राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से.नि.) ने देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी स्थित लोक भवन के प्रांगण में पूरे सम्मान और गरिमा के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के उपरांत उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले जांबाज सैनिकों, देश को आजादी दिलाने वाले अमर सेनानियों और आजादी के बाद राष्ट्र के नवनिर्माण में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाली महान विभूतियों को याद किया और उन्हें शत-शत नमन किया।
राज्यपाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों का त्याग, अद्वितीय साहस और अटूट देशभक्ति ही स्वतंत्र भारत की नींव है। आज भारत जिस ऊंचाई पर खड़ा है, उसके पीछे अनगिनत वीरों का खून और पसीना जुड़ा हुआ है। यह पावन अवसर हमें याद दिलाता है कि आजादी सिर्फ एक अधिकार नहीं है, बल्कि यह अपने देश को बेहतर बनाने का एक बड़ा दायित्व भी है।
स्वतंत्रता का वास्तविक मूल्य और नागरिकों के कर्तव्य
राष्ट्रीय ध्वज फहराने के बाद उपस्थित नागरिकों, अधिकारियों और युवाओं को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस हमें अपने संविधान, अपने अधिकारों और सबसे बढ़कर देश के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जब तक देश का प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन नहीं करेगा, तब तक स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों का सपना पूरी तरह सच नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस समृद्ध और सुरक्षित भारत की कल्पना की थी, उसे साकार करने की जिम्मेदारी अब हमारी वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के कंधों पर है। हमें हर दिन अपने कामों के जरिए देश की उन्नति में थोड़ा-बहुत योगदान देने का प्रयास करना चाहिए।
‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत
समारोह के दौरान अपने भाषण में राज्यपाल ने तीन प्रमुख सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए कहा। इनमें सबसे पहला और महत्वपूर्ण सिद्धांत है—’राष्ट्र प्रथम’। उन्होंने कहा कि हमारा कोई भी व्यक्तिगत, सामाजिक या व्यावसायिक निर्णय देश के हित से बड़ा नहीं हो सकता।
जब देश का हर व्यक्ति अपनी पसंद और फैसलों में ‘राष्ट्र प्रथम’ की सोच रखेगा, तो देश के भीतर की आंतरिक चुनौतियां अपने आप समाप्त होने लगेंगी। उन्होंने अपील की कि समाज के हर वर्ग को इस विचार को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए, ताकि एक मजबूत और एकजुट समाज का निर्माण हो सके।
‘नशामुक्त भारत’ के निर्माण का सशक्त संकल्प
राज्यपाल ने देश के विकास के सामने आने वाली सामाजिक बुराइयों पर भी ध्यान खींचा। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं के बीच नशे की बढ़ती समस्या को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की और ‘नशामुक्त भारत’ बनाने का कड़ा संकल्प लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति के शरीर को ही नष्ट नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार, समाज और देश के भविष्य को अंधकार में धकेल देता है। भारत को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बनाने के लिए हमारी युवा पीढ़ी का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना अनिवार्य है। नशामुक्त समाज बनाकर ही हम अपने युवाओं की ऊर्जा का सही इस्तेमाल देश की प्रगति में कर सकते हैं।
वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ का विजन
स्वतंत्रता दिवस के इस विशेष अवसर पर राज्यपाल ने देशवासियों को वर्ष 2047 तक भारत को एक पूर्ण रूप से विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी आजादी की 100वीं वर्षगांठ मनाएगा, तब हमारा देश दुनिया की सबसे बड़ी और मजबूत शक्तियों में से एक होना चाहिए।
इस विशाल लक्ष्य को पाने के लिए केवल सरकार के प्रयास काफी नहीं होंगे। इसके लिए देश के 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को एकजुट होकर एक जन-आंदोलन की तरह काम करना होगा। हर क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करना ही विकसित भारत का मुख्य आधार बनेगा।
युवा शक्ति, शिक्षा और अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका
अपने संबोधन में राज्यपाल ने देश की युवा आबादी को भारत की सबसे बड़ी संपत्ति बताया। उन्होंने कहा कि आज भारत की असली ताकत उसकी युवा शक्ति में छिपी हुई है। यदि हमारे युवाओं को सही दिशा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक कौशल प्रदान किया जाए, तो वे दुनिया के किसी भी क्षेत्र में नया इतिहास रच सकते हैं।
उन्होंने नई खोजों (नवाचार), आधुनिक शिक्षा प्रणाली, तकनीकी कौशल (स्किल डेवलपमेंट) और अनुसंधान (रिसर्च) को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। राज्यपाल के अनुसार, जब देश के स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय नई सोच और रिसर्च का केंद्र बनेंगे, तभी हम दुनिया को नई तकनीक और समाधान देने में सक्षम हो पाएंगे।
सामाजिक जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता का मार्ग
राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि आत्मनिर्भरता का मतलब सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत होना नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी जरूरतों के लिए अपने साधनों पर निर्भर रहना है। इसके साथ ही उन्होंने हर नागरिक से अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाने का भी आग्रह किया।
समाज के पिछड़े और जरूरतमंद वर्गों को साथ लेकर आगे बढ़ना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है। जब देश का हर व्यक्ति दूसरों की मदद के लिए हाथ बढ़ाएगा और अपनी जिम्मेदारियों को समझेगा, तभी एक समतामूलक और खुशहाल भारत का निर्माण संभव हो सकेगा।
दुनिया को नई दिशा देने वाला बनेगा भारत
भाषण के अंतिम चरण में राज्यपाल ने विश्वास व्यक्त किया कि भारत बहुत तेजी से वैश्विक मंच पर अपनी नई पहचान बना रहा है। आज दुनिया भारत की ओर उम्मीद और भरोसे की नजर से देख रही है।
चाहे वह आर्थिक क्षेत्र हो, विज्ञान और अंतरिक्ष का क्षेत्र हो, या फिर वैश्विक शांति का संदेश देना हो—भारत हर मोर्चे पर आगे बढ़कर नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति, हमारे संस्कार और हमारी आधुनिक सोच मिलकर भारत को एक बार फिर से ‘विश्व गुरु’ के पद पर बैठाएगी।
स्वतंत्रता सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि
अपने वक्तव्य का समापन करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भाषण देना या उत्सव मनाना ही काफी नहीं है। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों, अमर शहीदों और राष्ट्र निर्माताओं के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके दिखाए रास्ते पर चलें।
जब हम सब मिलकर एक आत्मनिर्भर, समृद्ध, शक्तिशाली और चरित्रवान भारत का निर्माण करेंगे, वही उन अनगिनत बलिदानों का सबसे बड़ा सम्मान होगा। लोक भवन में आयोजित इस कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ, जिसमें उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने देश की प्रगति में अपना सर्वस्व देने का संकल्प लिया।


