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लोक भवन में ‘सेवा और समर्पण’ के 5 साल: देवभूमि और वीरभूमि के प्रति राज्यपाल गुरमीत सिंह की प्रतिबद्धता की गाथा

लोक भवन में एक विशेष और गौरवशाली अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अपने कार्यकाल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को राज्य की जनता के सामने समर्पित किया। ‘सेवा, समर्पण और नवाचार के पांच वर्ष’ शीर्षक से तैयार की गई कॉफी टेबल बुक का विमोचन केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता मात्र नहीं है, बल्कि यह देवभूमि की सेवा में बिताए गए पांच वर्षों के गहन अनुभवों, दूरदर्शी निर्णयों और जन-कल्याणकारी योजनाओं का एक प्रामाणिक दस्तावेज है। पंद्रह सितंबर को पदभार संभालने के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में लोक भवन सूचना परिसर द्वारा संकलित यह पुस्तक राज्य के विकास यात्रा में लोक भवन की बदलती भूमिका और उसकी कार्यसंस्कृति को को रेखांकित करती है। यह ऐतिहासिक संकलन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्तित्व राष्ट्र सेवा की भावना, सैन्य अनुशासन और आधुनिक तकनीकी सोच से लैस हो, तो लोकतांत्रिक संस्थाएं किस प्रकार आम जनमानस के लिए प्रेरणा और प्रगति का केंद्र बन सकती हैं।

लोक भवन में आयोजित इस गरिमामय समारोह में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े गणमान्य व्यक्तियों, वरिष्ठ अधिकारियों और युवाओं की मौजूदगी ने इस अवसर को और भी खास बना दिया। राज्यपाल ने इस अवसर पर बेहद भावुक और प्रेरणादायक शब्दों में कहा कि यह संकलन सिर्फ उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों की सूची नहीं है, बल्कि यह उत्तराखण्ड की महान जनता के प्रति समर्पण, निरंतर सीखने की ललक और जनकल्याण के लिए किए गए अनगिनत प्रयासों की साझी गाथा है। देवभूमि और वीरभूमि के रूप में विख्यात इस राज्य की सेवा करने का अवसर मिलना किसी भी नागरिक के लिए परम सौभाग्य की बात होती है। इस सोच के साथ राज्यपाल ने बीते पांच वर्षों में लोक भवन को केवल एक प्रशासनिक व्यवस्था तक सीमित न रखकर इसे नए विचारों, सामाजिक बदलावों, आधुनिक तकनीकों और जनभावनाओं से जोड़ने वाले एक जीवंत केंद्र के रूप में स्थापित करने का निरंतर प्रयास किया है।

लोक भवन की बदलती कार्यसंस्कृति और जन-केंद्रित दृष्टिकोण
पारंपरिक रूप से राज्यपाल का आवास और कार्यालय यानी लोक भवन एक संवैधानिक औपचारिकता और प्रोटोकॉल से बंधा हुआ स्थान माना जाता रहा है। लेकिन बीते पांच वर्षों के दौरान इस धारणा में एक व्यापक परिवर्तन देखने को मिला है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह के नेतृत्व में लोक भवन ने अपनी दीवारों से बाहर निकलकर सीधे समाज के अंतिम व्यक्ति से जुड़ने की पहल की। ‘सेवा, समर्पण और नवाचार’ का जो मूल मंत्र इस कॉफी टेबल बुक के शीर्षक में झलकता है, वही मंत्र बीते आधे दशक में लोक भवन की कार्यप्रणाली का मुख्य आधार बना रहा।

इस परिवर्तन का सबसे बड़ा प्रभाव यह हुआ कि राज्य के दूर-दराज के पर्वतीय क्षेत्रों की समस्याओं, युवाओं की आकांक्षाओं और महिलाओं के संघर्षों को सीधे लोक भवन के मंच पर जगह मिली। प्रशासनिक जटिलताओं को कम करते हुए जन-शिकायतों और सुझावों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने की व्यवस्था विकसित की गई। जब एक संवैधानिक प्रमुख सीधे जनता, शोधकर्ताओं, वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों से संवाद स्थापित करता है, तो उससे न केवल शासन-प्रशासन में पारदर्शिता आती है बल्कि आम नागरिक के भीतर भी व्यवस्था के प्रति विश्वास सुदृढ़ होता है। इस कॉफी टेबल बुक में उन तमाम पलों और पहलों को चित्रों एवं प्रामाणिक विवरणों के माध्यम से बहुत ही सुंदरता से सहेजा गया है।

आधुनिक तकनीक और AI का प्रभावी उपयोग
उत्तराखण्ड जैसे कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में विकास की गति को तेज करने और प्रशासनिक कार्यों को सुलभ बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग अनिवार्य हो जाता है। राज्यपाल ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दिनों से ही सूचना तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर विशेष बल दिया। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और आपदा प्रबंधन जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों के समावेशन के लिए उन्होंने विभिन्न विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों को निरंतर प्रोत्साहित किया।

तकनीक को केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित न रखकर ग्रामीण और पर्वतीय अंचलों तक पहुँचाने के लिए कई नए प्रयोग किए गए। विश्वविद्यालयों में पठन-पाठन और शोध के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए डिजिटल लर्निंग, ई-गवर्नेस और एआई आधारित प्रणालियों को अपनाने की सिफारिश की गई। कॉफी टेबल बुक के विशेष अध्यायों में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि किस तरह राज्यपाल ने तकनीक को जन-सुविधा और राज्य की प्रगति का मुख्य हथियार बनाया। उनका मानना है कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और आधुनिक प्रोद्योगिकी ही उत्तराखण्ड की कठिन भौगोलिक चुनौतियों को अवसरों में बदलने का सबसे प्रभावी माध्यम सिद्ध होंगी।

उच्च शिक्षा में सुधार और युवाओं के लिए नवाचार के अवसर
राज्य के कुलाधिपति के रूप में राज्यपाल ने उत्तराखण्ड के विश्वविद्यालयीय ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाने का संकल्प लिया। बीते पांच वर्षों के दौरान राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में न केवल शैक्षणिक सत्रों को नियमित किया गया, बल्कि पठन-पाठन की गुणवत्ता और अनुसंधान गतिविधियों पर भी अभूतपूर्व ध्यान दिया गया। उन्होंने लगातार इस बात पर जोर दिया कि हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्रियां बांटने के केंद्र न बनें, बल्कि वे नवाचार, शोध और नए विचारों की नर्सरी के रूप में विकसित हों।

युवाओं के भीतर छिपी प्रतिभा और उनकी वैज्ञानिक सोच को निखारने के लिए लोक भवन के द्वार हमेशा खुले रहे। युवाओं को शोध, स्टार्टअप और सामाजिक उद्यमिता के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए लगातार प्रेरित किया गया। इस दौरान राज्य में ऐसे अनेक मंच तैयार किए गए जहाँ छात्र-छात्राएं सीधे अपने विचार साझा कर सकें। लोक भवन में समय-समय पर आयोजित होने वाले बौद्धिक विमर्श, प्रतियोगिताएं और संवाद कार्यक्रम इस बात के गवाह हैं कि राज्यपाल ने युवा शक्ति को राज्य के उज्ज्वल भविष्य का आधार माना है और उन्हें राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में मुख्य भूमिका निभाने का अवसर दिया है।

महिला सशक्तीकरण और स्व-सहायता समूहों की मजबूती
उत्तराखण्ड की रीढ़ यहाँ की नारी शक्ति मानी जाती है। पर्वतीय अर्थव्यवस्था, कृषि, पशुपालन और सामाजिक ताने-बाने को बनाए रखने में महिलाओं की भूमिका निर्विवाद है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह ने अपने पूरे कार्यकाल के दौरान महिला सशक्तीकरण को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा। उन्होंने समय-समय पर राज्य के कोने-कोने में जाकर महिला स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों और स्वयंसेवी संस्थाओं से सीधा संवाद स्थापित किया।

स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक खान-पान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे प्रयासों को लोक भवन के स्तर पर भरपूर प्रोत्साहन दिया गया। ऑर्गेनिक खेती, स्थानीय जड़ी-बूटियों के प्रसंस्करण और कुटीर उद्योगों के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अनेक ठोस कदम उठाए गए। कॉफी टेबल बुक में दर्ज तस्वीरें और विवरण इस बात की गवाही देते हैं कि किस तरह राज्यपाल की पहलों ने राज्य की दूर-दराज की ग्रामीण महिलाओं में एक नया आत्मविश्वास जगाया है और उन्हें आर्थिक व सामाजिक रूप से सशक्त बनाने का काम किया है।

सामाजिक सरोकार, सांस्कृतिक पहचान और वीरभूमि का सम्मान
उत्तराखण्ड न केवल देवभूमि है, बल्कि यह वीरभूमि भी है, जहाँ के हर दूसरे घर से कोई न कोई सदस्य देश की रक्षा में सीमाओं पर तैनात है। एक पूर्व सैन्य अधिकारी होने के नाते राज्यपाल का राज्य के पूर्व सैनिकों, वीरांगनाओं और शहीद परिवारों के प्रति एक विशेष भावनात्मक जुड़ाव रहा है। उन्होंने सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए अनेक योजनाबद्ध कदम उठाए और उनकी समस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिए प्रशासनिक स्तर पर मजबूत तंत्र विकसित किया।

इसके साथ ही, राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण, गंगा और उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता और पारंपरिक योग व आयुर्वेद के प्रसार के लिए भी राज्यपाल ने निरंतर कार्य किया। चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आधुनिक सुविधाओं से लैस बनाने के लिए दिए गए उनके मार्गदर्शन ने लाखों श्रद्धालुओं के अनुभव को सुखद बनाया है। सांस्कृतिक और सामाजिक सरोकारों से जुड़े इन तमाम आयामों को इस संकलन में बहुत ही सुरुचिपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया गया है, जो पाठक को राज्य के गौरवशाली इतिहास और वर्तमान की विकास यात्रा से जोड़ता है।

लोकतांत्रिक मूल्यों का संवर्धन और छात्र प्रतिभाओं का सम्मान
कॉफी टेबल बुक के विमोचन का यह अवसर केवल अतीत की उपलब्धियों को याद करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने भविष्य की पीढ़ी को प्रेरित करने का काम भी किया। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल ने लोक भवन में आयोजित सूचना का अधिकार विषयक वाद-विवाद प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को विशेष रूप से सम्मानित किया। सूचना का अधिकार जैसे पारदर्शी और लोकतांत्रिक विषय पर युवाओं की समझ और उनके विचारों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जागरूक नागरिक ही एक मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला होते हैं।

छात्राओं और छात्रों को सम्मानित करते हुए राज्यपाल ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उन्हें जीवन में हमेशा सत्य, निष्ठा और सेवा भाव के मार्ग पर चलने की सीख दी। इस तरह के आयोजनों के माध्यम से युवाओं में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक मुद्दों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति रुचि पैदा होती है। लोक भवन का यह प्रयास यह दर्शाता है कि प्रशासनिक दूरदर्शिता केवल योजनाओं को लागू करने तक सीमित नहीं होती, बल्कि भावी पीढ़ी में चरित्र निर्माण और सामाजिक दायित्व की भावना जगाना भी इसका एक अहम हिस्सा होता है।

प्रशासनिक समन्वय और भव्य आयोजन की गरिमा
इस ऐतिहासिक विमोचन समारोह में राज्य के कई गणमान्य व्यक्तियों और प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में सचिव श्री राज्यपाल श्री रविनाथ रामन, अपर सचिव श्रीमती रीना जोशी, हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा, उत्तराखण्ड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष श्री बलजीत सोनी, संयुक्त निदेशक सूचना डॉ. नितिन उपाध्याय सहित लोक भवन के वरिष्ठ अधिकारी, कर्मचारी और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

सभी उपस्थित अतिथियों ने राज्यपाल के पांच वर्षों के सफल, निष्कलंक और प्रेरणादायक कार्यकाल की सराहना की। अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ राज्यपाल के आत्मीय संबंधों और उनकी कार्यशैली ने लोक भवन के पूरे माहौल को एक परिवार की तरह बना दिया है। यही वजह है कि लोक भवन सूचना परिसर द्वारा तैयार की गई यह पुस्तक केवल कागजों का पुलिंदा न होकर अधिकारियों और कर्मचारियों के निष्ठापूर्वक किए गए साझा प्रयासों का एक सजीव प्रमाण बन गई है।

भविष्य की दिशा और विकास का नया रोडमैप
‘सेवा, समर्पण और नवाचार के पांच वर्ष’ शीर्षक वाली यह कॉफी टेबल बुक केवल एक पड़ाव है, मंजिल नहीं। राज्यपाल द्वारा व्यक्त की गई आशा के अनुरूप यह पुस्तक राज्य के नीति निर्धारकों, शोधकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और आम नागरिकों के लिए एक मार्गदर्शक का काम करेगी। इसमें दर्ज विचार और सफल मॉडल आने वाले वर्षों में राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए नए रास्ते खोलेंगे।

उत्तराखण्ड आज अपनी स्थापना के पच्चीसवें वर्ष की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पिछले पांच वर्षों के दौरान लोक भवन द्वारा स्थापित किए गए उच्च मानदंड, आधुनिक तकनीक का समावेश, युवाओं और महिलाओं का सशक्तीकरण तथा पारदर्शी शासन की नींव राज्य को एक समृद्ध और सशक्त पहचान देने में बेहद मददगार साबित होगी। यह पुस्तक इस बात का संदेश देती है कि जब संकल्प में पवित्रता, प्रयासों में निरन्तरता और सोच में नवाचार हो, तो हर चुनौती को अवसर में बदलकर प्रगति की नई गाथा लिखी जा सकती है।

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