राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कारगिल विजय दिवस के पावन और गौरवशाली अवसर पर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के चीड़बाग स्थित शौर्य स्थल पहुंचकर कारगिल युद्ध के अमर शहीदों को अपनी अत्यंत भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस ऐतिहासिक दिन पर उन्होंने शौर्य स्थल के स्मारक और अमर जवान ज्योति पर पुष्पचक्र अर्पित करते हुए भारत माता की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर जवानों के अदम्य साहस को नमन किया। इस गरिमामय श्रद्धांजलि समारोह के दौरान पूरा शौर्य स्थल परिसर भारत माता की जय और अमर शहीदों के जयघोष से गूंज उठा।
शौर्य स्थल पर अमर शहीदों को नमन और श्रद्धांजलि
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने चीड़बाग स्थित शौर्य स्थल के पवित्र प्रांगण में प्रवेश करते ही सबसे पहले देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले जांबाज सैनिकों की स्मृति में मौन रखा। इसके बाद उन्होंने पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ पुष्पचक्र अर्पित कर अमर शहीदों को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की सुरक्षा के लिए हमारे सैनिकों ने जो सर्वोच्च बलिदान दिया है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। कारगिल की चोटियों पर तिरंगा फहराने वाले उन वीर सपूतों की बदौलत ही आज हमारा देश सुरक्षित है और विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है।
पूर्व सैनिकों और वीरता पुरस्कार विजेताओं का अभिनंदन
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने समारोह में उपस्थित गैलेंट्री अवार्ड यानी वीरता पुरस्कार से अलंकृत सैनिकों और समाज तथा राष्ट्र निर्माण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिक केवल सीमा पर ही देश की रक्षा नहीं करते, बल्कि सेवानिवृत्त होने के बाद भी अपने सामाजिक दायित्वों का कुशलतापूर्वक निर्वहन करते हुए समाज को नई दिशा देने का काम करते हैं। पूर्व सैनिकों का अनुशासन और अनुभव नए भारत के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।
कारगिल युद्ध की कठिन परिस्थितियाँ और भारतीय सेना का शौर्य
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कारगिल युद्ध के उन ऐतिहासिक क्षणों और दुर्गम परिस्थितियों को याद करते हुए भारतीय सेना के पराक्रम की गाथा दोहराई। उन्होंने कहा कि कारगिल की लड़ाई दुनिया की सबसे कठिन सैन्य लड़ाइयों में गिनी जाती है। बर्फ से ढकी अत्यधिक ऊंची चोटियाँ, शून्य से भी नीचे का जमा देने वाला तापमान, हवा में ऑक्सीजन की कमी और नीचे से ऊपर की ओर चढ़कर दुश्मन पर वार करने जैसी अत्यधिक विषम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हमारे जवानों ने अद्भुत साहस और पराक्रम का परिचय दिया। भारतीय सेना के जांबाज अधिकारियों और जवानों ने हर चुनौती का सामना करते हुए दुश्मन को खदेड़ दिया और विजय पताका फहराई।
कारगिल विजय केवल सैन्य जीत नहीं, राष्ट्रीय अस्मिता का प्रतीक
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य सफलता का उत्सव नहीं है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय अस्मिता, संप्रभुता, अखंडता, साहस और अटूट आत्मविश्वास का जीवंत प्रतीक है। कारगिल युद्ध में हमारे जवानों ने यह सिद्ध कर दिया था कि भारत की सीमा की तरफ उठने वाली हर बुरी नजर का माकूल जवाब दिया जाएगा। भारतीय सेना का अनुशासन, उनका उच्च मनोबल और देश के प्रति निष्ठा पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल है।
शहीदों का त्याग राष्ट्र की अमर ज्योति
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि कारगिल युद्ध में अमर हुए शहीदों का त्याग और बलिदान इतिहास का कोई साधारण पन्ना नहीं है। यह बलिदान भारत राष्ट्र की आत्मा में सदैव जलती रहने वाली एक ऐसी अमर ज्योति है, जो आने वाली हर पीढ़ी को देशभक्ति, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का मार्ग दिखाती रहेगी। उन्होंने कहा कि जब तक यह अमर ज्योति हमारे दिलों में जलती रहेगी, तब तक भारत की संप्रभुता और सम्मान को कोई ठेस नहीं पहुँचा सकता।
शहीदों का त्याग राष्ट्र की अमर ज्योति
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने कहा कि कारगिल युद्ध में अमर हुए शहीदों का त्याग और बलिदान इतिहास का कोई साधारण पन्ना नहीं है। यह बलिदान भारत राष्ट्र की आत्मा में सदैव जलती रहने वाली एक ऐसी अमर ज्योति है, जो आने वाली हर पीढ़ी को देशभक्ति, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा का मार्ग दिखाती रहेगी। उन्होंने कहा कि जब तक यह अमर ज्योति हमारे दिलों में जलती रहेगी, तब तक भारत की संप्रभुता और सम्मान को कोई ठेस नहीं पहुँचा सकता।
शहीद परिवारों को पूर्ण सहयोग का भरोसा
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने वीर नारियों, शहीदों की माताओं और उनके परिजनों को यह आश्वस्त किया कि पूरा देश, भारतीय सेना और राज्य प्रशासन सदैव उनके साथ खड़ा है। उन्होंने कहा कि शहीद परिवारों का कल्याण और उनकी देखभाल करना हम सभी की प्राथमिक जिम्मेदारी है। किसी भी प्रकार की आवश्यकता, कठिनाई या समस्या के समय सेना और प्रशासन का हर तंत्र शहीद परिवारों की मदद के लिए पूरी तत्परता के साथ उपलब्ध रहेगा।
राष्ट्र निर्माण में प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने देश के युवाओं और आम नागरिकों का आह्वान करते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक का यह परम कर्तव्य है कि वह शहीदों के उच्च आदर्शों से प्रेरणा ले। उन्होंने कहा कि हमें अपने दैनिक जीवन में अनुशासन, ईमानदारी और राष्ट्रप्रेमी सोच को अपनाकर देश के विकास में अपना योगदान देना चाहिए। इसके साथ ही, शहीदों के परिवारों और पूर्व सैनिकों के सम्मान तथा कल्याण के प्रति हमेशा संवेदनशील रहना पूरे समाज का दायित्व है।
समारोह में गणमान्य हस्तियों की गरिमामयी उपस्थिति
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के इस गरिमामय कार्यक्रम के दौरान सैन्य और असैन्य क्षेत्र के कई वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। कार्यक्रम में सब एरिया के मुख्य सैन्य अधिकारी मेजर जनरल एमपीएस गिल विशेष रूप से उपस्थित थे। उनके अलावा भारतीय नौसेना और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी, थल सेना के अधिकारी, सैनिक, राष्ट्रीय कैडेट कोर के युवा कैडेट, देहरादून के विभिन्न स्कूलों के छात्र-छात्राएँ, वीर नारियाँ, शहीदों की माताएँ और पूर्व सैनिक भारी संख्या में उपस्थित रहे। संपूर्ण कार्यक्रम देशभक्ति के अद्भुत उत्साह और राष्ट्रीय गौरव के वातावरण में संपन्न हुआ।


