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राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने लोक भवन में किया पौधरोपण, 1.25 लाख पौधे लगाने पर संस्था के प्रयासों को सराहा

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने आज लोक भवन परिसर में आयोजित एक खास और गरिमामय कार्यक्रम में हिस्सा लिया। गौरव भारती शिक्षा संस्थान की तरफ से आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने खुद अपने हाथों से पौधरोपण करके पर्यावरण सुरक्षा का एक मजबूत संदेश दिया। यह विशेष कार्यक्रम संस्था की उस शानदार उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए रखा गया था, जिसके तहत उन्होंने साल 2011 से लेकर अब तक कुल 1 लाख 25 हजार पौधे लगाने का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण लक्ष्य पूरा कर लिया है। राजभवन के शांत और सुंदर माहौल में आयोजित इस कार्यक्रम ने राज्य में पर्यावरण को बचाने और हरियाली बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे लोगों को एक नई ऊर्जा और दिशा दी है।

15 वर्षों का लंबा सफर और 1.25 लाख पौधों की ऐतिहासिक उपलब्धि
गौरव भारती शिक्षा संस्थान पिछले 15 सालों से लगातार कुदरत को संवारने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के काम में जुटा हुआ है। संस्था ने साल 2011 से अपना यह हरियाली अभियान शुरू किया था। उस समय से लेकर आज तक बिना रुके और बिना थके, संस्थान के सदस्यों ने समाज के अलग-अलग लोगों को अपने साथ जोड़ा और धरती को हरा-भरा बनाने का संकल्प पूरा किया।

1 लाख 25 हजार पौधे लगाना कोई आसान काम नहीं होता। इसके पीछे सालों की कड़ी मेहनत, सही योजना और समाज को एक साथ लाने की सच्ची नीयत छिपी होती है। संस्था की इस 15 साल लंबी यात्रा की सराहना करते हुए कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने उनके इस प्रयास को ऐतिहासिक और प्रेरणादायक बताया। यह उपलब्धि सिर्फ एक गिनती नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबूत है कि अगर नीयत साफ हो और इरादे मजबूत हों, तो पर्यावरण में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

पर्यावरण सुरक्षा में सामाजिक भागीदारी का सबसे बड़ा महत्व
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए माननीय राज्यपाल ने संस्था के इस लंबे और लगातार चले अभियान की दिल से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि 15 सालों में 1.25 लाख पौधे लगाना सिर्फ एक रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ समाज को एक साथ लाने और लोगों को जागरूक करने का एक बेहतरीन उदाहरण है।

उन्होंने इस बात पर खास जोर दिया कि पर्यावरण को सुरक्षित और स्वच्छ रखना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज के हर वर्ग, हर उम्र के इंसान और हर नागरिक को आगे आना होगा। जब तक आम लोग इस काम में अपनी खुशी से और सक्रिय होकर हिस्सा नहीं लेंगे, तब तक कुदरत की रक्षा का सपना पूरी तरह से सच नहीं हो सकता। राज्यपाल ने कहा कि गौरव भारती शिक्षा संस्थान ने जिस तरह से जन-जागरूकता फैलाकर लोगों को पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया है, वह बेहद काबिले तारीफ है और दूसरी संस्थाओं को भी इससे सीख लेनी चाहिए।

सिर्फ पौधे लगाना काफी नहीं, देखभाल और संवर्धन भी जरूरी
पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने एक बहुत ही व्यावहारिक और जरूरी बात कही। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग उत्साह में आकर पौधे तो लगा देते हैं, लेकिन बाद में उनकी सही से देखभाल न होने के कारण बहुत से पौधे सूख जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं।

इसलिए, उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि पौधे लगाने से भी ज्यादा जरूरी काम यह है कि हम उनकी सही से देखभाल करें, उन्हें समय पर पानी दें, उनकी सुरक्षा का इंतजाम करें और उनके बड़े होने तक उनका पूरा ध्यान रखें। पौधरोपण का असली फायदा तभी मिलता है जब एक छोटा सा पौधा बड़ा होकर एक घना और छायादार पेड़ बनता है। उन्होंने अपील की कि हर इंसान जो भी पौधा लगाए, वह उसे अपने परिवार के सदस्य की तरह संभाले और उसका संवर्धन करे। केवल संख्या बढ़ाना ही हमारा मकसद नहीं होना चाहिए, बल्कि उन पौधों को जीवित रखना और एक नया जीवन देना असली लक्ष्य होना चाहिए।

दून घाटी के कोने-कोने तक पहुँचा हरियाली फैलाने का अभियान
कार्यक्रम में संस्था के अध्यक्ष श्री एस. पी. सिंह ने अपने विचार रखे और बताया कि उनकी संस्था द्वारा लगाए गए ये 1.25 लाख पौधे किसी एक खास जगह या केवल संस्थान के अपने परिसर तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि इस अभियान का दायरा बहुत बड़ा और फैला हुआ है।

उन्होंने जानकारी दी कि ये पौधे पूरे दून घाटी के अलग-अलग ग्रामीण इलाकों, दूर-दराज के गांवों, छोटी-बड़ी बस्तियों, सरकारी और निजी स्कूलों के परिसरों, मुख्य सड़कों के किनारों, प्राचीन मंदिरों और आम लोगों के घरों के आंगनों में रोपे गए हैं। संस्था का मकसद यही था कि हरियाली केवल कागजों पर या किसी एक सुरक्षित पार्क तक सिमट कर न रह जाए, बल्कि जहाँ भी इंसान रहते हैं और जहाँ भी खाली जगह मौजूद है, वहाँ पेड़-पौधे लहलहाएं। इस व्यापक फैलाव की वजह से दून घाटी की हवा को साफ करने और स्थानीय पर्यावरण को संतुलित रखने में बहुत मदद मिली है।

‘टेबेबुइया’ को देहरादून का ‘स्मृति वृक्ष’ घोषित करने का ऐतिहासिक प्रस्ताव
इस विशेष मौके पर गौरव भारती शिक्षा संस्थान की ओर से एक बहुत ही अनोखा और दूरदर्शी सुझाव भी सामने रखा गया। संस्था ने प्रस्ताव दिया कि सुंदर और रंग-बिरंगे फूलों वाले पेड़ ‘टेबेबुइया’ को देहरादून का आधिकारिक ‘स्मृति वृक्ष’ घोषित किया जाए।

संस्थान के अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि जब भी दून घाटी में कोई यादगार मौका हो, किसी की याद में पौधरोपण करना हो या किसी खास दिन को मनाना हो, तो लोग ‘टेबेबुइया’ प्रजाति के पौधे को ही चुनें। इस पेड़ के खूबसूरत फूल न केवल शहर की सुंदरता में चार चांद लगाएंगे, बल्कि देहरादून को एक नई पहचान भी देंगे। अगर इस प्रजाति को स्मृति पौधरोपण के लिए एक मानक या तय प्रजाति के रूप में अपना लिया जाता है, तो इससे शहर के सौंदर्य में जबरदस्त बढ़ोतरी होगी और लोगों के मन में अपने पूर्वजों या खास दिनों की याद में पौधे लगाने का रुझान भी बढ़ेगा।

कला, खेल, शिक्षा और समाज के दिग्गजों की गरिमामयी मौजूदगी
लोक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम की एक खास बात यह भी रही कि इसमें समाज के अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी नामचीन और सम्मानित हस्तियों ने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। शिक्षा, खेल, कला और समाज सेवा से जुड़े दिग्गजों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी खास बना दिया।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख हस्तियों की सूची:
श्री एस. पी. सिंह – चेयरमैन एवं अध्यक्ष, गौरव भारती शिक्षा संस्थान
श्री जोरावर सिंह – मैनेजर, एस.बी.एस. यूनिवर्सिटी
श्री आलोक उल्फत – प्रसिद्ध शिक्षक, रंगमंच कलाकार और सांस्कृतिक कार्यकर्ता
श्री पी. के. मेहरिशी – पूर्व हॉकी कोच एवं जाने-माने पर्यावरणविद
श्री जसविंदर सिंह सूडान – वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेंट
इन सभी हस्तियों ने पर्यावरण संरक्षण के इस बड़े अभियान में अपना समर्थन जताया और संस्था के 1.25 लाख पौधे लगाने के इस आंकड़े की दिल से तारीफ की। अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों के एक साथ आने से यह साफ संदेश जाता है कि पर्यावरण का मुद्दा हर इंसान और हर पेशे से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।

पर्यावरण संतुलन और भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक मजबूत कदम
आज जिस तरह से पूरी दुनिया में तापमान बढ़ रहा है, मौसम का मिजाज बदल रहा है और प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, ऐसे समय में 1.25 लाख पेड़ लगाना एक बहुत बड़ी राहत देने वाला काम है। पेड़ न केवल हमें सांस लेने के लिए साफ ऑक्सीजन देते हैं, बल्कि वे मिट्टी के कटाव को रोकते हैं, भूजल के स्तर को सुधारते हैं और न जाने कितने जीवों और पक्षियों को आसरा देते हैं।

गौरव भारती शिक्षा संस्थान का यह 15 सालों का प्रयास भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण बनाने की दिशा में एक बेहद ठोस कदम है। अगर इसी तरह समाज के अलग-अलग संगठन, स्कूल, कॉलेज और आम नागरिक आगे आकर जिम्मेदारी संभालेंगे, तो हमारी आने वाली पीढ़ियों को एक हरा-भरा, साफ और सेहतमंद माहौल मिल सकेगा।

कुदरत को बचाने के लिए एक साथ कदम बढ़ाने की जरूरत
लोक भवन में आयोजित यह पौधरोपण कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह कुदरत के प्रति हमारी जिम्मेदारी को याद दिलाने वाला एक बड़ा जरिया बना। माननीय राज्यपाल के विचारशील संबोधन और गौरव भारती शिक्षा संस्थान की 15 सालों की कड़ी मेहनत ने यह साबित कर दिया है कि जब इरादे नेक हों और समाज का साथ मिले, तो बड़े से बड़े लक्ष्य को आसानी से हासिल किया जा सकता है।

1 लाख 25 हजार पौधों का यह महत्वपूर्ण पड़ाव एक नई शुरुआत है। अब जरूरत इस बात की है कि इस संदेश को घर-घर तक पहुँचाया जाए। हर व्यक्ति को अपने जीवन के खास मौकों पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाना चाहिए और उसकी पूरी ईमानदारी से देखभाल करनी चाहिए। यही इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा और सच्चा संदेश है, जो हमारी धरती को आने वाले समय में और भी ज्यादा सुंदर और सुरक्षित बनाएगा।

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