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मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के माध्यम से उत्तराखंड में महिला स्वावलंबन को मिल रही नई उड़ान

मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना के जरिए उत्तराखंड में महिला सशक्तिकरण को एक नई और बेहद मजबूत दिशा मिल रही है। सचिवालय परिसर में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की बहनों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का उद्घाटन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने स्टॉलों का गहन मुआयना किया और ग्रामीण महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित राखियों के साथ-साथ विभिन्न स्थानीय उत्पादों की सराहना की। इसके बाद उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी तेरह जिलों की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं से सीधा संवाद स्थापित किया।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए 15 दिवसीय पखवाड़े का आयोजन
मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना का उद्देश्य केवल त्यौहारों तक सीमित रहना नहीं है, बल्कि इसे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाना है। इस सोच को और विस्तार देते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष से रक्षाबंधन पर्व से ठीक पंद्रह दिन पहले ही इस योजना का भव्य शुभारंभ कर दिया जाएगा। इसे पूरे पंद्रह दिनों के एक विशेष पखवाड़े के रूप में आयोजित किया जाएगा। सरकार के इस दूरदर्शी कदम से महिला समूहों को अपने तैयार सामान की बिक्री के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, जिससे उनके उत्पादों को व्यापक बाजार मिलेगा और उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।

सचिवालय में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान वर्चुअल माध्यम से जुड़ी दूर-दराज के जनपदों की महिलाओं ने मुख्यमंत्री का हृदय से आभार जताया। महिलाओं ने साझा किया कि राज्य सरकार द्वारा आजीविका संवर्धन के लिए चलाए जा रहे निरंतर प्रयासों से उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को स्थानीय स्तर से लेकर राज्य स्तर तक बाजार उपलब्ध कराए जाने से अब वे केवल गृहणी न रहकर आत्मनिर्भर उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। स्थानीय स्तर पर तैयार की गई हस्तशिल्प और जैविक वस्तुओं को नई पहचान मिल रही है, जिससे ग्रामीण परिवारों की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ हो रही है।

वोकल फॉर लोकल: स्थानीय निर्मित वस्तुओं की खरीदारी का आह्वान
मुख्यमंत्री ने आगामी रक्षाबंधन के पावन पर्व की समस्त प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही उन्होंने सचिवालय में कार्यरत सभी वरिष्ठ अधिकारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों से अपील की कि वे इन स्टॉलों से अधिक से अधिक खरीदारी करें। उन्होंने कहा कि स्थानीय बहनों द्वारा बनाए गए सामान को खरीदकर न केवल हम उनका उत्साहवर्धन करेंगे, बल्कि वोकल फॉर लोकल के संकल्प को भी धरातल पर साकार करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सर्वांगीण विकास को प्रगति का मुख्य आधार स्वीकार किया गया है। केंद्र और राज्य सरकार की जन कल्याणकारी नीतियां आज जमीन पर बदलाव ला रही हैं। उज्ज्वला योजना के माध्यम से जहां महिलाओं को धुएं से मुक्ति मिली है, वहीं जल जीवन मिशन ने हर घर नल से जल पहुंचाकर उनका जीवन सुगम बनाया है। इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास योजना, सुकन्या समृद्धि योजना और लखपति दीदी अभियान जैसी योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक स्तर को बहुत ऊपर उठाया है।

70 हजार से अधिक समूहों के माध्यम से 5 लाख से अधिक परिवार लाभान्वित
उत्तराखंड सरकार द्वारा वर्ष 2023 में शुरू की गई इस योजना की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पाद गुणवत्ता के मामले में किसी से पीछे नहीं हैं। हालांकि, उचित मंच और सही बाजार न मिल पाने के कारण उनकी प्रतिभा और मेहनत गांव की सीमाओं तक ही सीमित रह जाती थी। इसी बाधा को दूर करने के लिए सरकार ने इस विशेष योजना की नींव रखी थी, ताकि हर गांव में तैयार उत्पाद को शहर के बड़े बाजारों और उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।

आज उत्तराखंड में ग्रामीण विकास की तस्वीर तेजी से बदल रही है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में सत्तर हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह क्रियाशील हैं। इन समूहों के माध्यम से पांच लाख बीस हजार से अधिक ग्रामीण परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। इन स्वयं सहायता समूहों के कामकाज को सुचारू बनाने, उनके उत्पादों के मानकीकरण और विपणन की ठोस व्यवस्था के लिए आठ हजार से अधिक ग्राम संगठन तथा छह सौ पंद्रह क्लस्टर स्तर के महासंघ रात-दिन काम कर रहे हैं।

मजबूत विपणन प्रणाली और बुनियादी ढांचे का निर्माण
उत्पाद तैयार करने के साथ-साथ उनके प्रभावी विपणन के लिए राज्य सरकार ने एक संपूर्ण ढांचा तैयार किया है। प्रदेशभर में अब तक उनचास ग्रोथ सेंटर, सत्रह सरस सेंटर, तैंतीस नैनो पैकेजिंग इकाइयां और आठ आधुनिक बेकरी इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं। इसके अलावा, राज्य में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को ध्यान में रखते हुए प्रमुख यात्रा मार्गों पर एक सौ दस विशेष बिक्री केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय उत्पादों की बिक्री में भारी इजाफा दर्ज किया गया है।

अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड के उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए प्रधानमंत्री द्वारा शुरू किया गया विशेष ब्रांड ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। यह ब्रांड उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक मंच प्रदान कर रहा है। इसके साथ ही राज्य सरकार अब स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-कॉमर्स वेबसाइटों से जोड़ रही है, जिससे राज्य के सुदूर गांवों में बनी राखियां, हस्तशिल्प और खाद्य पदार्थ देश-विदेश के किसी भी कोने से एक क्लिक पर खरीदे जा सकेंगे।

प्रशासनिक सहभागिता और भविष्य की रूपरेखा
कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक स्तर पर भी व्यापक भागीदारी देखने को मिली। सचिवालय में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रमुख सचिव आर के सुधांशु, सचिव धीराज गर्ब्याल, अपर सचिव झरना कमठान, अनुराधा पाल और मुख्य विकास अधिकारी देहरादून अभिनव शाह व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। वहीं दूसरी ओर, राज्य के सभी जिलों के मुख्य विकास अधिकारी और प्रशासनिक अमला वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम से जुड़ा रहा।

उत्तराखंड में ग्रामीण महिलाओं का यह आर्थिक रूप से सशक्त होना इस बात का प्रमाण है कि यदि सही नीतियां और प्रशासनिक इच्छाशक्ति हो, तो पारंपरिक कौशल को व्यावसायिक सफलता में बदला जा सकता है। रक्षाबंधन जैसे पावन अवसर पर शुरू की गई यह पहल न केवल बहनों के चेहरों पर खुशी ला रही है, बल्कि राज्य की कुल आर्थिक वृद्धि में भी अपना बहुमूल्य योगदान दे रही है।

आने वाले समय में जब यह उत्सव पंद्रह दिनों के पखवाड़े के रूप में मनाया जाएगा, तो इससे न केवल व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक और पारंपरिक धरोहर को भी नई ऊर्जा मिलेगी। ग्रामीण महिलाएं अब सिर्फ अपने घर-परिवार तक सीमित न रहकर पूरे राज्य के विकास में अपनी भागीदारी दर्ज करा रही हैं। राज्य सरकार की मंशा स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में उत्तराखंड की हर महिला को आर्थिक रूप से स्वावलंबी और समृद्ध बनाया जाए।

इस योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आज राज्य के विभिन्न कोनों से आई बहनें आत्मविश्वास से लबरेज हैं। उनके द्वारा बनाए गए उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। चाहे वह प्राकृतिक रंगों से बनी राखियां हों, स्थानीय जड़ी-बूटियों से निर्मित सामग्री हो, या हस्तशिल्प के सुंदर नमूने—हर क्षेत्र में महिलाओं ने अपनी उत्कृष्टता साबित की है। सरकार द्वारा दिए जा रहे प्रशिक्षण और वित्तीय प्रोत्साहन ने उनके हुनर को नई उड़ान दी है।

उत्तराखंड के इस अनूठे मॉडल की सराहना अब अन्य क्षेत्रों में भी हो रही है। जिस प्रकार से स्थानीय उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर ध्यान दिया जा रहा है, उसने पारंपरिक ग्रामीण बाजार की अवधारणा को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। नैनो पैकेजिंग यूनिट्स और आधुनिक बेकरी इकाइयों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर ही प्रसंस्करण संभव हो पा रहा है, जिससे उत्पादों की शेल्फ लाइफ बढ़ी है और गुणवत्ता में सुधार आया है।

जैसे-जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से स्वयं सहायता समूहों का जुड़ाव बढ़ेगा, वैसे-वैसे बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और सीधा लाभ महिलाओं के बैंक खातों तक पहुंचेगा। यह पारदर्शी व्यवस्था महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे बड़ा कदम है।

संक्षेप में कहें तो यह योजना केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की माताओं और बहनों के स्वाभिमान, साहस और कड़ी मेहनत का उत्सव है। राज्य सरकार के ये निरंतर प्रयास यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि देवभूमि की हर नारी प्रगति के पथ पर आगे बढ़े और राज्य की समृद्धि में अपना योगदान दे।

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