राष्ट्रीय एकता यात्रा के माध्यम से लद्दाख के युवा देश की समृद्ध विविधता और भव्यता से रूबरू हो रहे हैं। भारतीय सेना के ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत आयोजित इस विशेष भ्रमण कार्यक्रम ने लेह और लद्दाख के स्कूली बच्चों को देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों, ऐतिहासिक धरोहरों और प्रमुख प्रशासनिक हस्तियों से सीधे जुड़ने का एक अद्भुत मंच प्रदान किया है। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान छात्रों का एक दल उत्तराखंड की राजधानी देहरादून पहुंचा, जहां उन्होंने लोक भवन में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) से एक शिष्टाचार मुलाकात की। इस संवाद कार्यक्रम में राज्यपाल ने न केवल बच्चों का गर्मजोशी से स्वागत किया, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने, बड़े सपने देखने और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित भी किया।
राष्ट्रीय एकता यात्रा केवल भौगोलिक दूरियों को कम करने की एक कोशिश मात्र नहीं है, बल्कि यह देश के सीमावर्ती क्षेत्रों के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उनमें देशभक्ति की भावना को गहराई से पिरोने का एक सशक्त माध्यम है। जब दूरदराज के पर्वतीय इलाकों से आने वाले ये युवा देश के अलग-अलग हिस्सों का भ्रमण करते हैं, तो उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, तकनीकी प्रगति और सैन्य सामर्थ्य को करीब से देखने और समझने का अवसर मिलता है।
भारतीय सेना का ‘ऑपरेशन सद्भावना’ और इसका दूरगामी प्रभाव
राष्ट्रीय एकता यात्रा का आयोजन भारतीय सेना की फायर एंड फ्यूरी कोर के मार्गदर्शन में १३९ साटा रेजीमेंट और धनुर्धारी आर्टिलरी ब्रिगेड द्वारा पूरी निष्ठा और प्रबंधन के साथ किया जा रहा है। सेना का ‘ऑपरेशन सद्भावना’ लंबे समय से सीमावर्ती और दुर्गम क्षेत्रों में जन-कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और युवा सशक्तिकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य कर रहा है।
इस तरह के राष्ट्रीय भ्रमण कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य लद्दाख जैसे सुदूर सीमावर्ती क्षेत्रों के विद्यार्थियों को देश के अन्य भागों की जीवनशैली, आधुनिक शिक्षा प्रणालियों, रक्षा संस्थानों और वैज्ञानिक अनुसंधानों से परिचित कराना है। इस यात्रा के दौरान लेह और लद्दाख के छात्र-छात्राओं को देहरादून स्थित कई विश्वप्रसिद्ध और प्रतिष्ठित संस्थानों का प्रत्यक्ष दौरा करने का अवसर दिया जा रहा है।
इन प्रमुख संस्थानों में मुख्य रूप से वन अनुसंधान संस्थान और भारतीय सैन्य अकादमी शामिल हैं। वन अनुसंधान संस्थान का दौरा जहां बच्चों को देश की विशाल प्राकृतिक संपदा, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक अनुसंधान के महत्व से अवगत कराएगा, वहीं भारतीय सैन्य अकादमी का भ्रमण उनमें अनुशासन, अदम्य साहस और देश सेवा की भावना का संचार करेगा। सैन्य अधिकारियों और कैडेटों के जीवन को करीब से देखकर ये विद्यार्थी भारतीय सशस्त्र बलों के गौरवशाली इतिहास और उनकी कार्यशैली को गहराई से समझ सकेंगे।
लोक भवन में राज्यपाल का ऐतिहासिक संबोधन और प्रेरणादायक संदेश
देहरादून स्थित लोक भवन में जब लद्दाख से आए इन युवा विद्यार्थियों ने राज्यपाल से मुलाकात की, तो पूरा माहौल उत्साह और आत्मीयता से भर गया। राज्यपाल ने बच्चों के साथ बेहद सहज और आत्मीय अंदाज में संवाद स्थापित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि इस प्रकार की यात्राएं केवल नए शहरों, इमारतों या प्राकृतिक दृश्यों को देखने का जरिया नहीं होतीं, बल्कि यह अपने विशाल देश को जानने, उसकी अंतरात्मा को महसूस करने और उससे भावनात्मक रूप से जुड़ने का एक स्वर्णिम अवसर होती हैं।
राज्यपाल ने भारत की उस महान विशेषता पर प्रकाश डाला जो इसे दुनिया के अन्य देशों से अलग और अनोखा बनाती है—’विविधता में एकता’। उन्होंने बेहद सरल शब्दों में बच्चों को समझाया कि लद्दाख, उत्तराखंड और भारत के अन्य राज्यों की बोलियां, खान-पान, पहनावा और भौगोलिक परिस्थितियां भले ही एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न हों, लेकिन हमारी राष्ट्रीय पहचान, हमारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा और देश के प्रति हमारा अटूट प्रेम हम सभी को एक सूत्र में बांधकर रखता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि इस यात्रा के दौरान वे जिन भी लोगों से मिलें, उनकी जीवनशैली और संस्कृति को खुले दिल से समझें। जब वे इस शैक्षणिक भ्रमण को पूरा करके वापस लेह लौटें, तो केवल यादें लेकर न जाएं, बल्कि अपने साथ राष्ट्रीय एकता, सद्भाव और अखंडता का एक ऐसा अमूल्य संदेश लेकर जाएं जिसे वे अपने परिवार, सहपाठियों, दोस्तों और पूरे समाज के साथ साझा कर सकें। राज्यपाल ने स्पष्ट रूप से कहा कि ये विद्यार्थी अपने-अपने क्षेत्रों में राष्ट्रीय एकता के सच्चे ब्रांड एंबेसडर और दूत बनकर उभरेंगे।
सीमाओं को लांघकर बड़े सपने देखने का आह्वान
अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए राज्यपाल ने विद्यार्थियों के मानसिक और बौद्धिक विकास पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि इंसान का जन्मस्थान भले ही उसे एक प्रारंभिक पहचान और सांस्कृतिक जड़ें प्रदान करता है, लेकिन वह कभी भी उसकी क्षमताओं या उसके भविष्य की सीमाओं को तय नहीं कर सकता। कोई व्यक्ति कहां पैदा हुआ है, इससे यह तय नहीं होता कि वह जीवन में कितनी ऊंचाई तक पहुंच सकता है।
लद्दाख की कठिन और चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बच्चों को जीवन के सबसे बड़े सीख से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि जिस तरह लद्दाख के विशाल, ऊंचे और कठोर पर्वत हर मौसम में अडिग खड़े रहते हैं, ठीक उसी तरह विद्यार्थियों को भी अपने जीवन में आने वाली परिस्थितियों से घबराने के बजाय उनसे दृढ़ता और साहस के साथ मुकाबला करना चाहिए।
असफलता के संदर्भ में राज्यपाल ने बच्चों को एक बेहद सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान किया। उन्होंने कहा कि जीवन के सफर में असफलता कभी भी अंतिम पड़ाव नहीं होती, बल्कि यह हमें अपनी गलतियों से सीखकर और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ने का अवसर देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा:
सपनों का दायरा बढ़ाएं: कभी भी अपने विचारों या लक्ष्यों को छोटा न रखें। हमेशा बड़े से बड़ा लक्ष्य निर्धारित करें और उसे हासिल करने का प्रयास करें।
अनुशासन और निरंतरता: किसी भी क्षेत्र में सफलता पाने के लिए कठिन परिश्रम, आत्म-अनुशासन और अटूट लगन की आवश्यकता होती है।
शिक्षा और आत्मविश्वास: शिक्षा वह शक्तिशाली माध्यम है जो व्यक्ति में आत्मविश्वास भरती है और उसे समाज में अपनी एक अलग और विशिष्ट पहचान बनाने में सक्षम बनाती है।
साहस के साथ आगे बढ़ना: जीवन में चाहे कितनी भी बाधाएं आएं, बिना डरे अपने पथ पर अग्रसर रहना ही सफलता की कुंजी है।
राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका और भविष्य की दिशा
संवाद के अंतिम चरण में राज्यपाल ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल और स्वर्णिम भविष्य की हार्दिक कामना की। उन्होंने इस बात पर गहरा विश्वास व्यक्त किया कि आज के ये स्कूली छात्र केवल कल के नागरिक ही नहीं हैं, बल्कि वे हमारे देश के वास्तविक निर्माता हैं। देश की प्रगति, उसकी सुरक्षा और उसकी समृद्धि की नींव इन्हीं युवाओं के कंधों पर टिकी हुई है।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि ‘ऑपरेशन सद्भावना’ के तहत आयोजित यह भ्रमण कार्यक्रम इन बच्चों के जीवन में एक बड़ा सकारात्मक बदलाव लाएगा। इस यात्रा के दौरान अर्जित किए गए नए अनुभव, विचार और ज्ञान उनके दृष्टिकोण को व्यापक बनाएंगे और उन्हें जीवन में नई ऊंचाइयों को छूने की प्रेरणा देंगे।
इस गरिमामयी अवसर पर सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति भी सराहनीय रही। कार्यक्रम में लेफ्टिनेंट कर्नल अनिल कुमार सहित साटा रेजीमेंट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, यात्रा में शामिल शिक्षकगण और बड़ी संख्या में लेह-लद्दाख के छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सैन्य अधिकारियों और शिक्षकों ने भी इस बात की पुष्टि की कि इस प्रकार के आयोजनों से बच्चों के आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिलती है और वे देश के व्यापक परिदृश्य को समझने में सक्षम बनते हैं।
राष्ट्रीय एकता यात्रा का यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब देश की सेना, प्रशासन और नागरिक एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो भारत की अखंडता और आपसी भाईचारे की जड़ें और अधिक मजबूत होती हैं। लद्दाख के इन नन्हे दूतों की यह यात्रा निसंदेह उनके दिलों में भारत मां के प्रति एक नई अलख जगाने में सफल सिद्ध होगी।


