लगेगी।
यह पहल केवल एक सरकारी इमारत खड़ी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए समाज में गोवंश के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का संदेश भी दिया गया है।

उत्तराखंड की नीतियों में गौ-संवर्धन और सांस्कृतिक मूल्य
उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है, जहाँ हर जीव और विशेष रूप से गौ माता के प्रति आदर का भाव सदियों से जन-जीवन का हिस्सा रहा है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गौ माता का स्थान अत्यंत पवित्र है और उनका संरक्षण केवल एक प्रशासनिक काम नहीं, बल्कि हमारा नैतिक कर्तव्य, धर्म और सामाजिक जिम्मेदारी है।

राज्य सरकार ने इस सोच को धरातल पर उतारने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं:
16 हजार से अधिक गोवंश को आश्रय: वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न गौ सदनों और गौशालाओं के माध्यम से 16,000 से अधिक निराश्रित पशुओं की देखभाल की जा रही है।
ग्राम्य गौ सेवक योजना: ग्रामीण स्तर पर पशुओं की देखरेख और युवाओं को जोड़ने के लिए इस योजना को एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है।
63 नए स्थानों का चयन: शहरी विकास और पंचायती राज विभाग के तालमेल से पूरे राज्य में 63 नए स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहाँ नई आधुनिक गौशालाओं का निर्माण किया जाएगा।
ये प्रयास दर्शाते हैं कि राज्य सरकार पशुधन संरक्षण को अपनी प्राथमिक नीतियों में प्रमुखता दे रही है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था और बद्री गाय: पशुधन से आजीविका का सशक्त मॉडल
गौ-संरक्षण का विचार तब तक पूरी तरह सफल नहीं हो सकता जब तक उसे आर्थिक स्वावलंबन से न जोड़ा जाए। उत्तराखंड सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है कि गोवंश को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बनाया जाए।
उत्तराखंड की पहचान मानी जाने वाली ‘बद्री गाय’ का दूध और उससे बना शुद्ध घी औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है।

सरकार बद्री गाय के दूध, घी और अन्य डेयरी उत्पादों के प्रसंस्करण और विपणन के लिए विशेष ग्रोथ सेंटर स्थापित कर रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं और पशुपालकों की आय में प्रत्यक्ष वृद्धि हो रही है।
गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और अन्य उत्पाद तैयार करने की दिशा में भी काम चल रहा है। इससे एक तरफ जहां रसायन मुक्त खेती को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ गांवों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए साधन बन रहे हैं।

हल्दीघेरा गौशाला: ₹7.23 करोड़ की लागत से बनी इस गौशाला का मुख्य उद्देश्य निराश्रित गोवंश को सुरक्षित आश्रय और बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
राज्य मार्ग-70 का उच्चीकरण: ₹34.44 करोड़ की लागत से 13.60 किलोमीटर लंबे मार्ग को सुधारा जा रहा है, जिससे यातायात सुगम होगा और नानक सागर क्षेत्र में पर्यटन व व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
कुल विकास कार्य: ₹108.84 करोड़ के बजट से कुल 15 योजनाओं का शिलान्यास किया गया है, जिसके तहत क्षेत्र में सड़क, पुल, शिक्षा और बाढ़ सुरक्षा ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
भविष्य की गौशालाएं: पूरे प्रदेश में बेघर पशुओं के लिए एक व्यवस्थित नेटवर्क तैयार करने के उद्देश्य से 63 नए स्थानों को चिन्हित किया गया है।

₹108.84 करोड़ के विकास कार्य: खटीमा और उधम सिंह नगर की नई तस्वीर
लोकार्पण के साथ-साथ मुख्यमंत्री द्वारा 15 विकास योजनाओं का शिलान्यास क्षेत्र के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करता है। खटीमा और उधम सिंह नगर जिला उत्तराखंड का एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती और कृषि-प्रधान क्षेत्र है। यहाँ आधारभूत सुविधाओं का मजबूत होना पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देता है।
सड़क और कनेक्टिविटी का विस्तार: राज्य मार्ग-70 के 13.60 किमी लंबे हिस्से के सुदृढ़ीकरण से सत्रहमील से नानक सागर तक का सफर बेहद आसान हो जाएगा। इससे नानक सागर साहिब आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को बड़ी राहत मिलेगी।
बाढ़ सुरक्षा और आपदा प्रबंधन: तराई क्षेत्र होने के कारण उधम सिंह नगर में मानसूनी नदियों से जलभराव की समस्या रहती है। नई स्वीकृत योजनाओं में बाढ़ सुरक्षा कार्यों को विशेष प्राथमिकता दी गई है।
शिक्षा और जनसुविधाएं: क्षेत्र में विद्यालयों के भवनों के जीर्णोद्धार, पेयजल व्यवस्था और ग्रामीण संपर्क मार्गों को सुधारने के लिए बजट आवंटित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सभी निर्माण कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता के मानकों के साथ पूरा किया जाए।

सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास का संतुलन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश में विकास के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का काम एक साथ हो रहा है। उत्तराखंड में भी यही मॉडल लागू किया जा रहा है, जहाँ एक तरफ अत्याधुनिक ऑल-वेदर रोड, आधुनिक पुल और डिजिटल ढांचा तैयार हो रहा है, तो दूसरी तरफ केदारनाथ -बद्रीनाथ धाम के पुनर्निर्माण से लेकर गौ-संरक्षण जैसे सांस्कृतिक अभियानों को भी उतनी ही शिद्दत से चलाया जा रहा है।

विकास और परंपरा का यह संतुलन उत्तराखंड को एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित कर रहा है। सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय पलायन को रोकने के दृष्टिकोण से भी बेहद अहम है।

आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में एक मजबूत कदम
खटीमा के हल्दीघेरा में हुआ यह कार्यक्रम केवल फीता काटने या शिलापट्ट अनावरण तक सीमित नहीं है। यह उत्तराखंड के दूरगामी विकास दृष्टिकोण को दिखाता है। गौशाला निर्माण से जहाँ बेघर गोवंश को सहारा मिला है, वहीं सौ करोड़ से अधिक की योजनाएं क्षेत्र के ढांचागत विकास को नई ऊर्जा देंगी।
जब गांव का पशुधन सुरक्षित होगा, सड़कें चौड़ी होंगी और बाढ़ से जान-माल का बचाव होगा, तब ग्रामीण अर्थव्यवस्था अपने आप मजबूत होगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का यह कदम साबित करता है कि उत्तराखंड सरकार जनकल्याण, सांस्कृतिक मूल्य और आधुनिक अवसंरचना के समन्वय से राज्य को प्रगति के शिखर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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