राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने राजधानी स्थित लोक भवन में आयोजित एक विशेष और गरिमामय कार्यक्रम के दौरान समाज में संवाद, शांति और आपसी तालमेल की आवश्यकता पर विस्तृत विचार रखे। महावीरायतन फाउंडेशन की ओर से आयोजित “संवाद से समाधान” विषय पर आधारित इस महत्वपूर्ण आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग करते हुए उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब संपूर्ण विश्व अनेक प्रकार के तनावों, मतभेदों और गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है, ऐसे समय में हर समस्या का स्थायी समाधान केवल और केवल आपसी बातचीत के माध्यम से ही निकाला जा सकता है।
उन्होंने इस बात को बहुत प्रमुखता से रेखांकित किया कि जिस क्षण दो पक्षों या विचारों के बीच बातचीत और संवाद के रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते हैं, ठीक उसी बिंदु से मतभेद, विवाद और संघर्ष की शुरुआत होती है। इसलिए, एक सभ्य और प्रगतिशील समाज के निर्माण के लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि समस्याओं को सुलझाने के लिए बातचीत के दरवाजे हर स्थिति में खुले रखे जाएं।
संवाद की महत्ता और वर्तमान वैश्विक परिस्थितियां
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि वर्तमान दौर में वैश्विक स्तर पर जो अशांति और अस्थिरता देखने को मिल रही है, उसका मुख्य कारण एक-दूसरे के दृष्टिकोण को समझने में कमी होना है। जब तक लोग एक-दूसरे से खुलकर बात नहीं करेंगे, तब तक गलतफहमियां दूर होना संभव नहीं है। संवाद केवल शब्दों का आदान-प्रदान नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे के विचारों, भावनाओं और समस्याओं को गहराई से समझने की प्रक्रिया है। अगर हम इतिहास उठाकर देखें तो दुनिया के बड़े से बड़े युद्ध और विवाद अंततः बातचीत की मेज पर ही सुलझे हैं। इसलिए हमें यह समझना होगा कि बल प्रयोग या टकराव से कोई भी समाधान हमेशा के लिए नहीं निकल सकता। टिकाऊ और शांतिपूर्ण समाधान केवल तभी संभव है जब दोनों पक्ष धैर्यपूर्वक बैठकर एक-दूसरे की बात सुनें और किसी सहमति तक पहुंचने का प्रयास करें।
भगवान महावीर स्वामी का जीवन दर्शन और उनकी प्रासंगिकता
अपने भाषण के मुख्य भाग में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने भगवान महावीर स्वामी के अमर संदेशों और उनके जीवन दर्शन का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर स्वामी का पूरा जीवन हम सभी के लिए एक महान प्रेरणा स्रोत है। उन्होंने दुनिया को यह सिखाया कि वास्तव में सबसे बड़ी विजय किसी दूसरे पर अधिकार जमाना नहीं, बल्कि स्वयं की इच्छाओं, क्रोध और कमियों पर विजय प्राप्त करना है। आत्मसंयम, अहिंसा, करुणा, दया और सामाजिक समरसता के जो सिद्धांत भगवान महावीर स्वामी ने सदियों पहले दिए थे, वे आज के आधुनिक दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस समय थे।
आज जब समाज में स्वार्थ और हिंसा की भावना बढ़ती दिख रही है, तब भगवान महावीर स्वामी का मूल मंत्र “जियो और जीने दो” पूरे मानव समाज को एक नई दिशा दिखाता है। यह संदेश केवल एक धार्मिक विचार नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया में शांति से रहने की एक व्यावहारिक नीति है। यदि हम अपने दैनिक जीवन में इस मंत्र का पालन करें, तो समाज के आधे से अधिक विवाद अपने आप ही समाप्त हो जाएंगे।
भारत की विविधता में निहित एकता और हमारी सांस्कृतिक नींव
भारत की महान विरासत और इसकी सामाजिक बनावट का जिक्र करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत इसकी विविधता है। भारत में विभिन्न भाषाओं को बोलने वाले, अलग-अलग खान-पान, रहन-सहन और परंपराओं का पालन करने वाले लोग एक साथ मिलकर रहते हैं। यह अनूठी विविधता ही हमारे देश की असली सुंदरता है और यही “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की सबसे मजबूत और अटूट नींव है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत का वास्तविक स्वरूप उसकी प्राचीन संस्कृति, भाईचारे और साझा मानवीय मूल्यों में बसता है। भारत ने कभी भी किसी अन्य देश पर अपनी सोच थोपने की कोशिश नहीं की, बल्कि हमेशा से संवाद और ज्ञान के आदान-प्रदान का स्वागत किया है। जब हमारे समाज में विभिन्न सोच और विचारों के लोग एक साथ मिलकर बैठते हैं, आपस में संवाद करते हैं और एक-दूसरे के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं, तभी एक सशक्त, समृद्ध और खुशहाल समाज का निर्माण होता है। राष्ट्र का विकास केवल बड़ी इमारतों या सड़कों से नहीं होता, बल्कि वहां रहने वाले नागरिकों के बीच के आपसी प्रेम और समरसता से होता है।
देवभूमि उत्तराखंड की विशेष जिम्मेदारी और संदेश
अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विभिन्न तनावों पर चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने कहा कि आज जब दुनिया के कई हिस्से हिंसक संघर्षों और अशांति की चपेट में हैं, ऐसे में उत्तराखंड जैसी पवित्र और आध्यात्मिक भूमि का कर्तव्य बहुत बड़ा हो जाता है। उत्तराखंड केवल एक राज्य नहीं है, यह हमारी आस्था, ज्ञान और शांति की पावन धरा यानी देवभूमि है।
इस पावन धरती से आपसी बातचीत, सद्भाव, शांति और सभी के साथ मिलकर रहने का संदेश पूरे देश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व तक पहुंचना चाहिए। देवभूमि की यह हवा और यहां का वातावरण हमेशा से ऋषि-मुनियों के चिंतन का केंद्र रहा है, जहां से केवल कल्याण और शांति की बात की गई है। यदि यहां से संवाद और समाधान की गूंज उठेगी, तो उसकी सकारात्मक तरंगें दूर-दूर तक पहुंचेंगी और अशांत दुनिया को सही मार्ग दिखाने में मददगार साबित होंगी।
महावीरायतन फाउंडेशन के सामाजिक प्रयासों की सराहना
कार्यक्रम के अंतिम चरण में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) ने इस गरिमामय कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए महावीरायतन फाउंडेशन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि समाज में शांति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए संस्था जो प्रयास कर रही है, वे बेहद सराहनीय और अनुकरणीय हैं।
आज के समय में जब लोग अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी में सामाजिक दायित्वों को भूलते जा रहे हैं, ऐसे समय में महावीरायतन फाउंडेशन जैसी संस्थाएं समाज को सही दिशा दिखाने का काम कर रही हैं।
उन्होंने यह विश्वास व्यक्त किया कि “संवाद से समाधान” का यह अभियान जन-जन तक पहुंचेगा और लोगों के दिलों में सकारात्मकता का बीज बोएगा। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से अपील की कि वे आज यहां से यह संकल्प लेकर जाएं कि वे एक ऐसे नए भारत का निर्माण करेंगे जहां आपसी बातचीत, सद्भाव, समरसता और अहिंसा हमारे जीवन का मुख्य आधार होंगे।


